नियंत्रण
क्या देखें
मापन
- बाएँ विलयन की सांद्रता
- 0.10mol/L
- दाएँ विलयन की सांद्रता
- 0.50mol/L
- पानी का शुद्ध प्रवाह
- बाएँ → दाएँ
- जल स्तर का अंतर
- 0.0cm
- झिल्ली पार करते पानी के अणु (प्रति सेकंड)
- → 0 · ← 0
- अवस्था
- पानी सांद्र विलयन की ओर जा रहा है
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- "क्या देखें" में से तीन में से एक दृश्य चुनें: विसरण, परासरण या विलयन में रखी कोशिका।
- विसरण में दोनों ओर अलग सांद्रता रखें और देखें कि बड़े रंगीन कण बेतरतीब टकराते हुए पूरे पात्र में समान रूप से कैसे फैल जाते हैं। ग्राफ़ में दोनों रेखाओं का मिलना विसरण का अंत है।
- परासरण में बीच की नारंगी डैश रेखा अर्धपारगम्य झिल्ली है: छोटे नीले पानी के अणु पार होते हैं, बड़े विलेय कण लौट आते हैं। सांद्र ओर का जल स्तर ऊपर उठता है और एक निश्चित Δh पर रुक जाता है।
- "विलयन में कोशिका" चुनें और अतिपरासरी विलयन दें: पादप कोशिका का जीवद्रव्य भित्ति से अलग होकर सिकुड़ जाएगा (जीवद्रव्यकुंचन)। फिर अल्पपरासरी देकर उसे वापस फूलते देखें (जीवद्रव्य विकुंचन)।
- कोशिका का प्रकार बदलकर लाल रक्त कोशिका लें: अल्पपरासरी में वह फूलकर फट जाती है, अतिपरासरी में काँटेदार होकर सिकुड़ जाती है।
- तापमान 5 °C से 60 °C तक बदलें और तुलना करें कि सब कुछ कितनी जल्दी होता है। किसी भी क्षण रोककर मापन लिख लें।
इत्र, चाय में चीनी और नमक लगा आम: एक ही रहस्य
कमरे के एक कोने में अगरबत्ती जलाइए, कुछ मिनट बाद पूरा कमरा महकने लगता है, जबकि किसी ने पंखे से खुशबू नहीं फैलाई। स्थिर पानी के गिलास में रंग की एक बूँद डालिए, बिना हिलाए भी धीरे-धीरे पूरा पानी गुलाबी हो जाता है। खुशबू और रंग अपने आप कैसे फैले? इसका नाम है विसरण।
अब दूसरा दृश्य। कच्चे आम की फाँकों पर नमक छिड़किए, थोड़ी देर में कटोरी में पानी जमा हो जाता है और फाँकें नरम व झुर्रीदार हो जाती हैं। सूखी किशमिश रात भर पानी में रखिए, सुबह वे फूल जाती हैं। एक बार पानी फल से बाहर निकला, दूसरी बार अंदर गया। पानी किस ओर जाएगा, यह परासरण तय करता है।
जड़ें मिट्टी से पानी खींचती हैं, पत्तियाँ हवा से ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का लेन-देन करती हैं, फेफड़ों में रक्त ऑक्सीजन लेता है और गुर्दे रक्त साफ़ करते हैं। जीवन के लगभग हर काम के पीछे ये दो शांत प्रक्रियाएँ हैं। इसीलिए यह अध्याय कक्षा 9 के विज्ञान से लेकर कक्षा 11 जीव विज्ञान और NEET तक हर परीक्षा में आता है।
शुरुआत से: अणु कभी स्थिर नहीं रहते
सब कुछ एक छोटे से सच से शुरू होता है: हर पदार्थ असंख्य छोटे कणों से बना है और ये कण हमेशा गति में रहते हैं। द्रव और गैस के अणु इधर-उधर भागते हैं, एक-दूसरे से टकराते हैं और हर टक्कर पर दिशा बदलते हैं। इस अनवरत बेतरतीब हलचल को तापीय गति कहते हैं।
1827 में वनस्पति वैज्ञानिक रॉबर्ट ब्राउन ने सूक्ष्मदर्शी में पानी पर तैरते परागकणों को बिना कारण काँपते देखा। असल में न दिखने वाले पानी के अणु चारों ओर से परागकण को धक्का दे रहे थे। इस हलचल को ब्राउनी गति कहते हैं, और सिमुलेशन का हर बिंदु ठीक ऐसे ही चलता है: कोई पसंदीदा दिशा नहीं, हर पल नया बेतरतीब धक्का।
यहाँ मज़े की बात है। कोई भी अणु नहीं जानता कि भीड़ कहाँ है। पर जहाँ अणु ज़्यादा हैं, वहाँ से बाहर निकलने वाले भी ज़्यादा हैं; जहाँ कम हैं, वहाँ से लौटने वाले भी कम। जोड़ने पर अधिक सांद्रता से कम सांद्रता की ओर शुद्ध प्रवाह बनता है। कोई धक्का नहीं देता, सिर्फ़ गिनती का खेल है।
जब दोनों ओर सांद्रता बराबर हो जाती है, क्या अणु रुक जाते हैं? नहीं! वे चलते रहते हैं, पर जितने बाएँ से दाएँ जाते हैं लगभग उतने ही दाएँ से बाएँ आते हैं, शुद्ध प्रवाह शून्य हो जाता है। इसे गतिक साम्यावस्था कहते हैं। मापन पैनल में "→" और "←" की संख्याएँ आख़िर में लगभग बराबर हो जाती हैं, ध्यान दें।
विसरण क्या है?
परिभाषा: समान ताप और दाब पर किसी पदार्थ के अणुओं या आयनों का अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर शुद्ध गमन, जो सांद्रता हर जगह बराबर होने तक चलता रहता है, विसरण (Diffusion) कहलाता है।
विसरण गैस, द्रव और ठोस तीनों में हो सकता है; गैस में सबसे तेज़ और ठोस में सबसे धीमा, क्योंकि गैस के अणुओं के बीच खाली जगह बहुत होती है और वे बहुत तेज़ चलते हैं। विसरण के लिए किसी झिल्ली की ज़रूरत नहीं। झिल्ली हो भी, पर वह हर कण को जाने दे (जैसे पादप कोशिका भित्ति), तो भी यह साधारण विसरण ही है।
सिमुलेशन के "विसरण" मोड में बीच में कोई अवरोध नहीं है। बाईं ओर कम और दाईं ओर ज़्यादा विलेय कणों से शुरू करें, वे धीरे-धीरे बाईं ओर खिसकते हैं। ग्राफ़ की दोनों रेखाएँ, यानी बाएँ और दाएँ की सांद्रता, पास आते-आते मिल जाती हैं, और अवस्था "समान रूप से फैल गया" दिखाती है।
J = −D · ΔC / Δxफ़िक का नियम: दर सांद्रता अंतर के साथ बढ़ती और दूरी के साथ घटती है
D ∝ T / ηगर्म और पतले माध्यम में विसरण तेज़ होता है
- पानी में स्याही की एक बूँद का फैलना
- घर में खाने या इत्र की खुशबू फैलना
- बिना हिलाए टी-बैग का रंग पानी में फैलना
- रंध्रों से पत्ती में CO₂ का जाना और O₂ का निकलना
- फेफड़ों की वायुकूपिकाओं से रक्त में ऑक्सीजन का जाना
- कोशिका के भीतर ग्लूकोज़ और आयनों का चलना
विसरण दाब और विसरण की दर
जहाँ अणु ठसाठस भरे हैं, वहाँ उनके बाहर फैलने की प्रवृत्ति अधिक होती है। इस प्रवृत्ति से बने दाब को विसरण दाब कहते हैं। सांद्रता जितनी अधिक, विसरण दाब उतना अधिक, और पदार्थ हमेशा अधिक से कम विसरण दाब की ओर जाता है।
शुद्ध पानी का विसरण दाब सबसे अधिक होता है। उसमें चीनी या नमक घोलने पर हर विलेय कण कुछ पानी के अणुओं को अपने चारों ओर बाँध लेता है, इसलिए स्वतंत्र पानी के अणु कम हो जाते हैं। विलयन में पानी का विसरण दाब शुद्ध पानी से कम होता है। इस कमी को पहले विसरण दाब न्यूनता (DPD) कहते थे; आज इसे जल विभव (ψ) से व्यक्त करते हैं।
इकाई समय में फैलने वाले पदार्थ की मात्रा विसरण की दर है। सांद्रता अंतर जितना बड़ा, दर उतनी तेज़; इसीलिए सिमुलेशन की शुरुआत में कण तेज़ी से पार होते हैं और अंत में बस बराबर आना-जाना चलता है। गैसों के लिए ग्राहम का नियम कहता है कि दर मोलर द्रव्यमान के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती है: हल्की गैस तेज़ फैलती है।
r₁ / r₂ = √(M₂ / M₁)ग्राहम का नियम: हल्की गैस तेज़ विसरित होती है
परासरण क्या है?
परिभाषा: जब भिन्न सांद्रता वाले दो विलयन एक अर्धपारगम्य झिल्ली से अलग हों, तो विलायक (प्रायः पानी) झिल्ली से होकर कम सांद्र (तनु) विलयन से अधिक सांद्र विलयन की ओर जाता है। इस प्रक्रिया को परासरण (Osmosis) कहते हैं।
अर्धपारगम्य झिल्ली छोटे पानी के अणुओं को जाने देती है पर चीनी जैसे बड़े विलेय कणों को रोक लेती है। कोशिका झिल्ली, अंडे के छिलके के अंदर की पतली झिल्ली, मछली का वायुकोश, सेलोफ़ेन और चर्मपत्र इसके उदाहरण हैं। पादप कोशिका भित्ति अर्धपारगम्य नहीं, पूर्णतः पारगम्य है।
"परासरण" मोड देखिए। छोटे नीले बिंदु पानी हैं, बड़े रंगीन बिंदु विलेय। बड़े बिंदु झिल्ली से टकराकर लौटते हैं, छोटे पार निकल जाते हैं। दाईं ओर विलेय ज़्यादा है, इसलिए वहाँ स्वतंत्र पानी कम है। बाएँ से दाएँ ज़्यादा पानी जाता है, लौटता कम है, और दायाँ जल स्तर ऊपर उठता है।
क्या स्तर हमेशा उठता रहेगा? नहीं। दाईं ओर पानी जितना ऊँचा होता है, नीचे उतना ज़्यादा द्रवस्थैतिक दाब बनता है, जो पानी को वापस धकेलता है। अंत में दोनों धक्के बराबर होते हैं और स्तर रुक जाता है। सिमुलेशन में Δh एक निश्चित मान पर ठहरता है और अवस्था "साम्यावस्था" दिखाती है। प्रवाह रोकने के लिए ज़रूरी दाब ही परासरण दाब है।
- अर्धपारगम्य झिल्ली ज़रूरी है
- झिल्ली के दोनों ओर सांद्रता अलग होनी चाहिए
- सिर्फ़ विलायक चलता है, विलेय नहीं
- पानी तनु विलयन से सांद्र विलयन की ओर जाता है
परासरण दाब: विलयन कितनी ज़ोर से खींचता है
किसी विलयन को अर्धपारगम्य झिल्ली से शुद्ध पानी से अलग करें तो पानी अंदर घुसना चाहता है। इस प्रवेश को ठीक रोकने के लिए विलयन पर जितना दाब लगाना पड़े, वह उस विलयन का परासरण दाब (π) है। विलयन जितना सांद्र, π उतना बड़ा।
तनु विलयनों के लिए वान्ट हॉफ़ ने गैस नियम जैसा सरल सूत्र दिया। C मोलर सांद्रता है, R गैस नियतांक, T केल्विन में ताप, और i बताता है कि एक सूत्र इकाई कितने कणों में टूटती है (चीनी के लिए 1, NaCl के लिए लगभग 2)। सूत्र दिखाता है कि परासरण कणों की संख्या पर निर्भर है, उनके प्रकार पर नहीं।
पादप विज्ञान में पानी की गति को जल विभव (ψ) से समझाते हैं। शुद्ध पानी का ψ = 0; विलेय मिलाने पर ψ ऋणात्मक हो जाता है। पानी हमेशा अधिक ψ (कम ऋणात्मक) से कम ψ (अधिक ऋणात्मक) की ओर जाता है। कोशिका का ψ विलेय विभव और दाब विभव का योग है।
π = i C R Tवान्ट हॉफ़ समीकरण; R = 0.0821 L·atm/(mol·K)
ψ = ψs + ψpजल विभव = विलेय विभव + दाब विभव
ψs = −i C R TR = 8.314 L·kPa/(mol·K) लेने पर ψ kPa में आता है
विसरण और परासरण में अंतर
"विसरण और परासरण में पाँच अंतर लिखिए" लगभग हर साल पूछा जाता है। यह तालिका ध्यान से पढ़ें और हर पंक्ति का कारण सिमुलेशन में जाँचें।
| आधार | विसरण | परासरण |
|---|---|---|
| झिल्ली | ज़रूरी नहीं | अर्धपारगम्य झिल्ली अनिवार्य |
| क्या चलता है | कोई भी कण: विलेय, विलायक या गैस | केवल विलायक (पानी) |
| माध्यम | ठोस, द्रव और गैस | केवल द्रव विलयन |
| दिशा | उस पदार्थ की अधिक से कम सांद्रता की ओर | तनु विलयन से सांद्र विलयन की ओर |
| कब रुकता है | जब हर जगह सांद्रता बराबर हो | जब परासरण और द्रवस्थैतिक दाब बराबर हों |
| दाब | विसरण दाब | परासरण दाब (स्तर में अंतर बनता है) |
| उदाहरण | इत्र फैलना, पत्तियों में गैस विनिमय | मूल रोम द्वारा जल अवशोषण, किशमिश फूलना |
अल्पपरासरी, समपरासरी और अतिपरासरी विलयन
कोशिका को विलयन में रखने पर पानी किस ओर जाएगा, यह बाहर और अंदर की सांद्रता की तुलना पर निर्भर है। इस तुलना को टॉनिसिटी कहते हैं। सिमुलेशन में कोशिका के अंदर लगभग 0.3 mol/L है और बाहर के तीन प्रीसेट हैं: अल्पपरासरी 0.05, समपरासरी 0.30 और अतिपरासरी 0.60 mol/L।
अल्पपरासरी (हाइपोटोनिक) यानी बाहर का विलयन कोशिका रस से तनु है: पानी अंदर जाता है। समपरासरी (आइसोटोनिक) यानी दोनों बराबर: जितना पानी जाता है उतना आता है, शुद्ध प्रवाह शून्य। अतिपरासरी (हाइपरटोनिक) यानी बाहर का विलयन सांद्र: पानी बाहर निकलता है।
पादप और जंतु कोशिकाएँ अलग व्यवहार करती हैं, क्योंकि पादप कोशिका एक कठोर भित्ति में बंद है जो उसे फटने नहीं देती। लाल रक्त कोशिका जैसी जंतु कोशिका में भित्ति नहीं होती, इसलिए ज़्यादा पानी से वह फट जाती है।
| बाहरी विलयन | पानी का शुद्ध प्रवाह | पादप कोशिका | लाल रक्त कोशिका |
|---|---|---|---|
| अल्पपरासरी | कोशिका के अंदर | स्फीत (टर्जिड), कड़ी और फूली | फूलकर फटती है (हीमोलाइसिस) |
| समपरासरी | शून्य | श्लथ (फ्लैसिड) | सामान्य उभयावतल डिस्क |
| अतिपरासरी | कोशिका से बाहर | जीवद्रव्यकुंचित | सिकुड़ती है (क्रिनेशन) |
जीवद्रव्यकुंचन और जीवद्रव्य विकुंचन
जीवद्रव्यकुंचन क्या है? जीवित पादप कोशिका को अतिपरासरी विलयन में रखने पर बहिःपरासरण से कोशिका रस का पानी बाहर निकल जाता है। रिक्तिका सिकुड़ती है और जीवद्रव्य कोशिका भित्ति से अलग होकर बीच में इकट्ठा हो जाता है। इसे जीवद्रव्यकुंचन (Plasmolysis) कहते हैं।
भित्ति पारगम्य है, इसलिए भित्ति और सिकुड़े जीवद्रव्य के बीच की जगह बाहरी विलयन से भर जाती है। "विलयन में कोशिका" मोड में अतिपरासरी चुनिए और देखिए हरा जीवद्रव्य भित्ति के कोनों से हटकर गोल हो रहा है और नीली रिक्तिका छोटी हो रही है। अवस्था पहले "जीवद्रव्यकुंचन की शुरुआत" और फिर "जीवद्रव्यकुंचित" दिखाती है।
जीवद्रव्य विकुंचन क्या है? जीवद्रव्यकुंचित कोशिका को मरने से पहले पानी या अल्पपरासरी विलयन में रखें तो अंतःपरासरण से पानी लौटता है, जीवद्रव्य फूलकर फिर भित्ति से सट जाता है। इसे जीवद्रव्य विकुंचन (Deplasmolysis) कहते हैं। सिमुलेशन बाहरी विलयन बदलने पर जानबूझकर दोबारा शुरू नहीं होता, ताकि आप यह वापसी खुद देख सकें।
- जीवद्रव्यकुंचन केवल जीवित कोशिका में होता है; मृत कोशिका की झिल्ली अर्धपारगम्य नहीं रहती
- लंबे समय तक जीवद्रव्यकुंचित रहने पर कोशिका मर जाती है और लौट नहीं पाती
- खेत में ज़्यादा खाद डालने से मिट्टी का पानी अतिपरासरी होकर फसल मुरझा जाती है
- नमक और चीनी से अचार व जैम सुरक्षित रहते हैं क्योंकि सूक्ष्मजीव जीवद्रव्यकुंचित हो जाते हैं
अंतःशोषण (इम्बाइबिशन)
सूखी लकड़ी, बीज और किशमिश पानी में फूल जाते हैं, और बरसात में लकड़ी के दरवाज़े फूलकर अटकने लगते हैं। यहाँ कोई विलयन या झिल्ली नहीं है: सेल्यूलोज़, प्रोटीन और स्टार्च जैसे सूखे कोलॉइड सीधे पानी सोख लेते हैं। इसे अंतःशोषण कहते हैं।
बीज अंकुरण का पहला चरण अंतःशोषण ही है: बीज पानी सोखकर फूलता है, बीजावरण फटता है और एंज़ाइम सक्रिय होते हैं। अंतःशोषण दाब बहुत बड़ा हो सकता है; पुराने समय में चट्टान की दरारों में सूखी लकड़ी की खूँटियाँ ठोककर उन्हें भिगोकर पत्थर तोड़े जाते थे। अंतःशोषण में ऊष्मा निकलती है और आयतन बढ़ता है।
विसरण और परासरण की दर किन बातों पर निर्भर है
सिमुलेशन में आप दोनों सांद्रताएँ और तापमान बदल सकते हैं। असल जीवन में कुछ और बातें भी मायने रखती हैं, और सबका कारण एक ही है: अणु कितनी तेज़ी से चलते हैं और उन्हें कितनी दूरी तय करनी है।
- सांद्रता अंतर: अंतर जितना बड़ा, दर उतनी तेज़ (फ़िक का नियम)
- तापमान: गर्म अणु तेज़ चलते हैं और पानी पतला होता है, दर बढ़ती है
- अणु का आकार या द्रव्यमान: छोटे, हल्के अणु तेज़ फैलते हैं (ग्राहम का नियम)
- माध्यम: गैस में सबसे तेज़, द्रव में धीमा, ठोस में सबसे धीमा
- दूरी और क्षेत्रफल: पतली झिल्ली और बड़ी सतह दर बढ़ाती हैं, इसलिए फेफड़ों में करोड़ों कूपिकाएँ और आँत में रसांकुर हैं
- दाब: गैसों में दाब का अंतर भी विसरण चलाता है
करके देखें: आलू, किशमिश और अंडा
किताब के प्रयोग घर पर भी हो जाते हैं। हर प्रयोग का परिणाम पहले अनुमान लगाएँ, फिर सिमुलेशन से मिलाएँ।
आलू परासरणमापी
एक बड़े आलू को छीलकर बीच में प्याले जैसा गड्ढा बनाइए, उसमें गाढ़ा चीनी का घोल डालकर पिन से स्तर चिह्नित कीजिए। आलू को शुद्ध पानी की तश्तरी में रखिए। कुछ घंटे बाद गड्ढे का स्तर ऊपर उठ जाता है।
आलू की जीवित कोशिकाएँ मिलकर अर्धपारगम्य झिल्ली का काम करती हैं: बाहर का पानी (अधिक जल विभव) उनसे होकर चीनी घोल (कम जल विभव) में पहुँचता है। उबले आलू से यही प्रयोग करें तो कुछ नहीं होता, क्योंकि मृत झिल्ली अर्धपारगम्य नहीं रहती। यह सिमुलेशन के परासरण मोड का असली रूप है।
फूलती किशमिश
कुछ सूखी किशमिश तौलिए, रात भर पानी में भिगोइए, पोंछकर फिर तौलिए। वे भारी हो जाती हैं: किशमिश के अंदर की चीनी बहुत सांद्र है और बाहर का पानी अल्पपरासरी। फूली किशमिश को गाढ़ी चाशनी में रखें तो वे फिर सिकुड़ जाती हैं।
बिना छिलके का अंडा
कच्चे अंडे को एक-दो दिन सिरके में रखें तो कैल्शियम कार्बोनेट का छिलका घुल जाता है और केवल पतली अर्धपारगम्य झिल्ली बचती है। पानी में यह अंडा फूलता है, गाढ़ी चाशनी में पिचक जाता है। यह अल्पपरासरी और अतिपरासरी विलयन में लाल रक्त कोशिका का बड़ा मॉडल है।
सिमुलेशन में ये प्रयोग आज़माएँ
सिर्फ़ देखिए नहीं, सवाल लेकर खेलिए। हर प्रयोग से पहले अपना अनुमान लिख लीजिए।
- परासरण मोड में दोनों सांद्रताएँ बराबर करें (जैसे दोनों 0.30)। क्या स्तर उठेगा? प्रवाह "साम्यावस्था" दिखाएगा, क्योंकि दोनों विलयन समपरासरी हैं।
- बाएँ 0 और दाएँ 1.00 दें: Δh सबसे बड़ा होगा। अब दाएँ 0.50 करें: क्या Δh लगभग आधा होता है? परासरण दाब सांद्रता के समानुपाती है।
- विसरण मोड में एक बार 5 °C और एक बार 60 °C पर चलाएँ, और ग्राफ़ की रेखाओं के मिलने का समय तुलना करें।
- कोशिका मोड में पादप कोशिका को अतिपरासरी से जीवद्रव्यकुंचित करें, फिर अल्पपरासरी दें: वह लौट आती है।
- लाल रक्त कोशिका को अल्पपरासरी विलयन में रखें: आयतन बढ़ते-बढ़ते वह फट जाती है, और बाद में समपरासरी देने से भी नहीं लौटती। इसीलिए ड्रिप का सलाइन 0.9 % होता है।
हल किए गए प्रश्न
इस अध्याय के प्रश्न रसायन और जीव विज्ञान को मिलाते हैं। पहले खुद हल करें, फिर मिलाएँ।
प्रश्न 1: सिमुलेशन टैंक का परासरण दाब
सिमुलेशन की शुरुआत में बाईं ओर 0.1 mol/L और दाईं ओर 0.5 mol/L चीनी का घोल है, तापमान 25 °C। दोनों का परासरण दाब और अंतर ज्ञात करें।
T = 25 + 273.15 = 298.15 K। चीनी टूटती नहीं, इसलिए i = 1। बायाँ: π = 0.1 × 0.0821 × 298.15 = 2.45 atm। दायाँ: π = 0.5 × 0.0821 × 298.15 = 12.24 atm। अंतर = 9.79 atm।
यह अंतर कितना ऊँचा जल स्तंभ थाम सकता है? h = Δπ/(ρg) = 9.79 × 101325 ÷ (1000 × 9.8) ≈ 101.2 मीटर! असली परासरण इतना शक्तिशाली है, इसीलिए सिमुलेशन में स्तर पैमाने पर दिखाने पड़े, और इसीलिए परासरण ऊँचे पेड़ों तक पानी पहुँचाने में मदद करता है।
Δπ = (C₂ − C₁) R T
प्रश्न 2: आलू की पट्टियों का द्रव्यमान
5.00 g की दो आलू पट्टियाँ 1 mol/L चीनी घोल और शुद्ध पानी में रखी गईं। एक घंटे बाद पहली 4.30 g और दूसरी 5.55 g की हो गई। प्रतिशत परिवर्तन और कारण बताइए।
चीनी घोल में: (4.30 − 5.00) ÷ 5.00 × 100 = -14.0 %। 0.70 g पानी बाहर निकला, क्योंकि घोल अतिपरासरी था।
पानी में: (5.55 − 5.00) ÷ 5.00 × 100 = +11.0 %। 0.55 g पानी अंदर गया, क्योंकि पानी अल्पपरासरी है। जिस सांद्रता पर परिवर्तन शून्य हो, वह आलू के कोशिका रस से समपरासरी है।
प्रतिशत परिवर्तन = (अंतिम − प्रारंभिक) ÷ प्रारंभिक × 100
प्रश्न 3: ग्राहम का नियम और सफ़ेद वलय
100 cm लंबी नली के एक सिरे पर अमोनिया (NH₃, M = 17) और दूसरे पर हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl, M = 36.5) में भीगी रुई रखी गई। जहाँ गैसें मिलेंगी वहाँ NH₄Cl का सफ़ेद वलय बनेगा। कहाँ?
दर अनुपात: r(NH₃) ÷ r(HCl) = √(36.5 ÷ 17) = 1.465। समान समय में दूरी दर के समानुपाती है, इसलिए अमोनिया वाले सिरे से वलय 100 × 1.465 ÷ (1.465 + 1) = 59.4 cm पर और HCl वाले सिरे से 40.6 cm पर बनेगा। हल्की अमोनिया ज़्यादा दूर जाती है।
प्रश्न 4: दो विलयन मिलाना
200 mL 0.5 mol/L चीनी घोल में 300 mL 0.1 mol/L घोल मिलाया गया। विसरण पूरा होने पर सांद्रता कितनी होगी?
पहले में चीनी = 0.10 mol, दूसरे में 0.03 mol, कुल 0.13 mol, कुल आयतन 0.5 L। अंतिम सांद्रता = 0.13 ÷ 0.5 = 0.26 mol/L। विसरण मोड में ग्राफ़ की रेखाएँ ठीक ऐसे ही औसत पर मिलती हैं।
C = (C₁V₁ + C₂V₂) ÷ (V₁ + V₂)
प्रश्न 5: सलाइन 0.9 % ही क्यों
0.9 % NaCl यानी प्रति लीटर 9 g नमक; NaCl का मोलर द्रव्यमान 58.44 g/mol। दिखाइए कि यह रक्त से लगभग समपरासरी है।
मोलरता = 9 ÷ 58.44 = 0.154 mol/L। NaCl, Na⁺ और Cl⁻ में टूटता है, इसलिए i ≈ 2 और कण सांद्रता ≈ 0.308 osmol/L, जो प्लाज़्मा के लगभग 0.3 osmol/L के बराबर है। शरीर के ताप (37 °C = 310.15 K) पर परासरण दाब ≈ 0.308 × 0.0821 × 310.15 = 7.84 atm। इसलिए सलाइन ड्रिप से लाल रक्त कोशिकाएँ न फटती हैं, न सिकुड़ती हैं।
प्रश्न 6: जल विभव से दिशा निकालना
एक कोशिका का विलेय विभव -800 kPa और दाब विभव +300 kPa है। उसे 25 °C पर 0.3 mol/L चीनी घोल में रखा गया। पानी किस ओर जाएगा?
कोशिका का ψ = -800 + 300 = -500 kPa। घोल का ψ = −C R T = −0.3 × 8.314 × 298.15 = -744 kPa। पानी अधिक से कम ψ की ओर जाता है। -500 > -744, इसलिए पानी कोशिका से घोल में जाएगा (अंतर 244 kPa) और कोशिका जीवद्रव्यकुंचन की ओर बढ़ेगी।
प्रश्न 7: तापमान विसरण को कितना तेज़ करता है
सिमुलेशन के कण D ∝ T/η मानते हैं, जहाँ η पानी की श्यानता है। 25 °C की तुलना में 5 °C पर विसरण 0.55 गुना और 60 °C पर 2.15 गुना है।
यानी 5 °C से 60 °C तक गर्म करने पर विसरण लगभग 3.9 गुना तेज़ होता है। केवल केल्विन ताप का अनुपात इतना बड़ा नहीं; ज़्यादातर बढ़त गर्म पानी के पतले होने से आती है। इसीलिए गर्म पानी में चाय का रंग जल्दी फैलता है।
प्रश्न 8: किशमिश का द्रव्यमान बढ़ना
2.0 g किशमिश रात भर पानी में रहकर 3.1 g की हो गई। प्रतिशत वृद्धि = (3.1 − 2.0) ÷ 2.0 × 100 = 55 %। यह पानी अंतःपरासरण और अंतःशोषण से अंदर गया।
वे गलतियाँ जो लगभग सब करते हैं
उत्तर लिखते समय इनसे बचें; परीक्षक ठीक इन्हीं पर अंक काटते हैं।
- "परासरण में विलेय चलता है" लिखना गलत है। केवल विलायक चलता है।
- "पानी सांद्र से तनु विलयन की ओर जाता है" उल्टा है। पानी तनु से सांद्र की ओर जाता है।
- कोशिका भित्ति को अर्धपारगम्य कहना गलत है। भित्ति पारगम्य है; कोशिका झिल्ली अर्धपारगम्य है।
- साम्यावस्था में अणु रुकते नहीं, केवल शुद्ध प्रवाह शून्य होता है।
- अंतःशोषण को परासरण कहना गलत है। अंतःशोषण में झिल्ली या विलयन नहीं चाहिए।
- समपरासरी विलयन में पादप कोशिका स्फीत नहीं, श्लथ होती है।
रोज़मर्रा के जीवन में विसरण और परासरण
ये प्रक्रियाएँ रोज़ हमारे आसपास काम करती हैं। कुछ उदाहरण याद रखें तो अनुप्रयोग वाले प्रश्न आसान हो जाते हैं।
- मछली और मांस पर नमक लगाकर सुखाना: सूक्ष्मजीव जीवद्रव्यकुंचित होकर मरते हैं
- अचार, जैम और जेली ज़्यादा नमक या चीनी से ख़राब नहीं होते
- दस्त में ओआरएस (ORS) घोल आँत को पानी और लवण सोखने में मदद करता है
- मूल रोम मिट्टी का पानी सोखते हैं और पानी कोशिका से कोशिका परासरण से जाता है
- पत्तियों के रंध्रों से वाष्पोत्सर्जन और गैस विनिमय
- गुर्दे का डायलिसिस: अर्धपारगम्य नली से रक्त के अपशिष्ट बाहर विसरित होते हैं
- आरओ (RO) फ़िल्टर उल्टा दाब लगाकर खारे पानी से शुद्ध पानी बनाता है
- मुरझाई सब्ज़ी पानी में ताज़ा होती है और मुरझाया पौधा पानी देने पर सीधा खड़ा होता है
परीक्षा कॉर्नर: CBSE, राज्य बोर्ड और NEET
यह विषय कक्षा 9 विज्ञान ("जीवन की मौलिक इकाई") और कक्षा 11 जीव विज्ञान ("पौधों में परिवहन") में आता है, और NEET में हर साल इससे जुड़े प्रश्न आते हैं। परिभाषाएँ और अंतर की तालिका सबसे आम लघु प्रश्न हैं।
लघु प्रश्न: "विसरण क्या है?", "अर्धपारगम्य झिल्ली क्या है?", "जीवद्रव्यकुंचन क्या है?"। कारण वाले प्रश्न: "परासरण को विशेष प्रकार का विसरण क्यों कहते हैं?" या "कोशिका भित्ति पारगम्य क्यों है?"। अनुप्रयोग प्रश्नों में स्थिति दी जाती है, जैसे किसान ने ज़्यादा खाद डाली या आलू चीनी घोल में रखा, और कारण समझाना होता है।
- परिभाषाएँ NCERT की भाषा में याद करें, उदाहरण अपने शब्दों में दें
- अंतर वाले प्रश्न में कम से कम पाँच बिंदु तालिका में लिखें
- जीवद्रव्यकुंचित कोशिका के चित्र में भित्ति, सिकुड़ा जीवद्रव्य, रिक्तिका और रिक्त स्थान नामांकित करें
- NEET में परासरण दाब, जल विभव और टॉनिसिटी पर MCQ आते हैं; हर सूत्र एक बार हाथ से हल करें
एक नज़र में दोहराव
परीक्षा की पिछली रात सिर्फ़ यह भाग पढ़ें, पूरा अध्याय याद आ जाएगा।
- विसरण: कणों का अधिक से कम सांद्रता की ओर अपने आप फैलना; झिल्ली ज़रूरी नहीं
- परासरण: अर्धपारगम्य झिल्ली से विलायक का तनु से सांद्र विलयन की ओर जाना
- परासरण दाब π = iCRT; जल विभव ψ = ψs + ψp
- अल्पपरासरी: पानी अंदर; समपरासरी: शुद्ध प्रवाह नहीं; अतिपरासरी: पानी बाहर
- जीवद्रव्यकुंचन: अतिपरासरी में जीवद्रव्य भित्ति छोड़ता है; विकुंचन: वापस आना
- अंतःशोषण: कोलॉइड द्वारा पानी सोखना; अंकुरण का पहला चरण
- दर बढ़ती है: बड़ा सांद्रता अंतर, अधिक ताप, छोटे अणु, पतली झिल्ली, बड़ी सतह
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विसरण क्या है, आसान भाषा में?
किसी पदार्थ के कणों का भीड़ वाली जगह से कम भीड़ वाली जगह की ओर अपने आप फैलना, जब तक सब जगह बराबर न हो जाए, विसरण है। जैसे कमरे के कोने में छिड़का इत्र पूरे कमरे में फैल जाता है।
परासरण क्या है, आसान भाषा में?
अर्धपारगम्य झिल्ली के दोनों ओर अलग सांद्रता के विलयन हों, तो पानी झिल्ली पार करके तनु विलयन से सांद्र विलयन में चला जाता है। घुले हुए कण पार नहीं कर पाते। यही परासरण है।
विसरण और परासरण में मुख्य अंतर क्या है?
विसरण में झिल्ली नहीं चाहिए और कोई भी कण चल सकता है। परासरण में अर्धपारगम्य झिल्ली चाहिए और केवल विलायक, यानी पानी, तनु से सांद्र विलयन की ओर जाता है।
परासरण को विशेष प्रकार का विसरण क्यों कहते हैं?
क्योंकि परासरण में भी पानी के अणु वहीं से जाते हैं जहाँ पानी अधिक सांद्र है और वहाँ पहुँचते हैं जहाँ कम सांद्र है, जो विसरण का नियम है। फ़र्क बस अर्धपारगम्य झिल्ली और केवल विलायक के चलने का है।
जीवद्रव्यकुंचन और जीवद्रव्य विकुंचन क्या हैं?
अतिपरासरी विलयन में पादप कोशिका पानी खोती है और जीवद्रव्य भित्ति से अलग हो जाता है, यह जीवद्रव्यकुंचन है। कोशिका को फिर पानी में रखने पर पानी लौटता है और वह सामान्य हो जाती है, यह विकुंचन है।
परासरण दाब किसे कहते हैं?
अर्धपारगम्य झिल्ली से शुद्ध पानी के विलयन में प्रवेश को ठीक रोकने के लिए विलयन पर लगाया जाने वाला दाब परासरण दाब है। तनु विलयन के लिए π = iCRT।
अर्धपारगम्य झिल्ली के उदाहरण क्या हैं?
कोशिका झिल्ली, अंडे के छिलके के अंदर की झिल्ली, मछली का वायुकोश, जंतु मूत्राशय की झिल्ली, सेलोफ़ेन और चर्मपत्र। पादप कोशिका भित्ति अर्धपारगम्य नहीं, पूर्णतः पारगम्य है।
नमक लगाने से मछली और अचार क्यों नहीं सड़ते?
ज़्यादा नमक या चीनी आसपास को अतिपरासरी बना देता है। जीवाणु और कवक की कोशिकाओं से परासरण द्वारा पानी निकल जाता है, वे जीवद्रव्यकुंचित होकर मरती हैं या बढ़ नहीं पातीं।
क्या अंतःशोषण और परासरण एक ही हैं?
नहीं। अंतःशोषण में बीज या लकड़ी जैसा सूखा कोलॉइड सीधे पानी सोखकर फूलता है; अर्धपारगम्य झिल्ली या दो विलयनों की ज़रूरत नहीं। परासरण में दोनों ज़रूरी हैं।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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