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प्रकाश संश्लेषण: पत्ती धूप से भोजन कैसे बनाती है

प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रिया है जिसमें हरे पौधे पर्णहरित (क्लोरोफिल) की मदद से सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा लेकर कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से ग्लूकोज़ बनाते हैं और ऑक्सीजन बाहर छोड़ते हैं। समीकरण: 6CO₂ + 12H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O। यह हरितलवक में दो चरणों में होता है: प्रकाश अभिक्रिया और अप्रकाशी अभिक्रिया।

प्रकाश या तापमान बदलने के लिए ग्राफ़ पर खींचें

CO₂ · कार्बन डाइऑक्साइडO₂ · ऑक्सीजनH₂O · पानीC₆H₁₂O₆ · शर्कराअभी की स्थितिअधिक CO₂ (1000 ppm) पर
गति

नियंत्रण

दृश्य

60 %
420 ppm
25 °C

मापन

प्रकाश संश्लेषण की दर
18.0µmol m⁻² s⁻¹
सीमाकारी कारक
प्रकाश
प्रति मिनट बुलबुले
36
कुल गिने बुलबुले
0
बना ग्लूकोज़
0µg
पत्ती की घड़ी
0.0min

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. पहले कुछ न बदलें, बस “पत्ती” दृश्य देखें: धूप पत्ती पर पड़ रही है, नीचे के रंध्रों से CO₂ अंदर जा रही है, तने के जाइलम से पानी ऊपर चढ़ रहा है, O₂ बाहर निकल रही है और दाईं ओर शर्करा का मीटर भर रहा है।
  2. प्रकाश की तीव्रता का स्लाइडर धीरे-धीरे बढ़ाएँ और “सीमाकारी कारक” वाला खाना देखें: एक सीमा के बाद प्रकाश बढ़ाने से दर नहीं बढ़ती, क्योंकि अब CO₂ कम पड़ रही है।
  3. CO₂ की सांद्रता बढ़ाएँ, ऊपर वाले ग्राफ़ का सपाट हिस्सा ऊपर उठ जाएगा। फिर तापमान 45 °C की ओर ले जाएँ और देखें कि नीचे वाले ग्राफ़ में दर अचानक कैसे गिरती है।
  4. “हाइड्रिला” दृश्य पर जाएँ: मापन पैनल में लिखा है कि हर मिनट कितने ऑक्सीजन के बुलबुले निकल रहे हैं। प्रकाश कम करके प्रयोगशाला की तरह बुलबुले गिनें।
  5. “हरितलवक के अंदर” दृश्य पर जाएँ: बाईं ओर थाइलेकॉइड में पानी टूटकर O₂, ATP और NADPH बन रहे हैं, दाईं ओर स्ट्रोमा का केल्विन चक्र उन्हें खर्च करके CO₂ से ग्लूकोज़ बना रहा है।
  6. किसी भी ग्राफ़ पर उँगली या माउस खींचकर सीधे प्रकाश या तापमान बदल सकते हैं; स्लाइडर भी यही काम करते हैं।

थाली की रोटी से पेड़ की पत्ती तक

आज आपने जो रोटी या चावल खाया, उसका गेहूँ या धान किसी खेत में उगा था। उस पौधे ने किसी दुकान से खाना नहीं खरीदा। मिट्टी से पानी, हवा से कार्बन डाइऑक्साइड और आसमान से धूप, बस इन तीन चीज़ों से उसने अपना भोजन खुद बनाया और उसका कुछ हिस्सा दानों में जमा कर दिया, जिसे हम खाते हैं। इसी रसोई का नाम है प्रकाश संश्लेषण।

घर पर एक आसान प्रयोग सोचिए। गमले के पौधे को कुछ दिन अंधेरी अलमारी में रख दें तो उसकी पत्तियाँ पीली पड़ने लगती हैं और पौधा मुरझा जाता है। वापस धूप में रखें तो फिर हरा-भरा हो जाता है, क्योंकि बिना प्रकाश के पौधे की रसोई बंद रहती है। तालाब में या मछलीघर में हाइड्रिला जैसे जलीय पौधे को धूप में ध्यान से देखें, तो पत्तियों से छोटे-छोटे बुलबुले उठते दिखेंगे। ये बुलबुले प्रकाश संश्लेषण में बनी ऑक्सीजन हैं।

अभी आपने जो साँस ली, उसकी ऑक्सीजन भी किसी पेड़ या समुद्र के शैवाल ने बनाई थी। इसलिए प्रकाश संश्लेषण सिर्फ़ पौधों का विषय नहीं है, यह धरती के लगभग हर जीव के भोजन और साँस की जड़ है। इस पेज पर हम क्रम से देखेंगे कि पत्ती यह काम कैसे करती है, किस चीज़ की कमी से यह धीमा हो जाता है, और बोर्ड व NEET परीक्षा में इससे क्या-क्या पूछा जाता है।

बिल्कुल शुरू से: प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं

“प्रकाश” यानी रोशनी और “संश्लेषण” यानी छोटी चीज़ों को जोड़कर बड़ी चीज़ बनाना। तो प्रकाश संश्लेषण का अर्थ है प्रकाश की सहायता से सरल अणुओं (CO₂ और H₂O) को जोड़कर जटिल भोज्य अणु (ग्लूकोज़) बनाना। अंग्रेज़ी में इसे photosynthesis कहते हैं।

परीक्षा में परिभाषा ऐसे लिखें: वह प्रक्रम जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में पर्णहरित की सहायता से वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड और जल से कार्बोहाइड्रेट (ग्लूकोज़) का निर्माण करते हैं और ऑक्सीजन मुक्त करते हैं, प्रकाश संश्लेषण कहलाता है। इसमें प्रकाश ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा में बदलकर भोजन में संचित हो जाती है।

इसके लिए चार चीज़ें चाहिए: प्रकाश (ऊर्जा का स्रोत), पर्णहरित (प्रकाश पकड़ने वाला हरा वर्णक), कार्बन डाइऑक्साइड (हवा से रंध्रों के रास्ते आती है) और जल (जड़ें सोखती हैं, जाइलम से पत्ती तक पहुँचता है)। बनती हैं दो चीज़ें: ग्लूकोज़ (भोजन) और ऑक्सीजन (हवा में छोड़ दी जाती है)। ग्लूकोज़ का ज़्यादातर हिस्सा बाद में मंड (स्टार्च) के रूप में जमा हो जाता है, इसलिए धूप में रही पत्ती पर आयोडीन डालने से नीला-काला रंग आता है।

कक्षा 10 की NCERT पुस्तक के “जैव प्रक्रम” अध्याय में प्रकाश संश्लेषण की तीन घटनाएँ बताई गई हैं: (1) पर्णहरित द्वारा प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण; (2) प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में रूपांतरण और जल के अणुओं का हाइड्रोजन व ऑक्सीजन में अपघटन; (3) कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन। ये तीनों क्रम से होना ज़रूरी नहीं, जैसे मरुस्थलीय पौधे रात में CO₂ लेकर रख लेते हैं और दिन में उसका उपयोग करते हैं।

प्रकाश संश्लेषण के ज़रूरी शब्द

इस अध्याय के हर प्रश्न में यही शब्द घूम-फिरकर आते हैं। इन्हें एक बार अच्छी तरह समझ लें।

शब्दआसान भाषा में अर्थ
पर्णहरित (क्लोरोफिल)पत्ती का हरा वर्णक जो प्रकाश सोखता है; इसके केंद्र में मैग्नीशियम (Mg) परमाणु होता है
हरितलवक (क्लोरोप्लास्ट)पत्ती की कोशिका का हरा कोशिकांग, प्रकाश संश्लेषण की रसोई
थाइलेकॉइड और ग्रेनाहरितलवक के अंदर चपटी थैलियाँ; इनकी गड्डी को ग्रेनम (बहुवचन ग्रेना) कहते हैं
स्ट्रोमाहरितलवक के अंदर का तरल भाग; यहाँ केल्विन चक्र चलता है
रंध्रपत्ती (प्रायः निचली सतह) के छोटे छिद्र, दो द्वार कोशिकाओं से घिरे; इनसे CO₂ अंदर और O₂ बाहर जाती है
प्रकाश अभिक्रियाथाइलेकॉइड में होती है; प्रकाश चाहिए; जल टूटता है, O₂ निकलती है, ATP और NADPH बनते हैं
अप्रकाशी अभिक्रियास्ट्रोमा में होती है; सीधे प्रकाश नहीं चाहिए; ATP-NADPH खर्च करके CO₂ से शर्करा बनती है
जल का प्रकाश-अपघटनप्रकाश ऊर्जा से जल के अणु का टूटना: 2H₂O → 4H⁺ + 4e⁻ + O₂
प्रकाश फ़ॉस्फ़ोरिलीकरणप्रकाश ऊर्जा से ADP और फ़ॉस्फ़ेट जोड़कर ATP बनाना
केल्विन चक्रCO₂ स्थिरीकरण से शर्करा बनाने वाला चक्र; पहला स्थायी उत्पाद 3-कार्बन का, इसलिए C₃ चक्र
रुबिस्को (RuBisCO)वह एंज़ाइम जो CO₂ को RuBP से जोड़ता है; धरती पर सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला प्रोटीन
सीमाकारी कारककई कारकों में से वह जो सबसे कम मात्रा में है और दर को रोककर रखता है

प्रकाश संश्लेषण का समीकरण और उसका अर्थ

शब्दों में: कार्बन डाइऑक्साइड + जल → (सूर्य का प्रकाश, पर्णहरित) → ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन + जल। NCERT कक्षा 10 में यही पूरा समीकरण दिया गया है, जिसमें दाईं ओर भी जल है। कई किताबें सरल रूप भी लिखती हैं, जिसमें दोनों ओर के 6 जल अणु काट दिए जाते हैं।

सवाल उठता है कि दोनों ओर जल है तो काट क्यों नहीं देते? क्योंकि बाईं ओर के सभी 12 जल अणु सच में टूटते हैं और मुक्त होने वाली पूरी ऑक्सीजन उन्हीं से आती है। दाईं ओर के 6 जल अणु नए हैं, जो अप्रकाशी अभिक्रिया में बनते हैं। 1941 में रूबेन और कामेन ने ऑक्सीजन के भारी समस्थानिक ¹⁸O से दिखाया कि जल में ¹⁸O डालने पर निकली ऑक्सीजन में ¹⁸O मिलता है, पर CO₂ में डालने पर नहीं। इससे पहले वैन नील ने भी यही अनुमान लगाया था। अतः प्रकाश संश्लेषण में मुक्त ऑक्सीजन जल से आती है, CO₂ से नहीं।

पूरे समीकरण में दोनों ओर का द्रव्यमान बराबर है: बाईं ओर 264 g CO₂ और 216 g जल मिलकर 480 g; दाईं ओर 180 g ग्लूकोज़, 192 g ऑक्सीजन और 108 g जल मिलकर भी 480 g। नीचे की तालिका में हर अणु का हिसाब है (C = 12, H = 1, O = 16 मानकर)।

6CO₂ + 12H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂Oपूरा समीकरण (सूर्य का प्रकाश और पर्णहरित की उपस्थिति में)

6CO₂ + 6H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂सरल (नेट) समीकरण; दोनों ओर के 6 जल अणु काटकर

2H₂O → 4H⁺ + 4e⁻ + O₂जल का प्रकाश-अपघटन, प्रकाश अभिक्रिया में

अणुसंख्यामोलर द्रव्यमानकुल द्रव्यमान
CO₂ (अभिकारक)644 g/mol264 g
H₂O (अभिकारक)1218 g/mol216 g
C₆H₁₂O₆ (उत्पाद)1180 g/mol180 g
O₂ (उत्पाद)632 g/mol192 g
H₂O (उत्पाद)618 g/mol108 g

पर्णहरित और हरितलवक: पत्ती के सोलर पैनल

पत्तियाँ हरी क्यों होती हैं? पर्णहरित सूर्य के प्रकाश का लाल और नीला भाग बहुत अच्छी तरह सोखता है, पर हरा प्रकाश लगभग पूरा लौटा देता है। वही लौटा हुआ हरा प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है। मज़े की बात है कि जो रंग पौधे के सबसे कम काम का है, वही हमें दिखता है।

वर्णक कई प्रकार के होते हैं। क्लोरोफिल-a मुख्य वर्णक है और सीधे प्रकाश अभिक्रिया में भाग लेता है। क्लोरोफिल-b, कैरोटीन (नारंगी) और ज़ैंथोफिल (पीला) सहायक वर्णक हैं, जो अतिरिक्त प्रकाश पकड़कर ऊर्जा क्लोरोफिल-a तक पहुँचाते हैं। पतझड़ में पर्णहरित टूटने पर छिपे हुए पीले-नारंगी वर्णक दिखने लगते हैं। पर्णहरित के केंद्र में मैग्नीशियम होता है, इसलिए मिट्टी में Mg की कमी से पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं (हरिमाहीनता या क्लोरोसिस)।

पत्ती की पर्णमध्योतक कोशिकाओं में, ख़ासकर ऊपरी सतह के नीचे की खंभ ऊतक परत में, बहुत सारे हरितलवक होते हैं। हर हरितलवक दोहरी झिल्ली से घिरा होता है। अंदर स्ट्रोमा नाम का तरल है, जिसमें थाइलेकॉइड की गड्डियाँ (ग्रेना) तैरती हैं, जो स्ट्रोमा पटलिकाओं से आपस में जुड़ी हैं। पर्णहरित थाइलेकॉइड की झिल्ली में होता है। सिमुलेशन के “हरितलवक के अंदर” दृश्य में यही चित्र बना है।

दो चरण: प्रकाश अभिक्रिया और अप्रकाशी अभिक्रिया

हरितलवक को दो विभागों वाली एक फ़ैक्ट्री समझिए। पहला विभाग प्रकाश से “बैटरी चार्ज” करता है, यानी ATP और NADPH बनाता है। दूसरा विभाग उन चार्ज बैटरियों को खर्च करके CO₂ से शक्कर बनाता है। पहला है प्रकाश अभिक्रिया (प्रकाश रासायनिक चरण), दूसरा है अप्रकाशी अभिक्रिया (जैव संश्लेषी चरण), जिसे अंधकार अभिक्रिया भी कहते हैं।

प्रकाश अभिक्रिया: थाइलेकॉइड में ऊर्जा पकड़ना

पर्णहरित जब प्रकाश सोखता है तो उसके इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर ऊँचे ऊर्जा स्तर पर पहुँच जाते हैं और वाहक अणुओं की एक शृंखला से आगे बढ़ते हैं। खोए इलेक्ट्रॉनों की पूर्ति के लिए जल के अणु टूटते हैं, यही जल का प्रकाश-अपघटन है। इससे बनी ऑक्सीजन रंध्रों से बाहर हवा में चली जाती है।

इलेक्ट्रॉन जब वाहकों से गुज़रते हैं तो जो ऊर्जा छूटती है उससे ADP और फ़ॉस्फ़ेट जुड़कर ATP बनता है (प्रकाश फ़ॉस्फ़ोरिलीकरण)। अंत में इलेक्ट्रॉन और H⁺ मिलकर NADP⁺ को NADPH में बदल देते हैं। कक्षा 11 में आप पढ़ेंगे कि इसमें दो वर्णक तंत्र काम करते हैं: PS II (P680), जहाँ जल टूटता है, और PS I (P700); इलेक्ट्रॉन के रास्ते को Z-योजना कहते हैं।

  • स्थान: थाइलेकॉइड झिल्ली (ग्रेना)
  • चाहिए: प्रकाश, पर्णहरित, जल, ADP, NADP⁺
  • बनते हैं: ATP, NADPH और सह-उत्पाद के रूप में O₂

अप्रकाशी अभिक्रिया: स्ट्रोमा में केल्विन चक्र

इस चरण में सीधे प्रकाश नहीं लगता, पर प्रकाश अभिक्रिया में बने ATP और NADPH ज़रूर लगते हैं। इसलिए “अंधकार अभिक्रिया” का मतलब यह नहीं कि यह रात में होती है; यह दिन में ही प्रकाश अभिक्रिया के साथ-साथ चलती है। प्रकाश बंद होते ही ATP-NADPH ख़त्म हो जाते हैं और कुछ ही पलों में यह भी रुक जाती है।

मेल्विन केल्विन ने रेडियोधर्मी ¹⁴C से क्लोरेला शैवाल पर प्रयोग करके यह चक्र खोजा और 1961 में नोबेल पुरस्कार पाया। इसके तीन चरण हैं। कार्बोक्सिलीकरण: रुबिस्को एंज़ाइम CO₂ को 5-कार्बन वाले RuBP से जोड़ता है, और दो अणु 3-कार्बन वाले PGA (3-फ़ॉस्फ़ोग्लिसरिक अम्ल) बनते हैं। अपचयन: ATP और NADPH की मदद से PGA से ग्लिसरैल्डिहाइड-3-फ़ॉस्फ़ेट बनता है, जिससे आगे ग्लूकोज़ बनता है। पुनर्जनन: बाकी शर्करा और ATP खर्च करके फिर से RuBP बनता है ताकि चक्र चलता रहे।

हिसाब याद रखें: हर एक CO₂ के स्थिरीकरण में 3 ATP और 2 NADPH लगते हैं। इसलिए एक ग्लूकोज़ (6 CO₂) बनाने में 18 ATP और 12 NADPH लगते हैं।

  • स्थान: हरितलवक का स्ट्रोमा
  • चाहिए: CO₂, ATP, NADPH, RuBP, रुबिस्को एंज़ाइम
  • बनते हैं: ग्लूकोज़ (शर्करा), ADP और NADP⁺ (जो वापस प्रकाश अभिक्रिया में जाते हैं)

प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारक

जो चीज़ें प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ाती या घटाती हैं, उन्हें कारक कहते हैं। इन्हें दो भागों में बाँटा जाता है। बाह्य कारक वातावरण से आते हैं: प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड, तापमान और जल। आंतरिक कारक पौधे के अपने होते हैं: पत्तियों की संख्या, आकार, आयु और दिशा, पर्णमध्योतक कोशिकाएँ और हरितलवक, आंतरिक CO₂ की मात्रा और पर्णहरित की मात्रा।

प्रकाश: प्रकाश बढ़ने पर दर बढ़ती है, पर एक सीमा तक। बहुत तेज़ प्रकाश में पर्णहरित नष्ट भी हो सकता है। रंग की बात करें तो लाल प्रकाश में दर सबसे अधिक, फिर नीले में; हरे में सबसे कम। कार्बन डाइऑक्साइड: हवा में CO₂ केवल लगभग 0.04% है (पुरानी किताबों में 0.03%), यानी आजकल लगभग 420 ppm। NCERT कक्षा 11 के अनुसार यही प्रमुख सीमाकारी कारक है, क्योंकि इसकी मात्रा बहुत कम है।

तापमान: अप्रकाशी अभिक्रिया के सारे चरण एंज़ाइम चलाते हैं, और एंज़ाइम तापमान पर बहुत निर्भर होते हैं। ठंड में वे धीरे काम करते हैं, गर्मी बढ़ने पर दर बढ़ती है। अधिकांश पौधों में लगभग 20 से 35 °C के बीच (प्रजाति के अनुसार अलग) दर सबसे अधिक होती है, इसे इष्टतम तापमान कहते हैं। इससे बहुत अधिक गर्मी में एंज़ाइम का आकार बिगड़ जाता है (विकृतीकरण) और दर तेज़ी से गिरती है। C₄ पौधों का इष्टतम तापमान C₃ पौधों से अधिक होता है। जल: पानी की कमी से रंध्र बंद हो जाते हैं, CO₂ अंदर नहीं जा पाती, और दर घट जाती है।

आंतरिक कारकों में पर्णहरित के बिना प्रकाश संश्लेषण हो ही नहीं सकता। बहुत नई और बहुत पुरानी पत्तियों में दर कम होती है। और अगर बनी हुई शर्करा पत्ती से जल्दी हटाई न जाए तो जमा होकर प्रक्रिया को धीमा कर देती है।

सीमाकारी कारक और ब्लैकमैन का नियम

1905 में ब्रिटिश वनस्पति वैज्ञानिक एफ़. एफ़. ब्लैकमैन ने सीमाकारी कारकों का नियम दिया: यदि कोई रासायनिक प्रक्रम एक से अधिक कारकों से प्रभावित होता है, तो उसकी दर उस कारक से तय होती है जो अपने न्यूनतम मान के सबसे निकट है। आसान उदाहरण: तीन दोस्त मिलकर अलमारी उठा रहे हैं और उनमें एक धीमा है। बाकी दो कितने भी तेज़ हों, अलमारी उसी धीमे दोस्त की चाल से चलेगी। उसकी मदद करेंगे तभी काम तेज़ होगा।

सिमुलेशन का मॉडल ठीक इसी नियम पर चलता है। हर कारक एक “छत” तय करता है: प्रकाश की छत = 0.30 × प्रकाश प्रतिशत, CO₂ की छत = 0.05 × ppm, और तापमान की छत = 35 × एंज़ाइम की दक्षता। दर इन तीनों में सबसे नीची छत होती है, इकाई µmol CO₂ प्रति वर्ग मीटर पत्ती प्रति सेकंड (पादप वैज्ञानिक यही इकाई उपयोग करते हैं; धूप में फ़सल की पत्ती में अधिकतम लगभग 20–30)।

नीचे की तालिका में 25 °C पर प्रकाश बढ़ाते हुए दर दिखाई गई है, सामान्य हवा में और अधिक CO₂ में। सामान्य हवा में एक सीमा के बाद प्रकाश बढ़ाने पर भी दर रुक जाती है, क्योंकि अब सीमाकारी कारक प्रकाश से बदलकर CO₂ हो गया है। CO₂ बढ़ाने पर सपाट हिस्सा ऊपर उठता है। यही ब्लैकमैन का वक्र है।

प्रकाशदर (सामान्य हवा)सीमाकारी कारकदर (1000 ppm CO₂)
0 %0.0प्रकाश0.0
20 %6.0प्रकाश6.0
40 %12.0प्रकाश12.0
60 %18.0प्रकाश18.0
80 %21.0CO₂24.0
100 %21.0CO₂24.7

तापमान और एंज़ाइम: इष्टतम तापमान क्यों होता है

इष्टतम तापमान से नीचे हर 10 °C बढ़ने पर एंज़ाइम अभिक्रिया की दर लगभग दोगुनी होती है (इसे Q₁₀ = 2 कहते हैं)। हमारे मॉडल में इष्टतम तापमान 30 °C है। इसके ऊपर एंज़ाइम का प्रोटीन ढाँचा बिगड़ने लगता है और 45 °C पर मॉडल की दर शून्य हो जाती है।

तालिका में केवल एंज़ाइम की छत है, यानी प्रकाश और CO₂ भरपूर हों तो तापमान अधिकतम कितनी दर चलने देगा। ध्यान दें कि चढ़ाई धीमी है और गिरावट बहुत खड़ी। असली पौधों में गर्मी से बिगड़े एंज़ाइम ठंडा करने पर भी पूरी तरह पहले जैसे नहीं होते।

तापमानएंज़ाइम की छत (µmol m⁻² s⁻¹)अधिकतम का कितना भाग
0 °C4.413 %
10 °C8.825 %
20 °C17.550 %
25 °C24.771 %
30 °C35.0100 %
35 °C31.189 %
40 °C19.456 %
45 °C0.00 %

सिमुलेशन में खुद प्रयोग करें

हर प्रयोग से पहले “फिर से शुरू” दबाएँ, ताकि ग्लूकोज़ और बुलबुलों की गिनती शून्य से शुरू हो।

प्रयोग 1: प्रकाश बढ़ाएँ और देखें दर कहाँ रुकती है

CO₂ 420 ppm और तापमान 25 °C रखकर प्रकाश 0 से 100% तक बढ़ाएँ। पहले दर सीधी रेखा में बढ़ेगी और सीमाकारी कारक “प्रकाश” लिखा रहेगा। लगभग 70% के बाद दर बढ़ना बंद हो जाएगी और सीमाकारी कारक “कार्बन डाइऑक्साइड” हो जाएगा। ऊपर वाले ग्राफ़ में बिंदु सपाट हिस्से पर पहुँच जाएगा।

प्रयोग 2: CO₂ बढ़ाकर छत उठाएँ

प्रकाश 100% रखकर CO₂ को 1000 ppm करें। ठोस वक्र डैश वाले वक्र की ओर उठ जाएगा, और अब तापमान (एंज़ाइम) सीमाकारी है। फिर तापमान 30 °C करें तो प्रकाश फिर से सीमाकारी हो जाता है। एक कारक ठीक करते ही अगला सामने आ जाता है।

प्रयोग 3: बहुत गर्मी में क्या होता है

नीचे वाले ग्राफ़ में बिंदु को 30 से 45 °C की ओर खींचें। दर तेज़ी से गिरेगी और 45 °C पर सीमाकारी कारक के खाने में “एंज़ाइम विकृत हो गए” लिखा आएगा। शर्करा मीटर भरना बंद हो जाएगा और O₂ भी नहीं निकलेगी।

प्रयोग 4: हाइड्रिला के बुलबुले गिनें

“हाइड्रिला” दृश्य खोलें। शुरुआती मानों पर हर मिनट 36 बुलबुले निकलते हैं। पत्ती की घड़ी असली समय से 10 गुना तेज़ चलती है, इसलिए जब पत्ती की घड़ी एक मिनट दिखाए तब जाँचें कि “कुल गिने बुलबुले” लगभग 36 हुए या नहीं। फिर प्रकाश आधा करके दोबारा गिनें।

प्रयोग 5: दोनों चरणों का संबंध देखें

“हरितलवक के अंदर” दृश्य में प्रकाश शून्य करें। पीले फ़ोटॉन आना बंद हो जाएँगे, ATP और NADPH आना रुक जाएगा, और केल्विन चक्र भी थम जाएगा। इससे साफ़ है कि अप्रकाशी अभिक्रिया सीधे प्रकाश न लेते हुए भी पूरी तरह प्रकाश अभिक्रिया पर निर्भर है।

प्रयोगशाला के प्रयोग: मंड, प्रकाश, पर्णहरित और ऑक्सीजन

ये प्रयोग CBSE बोर्ड और प्रायोगिक परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं। सबका आधार एक ही है: जहाँ प्रकाश संश्लेषण हुआ है, वहाँ मंड जमा हुआ है, और आयोडीन मंड को नीला-काला कर देता है। नीचे की तालिका सिमुलेशन के मॉडल से गणना की गई है: हाइड्रिला प्रयोग में लैंप की दूरी बदलने पर प्रति मिनट बुलबुले कितने होते हैं (25 °C, सामान्य हवा)।

पत्ती में मंड का परीक्षण (आयोडीन परीक्षण)

कुछ घंटे धूप में रहे पौधे की एक पत्ती तोड़ें। उसे कुछ मिनट पानी में उबालें, जिससे कोशिकाएँ मर जाएँ और अभिक्रियाएँ रुक जाएँ। फिर पत्ती को ऐल्कोहॉल वाली परखनली में रखकर उसे गर्म पानी के बीकर में गर्म करें (सीधे लौ पर कभी नहीं, क्योंकि ऐल्कोहॉल ज्वलनशील है)। पर्णहरित घुलकर निकल जाता है और पत्ती सफ़ेद-सी हो जाती है। गुनगुने पानी में धोकर नरम करें और आयोडीन विलयन डालें। नीला-काला रंग मंड की उपस्थिति, यानी प्रकाश संश्लेषण, दिखाता है।

प्रकाश की आवश्यकता का प्रयोग

गमले के पौधे को लगभग 48 घंटे अंधेरे में रखें, ताकि पत्तियों का सारा मंड खर्च हो जाए (मंडरहित करना)। फिर एक पत्ती के कुछ भाग को दोनों ओर से काले कागज़ या पन्नी से ढककर क्लिप लगा दें और पौधे को कुछ घंटे धूप में रखें। आयोडीन परीक्षण करने पर ढका भाग भूरा-पीला रहता है और खुला भाग नीला-काला हो जाता है। निष्कर्ष: प्रकाश के बिना प्रकाश संश्लेषण नहीं होता।

पर्णहरित की आवश्यकता का प्रयोग: चितकबरी पत्ती

क्रोटन या चितकबरे मनी प्लांट जैसी पत्ती लें, जिसका कुछ भाग हरा और कुछ सफ़ेद या पीला हो। पौधे को मंडरहित करके धूप में रखें, पत्ती का चित्र बना लें, फिर आयोडीन परीक्षण करें। केवल जो भाग हरे थे वही नीले-काले होते हैं, सफ़ेद भाग नहीं। निष्कर्ष: पर्णहरित प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है। यह NCERT कक्षा 10 की गतिविधि है।

कार्बन डाइऑक्साइड की आवश्यकता: मोल का अर्ध-पत्ती प्रयोग

मंडरहित पौधे की एक पत्ती का आधा भाग एक बोतल में डालें, जिसमें पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH) रखा हो। KOH बोतल के अंदर की CO₂ सोख लेता है। कुछ घंटे धूप में रखने के बाद आयोडीन डालें: बोतल के अंदर वाला आधा भाग नीला-काला नहीं होता, बाहर वाला होता है। निष्कर्ष: CO₂ के बिना प्रकाश संश्लेषण नहीं होता। NCERT में यही विचार दो गमलों वाली गतिविधि से दिखाया गया है, जिसमें एक पौधे के पास KOH रखा जाता है।

ऑक्सीजन निकलने का प्रयोग (हाइड्रिला)

एक बीकर में पानी लेकर उसमें हाइड्रिला रखें, ऊपर उल्टी कीप और कीप की नली पर पानी से भरी उल्टी परखनली रखें। पानी में थोड़ा सोडियम बाइकार्बोनेट (खाने का सोडा) डालने से CO₂ मिलती रहती है। धूप में रखने पर बुलबुले उठकर परखनली के ऊपर गैस जमा करते हैं। इस गैस में सुलगती तीली डालने पर वह भभककर जल उठती है, इसलिए गैस ऑक्सीजन है। लैंप को दूर ले जाने पर हर मिनट निकलने वाले बुलबुले कम हो जाते हैं, सिमुलेशन में बिल्कुल यही दिखता है।

लैंप की दूरीप्रकाशदरप्रति मिनट बुलबुले
10 cm100.0 %21.042.0
15 cm44.4 %13.326.7
20 cm25.0 %7.515.0
30 cm11.1 %3.36.7
40 cm6.3 %1.93.8

C₃ और C₄ पौधे (कक्षा 11, NEET)

धान, गेहूँ, आलू, सोयाबीन जैसे अधिकांश पौधों में CO₂ स्थिरीकरण का पहला स्थायी उत्पाद 3-कार्बन वाला PGA है, इसलिए ये C₃ पौधे हैं। मक्का, गन्ना, ज्वार और कुछ घासों जैसे गर्म क्षेत्रों के पौधों में पहला स्थायी उत्पाद 4-कार्बन वाला ऑक्सैलोऐसीटिक अम्ल (OAA) है, इसलिए ये C₄ पौधे हैं। इनका पथ हैच-स्लैक पथ कहलाता है।

C₄ पौधों की पत्तियों में क्रैंज़ शारीरिकी होती है: संवहन बंडल के चारों ओर बड़ी पूल आच्छद कोशिकाओं की परत। पर्णमध्योतक में PEP कार्बोक्सिलेज़ CO₂ पकड़ता है और उसे पूल आच्छद कोशिकाओं में ले जाकर अधिक सांद्रता में छोड़ता है, जहाँ केल्विन चक्र चलता है। इससे प्रकाश श्वसन लगभग नहीं होता और गर्मी व तेज़ धूप में उत्पादन अधिक होता है। क़ीमत है अधिक ऊर्जा: प्रति ग्लूकोज़ C₃ में 18 ATP, C₄ में 30 ATP।

विशेषताC₃ पौधेC₄ पौधे
पहला स्थायी उत्पादPGA (3 कार्बन)OAA (4 कार्बन)
पहला CO₂ ग्राहीRuBPPEP
मुख्य एंज़ाइमरुबिस्कोPEP कार्बोक्सिलेज़, फिर रुबिस्को
क्रैंज़ शारीरिकीनहींहाँ
प्रकाश श्वसनअधिकलगभग नहीं
इष्टतम तापमानकम (लगभग 20–25 °C)अधिक (लगभग 30–40 °C)
प्रति ग्लूकोज़ ATP1830
उदाहरणधान, गेहूँ, आलू, सोयाबीनमक्का, गन्ना, ज्वार

हल किए गए प्रश्न

सभी प्रश्नों में C = 12, H = 1, O = 16 लिया गया है। सिमुलेशन की पत्ती का क्षेत्रफल 50 वर्ग सेंटीमीटर है।

प्रश्न 1: समीकरण के दोनों ओर का द्रव्यमान मिलाइए

6 अणु CO₂ = 6 × 44 = 264 g और 12 अणु जल = 12 × 18 = 216 g, कुल 480 g। दाईं ओर 1 अणु ग्लूकोज़ 180 g, 6 अणु O₂ = 6 × 32 = 192 g, 6 अणु जल = 108 g, कुल 480 g। दोनों ओर बराबर, अतः समीकरण द्रव्यमान संरक्षण मानता है।

प्रश्न 2: 90 g ग्लूकोज़ बनाने में कितनी CO₂ लगेगी

ग्लूकोज़ के मोल = 90 ÷ 180 = 0.5 मोल। 1 मोल ग्लूकोज़ में 6 मोल CO₂ लगती है, तो 3 मोल CO₂ = 3 × 44 = 132 g। साथ में 3 मोल O₂ = 96 g निकलेगी, जिसका आयतन STP पर 3 × 22.4 = 67.2 लीटर होगा। नेट जल की खपत 54 g होगी।

प्रश्न 3: सिमुलेशन की शुरुआती स्थिति में पत्ती एक घंटे में कितना ग्लूकोज़ बनाती है

शुरुआत में प्रकाश 60%, CO₂ 420 ppm, तापमान 25 °C। तीनों छतें: प्रकाश 18.0, CO₂ 21.0, तापमान 24.75। सबसे छोटी प्रकाश की है, इसलिए दर 18.0 µmol CO₂ m⁻² s⁻¹ और सीमाकारी कारक प्रकाश।

6 CO₂ से 1 ग्लूकोज़, इसलिए ग्लूकोज़ 18.0 ÷ 6 µmol m⁻² s⁻¹ की दर से बनता है। 50 cm² (= 0.005 m²) पत्ती और ग्लूकोज़ का मोलर द्रव्यमान 180 लेकर पत्ती हर सेकंड 2.7 µg, एक घंटे में 9.72 mg, और 10 घंटे की धूप वाले दिन में लगभग 97.2 mg ग्लूकोज़ बनाती है। उसी एक घंटे में 324 µmol यानी 10.37 mg ऑक्सीजन निकलती है।

ग्लूकोज़ (µg/s) = (दर ÷ 6) × 180 × पत्ती का क्षेत्रफल (m²)

प्रश्न 4: सीमाकारी कारक पहचानिए

पूरी धूप (प्रकाश 100%), CO₂ 420 ppm और 25 °C पर तीनों छतें: प्रकाश 30.0, CO₂ 21.0, तापमान 24.75। सबसे छोटी CO₂ की, इसलिए दर 21.0 और सीमाकारी कारक CO₂। अब प्रकाश और बढ़ाने से कोई लाभ नहीं।

CO₂ को 600 ppm करने पर उसकी छत 30.0 हो जाती है। अब सबसे छोटी तापमान की छत है, दर 24.75। तापमान 30 °C करने पर एंज़ाइम की छत 35.0 हो जाती है और दर 30.0; अब फिर प्रकाश सीमाकारी है। इसी कारण ग्रीनहाउस में प्रकाश, CO₂ और गर्मी तीनों एक साथ बढ़ाए जाते हैं।

प्रश्न 5: लैंप दूर करने पर बुलबुले कितने घटते हैं

प्रकाश की तीव्रता दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होती है। लैंप 10 cm दूर हो तो प्रकाश 100% मानें। 20 cm पर दूरी 2 गुना, इसलिए प्रकाश 4 गुना कम = 25%। 10 cm पर दर 21.0 (CO₂ सीमाकारी) और हर मिनट 42 बुलबुले। 20 cm पर दर 7.5 (प्रकाश सीमाकारी) और बुलबुले 15। दूरी दोगुनी हुई, पर बुलबुले आधे से भी बहुत ज़्यादा घट गए।

I ∝ 1/d²प्रति मिनट बुलबुले = दर × 2 (इस मॉडल में)

प्रश्न 6: तापमान 10 °C बढ़ने पर दर कितनी बढ़ती है

प्रकाश और CO₂ भरपूर हों तो एंज़ाइम की छत ही दर तय करती है। 15 °C पर छत 12.37, 25 °C पर 24.75। अनुपात 2.0, यानी 10 °C बढ़ने पर दर दोगुनी (Q₁₀ = 2)। पर 40 °C पर, इष्टतम से ऊपर, छत घटकर 19.44 रह जाती है।

प्रश्न 7: एक ग्लूकोज़ के लिए कितने ATP और NADPH

C₃ पथ में हर CO₂ पर 3 ATP और 2 NADPH। ग्लूकोज़ में 6 कार्बन हैं, इसलिए 6 × 3 = 18 ATP और 6 × 2 = 12 NADPH। C₄ पौधे हर CO₂ पर 5 ATP खर्च करते हैं, यानी प्रति ग्लूकोज़ 30 ATP, 12 अधिक; बदले में उनमें प्रकाश श्वसन से कार्बन की हानि नहीं होती। NEET में यह हिसाब अक्सर पूछा जाता है।

प्रश्न 8: ग्लूकोज़ में कितनी ऊर्जा जमा होती है

एक मोल ग्लूकोज़ में लगभग 2,870 kJ ऊर्जा संचित रहती है। 90 g ग्लूकोज़ = 0.5 मोल, इसलिए संचित ऊर्जा 0.5 × 2,870 = 1,435 kJ। सिमुलेशन की पत्ती एक घंटे में 9.72 mg ग्लूकोज़ बनाती है, जिसमें लगभग 155 J प्रकाश ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा के रूप में जमा होती है।

प्रकाश संश्लेषण और श्वसन में अंतर

दोनों प्रक्रियाएँ एक-दूसरे की उलटी हैं: एक के उत्पाद दूसरे के कच्चे माल हैं। पौधे दिन-रात श्वसन करते हैं, पर प्रकाश संश्लेषण केवल प्रकाश में। दिन में प्रकाश संश्लेषण श्वसन से बहुत तेज़ चलता है, इसलिए कुल मिलाकर पौधा ऑक्सीजन छोड़ता है।

आधारप्रकाश संश्लेषणश्वसन
कहाँकेवल हरी कोशिकाओं के हरितलवक मेंसभी जीवित कोशिकाओं में (कोशिकाद्रव्य और माइटोकॉन्ड्रिया)
कबकेवल प्रकाश मेंहर समय
कच्चा मालCO₂ और जलग्लूकोज़ और O₂
उत्पादग्लूकोज़ और O₂CO₂, जल और ऊर्जा (ATP)
ऊर्जासंचित होती हैमुक्त होती है
उपापचय का प्रकारउपचय (निर्माण)अपचय (विघटन)
शुष्क भारबढ़ता हैघटता है

प्रकाश संश्लेषण का महत्व

प्रकाश संश्लेषण न हो तो कुछ ही वर्षों में धरती की लगभग सभी खाद्य शृंखलाएँ टूट जाएँ। मुख्य बातें:

  • लगभग हर खाद्य शृंखला की शुरुआत: पौधे उत्पादक हैं, शाकाहारी उन्हें खाते हैं और मांसाहारी शाकाहारियों को। हमारा हर दाना, दाल और फल संचित धूप है।
  • वायुमंडल को ऑक्सीजन देता है और ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड का संतुलन बनाए रखता है।
  • हवा से CO₂ हटाकर वैश्विक तापन को धीमा करता है; वन और समुद्री शैवाल बड़े कार्बन भंडार हैं।
  • कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस करोड़ों वर्ष पहले के प्रकाश संश्लेषण में जमा सौर ऊर्जा हैं।
  • लकड़ी, कपास, जूट, रबर और कई दवाओं का कच्चा माल पौधों से आता है।
  • सूर्य की ऊर्जा को जीव जगत में उपयोगी रासायनिक ऊर्जा में बदलने का लगभग एकमात्र रास्ता।

आम गलतियाँ

उत्तर लिखने से पहले इस सूची पर एक नज़र डाल लें।

  • “अंधकार अभिक्रिया रात में होती है” लिखना गलत है। यह दिन में होती है; बस इसमें सीधे प्रकाश नहीं लगता।
  • “ऑक्सीजन CO₂ से आती है” लिखना गलत है। मुक्त ऑक्सीजन जल के प्रकाश-अपघटन से आती है।
  • दोनों समीकरण मिला देना, जैसे बाईं ओर 12H₂O लिखकर दाईं ओर 6H₂O भूल जाना।
  • “पौधे दिन में श्वसन नहीं करते” लिखना गलत है। श्वसन हर समय होता है; दिन में प्रकाश संश्लेषण उससे आगे निकल जाता है।
  • यह मान लेना कि कोई भी कारक बढ़ाने से दर बढ़ेगी। केवल सीमाकारी कारक बढ़ाने से बढ़ती है।
  • मंड परीक्षण में ऐल्कोहॉल को सीधे लौ पर गर्म करना। हमेशा जल-ऊष्मक (वॉटर बाथ) में गर्म करें।
  • “पत्ती हरी है क्योंकि वह हरा प्रकाश सोखती है” लिखना। वह हरा प्रकाश परावर्तित करती है।

असल ज़िंदगी में प्रकाश संश्लेषण

ठंडे देशों में किसान ग्रीनहाउस में टमाटर और खीरा उगाते हैं। अंदर लैंप से प्रकाश, हीटर से गर्मी और सिलेंडर से CO₂ छोड़कर उसे लगभग 1000 ppm तक बढ़ाया जाता है। वे ब्लैकमैन के नियम से ही तय करते हैं कि कौन-सा कारक सीमाकारी है, और केवल उसी पर पैसा खर्च करते हैं।

मछलीघर में जलीय पौधे दिन में मछलियों के लिए ऑक्सीजन बढ़ाते हैं। पर रात में प्रकाश न होने पर पौधे भी ऑक्सीजन खर्च करते हैं, इसलिए बहुत ज़्यादा पौधे और मछलियाँ साथ हों तो सुबह तक ऑक्सीजन कम पड़ सकती है और मछलियाँ सतह पर आकर मुँह खोलती हैं। शैवाल से भरे तालाब में इसी कारण सुबह-सुबह मछलियाँ मर सकती हैं।

गर्मियों की दोपहर में पानी की कमी होने पर पत्तियों के रंध्र बंद हो जाते हैं, CO₂ अंदर नहीं जा पाती और प्रकाश संश्लेषण घट जाता है। इसलिए सिंचाई पौधे को दोहरा लाभ देती है: पानी भी और परोक्ष रूप से CO₂ भी। पंजाब-हरियाणा में धान (C₃) और मक्का (C₄) की तुलना इसी अध्याय से समझ आती है।

वैज्ञानिक अब “कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण” पर काम कर रहे हैं, जिसमें सूर्य के प्रकाश से जल तोड़कर हाइड्रोजन ईंधन बनाया जाता है। धान में C₄ गुण डालने पर भी शोध चल रहा है, ताकि उतनी ही ज़मीन से ज़्यादा अनाज मिले।

परीक्षा कॉर्नर: CBSE बोर्ड, JEE और NEET

CBSE कक्षा 10 में “जैव प्रक्रम” अध्याय से प्रकाश संश्लेषण का समीकरण, तीन घटनाएँ, रंध्र का खुलना-बंद होना और पर्णहरित/CO₂ की आवश्यकता वाले प्रयोग अक्सर 2 से 5 अंकों के प्रश्नों में आते हैं। कक्षा 7 में “पौधों में पोषण” से इसकी नींव पड़ती है। कक्षा 11 के “उच्च पादपों में प्रकाश संश्लेषण” अध्याय से NEET में हर साल कुछ प्रश्न आते हैं: Z-योजना, केल्विन चक्र के चरण, C₃ बनाम C₄, क्रैंज़ शारीरिकी, प्रकाश श्वसन और सीमाकारी कारक। JEE में यह विषय नहीं आता, पर मोल और द्रव्यमान वाले प्रश्न (जैसे प्रश्न 2) रसायन के स्टॉइकियोमेट्री अभ्यास के लिए अच्छे हैं।

एक नमूना बोर्ड प्रश्न

एक छात्र ने गमले के पौधे को दो दिन अंधेरे में रखा, फिर एक पत्ती के बीच में काला कागज़ लपेटकर पौधे को दिन भर धूप में रखा। शाम को पत्ती का आयोडीन परीक्षण किया।

  • पौधे को दो दिन अंधेरे में क्यों रखा गया? (उत्तर: पत्तियों को मंडरहित करने के लिए)
  • पत्ती का कौन-सा भाग नीला-काला होगा और क्यों?
  • पत्ती को ऐल्कोहॉल में उबालना क्यों ज़रूरी है?
  • इस प्रयोग से क्या निष्कर्ष निकलता है?

NEET के लिए झटपट तथ्य

इन्हें याद रखें, कुछ अंक पक्के हो जाएँगे।

  • पर्णहरित का केंद्रीय परमाणु: मैग्नीशियम
  • प्रकाश अभिक्रिया का स्थान: ग्रेना/थाइलेकॉइड; केल्विन चक्र का स्थान: स्ट्रोमा
  • मुक्त O₂ का स्रोत: जल (रूबेन और कामेन)
  • C₃ चक्र का प्राथमिक CO₂ ग्राही: RuBP; एंज़ाइम: रुबिस्को
  • C₄ पौधों में प्राथमिक CO₂ ग्राही: PEP; पहला उत्पाद: OAA
  • सीमाकारी कारकों का नियम: ब्लैकमैन, 1905
  • PS I का अभिक्रिया केंद्र P700, PS II का P680

रिवीज़न: एक नज़र में सारांश

परीक्षा से पहली रात ये पंक्तियाँ पढ़ लें।

  • परिभाषा: प्रकाश और पर्णहरित की मदद से CO₂ और जल से ग्लूकोज़ बनाना, O₂ मुक्त होना।
  • पूरा समीकरण: 6CO₂ + 12H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O
  • प्रकाश अभिक्रिया (ग्रेना): जल का प्रकाश-अपघटन, O₂ मुक्त, ATP और NADPH बनना।
  • अप्रकाशी अभिक्रिया (स्ट्रोमा): केल्विन चक्र, CO₂ स्थिरीकरण, ग्लूकोज़ बनना।
  • एक ग्लूकोज़ में 18 ATP और 12 NADPH (C₃)।
  • बाह्य कारक: प्रकाश, CO₂, तापमान, जल; आंतरिक: पर्णहरित, पत्ती की आयु, रंध्र, जमा शर्करा।
  • सबसे कम मात्रा वाला कारक दर तय करता है (ब्लैकमैन)।
  • प्रयोग: आयोडीन से नीला-काला = मंड; काला कागज़ = प्रकाश, चितकबरी पत्ती = पर्णहरित, KOH = CO₂।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं?

वह प्रक्रिया जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में पर्णहरित की सहायता से कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज़ बनाते हैं और ऑक्सीजन मुक्त करते हैं, प्रकाश संश्लेषण कहलाती है।

प्रकाश संश्लेषण का सूत्र क्या है?

पूरा समीकरण 6CO₂ + 12H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ + 6H₂O है (सूर्य का प्रकाश और पर्णहरित की उपस्थिति में)। सरल रूप 6CO₂ + 6H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ है।

प्रकाश संश्लेषण कहाँ होता है?

पत्ती की पर्णमध्योतक कोशिकाओं के हरितलवक में। प्रकाश अभिक्रिया थाइलेकॉइड या ग्रेना में और अप्रकाशी अभिक्रिया (केल्विन चक्र) स्ट्रोमा में होती है।

प्रकाश संश्लेषण में निकलने वाली ऑक्सीजन कहाँ से आती है?

जल से। प्रकाश अभिक्रिया में जल के प्रकाश-अपघटन (2H₂O → 4H⁺ + 4e⁻ + O₂) से ऑक्सीजन मुक्त होती है। रूबेन और कामेन ने 1941 में ¹⁸O समस्थानिक से यह सिद्ध किया।

प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारक कौन से हैं?

बाह्य कारक: प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड, तापमान और जल। आंतरिक कारक: पर्णहरित की मात्रा, पत्तियों की संख्या, आयु और संरचना, रंध्र और जमा शर्करा।

सीमाकारी कारक का नियम क्या है?

ब्लैकमैन (1905) के अनुसार, यदि कोई प्रक्रम कई कारकों पर निर्भर है तो उसकी दर उस कारक से तय होती है जो सबसे कम मात्रा में है। उसी कारक को बढ़ाने पर दर बढ़ती है।

केल्विन चक्र क्या है?

स्ट्रोमा में होने वाला चक्र जिसमें रुबिस्को एंज़ाइम CO₂ को RuBP से जोड़ता है और ATP व NADPH खर्च करके शर्करा बनती है। इसके तीन चरण हैं: कार्बोक्सिलीकरण, अपचयन और RuBP का पुनर्जनन।

क्या अप्रकाशी अभिक्रिया रात में होती है?

नहीं। यह दिन में प्रकाश अभिक्रिया के साथ चलती है। इसे अप्रकाशी इसलिए कहते हैं क्योंकि इसमें सीधे प्रकाश नहीं लगता, पर प्रकाश अभिक्रिया के ATP और NADPH के बिना यह नहीं चल सकती।

प्रकाश संश्लेषण के लिए इष्टतम तापमान कितना है?

पौधे के अनुसार अलग, आमतौर पर लगभग 20 से 35 °C। C₄ पौधों का इष्टतम तापमान C₃ पौधों से अधिक होता है। बहुत अधिक गर्मी में एंज़ाइम विकृत होकर दर तेज़ी से गिरा देते हैं।

प्रकाश संश्लेषण और श्वसन में मुख्य अंतर क्या है?

प्रकाश संश्लेषण केवल हरी कोशिकाओं में प्रकाश में होता है और CO₂ व जल से ग्लूकोज़ बनाकर ऊर्जा संचित करता है। श्वसन सभी जीवित कोशिकाओं में हर समय होता है और ग्लूकोज़ तोड़कर ऊर्जा मुक्त करता है।

इस विषय पर और पढ़ाई

एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।

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