मुँह और मुखगुहा: दाँत भोजन को चूर्ण कर रहे हैं, और लार में मौजूद लार एमाइलेज़ स्टार्च को तोड़ना शुरू कर देता है।
भोजन बोलसभोजन का प्रकार बदलकर देखें कि हर अंग में क्या अलग होता हैनियंत्रण
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किसी भी अंग पर जाएँ
मापन
- वर्तमान अंग
- मुँह और मुखगुहा
- सक्रिय रस/एंजाइम
- लार: लार एमाइलेज़
- परिवर्तन
- स्टार्च → माल्टोज़ (आंशिक)
- प्रगति
- 0%
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- "मुँह" से चलाना शुरू करें: दाँत भोजन चूर्ण करते हैं और बोलस बनता है।
- भोजन का प्रकार बदलें (चावल, अंडा/मछली, घी) और हर बार एक ही अंग पर रोककर कैप्शन और "परिवर्तन" रीडिंग की तुलना करें।
- ग्रासनली पर रोकें: पेरिस्टैल्सिस के छल्लों को नली के साथ खिसकते देखें।
- आमाशय पर रोकें: मंथन का चाप देखें, और चावल चुनने पर एमाइलेज़ के बंद होने की रीडिंग देखें।
- "विलाई क्लोज़-अप" पर जाएँ: घी चुनने पर कण बीच के लैक्टियल में जाते हैं; चावल या अंडा चुनने पर दोनों ओर की रक्त कोशिकाओं में।
- पूरी यात्रा एक बार चलाकर "वर्तमान अंग", "सक्रिय रस/एंजाइम" और "परिवर्तन" तीनों को साथ पढ़ें।
चावल खाने से थोड़ी देर पेट भरता है, घी में तला खाना घंटों भारी क्यों लगता है
दोपहर में चावल खाने के दो घंटे में फिर भूख लग जाती है, पर उतनी ही मात्रा में घी में तला खाना खाने से देर तक पेट भरा लगता है। दोनों ही तो "भोजन" हैं, फिर शरीर इनके साथ अलग-अलग व्यवहार क्यों करता है?
पेट से गुड़गुड़ की आवाज़ सुनी है? यह आमाशय और आंत की पेशियों के भोजन और फँसी हवा पर काम करने की आवाज़ है, जिसे पेरिस्टैल्सिस कहते हैं। भोजन मुँह में जाने से लेकर बाहर निकलने तक यह पेशीय लहर कभी पूरी तरह नहीं रुकती।
असली सवाल यह है: चावल का स्टार्च, अंडे-मछली का प्रोटीन और घी की वसा — तीन पूरी तरह अलग अणु हैं, फिर भी शरीर इन सबको एक ही नली से गुज़ारता है। हर एक को अलग जगह अलग एंजाइम से कैसे तोड़ता है? इस पृष्ठ के सिमुलेशन में भोजन का प्रकार बदलकर इसे स्वयं देखें।
शुरुआत से समझें: पाचन किसे कहते हैं और क्यों ज़रूरी है
भोजन के स्टार्च, प्रोटीन और वसा इतने बड़े अणु हैं कि वे आंत की दीवार पार करके सीधे रक्त में नहीं जा सकते। इन बड़े अणुओं को छोटे, अवशोषण योग्य अणुओं में तोड़ने की प्रक्रिया ही पाचन है। जो अंग-तंत्र यह काम करता है, उसे पाचन तंत्र कहते हैं।
पाचन दो प्रकार का होता है: यांत्रिक और रासायनिक। दाँतों से चबाना या आमाशय में मंथन यांत्रिक पाचन है—यह भोजन को छोटे टुकड़ों में तोड़ता है, पर अणु की संरचना नहीं बदलता। एंजाइम की मदद से बड़े अणु को छोटे अणु में तोड़ना रासायनिक पाचन है—असली रासायनिक बदलाव यहीं होता है।
पाचन तंत्र की मुख्य नली मुँह से शुरू होकर ग्रासनली, आमाशय, छोटी आँत और बड़ी आँत से गुज़रकर मलद्वार पर समाप्त होती है। इसके साथ सहायक ग्रंथियाँ हैं—लार ग्रंथि, यकृत और अग्न्याशय—जो पाचक रस बनाकर नली में भेजती हैं। सिमुलेशन के छह पड़ाव (मुँह, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आँत, विलाई अवशोषण, बड़ी आँत) यह पूरी यात्रा दिखाते हैं।
बोलस ग्रासनली से पेरिस्टैल्सिस में गुज़रता है; यदि ग्रासनली की लंबाई लगभग 25 cm और पेरिस्टैल्सिस लहर की गति लगभग 5 cm/s हो, तो आमाशय तक पहुँचने का समय लगभग 25 ÷ 5 = 5 सेकंड है—निगलने के कुछ सेकंड में ही भोजन आमाशय में पहुँच जाता है।
पाचन तंत्र के महत्वपूर्ण शब्द
पड़ावों में जाने से पहले शब्दावली स्पष्ट कर लें — परीक्षा के परिभाषा वाले प्रश्न यहीं से आते हैं।
| शब्द | सरल भाषा में अर्थ |
|---|---|
| बोलस | चबाए और लार में मिले भोजन का नरम, गोल पिंड, जो निगला जाता है |
| पेरिस्टैल्सिस | नलीनुमा अंग की पेशियों के बारी-बारी संकुचन-विस्तार की लहर, जो भोजन को आगे धकेलती है |
| एंजाइम | शरीर में बना प्रोटीन, जो एक विशेष रासायनिक अभिक्रिया को तेज़ करता है, पर स्वयं नहीं बदलता |
| पाचक रस | ग्रंथि से निकला तरल, जिसमें एंजाइम या कोई अन्य सहायक पदार्थ (जैसे HCl) होता है |
| इमल्सीकरण | पित्त द्वारा वसा की बड़ी बूँदों को कई सूक्ष्म बूँदों में तोड़ना, ताकि लाइपेज़ तेज़ी से काम कर सके |
| विलाई | छोटी आँत की दीवार पर अंगुली जैसी उभार, जो अवशोषण का क्षेत्रफल कई गुना बढ़ा देती हैं |
| लैक्टियल | हर विलाई के बीच की लसिका वाहिका, जो केवल वसा-पाचन के उत्पाद अवशोषित करती है |
| अवशोषण | पचे हुए छोटे अणुओं का आंत की दीवार पार करके रक्त या लसिका में जाना |
| मल | अपाचित भाग और आंत के जीवाणुओं से बड़ी आँत में बना ठोस अपशिष्ट |
छह अंग, छह अलग काम
हर अंग पर भोजन थोड़ा-थोड़ा बदलता है। आओ सिमुलेशन के छह पड़ावों को क्रम से देखें—और नोट करें कि भोजन का प्रकार बदलने पर हर एक पर क्या अलग होता है।
मुँह: चूर्णन, और स्टार्च की शुरुआत
दाँत भोजन को यांत्रिक रूप से चूर्ण करते हैं, और जीभ इसे लार में मिलाकर बोलस बनाती है। लार ग्रंथि से आया लार एमाइलेज़ यहीं स्टार्च तोड़ना शुरू कर देता है—इसलिए चावल का एक कौर देर तक चबाने पर थोड़ा मीठा लगने लगता है।
प्रोटीन या वसा के लिए मुँह में कोई एंजाइम नहीं है, इसलिए अंडा/मछली या घी चुनने पर इस पड़ाव पर केवल यांत्रिक चूर्णन होता है, कोई रासायनिक बदलाव नहीं।
ग्रासनली: केवल परिवहन, पेरिस्टैल्सिस से
ग्रासनली में कोई एंजाइम नहीं है—यहाँ काम केवल एक है, बोलस को पेरिस्टैल्सिस लहर से आमाशय की ओर धकेलना। तीनों भोजन प्रकारों के लिए यह पड़ाव एक जैसा दिखता है, क्योंकि यहाँ कोई रासायनिक पाचन नहीं होता, केवल परिवहन।
आमाशय: प्रोटीन की असली शुरुआत
आमाशय की ग्रंथियों से HCl और पेप्सिन निकलते हैं, जो प्रोटीन को छोटे पेप्टोन और पॉलीपेप्टाइड में तोड़ना शुरू करते हैं। इस तेज़ अम्लता (लगभग pH 2) से मुँह से आया लार एमाइलेज़ निष्क्रिय हो जाता है, इसलिए चावल चुनने पर स्टार्च का पाचन यहाँ रुक जाता है। घी चुनने पर तेज़ मंथन वसा को छोटी बूँदों में तोड़ता है, पर आमाशय का लाइपेज़ बहुत कम काम करता है, इसलिए असली वसा-पाचन अभी आगे है।
छोटी आँत: जहाँ तीनों पोषक तत्व पूरे होते हैं
यहाँ यकृत का पित्त और अग्न्याशय रस दोनों आते हैं। पित्त वसा को सूक्ष्म बूँदों में इमल्सीफाई करता है, फिर अग्न्याशय का लाइपेज़ उन्हें फैटी अम्ल और ग्लिसरॉल में तोड़ता है। अग्न्याशय का एमाइलेज़ बाकी स्टार्च को माल्टोज़ में बदलता है, और ट्रिप्सिन पॉलीपेप्टाइड को छोटा करता है; दीवार के अपने माल्टेज़ और पेप्टिडेज़ अंतिम काम पूरा करके ग्लूकोज़ और अमीनो अम्ल बनाते हैं।
तीनों भोजन प्रकारों के लिए छोटी आँत सबसे व्यस्त अंग है—यहीं हर पोषक तत्व का पाचन उसके अंतिम, अवशोषण योग्य रूप में पूरा होता है।
विलाई: जहाँ असली अवशोषण होता है
छोटी आँत की दीवार पर लाखों विलाई होती हैं, हर एक में रक्त कोशिकाओं का जाल और बीच में एक लैक्टियल। ग्लूकोज़ और अमीनो अम्ल विलाई की कोशिकाओं से होकर सीधे रक्त कोशिकाओं में जाते हैं, पर फैटी अम्ल और ग्लिसरॉल रक्त को छोड़कर लैक्टियल से लसिका तंत्र में प्रवेश करते हैं—घी चुनने पर सिमुलेशन में यही एक अंतर अलग दिखता है।
बड़ी आँत: पानी अवशोषण, अपशिष्ट निर्माण
जो छोटी आँत में अवशोषित नहीं हुआ, वह यहाँ आता है। अब मुख्य काम पानी और कुछ लवण अवशोषित करना है, जबकि आंत के जीवाणु अपाचित रेशे पर काम करके कुछ विटामिन (जैसे विटामिन K) बनाते हैं। बाकी हिस्सा धीरे-धीरे ठोस होकर मल बन जाता है।
तीन भोजन, तीन अलग यात्राएँ
सिमुलेशन में भोजन का प्रकार बदलने पर एक ही रास्ते पर अलग कहानी दिखती है, क्योंकि हर पोषक तत्व के अपने एंजाइम अपनी जगह काम करते हैं।
- स्टार्च (चावल): कुल 2 अंगों में रासायनिक रूप से पचता है (मुँह और छोटी आँत); आमाशय में रुक जाता है।
- प्रोटीन (अंडा/मछली): कुल 2 अंगों में रासायनिक रूप से पचता है (आमाशय और छोटी आँत); मुँह में कुछ नहीं होता।
- वसा (घी): केवल 1 अंग में रासायनिक रूप से पचती है (छोटी आँत), और वह भी पित्त से इमल्सीकृत होने के बाद।
- अवशोषण का रास्ता भी अलग है: स्टार्च और प्रोटीन के अंतिम उत्पाद रक्त कोशिकाओं में जाते हैं, जबकि वसा का अंतिम उत्पाद लैक्टियल से लसिका में जाता है।
विलाई और अवशोषण का क्षेत्रफल
अगर छोटी आँत भीतर से एक सामान्य, सपाट नली होती, तो उसका अवशोषण क्षेत्रफल केवल लगभग 0.5 वर्ग मीटर होता। पर विलाई और उनकी सतह की और भी छोटी माइक्रोविलाई मिलकर यह क्षेत्रफल लगभग 400 गुना बढ़ा देती हैं, इसलिए असली अवशोषण क्षेत्रफल लगभग 0.5 × 400 = 200 वर्ग मीटर होता है—एक छोटे बैडमिंटन कोर्ट के बराबर।
इतने बड़े क्षेत्रफल के बिना शरीर रोज़ के सारे ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल और फैटी अम्ल को इतनी तेज़ी से अवशोषित नहीं कर पाता।
अवशोषण क्षेत्रफल ≈ सपाट क्षेत्रफल × विलाई गुणकविलाई और माइक्रोविलाई मिलकर सतह कई गुना बढ़ाती हैं
पाचक रसों की एक नज़र में सारणी
कौन-सी ग्रंथि कौन-सा रस बनाती है, यह भूल जाना बहुत सामान्य गलती है—यह सारणी देखने से आसान हो जाता है।
| रस | स्रोत | मुख्य घटक | काम |
|---|---|---|---|
| लार | लार ग्रंथि | लार एमाइलेज़ | स्टार्च का पहला विघटन शुरू करता है |
| जठर रस | आमाशय की दीवार | HCl, पेप्सिन | प्रोटीन तोड़ता है, कीटाणु मारता है |
| पित्त | यकृत (संग्रह: पित्ताशय) | पित्त लवण (एंजाइम नहीं) | वसा को इमल्सीफाई करता है |
| अग्न्याशय रस | अग्न्याशय | एमाइलेज़, ट्रिप्सिन, लाइपेज़ | तीनों पोषक तत्वों का मुख्य पाचन |
| आंत्र रस | छोटी आँत की दीवार | माल्टेज़, पेप्टिडेज़ | सबसे छोटे अणुओं में बदलने का अंतिम काम |
सिमुलेशन में स्वयं करके देखें
हर बार पहले अनुमान लगाएँ, फिर चलाकर मिलाएँ।
- एक ही अंग पर रोककर तीनों भोजन के कैप्शन बारी-बारी पढ़ें: किस अंग पर तीनों एक ही बात कहते हैं, और कहाँ पूरी तरह अलग?
- आमाशय में चावल चुनकर देखें कि "सक्रिय रस/एंजाइम" रीडिंग में एमाइलेज़ के निष्क्रिय होने की बात लिखी है या नहीं।
- विलाई क्लोज़-अप में घी चुनने पर कण बीच के लैक्टियल में जाते हैं, और चावल/अंडा चुनने पर दोनों ओर की रक्त कोशिकाओं में—रंगीन बिंदुओं का पीछा करें।
- ग्रासनली के पड़ाव पर पेरिस्टैल्सिस के छल्ले किस दिशा में खिसकते हैं, देखें—मुँह से आमाशय की ओर ही, उल्टा नहीं।
- पूरी यात्रा 0.5× गति पर चलाकर देखें कि "परिवर्तन" रीडिंग में डैश (—) किन-किन अंगों पर आता है, उसकी एक सूची बनाएँ।
हल किए गए प्रश्न, चरण-दर-चरण
पाचन तंत्र के प्रश्न ज़्यादातर अनुपात और योग के होते हैं, सामान्य और बहुचर्चित अनुमानित आँकड़ों से।
प्रश्न 1: ग्रासनली पार करने का समय
यदि ग्रासनली लगभग 25 cm लंबी है और पेरिस्टैल्सिस लहर लगभग 5 cm/s की गति से चलती है, तो समय = दूरी ÷ गति = 25 ÷ 5 = 5 सेकंड।
प्रश्न 2: कौन-सा पोषक तत्व कितने अंगों में पचता है
सिमुलेशन के अपने आँकड़ों से स्टार्च 2 अंगों में (मुँह और छोटी आँत), प्रोटीन 2 अंगों में (आमाशय और छोटी आँत), और वसा केवल 1 अंग में (छोटी आँत) रासायनिक रूप से पचती है।
प्रश्न 3: आमाशय में रहने के समय का अनुपात
वसा आमाशय में औसतन लगभग 6 घंटे रहती है, स्टार्च लगभग 2 घंटे। अनुपात = 6 ÷ 2 = 3, यानी वसा स्टार्च से लगभग 3 गुना अधिक समय रहती है।
प्रश्न 4: आमाशय और छोटी आँत की अम्लता का अंतर
आमाशय का pH लगभग 2 है; पित्त और अग्न्याशय रस मिलने के बाद छोटी आँत का pH लगभग 7 हो जाता है। अंतर = 7 − 2 = 5 इकाई; हर pH इकाई पर H⁺ सांद्रता 10 गुना बदलती है, इसलिए अनुपात = 10^5 = 1,00,000 गुना।
प्रश्न 5: छोटी और बड़ी आँत की लंबाई का अनुपात
छोटी आँत लगभग 6 मीटर लंबी है, बड़ी आँत लगभग 2 मीटर। अनुपात = 6 ÷ 2 = 4, यानी "छोटी" आँत असल में "बड़ी" आँत से 4 गुना लंबी है—नाम लंबाई नहीं, मोटाई बताते हैं।
प्रश्न 6: रोज़ कुल कितना पाचक रस निकलता है
लार लगभग 1.2 L, जठर रस लगभग 2.5 L, पित्त लगभग 0.8 L, अग्न्याशय रस लगभग 1.5 L और आंत्र रस लगभग 1.8 L। कुल = 1.2 + 2.5 + 0.8 + 1.5 + 1.8 = 7.8 लीटर प्रतिदिन।
प्रश्न 7: मुँह से बड़ी आँत तक कुल समय
आमाशय में लगभग 3 घंटे, छोटी आँत में लगभग 5 घंटे और बड़ी आँत में लगभग 20 घंटे—कुल = 3 + 5 + 20 = 28 घंटे, मुँह और ग्रासनली के कुछ सेकंड इसमें शामिल नहीं हैं।
प्रश्न 8: विलाई अवशोषण क्षेत्रफल कितना बढ़ाती हैं
सपाट नली का क्षेत्रफल लगभग 0.5 वर्ग मीटर होता; विलाई और माइक्रोविलाई मिलकर इसे लगभग 400 गुना बढ़ाकर 0.5 × 400 = 200 वर्ग मीटर कर देती हैं।
वे गलतियाँ जो लगभग सभी करते हैं
इन गलतियों से बचकर पाचन तंत्र के प्रश्नों में नंबर कटने से बचाया जा सकता है।
- यह मानना कि हर पोषक तत्व का पाचन आमाशय में पूरा हो जाता है। आमाशय मुख्यतः प्रोटीन पचाता है; स्टार्च का पाचन तो वहाँ रुक जाता है।
- यह मानना कि हर पोषक तत्व रक्त में अवशोषित होता है। फैटी अम्ल और ग्लिसरॉल रक्त को छोड़कर लैक्टियल से लसिका में जाते हैं।
- पित्त को एंजाइम समझना। पित्त में कोई एंजाइम नहीं है; यह केवल वसा को छोटी बूँदों में इमल्सीफाई करके लाइपेज़ का काम आसान करता है।
- यांत्रिक और रासायनिक पाचन को एक ही चीज़ समझना। चबाना या मंथन केवल आकार छोटा करता है; अणु की संरचना केवल एंजाइम बदलते हैं।
- यह मानना कि बड़ी आँत का मुख्य काम पाचन है। इसका असली काम पानी अवशोषित करना और मल बनाना है; यहाँ कोई बड़ा एंजाइमेटिक पाचन नहीं होता।
असल ज़िंदगी में पाचन तंत्र का ज्ञान
पाचन का यह ज्ञान केवल परीक्षा के लिए नहीं है—यह अपने खाने-पीने और पेट की सामान्य समस्याओं को समझने में भी काम आता है।
- एंटासिड गोलियाँ: आमाशय की अतिरिक्त अम्लता को बेअसर करके जलन कम करती हैं, क्योंकि यह HCl का pH बढ़ा देती हैं।
- ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट (ORS): दस्त में छोटी और बड़ी आँत की पानी-लवण अवशोषित करने की क्षमता घट जाती है; ORS का ग्लूकोज़-नमक मिश्रण अवशोषण फिर आसान बना देता है।
- लैक्टोज़ असहनशीलता: बड़े होने पर कई लोगों की छोटी आँत में लैक्टेज़ एंजाइम कम हो जाता है, इसलिए दूध का लैक्टोज़ बिना पचे गैस और पेट फूलने का कारण बनता है।
- बैरिएट्रिक सर्जरी: अत्यधिक मोटापे में आमाशय का आकार छोटा किया जाता है, जिससे कम भोजन में ही पेट भरा लगे और पाचन तंत्र में गति धीमी हो जाए।
- प्रोबायोटिक दही: बड़ी आँत के लाभदायक जीवाणुओं की संख्या बढ़ाकर पाचन में मदद करता है और कुछ विटामिन बनाने में सहायक होता है।
परीक्षा कोना: CBSE और NEET
CBSE कक्षा 10 की "जैव प्रक्रम" (Life Processes) इकाई में पाचन तंत्र नियमित आता है, और NEET में यह शरीर-क्रिया विज्ञान की नींव है। परिभाषा प्रश्नों में अंग और एंजाइम के नाम, लघु-उत्तरीय प्रश्नों में "पित्त एंजाइम क्यों नहीं है" या "बड़ी आँत का मुख्य काम क्या है", और संख्यात्मक प्रश्नों में ऊपर के आँकड़ों पर आधारित हिसाब आता है।
एक हल किया गया परीक्षा-जैसा प्रश्न
परिदृश्य: रफ़ी दोपहर में चावल, मछली और घी में बना सालन खाता है। निगलने के लगभग 5 सेकंड में ही भोजन उसके आमाशय में पहुँच जाता है।
(क) पेरिस्टैल्सिस की परिभाषा दें। (ख) आमाशय में स्टार्च का पाचन क्यों रुक जाता है? (ग) घी की वसा छोटी आँत में कैसे पचती है, समझाएँ। (घ) कथन का मूल्यांकन करें: "वसा-पाचन के अंतिम उत्पाद रक्त में अवशोषित होते हैं, लसिका में नहीं।"
(घ) का उत्तर: हर विलाई के बीच का लैक्टियल केवल फैटी अम्ल और ग्लिसरॉल अवशोषित करके लसिका तंत्र में भेजता है, जबकि ग्लूकोज़ और अमीनो अम्ल दोनों ओर की रक्त कोशिकाओं में जाते हैं—इसलिए कथन गलत है।
दोहराव: अंतिम समय का सारांश
परीक्षा से पहले केवल यह सूची और पाचक रसों की सारणी एक बार देख लेना पर्याप्त है।
- पाचन = बड़े अणु तोड़कर छोटे, अवशोषण योग्य अणु बनाना; यांत्रिक (आकार) और रासायनिक (एंजाइम) दो प्रकार हैं।
- मुँह: स्टार्च की शुरुआत (एमाइलेज़)। ग्रासनली: केवल परिवहन (पेरिस्टैल्सिस)। आमाशय: प्रोटीन की शुरुआत (HCl + पेप्सिन)।
- छोटी आँत: तीनों पोषक तत्वों का मुख्य पाचन (पित्त + अग्न्याशय रस + आंत्र रस)। बड़ी आँत: पानी अवशोषण और मल निर्माण।
- विलाई: ग्लूकोज़ और अमीनो अम्ल रक्त कोशिकाओं में; फैटी अम्ल और ग्लिसरॉल लैक्टियल से लसिका में।
- मुख्य अनुमानित आँकड़े: pH अंतर से H⁺ अनुपात 1,00,000, प्रतिदिन पाचक रस लगभग 7.8 L, विलाई क्षेत्रफल लगभग 400 गुना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पाचन किसे कहते हैं?
भोजन के बड़े अणुओं (स्टार्च, प्रोटीन, वसा) को यांत्रिक और रासायनिक प्रक्रिया से तोड़कर छोटे, रक्त में अवशोषित होने योग्य अणुओं में बदलने की प्रक्रिया को पाचन कहते हैं।
पाचन तंत्र के मुख्य अंग कौन-कौन से हैं?
मुँह, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आँत और बड़ी आँत मुख्य नली बनाते हैं, जिनके साथ सहायक ग्रंथियाँ—लार ग्रंथि, यकृत और अग्न्याशय—जुड़ी होती हैं।
पेरिस्टैल्सिस क्या है?
नलीनुमा अंग की पेशियों के बारी-बारी संकुचन-विस्तार की लहर को पेरिस्टैल्सिस कहते हैं, जो भोजन को मुँह से मलद्वार की ओर धकेलती है।
मुँह में कौन-सा एंजाइम काम करता है?
लार ग्रंथि से आया लार एमाइलेज़ स्टार्च तोड़ना शुरू करता है; प्रोटीन या वसा के लिए मुँह में कोई एंजाइम नहीं है।
आमाशय में स्टार्च का पाचन क्यों रुक जाता है?
आमाशय के HCl की तेज़ अम्लता से लार एमाइलेज़ निष्क्रिय हो जाता है, इसलिए स्टार्च का रासायनिक पाचन यहाँ कुछ समय के लिए रुक जाता है।
क्या पित्त एक एंजाइम है?
नहीं। पित्त में कोई एंजाइम नहीं है; यह केवल वसा को इमल्सीकरण से छोटी बूँदों में तोड़कर अग्न्याशय के लाइपेज़ का काम आसान करता है।
विलाई क्या काम करती हैं?
छोटी आँत की दीवार पर अंगुली जैसी विलाई अवशोषण का क्षेत्रफल कई गुना बढ़ा देती हैं, और हर एक की रक्त कोशिकाएँ व लैक्टियल पचे हुए पोषक तत्व अवशोषित करते हैं।
वसा रक्त में अवशोषित क्यों नहीं होती?
फैटी अम्ल और ग्लिसरॉल हर विलाई के बीच के लैक्टियल से लसिका तंत्र में प्रवेश करते हैं, रक्त कोशिकाओं में नहीं; बाद में लसिका रक्त में मिल जाती है।
बड़ी आँत का मुख्य काम क्या है?
बचा हुआ पानी और कुछ लवण अवशोषित करना, आंत के जीवाणुओं की मदद से कुछ विटामिन बनाना, और अपाचित भाग को मल के रूप में जमा करना।
तीन प्रकार के भोजन का पाचन रास्ता कैसे अलग है?
स्टार्च मुँह और छोटी आँत में, प्रोटीन आमाशय और छोटी आँत में, और वसा केवल छोटी आँत में रासायनिक रूप से पचती है; वसा के अवशोषण का रास्ता भी अलग है (लसिका, रक्त नहीं)।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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SSC Biology: syllabus and preparation
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रसायन विज्ञान
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
रसायन विज्ञान
गैस नियम: बॉयल, चार्ल्स, गे-लुसाक, आवोगाद्रो और PV = nRT
रसायन विज्ञान
आयनिक बंध कैसे बनता है
रसायन विज्ञान
वैद्युत अपघटन और फैराडे के नियम
रसायन विज्ञान
सहसंयोजक बंध
रसायन विज्ञान
आवर्त सारणी की आवर्तिता
गणित
पाइथागोरस प्रमेय
गणित
त्रिकोणमितीय अनुपात और इकाई वृत्त
गणित
द्विघात समीकरण और द्विघात फलन का ग्राफ़
गणित
वृत्त के प्रमेय
गणित
ऊँचाई और दूरी: उन्नयन कोण और अवनमन कोण
गणित
प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता
गणित
समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी
गणित






















