नियंत्रण
बीकर का विलयन
सूचक
मापन
- pH
- 1.00
- pOH
- 13.00
- [H₃O⁺] सांद्रता
- 1.00 × 10⁻¹M
- विलयन की प्रकृति
- अम्लीय
- ब्यूरेट से मिलाया गया आयतन (NaOH)
- 0.0mL
- मिलाया गया अनुमापक
- 0.00mmol
- बीकर में शुरू का विलेय (HCl)
- 2.50mmol
- तुल्यता बिंदु का आयतन
- 25.0mL
- बीकर के विलयन का आयतन + NaOH
- 25.0mL
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- "बीकर का विलयन" में HCl, CH₃COOH, NaOH या शुद्ध जल चुनें। अम्ल या जल हो तो ब्यूरेट में NaOH रहेगा, और क्षारक हो तो ब्यूरेट में HCl।
- ▶ दबाएँ: ब्यूरेट से बूँदें गिरेंगी, बीकर का रंग बदलेगा और दाईं ओर अनुमापन वक्र बनता जाएगा।
- "ब्यूरेट से मिलाया गया आयतन" स्लाइडर से किसी भी आयतन पर रुककर pH, pOH और [H₃O⁺] पढ़ें।
- सूचक बदलें: फ़ीनॉल्फ़्थेलिन क्षारीय विलयन में गुलाबी होता है, मेथिल ऑरेंज अम्ल में लाल और क्षार में पीला।
- "आयनों को बड़ा करके दिखाएँ" चालू रखें तो गोले में लाल H₃O⁺ और नीले OH⁻ बिंदु दिखेंगे: हर pH इकाई पर दो बिंदु घटते या बढ़ते हैं, क्योंकि स्केल लघुगणकीय है।
- सांद्रता या आयतन बदलने पर बीकर फिर से भर जाता है। तुल्यता बिंदु का आयतन मापन पैनल में पढ़ें और कॉपी में M₁V₁ = M₂V₂ से जाँचें।
नींबू, साबुन और एसिडिटी: सब एक ही कहानी
नींबू जीभ पर निचोड़ें तो खट्टा लगता है। सिरका खट्टा है, इमली खट्टी है, दही भी हल्का खट्टा है। अब साबुन हाथ में लें: वह चिकना और फिसलन भरा लगता है, और गलती से मुँह में जाए तो कड़वा। खट्टी चीज़ें एक परिवार हैं और कड़वी-फिसलन वाली चीज़ें दूसरा। रसायनज्ञ इन्हें अम्ल और क्षारक कहते हैं।
बहुत तला-भुना या मसालेदार खाना खाने के बाद कई लोगों को सीने में जलन होती है, जिसे हम एसिडिटी कहते हैं। डॉक्टर एंटासिड देते हैं। क्यों? क्योंकि आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ज़्यादा बन गया है, और एंटासिड एक दुर्बल क्षारक है जो उस अतिरिक्त अम्ल को खत्म कर देता है। अम्ल और क्षारक का एक-दूसरे के गुणों को खत्म कर देना उदासीनीकरण कहलाता है, और यही इस पेज का मुख्य नायक है।
पर "कितना खट्टा" या "कितना क्षारीय" मापेंगे कैसे? प्रयोगशाला का अम्ल चखा तो नहीं जा सकता! इसलिए वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक संख्या बनाई: pH। लगभग 0 से 14 तक की यह संख्या एक नज़र में बता देती है कि विलयन कितना अम्लीय या क्षारीय है। नीचे के सिमुलेशन में आप हर बूँद के साथ इस संख्या को बदलते देखेंगे।
शुरू से: अम्ल, क्षारक और क्षार क्या हैं
सबसे सरल परिभाषा स्वीडिश वैज्ञानिक आरहेनियस ने दी। उनके अनुसार जो पदार्थ जल में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H⁺) देता है वह अम्ल है, और जो हाइड्रॉक्साइड आयन (OH⁻) देता है वह क्षार है। HCl जल में H⁺ और Cl⁻ में टूटता है, इसलिए अम्ल है; NaOH, Na⁺ और OH⁻ में टूटता है, इसलिए क्षार है।
एक छोटी पर ज़रूरी बात: अकेला H⁺ आयन (यानी सिर्फ़ एक प्रोटॉन) जल में अकेला नहीं रह सकता। वह तुरंत एक जल अणु से जुड़कर हाइड्रोनियम आयन H₃O⁺ बना लेता है। इसलिए किसी किताब में H⁺ और किसी में H₃O⁺ लिखा दिखे तो घबराएँ नहीं, दोनों का मतलब एक ही है।
बाद में ब्रॉन्स्टेड और लॉरी ने बड़ी परिभाषा दी: जो प्रोटॉन (H⁺) देता है वह अम्ल है, और जो प्रोटॉन लेता है वह क्षारक है। इस परिभाषा में अमोनिया (NH₃) क्षारक है, क्योंकि वह जल से एक प्रोटॉन लेकर NH₄⁺ बन जाती है, भले ही उसमें OH न हो।
अब क्षारक और क्षार का अंतर, जो परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है। जो पदार्थ अम्ल से अभिक्रिया करके लवण और जल देता है वह क्षारक है, जैसे CuO, CaO, NaOH। इनमें से जो जल में घुलते हैं (NaOH, KOH, Ca(OH)₂) सिर्फ़ उन्हें क्षार कहते हैं। इसलिए याद रखें: सभी क्षार क्षारक हैं, पर सभी क्षारक क्षार नहीं। कॉपर ऑक्साइड क्षारक है, पर जल में नहीं घुलता, इसलिए क्षार नहीं।
- अम्ल के गुण: स्वाद में खट्टे, नीले लिटमस को लाल करते हैं, सक्रिय धातुओं (Zn, Mg) से अभिक्रिया करके H₂ गैस देते हैं, कार्बोनेट से CO₂ देते हैं, जलीय विलयन विद्युत का चालन करता है।
- क्षार के गुण: स्वाद में कड़वे, छूने पर साबुन जैसे फिसलन भरे, लाल लिटमस को नीला और फ़ीनॉल्फ़्थेलिन को गुलाबी करते हैं, अम्ल से अभिक्रिया करके लवण और जल देते हैं।
- लवण: जब अम्ल का H⁺ किसी धातु आयन या NH₄⁺ से बदल जाए तो बना यौगिक, जैसे NaCl, KNO₃, CaSO₄।
ज़रूरी शब्द एक नज़र में
"परिभाषा दीजिए" वाले ज़्यादातर प्रश्न इसी तालिका से आते हैं, इसलिए इसे एक बार ध्यान से पढ़ लें।
| शब्द | प्रतीक या उदाहरण | सरल भाषा में अर्थ |
|---|---|---|
| अम्ल | HCl, H₂SO₄, CH₃COOH | जल में H₃O⁺ देता है, या प्रोटॉन देता है |
| क्षारक | CuO, CaO, NaOH | अम्ल को उदासीन करके लवण और जल देता है |
| क्षार | NaOH, KOH, Ca(OH)₂ | जल में घुलनशील क्षारक, OH⁻ देता है |
| लवण | NaCl, CaSO₄ | अम्ल और क्षारक के उदासीनीकरण से बना आयनिक यौगिक |
| pH | pH = −log[H₃O⁺] | अम्लता या क्षारकता का माप, आमतौर पर 0 से 14 |
| pOH | pOH = −log[OH⁻] | OH⁻ आयनों का माप; pH + pOH = 14 |
| सांद्रता (मोलरता) | M = mol/L | एक लीटर विलयन में विलेय के कितने मोल हैं |
| सूचक | लिटमस, फ़ीनॉल्फ़्थेलिन | वह पदार्थ जिसका रंग pH के अनुसार बदलता है |
| उदासीनीकरण | HCl + NaOH → NaCl + H₂O | अम्ल और क्षारक मिलकर लवण और जल बनाते हैं |
| अनुमापन | ब्यूरेट और पिपेट | ज्ञात विलयन से अज्ञात विलयन की सांद्रता निकालना |
| तुल्यता बिंदु | M₁V₁ = M₂V₂ | जहाँ अम्ल और क्षारक के मोल ठीक बराबर होते हैं |
pH मान क्या है और यह क्या बताता है
शुद्ध जल भी अपने आप बहुत थोड़ा टूटता है: H₂O + H₂O ⇌ H₃O⁺ + OH⁻। 25 °C पर एक लीटर शुद्ध जल में H₃O⁺ सिर्फ़ 1.0 × 10⁻⁷ मोल होता है, और OH⁻ भी ठीक उतना ही। दोनों बराबर हैं, इसलिए जल उदासीन है।
इतनी छोटी संख्याओं से काम करना मुश्किल है। इसलिए 1909 में डेनिश रसायनज्ञ सोरेनसन ने एक तरकीब निकाली: सांद्रता का लघुगणक लो और ऋण चिह्न लगा दो। तब 1.0 × 10⁻⁷ बन जाता है एक आसान 7। यही संख्या pH है। "p" का अर्थ है power यानी घात, और "H" का अर्थ हाइड्रोजन।
तो pH मान क्या बताता है? यह विलयन में हाइड्रोजन (हाइड्रोनियम) आयनों की सांद्रता बताता है। pH जितना कम, H₃O⁺ उतना ज़्यादा और विलयन उतना अम्लीय। pH जितना ज़्यादा, H₃O⁺ उतना कम, OH⁻ उतना ज़्यादा, और विलयन उतना क्षारीय।
सबसे ज़रूरी बात यह है: pH स्केल लघुगणकीय (logarithmic) है। pH 1 घटे तो H₃O⁺ दस गुना बढ़ता है, 2 घटे तो सौ गुना। इसलिए pH 3 का सिरका pH 6 के दूध से दोगुना नहीं, पूरे 1,000 गुना अधिक अम्लीय है! सिमुलेशन के गोले में इसीलिए हर pH इकाई पर बराबर बिंदु बढ़ते-घटते हैं: बिंदु लॉग स्केल पर बने हैं।
pH = −log₁₀[H₃O⁺][H₃O⁺] मोल/लीटर में
pOH = −log₁₀[OH⁻][OH⁻] मोल/लीटर में
[H₃O⁺][OH⁻] = Kw = 1.0 × 10⁻¹⁴25 °C पर जल का आयनिक गुणनफल
pH + pOH = 1425 °C पर हर जलीय विलयन में
[H₃O⁺] = 10⁻ᵖᴴउल्टा: pH से सांद्रता निकालना
pH स्केल 0 से 14 तक: रोज़ की चीज़ों के pH मान
सिमुलेशन के नीचे की रंगीन पट्टी ही pH स्केल है: बाईं ओर लाल (बहुत अम्लीय), बीच में हरा (उदासीन), दाईं ओर नीला-बैंगनी (बहुत क्षारीय)। सार्वत्रिक सूचक का रंग ठीक इसी तरह बदलता है, इसलिए पट्टी उन्हीं रंगों से बनी है।
देखें हमारे आस-पास की चीज़ें इस स्केल पर कहाँ आती हैं। प्राकृतिक चीज़ों का pH थोड़ा ऊपर-नीचे होता है, इसलिए इन मानों को लगभग मानें।
| पदार्थ | लगभग pH | प्रकृति |
|---|---|---|
| जठर रस (आमाशय का अम्ल) | 1–3 | प्रबल अम्लीय |
| नींबू का रस | 2 | अम्लीय |
| सिरका | 3 | अम्लीय |
| शीतल पेय, टमाटर | 3–4 | अम्लीय |
| सामान्य वर्षा जल | 5.6 | हल्का अम्लीय |
| दूध | 6.5 | लगभग उदासीन |
| शुद्ध जल | 7 | उदासीन |
| रक्त | 7.4 | हल्का क्षारीय |
| बेकिंग सोडा का विलयन | 8–9 | हल्का क्षारीय |
| साबुन का पानी | 9–10 | क्षारीय |
| चूने का पानी | 12 | प्रबल क्षारीय |
| ब्लीच | 12–13 | प्रबल क्षारीय |
प्रबल और दुर्बल अम्ल: हर खट्टा बराबर नहीं
HCl को जल में डालें तो लगभग हर अणु आयनों में टूट जाता है। यह प्रबल अम्ल है, और हिसाब सीधा है: 0.01 M HCl में [H₃O⁺] सीधे 0.01 M है।
सिरके का ऐसीटिक अम्ल (CH₃COOH) अलग है: जल में बहुत कम अणु टूटते हैं, ज़्यादातर पूरे रहते हैं। यह दुर्बल अम्ल है। इसके टूटने की प्रवृत्ति वियोजन स्थिरांक Ka से मापी जाती है; ऐसीटिक अम्ल का Ka = 1.8 × 10⁻⁵, यानी pKa = 4.74।
नतीजा? एक ही 0.1 M सांद्रता पर HCl का pH 1.00 है, जबकि ऐसीटिक अम्ल का pH 2.88। सिर्फ़ 1.33% अणु टूटते हैं! सिमुलेशन में बीकर का विलयन HCl से CH₃COOH करें: शुरुआती pH काफ़ी बढ़ जाता है और वक्र की शुरुआत में एक समतल "कंधा" बन जाता है।
प्रबल और सांद्र एक चीज़ नहीं हैं, यह परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है। "प्रबल" बताता है कि अम्ल कितना पूरा टूटता है, और "सांद्र" बताता है कि एक लीटर में कितना है। बहुत तनु HCl भी प्रबल अम्ल है, और बहुत सांद्र ऐसीटिक अम्ल भी दुर्बल।
- प्रबल अम्ल: HCl, HNO₃, H₂SO₄ (पहला चरण)।
- दुर्बल अम्ल: CH₃COOH (सिरका), H₂CO₃ (शीतल पेय), सिट्रिक अम्ल (नींबू), टार्टरिक अम्ल (इमली)।
- प्रबल क्षारक: NaOH, KOH।
- दुर्बल क्षारक: NH₄OH (अमोनिया का विलयन), Mg(OH)₂ (एंटासिड में)।
सूचक: विलयन खुद रंग से अपना pH बताता है
सूचक वह पदार्थ है जिसका रंग विलयन के pH के अनुसार बदलता है। ज़्यादातर सूचक खुद दुर्बल अम्ल या दुर्बल क्षारक होते हैं; H⁺ लेने पर एक रंग, H⁺ छोड़ने पर दूसरा।
हर सूचक का रंग बदलने का अपना pH परास होता है। अनुमापन में ऐसा सूचक चुना जाता है जिसका परास तुल्यता बिंदु की तीखी छलांग के भीतर आए।
| सूचक | अम्ल में रंग | क्षार में रंग | रंग बदलने का pH परास |
|---|---|---|---|
| लिटमस | लाल | नीला | लगभग 5–8 |
| फ़ीनॉल्फ़्थेलिन | रंगहीन | गुलाबी | लगभग 8.2–10 |
| मेथिल ऑरेंज | लाल | पीला | लगभग 3.1–4.4 |
| सार्वत्रिक सूचक | लाल → नारंगी → पीला | हरा → नीला → बैंगनी | 0–14 (हर pH का अलग रंग) |
| हल्दी (घरेलू) | पीला | लाल-भूरा | क्षार में रंग बदलता है |
| लाल पत्तागोभी का रस (घरेलू) | लाल-गुलाबी | हरा-पीला | बड़े परास में रंग बदलता है |
उदासीनीकरण अभिक्रिया क्या है
जब अम्ल और क्षारक आपस में अभिक्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, तो उसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। अभिक्रिया के बाद अम्ल की अम्लता और क्षारक की क्षारकता दोनों "उदासीन" यानी खत्म हो जाती हैं।
असली खेल आयनों के स्तर पर होता है। Na⁺ और Cl⁻ दर्शक की तरह विलयन में तैरते रहते हैं (इन्हें दर्शक आयन कहते हैं); काम सिर्फ़ H₃O⁺ और OH⁻ करते हैं, जो मिलकर जल बन जाते हैं। सिमुलेशन के गोले में लाल बिंदुओं का घटना और नीले बिंदुओं का बढ़ना यही है।
उदासीनीकरण ऊष्माक्षेपी है। प्रबल अम्ल और प्रबल क्षारक के उदासीनीकरण में हर मोल जल बनने पर लगभग 57 किलोजूल ऊष्मा निकलती है, इसलिए बीकर छूने पर थोड़ा गर्म लगता है। यह रेडॉक्स अभिक्रिया भी नहीं है, क्योंकि किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या नहीं बदलती: H +1 और O −2 ही रहते हैं।
HCl + NaOH → NaCl + H₂Oआण्विक समीकरण
H₃O⁺ + OH⁻ → 2H₂Oनेट आयनिक समीकरण
H₂SO₄ + 2KOH → K₂SO₄ + 2H₂Oद्विक्षारकी अम्ल को दो मोल क्षार चाहिए
CH₃COOH + NaOH → CH₃COONa + H₂Oदुर्बल अम्ल का उदासीनीकरण
अनुमापन: अज्ञात सांद्रता निकालने की विधि
मान लीजिए आपके पास NaOH का विलयन है पर उसकी सांद्रता पता नहीं। आप पिपेट से निश्चित आयतन शंक्वाकार फ्लास्क में लेते हैं, कुछ बूँद सूचक डालते हैं, और ब्यूरेट से ज्ञात सांद्रता का HCl बूँद-बूँद मिलाते हैं। जिस क्षण सूचक का रंग स्थायी रूप से बदले (अंत बिंदु), ब्यूरेट की रीडिंग लें। इस पूरी प्रक्रिया का नाम अनुमापन (titration) है।
तुल्यता बिंदु पर अम्ल के मोल = क्षारक के मोल (1:1 अभिक्रिया में)। मोल = सांद्रता × आयतन, इसलिए M₁V₁ = M₂V₂। तीन मान पता हों तो चौथा निकल आता है।
सिमुलेशन की शुरुआती व्यवस्था में 25 mL 0.1 M HCl में 0.1 M NaOH मिलाया जा रहा है, इसलिए तुल्यता बिंदु 25 mL पर है। शुरुआती pH 1.00 है। ध्यान दें, पहले 20 mL में pH मुश्किल से बढ़ता है, पर तुल्यता बिंदु के ठीक आगे-पीछे सिर्फ़ 0.2 mL (लगभग 4 बूँदें!) मिलाने पर pH 3.70 से उछलकर 10.30 हो जाता है। लगभग 6.6 pH इकाइयों की यह छलांग ही अनुमापन की जान है, और इसीलिए आख़िरी मिलीलीटर बूँद-बूँद करके डाले जाते हैं।
मोल = M × VV लीटर में; mL में लें तो उत्तर मिलीमोल में
M₁V₁ = M₂V₂तुल्यता बिंदु पर (1:1 अभिक्रिया में)
n₁M₁V₁ = n₂M₂V₂n = प्रति अणु H⁺ या OH⁻ की संख्या (H₂SO₄ के लिए n = 2)
| मिलाया गया NaOH | pH | [H₃O⁺] (M) | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| 0.0 mL | 1.00 | 1.00 × 10⁻¹ | अम्लीय |
| 10.0 mL | 1.37 | 4.29 × 10⁻² | अम्लीय |
| 20.0 mL | 1.95 | 1.11 × 10⁻² | अम्लीय |
| 24.0 mL | 2.69 | 2.04 × 10⁻³ | अम्लीय |
| 24.9 mL | 3.70 | 2.00 × 10⁻⁴ | अम्लीय |
| 25.0 mL | 7.00 | 1.00 × 10⁻⁷ | उदासीन |
| 25.1 mL | 10.30 | 5.01 × 10⁻¹¹ | क्षारीय |
| 26.0 mL | 11.29 | 5.10 × 10⁻¹² | क्षारीय |
| 30.0 mL | 11.96 | 1.10 × 10⁻¹² | क्षारीय |
| 50.0 mL | 12.52 | 3.00 × 10⁻¹³ | क्षारीय |
सिमुलेशन में खुद करें: 6 छोटे प्रयोग
पढ़ने से ज़्यादा पक्की समझ करके आती है। हर प्रयोग से पहले अंदाज़ा लगाएँ कि क्या होगा, फिर जाँचें।
प्रयोग 1: छलांग पकड़ें
शुरुआती व्यवस्था रखें, मिलाया गया आयतन 24 mL पर लाएँ, फिर 0.1 mL करके बढ़ाएँ। 25 mL पार करते ही रंग लाल-नारंगी से बैंगनी-नीला हो जाएगा। असली प्रयोगशाला में यही अंत बिंदु है।
प्रयोग 2: दुर्बल अम्ल का कंधा
बीकर में CH₃COOH रखें। शुरुआती pH 2.88 है, और आधे उदासीनीकरण (12.5 mL) पर pH 4.75 होता है, जो pKa के बराबर है। यह समतल हिस्सा बफ़र क्षेत्र है, जहाँ क्षार मिलाने पर भी pH आसानी से नहीं बदलता। तुल्यता बिंदु पर pH 8.72 है: 7 नहीं, क्षारीय!
प्रयोग 3: उल्टा अनुमापन
बीकर में NaOH रखें। अब ब्यूरेट में HCl है और वक्र ऊपर से नीचे गिरता है। फ़ीनॉल्फ़्थेलिन चुनें तो बीकर शुरू में गुलाबी रहता है और तुल्यता बिंदु पार होते ही रंगहीन हो जाता है।
प्रयोग 4: शुद्ध जल में क्षार
बीकर में शुद्ध जल रखें। pH ठीक 7 से शुरू होता है, और NaOH की पहली कुछ बूँदें ही इसे 11 से ऊपर पहुँचा देती हैं, क्योंकि उदासीन करने के लिए कोई अम्ल नहीं है। यहाँ कोई तुल्यता बिंदु नहीं है।
प्रयोग 5: सांद्रता बदलें
बीकर का HCl 0.1 से 0.2 M करें: तुल्यता बिंदु 25 से 50 mL पर खिसक जाएगा, क्योंकि दोगुने मोल को दोगुना क्षार चाहिए। ब्यूरेट का NaOH 0.2 M करें तो यह आधा हो जाएगा। M₁V₁ = M₂V₂ आँखों के सामने!
प्रयोग 6: आयन गिनें
pH 1 पर गोले में लगभग 26 लाल और 2 नीले बिंदु दिखते हैं, pH 7 पर दोनों 14-14। बिंदु लॉग स्केल पर हैं, इसलिए असली अनुपात कहीं बड़ा है: pH 1 पर H₃O⁺ आयन OH⁻ से दस खरब गुना (10¹²) ज़्यादा होते हैं।
हल किए गए प्रश्न: चरण दर चरण
नीचे का हर उत्तर उन्हीं समीकरणों से निकाला गया है जिनसे सिमुलेशन चलता है (25 °C पर)। पहले खुद हल करें, फिर मिलाएँ।
प्रश्न 1: 0.01 M HCl विलयन का pH क्या है?
HCl प्रबल अम्ल है और पूरा वियोजित होता है, इसलिए [H₃O⁺] = 0.01 M = 10⁻² M। pH = −log(10⁻²) = 2.00।
प्रश्न 2: 0.001 M NaOH विलयन का pH क्या है?
NaOH प्रबल क्षार है, इसलिए [OH⁻] = 0.001 M। pOH = −log(10⁻³) = 3.00, तो pH = 14 − pOH = 11.00। याद रखें, क्षार का pH सीधे नहीं आता: पहले pOH, फिर 14 में से घटाएँ।
प्रश्न 3: तनुकरण से pH कितना बढ़ता है?
0.1 M HCl के 10 mL में जल मिलाकर 1,000 mL किया गया। M₁V₁ = M₂V₂ से नई सांद्रता = 0.1 × 10 ÷ 1,000 = 0.001 M। pH 1.00 से बढ़कर 3.00 हो गया: सौ गुना तनु करने पर pH ठीक 2 बढ़ा, लॉग स्केल के कारण।
प्रश्न 4: अम्ल और क्षार मिलाने के बाद pH क्या होगा?
0.1 M HCl के 25 mL में 0.1 M NaOH के 20 mL मिलाए गए। HCl = 2.5 mmol, NaOH = 2.0 mmol। उदासीनीकरण के बाद बचा HCl = 0.5 mmol, कुल आयतन 45 mL। [H₃O⁺] = 0.5 ÷ 45 = 0.0111 M, और pH = 1.95। स्लाइडर 20 mL पर लाकर जाँचें।
प्रश्न 5: अनुमापन से अज्ञात सांद्रता
20 mL NaOH को उदासीन करने में 0.08 M HCl के 25 mL लगे। NaOH की सांद्रता क्या है? M₁V₁ = M₂V₂ से, M(NaOH) = 0.08 × 25 ÷ 20 = 0.10 M। (मिलाया गया HCl = 2.0 mmol, इसलिए NaOH भी 2.0 mmol था।)
प्रश्न 6: दुर्बल अम्ल का pH
0.1 M ऐसीटिक अम्ल का pH क्या है? (Ka = 1.8 × 10⁻⁵) दुर्बल अम्ल में [H₃O⁺] ≈ √(Ka × C), जिससे pH ≈ 2.88। उसी सांद्रता के HCl का pH 1.00 है, इसलिए दुर्बल अम्ल काफ़ी कम अम्लीय है।
प्रश्न 7: pH से सांद्रता
एक विलयन का pH 4.5 है। [H₃O⁺] = 10⁻⁴·⁵ = 3.16 × 10⁻⁵ M। pOH = 9.5, और [OH⁻] = Kw ÷ [H₃O⁺] = 3.16 × 10⁻¹⁰ M।
प्रश्न 8: कितने गुना अधिक अम्लीय?
pH 3 का विलयन pH 6 वाले से कितने गुना अधिक अम्लीय है? अंतर 3 इकाई है, इसलिए 10³ = 1,000 गुना।
गलतियाँ जो सब करते हैं
कॉपियाँ जाँचते समय शिक्षकों को बार-बार यही गलतियाँ मिलती हैं। आप इनसे बचें।
- pH 3 को pH 6 से "दोगुना" अम्लीय कहना। असल में हज़ार गुना, क्योंकि स्केल लघुगणकीय है।
- क्षार के लिए −log[OH⁻] लिखकर उसी को pH कहना। वह pOH है; pH = 14 − pOH।
- "प्रबल" और "सांद्र" को एक समझना। तनु HCl भी प्रबल अम्ल है।
- हर क्षारक को क्षार कहना। सिर्फ़ जल में घुलने वाले क्षारक ही क्षार हैं।
- मान लेना कि तुल्यता बिंदु पर विलयन हमेशा उदासीन होता है। दुर्बल अम्ल-प्रबल क्षारक में pH 7 से ज़्यादा होता है।
- H₂SO₄ जैसे द्विक्षारकी अम्ल के लिए M₁V₁ = M₂V₂ में n भूल जाना।
- mL और L मिला देना। दोनों ओर एक ही इकाई रखें, पर मोल निकालने के लिए लीटर लें।
दैनिक जीवन में pH और उदासीनीकरण
आमाशय भोजन पचाने के लिए हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाता है (pH 1–3)। ज़्यादा हो जाए तो एसिडिटी या सीने में जलन होती है। एंटासिड में Mg(OH)₂ (मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया) या Al(OH)₃ जैसे दुर्बल क्षारक होते हैं जो अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करते हैं।
मिट्टी का pH फ़सल के लिए बहुत ज़रूरी है; ज़्यादातर फ़सलें pH 6 से 7.5 में अच्छी होती हैं। मिट्टी ज़्यादा अम्लीय हो तो किसान बिना बुझा चूना (CaO) या चूना पत्थर (CaCO₃) डालते हैं, और ज़्यादा क्षारीय हो तो जैविक खाद या जिप्सम।
कारख़ानों और वाहनों से निकली सल्फ़र डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन के ऑक्साइड वर्षा जल में घुलकर अम्लीय वर्षा बनाते हैं (pH 5.6 से कम)। इससे पेड़-पौधे, मछलियाँ और संगमरमर की इमारतें (जैसे ताजमहल) प्रभावित होती हैं।
खाने के बाद मुँह के जीवाणु अम्ल बनाते हैं जो दाँतों का इनेमल घिसते हैं; pH 5.5 से नीचे दंत क्षय शुरू होता है। टूथपेस्ट हल्का क्षारीय होता है, इसलिए ब्रश करने से वह अम्ल उदासीन हो जाता है।
मधुमक्खी के डंक में अम्ल होता है, इसलिए बेकिंग सोडा जैसा दुर्बल क्षार लगाने से आराम मिलता है। ततैया के डंक में क्षारीय पदार्थ होता है, इसलिए वहाँ सिरके जैसा दुर्बल अम्ल लगाने की सलाह दी जाती है। बिच्छू बूटी (नेटल) और चींटी के डंक में मेथेनॉइक (फ़ॉर्मिक) अम्ल होता है।
रक्त का pH 7.35 से 7.45 के बीच बफ़र तंत्र बनाए रखता है; इस सीमा से बाहर जाना गंभीर स्थिति है।
परीक्षा कोना: CBSE, राज्य बोर्ड और NEET में क्या पूछा जाता है
NCERT कक्षा 7 में "अम्ल, क्षारक और लवण", कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 2 "अम्ल, क्षारक एवं लवण" और कक्षा 11 रसायन के "साम्यावस्था" अध्याय में यह विषय आता है। NEET और JEE में pH की गणना और बफ़र सीधे पूछे जाते हैं।
- 1 अंक: pH मान क्या है? उदासीनीकरण की परिभाषा दीजिए। फ़ीनॉल्फ़्थेलिन क्षार में किस रंग का होता है?
- 2–3 अंक: सभी क्षार क्षारक हैं पर सभी क्षारक क्षार नहीं, समझाइए। दाँत क्षय में pH की भूमिका बताइए। अम्ल को जल में मिलाते समय जल को अम्ल में क्यों नहीं डालते?
- संख्यात्मक: दिए गए विलयन का pH निकालें, या अनुमापन से M₁V₁ = M₂V₂ द्वारा सांद्रता निकालें। इकाई और लॉग का चरण साफ़ लिखें।
- अभिकथन-कारण (Assertion-Reason): जैसे "pH 3 का विलयन pH 6 से 1000 गुना अम्लीय है; कारण: pH स्केल लघुगणकीय है।"
- NEET/JEE: दुर्बल अम्ल का pH, दो प्रबल विलयनों के मिश्रण का pH, बफ़र का pH = pKa (आधे उदासीनीकरण पर)।
एक पेज में पुनरावृत्ति
परीक्षा से पहली रात सिर्फ़ यह सूची पढ़ लें।
- अम्ल जल में H₃O⁺ देते हैं, क्षार OH⁻; जल में घुलनशील क्षारक ही क्षार है।
- pH = −log[H₃O⁺]; pOH = −log[OH⁻]; 25 °C पर pH + pOH = 14।
- pH < 7 अम्लीय, = 7 उदासीन, > 7 क्षारीय; हर इकाई = 10 गुना।
- प्रबल अम्ल लगभग पूरा वियोजित होता है, दुर्बल अम्ल थोड़ा सा।
- उदासीनीकरण: अम्ल + क्षारक → लवण + जल; नेट आयनिक H₃O⁺ + OH⁻ → 2H₂O; ऊष्माक्षेपी।
- अनुमापन में तुल्यता बिंदु पर M₁V₁ = M₂V₂, जहाँ pH तेज़ी से उछलता है।
- फ़ीनॉल्फ़्थेलिन: अम्ल में रंगहीन, क्षार में गुलाबी; मेथिल ऑरेंज: अम्ल में लाल, क्षार में पीला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
pH मान क्या है?
pH मान किसी जलीय विलयन में हाइड्रोजन (हाइड्रोनियम) आयन की मोलर सांद्रता का ऋणात्मक लघुगणक है: pH = −log[H₃O⁺]। यह बताता है कि विलयन कितना अम्लीय या क्षारीय है।
pH का फुल फॉर्म क्या है?
pH का अर्थ है "power of hydrogen" (फ्रेंच में puissance, जर्मन में Potenz, यानी शक्ति या घात)। यह हाइड्रोजन आयन सांद्रता को 10 की घात के रूप में व्यक्त करता है।
pH स्केल की सीमा क्या है?
रोज़मर्रा के विलयनों के लिए pH स्केल 0 से 14 तक है, और 25 °C पर 7 उदासीन है। बहुत सांद्र प्रबल अम्ल का pH 0 से नीचे और बहुत सांद्र प्रबल क्षार का 14 से ऊपर जा सकता है।
अम्ल, क्षार और लवण में क्या अंतर है?
अम्ल जल में H₃O⁺ देता है, स्वाद में खट्टा होता है और नीले लिटमस को लाल करता है। क्षार जल में OH⁻ देता है, कड़वा और फिसलन भरा होता है, लाल लिटमस को नीला करता है। लवण इन दोनों के उदासीनीकरण से बना आयनिक यौगिक है, जैसे NaCl।
उदासीनीकरण अभिक्रिया किसे कहते हैं? उदाहरण दें।
अम्ल और क्षारक की अभिक्रिया से लवण और जल बनना उदासीनीकरण कहलाता है, जैसे HCl + NaOH → NaCl + H₂O, या H₂SO₄ + 2KOH → K₂SO₄ + 2H₂O।
पानी का pH मान कितना होता है?
शुद्ध जल का pH 25 °C पर 7 होता है, क्योंकि उसमें [H₃O⁺] = [OH⁻] = 10⁻⁷ M है। नल या बोतल के पानी में घुले लवण और CO₂ के कारण pH आमतौर पर 6.5 से 8.5 के बीच रहता है।
अनुमापन में फ़ीनॉल्फ़्थेलिन क्यों लिया जाता है?
फ़ीनॉल्फ़्थेलिन लगभग pH 8.2 से नीचे रंगहीन और ऊपर गुलाबी होता है, इसलिए प्रबल क्षारक से अनुमापन की तीखी छलांग के भीतर यह साफ़ रंग बदलता है। दुर्बल अम्ल के लिए यह ख़ास तौर पर उपयुक्त है, जिनका तुल्यता बिंदु pH 7 से ऊपर होता है।
तुल्यता बिंदु पर क्या होता है?
तुल्यता बिंदु पर अम्ल और क्षारक के मोल ठीक बराबर होते हैं, इसलिए 1:1 अभिक्रिया में M₁V₁ = M₂V₂। प्रबल अम्ल-प्रबल क्षारक में वहाँ pH 7 होता है; दुर्बल अम्ल-प्रबल क्षारक में 7 से अधिक।
रक्त का pH मान कितना होता है?
मानव रक्त हल्का क्षारीय है, लगभग pH 7.35 से 7.45, जिसे शरीर का बफ़र तंत्र इसी सँकरी सीमा में बनाए रखता है।
क्या pH ऋणात्मक हो सकता है?
हाँ। [H₃O⁺] = 1 M वाले विलयन का pH 0 होता है, और इससे अधिक सांद्र विलयन का pH ऋणात्मक। पर विद्यालय के ज़्यादातर विलयन 0–14 के बीच ही आते हैं।
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