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जब दो तरंगें मिलती हैं: व्यतिकरण को देखें

जब दो कला-संबद्ध स्रोतों की तरंगें एक ही स्थान पर मिलती हैं, तो अध्यारोपण के कारण कहीं परिणामी आयाम बढ़ जाता है और कहीं घट या शून्य हो जाता है — इस घटना को व्यतिकरण कहते हैं। नीचे के रिपल टैंक में स्रोत खिसकाएँ, तरंगदैर्ध्य और कलांतर बदलें और दीप्त व अदीप्त फ्रिंज बनते देखें।

स्रोत S₁, S₂ या बिंदु P को खींचें

शृंगगर्तसंपोषी रेखा, Δ = nλविनाशी रेखा, Δ = (n + ½)λ
गति

नियंत्रण

3.0 cm
12.0 cm
0 °
1.00

दृश्य

मापन

S₁ से दूरी, r₁
26.8cm
S₂ से दूरी, r₂
24.0cm
पथांतर, Δ
2.83cm
पथांतर, Δ/λ
0.94λ
P पर कलांतर, δ
20°
परिणामी आयाम (A₁ = 1)
1.97
P पर व्यतिकरण
आंशिक
पर्दे पर मापी गई फ्रिंज चौड़ाई
11.5cm
β = λD/d (D ≫ d मानकर)
11.0cm

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. S₁ और S₂ को खींचें या "स्रोतों के बीच दूरी" स्लाइडर बदलें — d बढ़ाने पर फ्रिंज पास-पास आ जाती हैं।
  2. दृश्य को "औसत तीव्रता" पर करें: चलती तरंगों की जगह स्थिर दीप्त और अदीप्त फ्रिंज दिखेंगी।
  3. बिंदु P को हरी रेखा पर रखें तो पथांतर λ का पूर्ण गुणज होगा; लाल डैश रेखा पर अर्ध-पूर्ण गुणज।
  4. कलांतर φ = 180° करें: सारी फ्रिंज खिसक जाती हैं और बीच की रेखा अदीप्त हो जाती है।

तालाब में दो पत्थर: व्यतिकरण से पहली मुलाकात

किसी शांत तालाब में थोड़ी दूरी पर दो पत्थर एक साथ डालकर देखिए। दोनों से गोल-गोल लहरें फैलती हैं और कुछ ही देर में एक-दूसरे के आर-पार निकलने लगती हैं। ध्यान से देखेंगे तो एक पैटर्न दिखेगा — कुछ रेखाओं पर पानी खूब ऊपर-नीचे हो रहा है, और कुछ रेखाओं पर लगभग शांत है।

"कहीं ज़ोरदार, कहीं शांत" का यही पैटर्न व्यतिकरण है। जहाँ दोनों तरंगें एक ही कदम में पहुँचती हैं वहाँ वे एक-दूसरे की मदद करती हैं, और जहाँ उलटे कदम में पहुँचती हैं वहाँ एक-दूसरे को मिटा देती हैं। यह पैटर्न अव्यवस्थित नहीं होता — कहाँ ज़ोर होगा और कहाँ शांति, यह पहले से गणना करके बताया जा सकता है।

साबुन के बुलबुले पर चमकते रंग, या बारिश के बाद सड़क पर फैली तेल की पतली परत के इंद्रधनुषी रंग भी प्रकाश के व्यतिकरण का ही नतीजा हैं। यहाँ लहरें पानी की नहीं, प्रकाश की हैं — पर नियम वही है।

शुरुआत से: तरंगों की कुछ आसान बातें

पहले कुछ शब्द पहचान लेते हैं। पानी की लहर का सबसे ऊँचा भाग शृंग कहलाता है और सबसे नीचा भाग गर्त। दो पास-पास के शृंगों के बीच की दूरी तरंगदैर्ध्य है, जिसे λ (लैम्ब्डा) से लिखते हैं।

कण अपनी विराम स्थिति से अधिकतम जितना हटता है, वह आयाम (A) है। कला बताती है कि किसी क्षण कण अपने कंपन की किस अवस्था में है — शृंग पर, गर्त पर, ऊपर जा रहा है या नीचे। जो दो कण साथ-साथ ऊपर उठते और साथ-साथ नीचे आते हैं, वे समान कला में हैं।

अध्यारोपण का सिद्धांत: तरंगें जोड़ना जानती हैं

जब एक ही माध्यम में दो या अधिक तरंगें एक साथ किसी कण से गुज़रती हैं, तो कण का परिणामी विस्थापन अलग-अलग तरंगों के विस्थापनों के योग के बराबर होता है। इसे अध्यारोपण का सिद्धांत कहते हैं।

आसान उदाहरण: दो दोस्त एक झूले को धक्का दे रहे हैं। दोनों एक ही दिशा में, एक ही समय धक्का दें तो झूला बहुत ऊँचा जाता है। पर अगर एक आगे से और दूसरा पीछे से बराबर ज़ोर से धक्का दे, तो झूला हिलता ही नहीं। तरंगों में भी विस्थापन चिह्न सहित जुड़ते हैं।

y = y₁ + y₂परिणामी विस्थापन = अलग-अलग विस्थापनों का योग

ज़रूरी शब्द एक नज़र में

ये परिभाषाएँ परीक्षा में बार-बार आती हैं, इसलिए एक छोटी तालिका बना दी है।

शब्दआसान अर्थ
अध्यारोपणकई तरंगें एक जगह मिलें तो उनके विस्थापनों का जुड़ना
व्यतिकरणअध्यारोपण से बनने वाला स्थायी पैटर्न — कहीं अधिक, कहीं कम आयाम
कला-संबद्ध स्रोतसमान आवृत्ति वाले दो स्रोत, जिनका कलांतर समय के साथ नहीं बदलता
पथांतर (Δ)किसी बिंदु की दोनों स्रोतों से दूरी का अंतर, |r₁ − r₂|
कलांतर (δ)एक तरंग दूसरी से कितनी आगे-पीछे है, कोण में
फ्रिंजपर्दे पर बारी-बारी से दीप्त और अदीप्त पट्टियाँ
फ्रिंज चौड़ाई (β)दो पास-पास की दीप्त (या अदीप्त) फ्रिंजों के बीच की दूरी

संपोषी और विनाशी व्यतिकरण की शर्तें

किसी बिंदु पर दो तरंगें क्या करेंगी, यह इस पर निर्भर है कि वे वहाँ किस कला में पहुँचती हैं। और कला निर्भर करती है पथांतर पर — एक तरंग को दूसरी से कितना अधिक रास्ता तय करना पड़ा।

संपोषी व्यतिकरण: शृंग पर शृंग

यदि पथांतर तरंगदैर्ध्य का पूर्ण गुणज हो (0, λ, 2λ, …), तो एक तरंग ने बस कुछ पूरे चक्र अधिक चले हैं। शृंग शृंग पर और गर्त गर्त पर पड़ता है। आयाम A₁ + A₂ हो जाता है — प्रकाश में दीप्त फ्रिंज।

Δ = nλ, n = 0, 1, 2, …परिणामी आयाम A₁ + A₂

विनाशी व्यतिकरण: शृंग पर गर्त

यदि पथांतर आधे तरंगदैर्ध्य का विषम गुणज हो (λ/2, 3λ/2, …), तो एक तरंग का शृंग दूसरी के गर्त पर पड़ता है। विस्थापन उलटी दिशा में होते हैं और एक-दूसरे को काट देते हैं। आयाम |A₁ − A₂| होता है; दोनों बराबर हों तो शून्य — अदीप्त फ्रिंज।

Δ = (2n + 1)λ/2परिणामी आयाम |A₁ − A₂|

पथांतर से कलांतर

एक तरंगदैर्ध्य अधिक पथ का मतलब एक पूरा चक्र, यानी 2π रेडियन या 360° कलांतर। इसलिए किसी भी पथांतर को एक सरल अनुपात से कलांतर में बदला जा सकता है, और किसी भी कलांतर के लिए परिणामी आयाम का सामान्य सूत्र भी है।

δ = (2π/λ)·Δकलांतर

A² = A₁² + A₂² + 2A₁A₂cosδकिसी भी कला पर परिणामी आयाम

कला-संबद्ध स्रोत क्यों ज़रूरी हैं

दो अलग बल्ब जलाकर दीवार पर डालें तो कोई फ्रिंज नहीं दिखती। हर बल्ब का प्रकाश एक सेकंड में लाखों बार बेतरतीब ढंग से कला बदलता है, इसलिए किसी बिंदु पर एक पल संपोषी तो अगले पल विनाशी — आँख तक सिर्फ़ औसत प्रकाश पहुँचता है।

स्थिर पैटर्न के लिए दोनों स्रोतों की आवृत्ति समान और कलांतर स्थिर होना चाहिए। ऐसे स्रोत कला-संबद्ध कहलाते हैं। इसीलिए आम तौर पर एक ही स्रोत के प्रकाश को दो भागों में बाँटा जाता है — जैसे यंग ने दो पतली झिरियों से किया।

  • दोनों स्रोतों की आवृत्ति (और तरंगदैर्ध्य) समान हो।
  • कलांतर स्थिर रहे।
  • आयाम समान या लगभग समान हों, ताकि अदीप्त फ्रिंज पूरी तरह अँधेरी और पैटर्न साफ़ दिखे।
  • स्रोत बहुत पतले और एक-दूसरे के पास हों।

यंग का द्वि-झिरी प्रयोग चरण दर चरण

लगभग 1801 में टॉमस यंग ने एक सरल प्रयोग से दिखाया कि प्रकाश तरंग की तरह व्यवहार करता है। कक्षा 12 की भौतिकी में यह इस अध्याय का सबसे अहम हिस्सा है।

प्रयोग की व्यवस्था

एकवर्णी प्रकाश पहले एक पतली झिरी S से गुज़रता है, फिर बहुत पास-पास की दो पतली झिरियों S₁ और S₂ तक पहुँचता है, जिनके बीच दूरी d है। दूर, D दूरी पर एक पर्दा है। S₁ और S₂ एक ही तरंगाग्र से प्रकाशित होती हैं, इसलिए कला-संबद्ध स्रोतों की तरह काम करती हैं।

पर्दे पर समान दूरी पर दीप्त और अदीप्त फ्रिंज दिखती हैं। बीच में, जहाँ पथांतर शून्य है, दीप्त फ्रिंज होती है — अगर दोनों झिरियाँ समान कला में हों।

फ्रिंज की स्थिति और चौड़ाई

पर्दे के केंद्र से y दूरी पर पथांतर लगभग Δ = yd/D होता है (जब D बहुत बड़ा हो)। दीप्त फ्रिंज के लिए Δ = nλ रखने पर n-वीं दीप्त फ्रिंज की स्थिति मिलती है, और दो पास-पास की फ्रिंजों का अंतर ही फ्रिंज चौड़ाई है।

yₙ = nλD/dn-वीं दीप्त फ्रिंज की स्थिति

β = λD/dफ्रिंज चौड़ाई

  • λ बढ़े तो β बढ़ती है — लाल प्रकाश की फ्रिंज नीले से चौड़ी।
  • पर्दा दूर करें (D बढ़ाएँ) तो फ्रिंज चौड़ी होती हैं।
  • झिरियाँ पास लाएँ (d घटाएँ) तो फ्रिंज चौड़ी होती हैं।
  • पूरा उपकरण पानी में डुबाएँ तो λ घटता है, फ्रिंज पतली हो जाती हैं।

व्यतिकरण और विवर्तन में अंतर

दोनों में दीप्त-अदीप्त पट्टियाँ दिखती हैं, इसलिए ये अक्सर उलझ जाते हैं। असली अंतर यह है कि मिलने वाली तरंगें कहाँ से आ रही हैं।

आधारव्यतिकरणविवर्तन
स्रोतदो कला-संबद्ध स्रोतों की तरंगेंएक ही तरंगाग्र के अलग-अलग भागों की तरंगें
फ्रिंज चौड़ाईप्रायः सभी बराबरकेंद्रीय फ्रिंज सबसे चौड़ी, बाकी पतली
चमकदीप्त फ्रिंज लगभग समान चमकीलीकेंद्र से दूर जाने पर तेज़ी से घटती है
अदीप्त फ्रिंजपूरी तरह अँधेरी हो सकती हैपूरी तरह अँधेरी नहीं होती
उदाहरणयंग का द्वि-झिरी प्रयोगएक पतली झिरी या तीखे किनारे से गुज़रता प्रकाश

सिमुलेशन में खुद प्रयोग करें

ऊपर का रिपल टैंक एक छोटी प्रयोगशाला है। किताब में जो पढ़ा, उसे यहाँ खुद जाँचिए।

  • तरंगदैर्ध्य λ बढ़ाएँ: लहरें लंबी होती हैं और हरी-लाल रेखाएँ दूर-दूर हो जाती हैं — ठीक β = λD/d के अनुसार।
  • स्रोतों की दूरी d घटाएँ: रेखाएँ कम, फ्रिंज चौड़ी।
  • कलांतर φ को 0° से 360° तक धीरे-धीरे बदलें: पूरा पैटर्न एक ओर खिसकता है और 360° पर वापस आ जाता है।
  • आयाम अनुपात घटाएँ: अदीप्त फ्रिंज काली नहीं, धूसर हो जाती है।
  • बिंदु P को अलग-अलग जगह खींचें और मापन पैनल में पथांतर कितने λ है, देखें।

हल उदाहरण

हर उदाहरण चरण दर चरण हल किया गया है। पहले सभी मात्रक SI में बदल लें।

उदाहरण 1: फ्रिंज चौड़ाई ज्ञात करना

यंग के प्रयोग में λ = 600 nm, झिरियों के बीच दूरी d = 0.5 mm और पर्दे की दूरी D = 1 m है। फ्रिंज चौड़ाई कितनी है?

β = λD/d = (600 × 10⁻⁹ × 1) / (0.5 × 10⁻³) = 1.2 mm। तीसरी दीप्त फ्रिंज केंद्र से y₃ = 3β = 3.6 mm दूर होगी।

उदाहरण 2: फ्रिंज चौड़ाई से तरंगदैर्ध्य

एक प्रयोग में मापी गई फ्रिंज चौड़ाई 0.75 mm, D = 1.5 m और d = 1 mm है। प्रकाश का तरंगदैर्ध्य कितना है?

सूत्र पलटें: λ = βd/D = (0.75 × 10⁻³ × 1 × 10⁻³) / 1.5 = 500 nm — यह हरे प्रकाश का तरंगदैर्ध्य है।

उदाहरण 3: झिरियों की दूरी आधी करने पर

उदाहरण 1 में d को आधा करके 0.25 mm किया गया। नई फ्रिंज चौड़ाई β′ = λD/(d/2) = 2.4 mm — ठीक दोगुनी। β और d व्युत्क्रमानुपाती हैं।

उदाहरण 4: दीप्त या अदीप्त?

λ = 600 nm पर दो बिंदुओं का पथांतर क्रमशः 1.5 µm और 1.8 µm है। हर बिंदु पर क्या होगा?

पहला बिंदु: Δ/λ = 2.5, अर्ध-पूर्णांक। कलांतर δ = (2π/λ)Δ = 5π रेडियन, जो π का विषम गुणज है — विनाशी व्यतिकरण, अदीप्त फ्रिंज।

दूसरा बिंदु: Δ/λ = 3, पूर्णांक। δ = 6π रेडियन, 2π का गुणज — संपोषी व्यतिकरण, दीप्त फ्रिंज।

उदाहरण 5: असमान आयाम

दो कला-संबद्ध तरंगों के आयाम 3 cm और 1 cm हैं। अधिकतम आयाम = 3 + 1 = 4 cm, न्यूनतम आयाम = 3 − 1 = 2 cm। तीव्रता आयाम के वर्ग के समानुपाती है, इसलिए Imax : Imin = 4² : 2² = 4 : 1।

कलांतर 60° हो तो A² = 3² + 1² + 2 × 3 × 1 × cos60° = 13, इसलिए A = 3.61 cm।

आम गलतियाँ

ये गलतियाँ पहले से जान लें तो परीक्षा में अंक बचेंगे।

  • β = λD/d में mm और nm एक साथ रख देना — पहले सब कुछ मीटर में बदलें।
  • सोचना कि अदीप्त फ्रिंज पर ऊर्जा नष्ट होती है — वह केवल पुनर्वितरित होती है।
  • सोचना कि d बढ़ाने पर फ्रिंज चौड़ी होती है — उलटा, d बढ़ने पर β घटती है।
  • दो अलग बल्बों से व्यतिकरण की उम्मीद — वे कला-संबद्ध नहीं हैं।
  • व्यतिकरण और विवर्तन को मिला देना — देखें, दो स्रोत हैं या एक तरंगाग्र।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यतिकरण

व्यतिकरण सिर्फ़ किताब की बात नहीं है, यह हमारे आसपास हर दिन हो रहा है।

  • साबुन के बुलबुले और तेल की परत: पतली परत की आगे और पीछे की सतह से परावर्तित प्रकाश व्यतिकरण करता है। अलग-अलग मोटाई पर अलग रंग प्रबल होते हैं, इसलिए इंद्रधनुषी रंग दिखते हैं।
  • चश्मे और कैमरा लेंस की परावर्तन-रोधी परत: एक बहुत पतली परत लगाई जाती है ताकि उसकी दोनों सतहों से परावर्तित प्रकाश विनाशी व्यतिकरण से एक-दूसरे को मिटा दे। परावर्तन घटता है और अधिक प्रकाश अंदर जाता है।
  • नॉइज़-कैंसलिंग हेडफ़ोन: माइक्रोफ़ोन बाहर का शोर सुनता है और हेडफ़ोन ठीक उलटी कला (180°) की ध्वनि बनाता है। दोनों का विनाशी व्यतिकरण होता है — इंजन या पंखे जैसी लगातार आवाज़ बहुत कम हो जाती है।
  • रेडियो और वाई-फ़ाई सिग्नल: दीवारों से परावर्तित सिग्नल सीधे सिग्नल से व्यतिकरण करता है, इसलिए कमरे के कुछ कोनों में सिग्नल कमज़ोर मिलता है।

परीक्षा कॉर्नर: CBSE कक्षा 12 और JEE/NEET

ये प्रश्न सबसे अधिक पूछे जाते हैं।

  • कला-संबद्ध स्रोत की परिभाषा दीजिए और बताइए कि दो स्वतंत्र स्रोत स्थायी व्यतिकरण पैटर्न क्यों नहीं बनाते।
  • पथांतर और कलांतर के रूप में संपोषी व विनाशी व्यतिकरण की शर्तें लिखिए।
  • दिए गए λ, D और d से फ्रिंज चौड़ाई ज्ञात कीजिए — इस पृष्ठ के मानों से β = 1.2 mm।
  • JEE/NEET: d आधा करने, पर्दा दूर करने या उपकरण को पानी में रखने पर फ्रिंज चौड़ाई में परिवर्तन; तथा Imax/Imin = (A₁ + A₂)²/(A₁ − A₂)² पर आधारित प्रश्न।
  • व्यतिकरण और विवर्तन में अंतर स्पष्ट कीजिए।

झटपट दोहराव

परीक्षा से पहले की रात बस यह भाग पढ़ लें, मुख्य बातें याद आ जाएँगी।

  • अध्यारोपण: y = y₁ + y₂।
  • व्यतिकरण के लिए कला-संबद्ध स्रोत चाहिए।
  • संपोषी: Δ = nλ, आयाम A₁ + A₂।
  • विनाशी: Δ = (2n + 1)λ/2, आयाम |A₁ − A₂|।
  • कलांतर δ = (2π/λ)Δ।
  • फ्रिंज चौड़ाई β = λD/d।
  • ऊर्जा नष्ट नहीं होती, पुनर्वितरित होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अध्यारोपण का सिद्धांत क्या है?

जब कई तरंगें एक साथ किसी बिंदु पर मिलती हैं, तो परिणामी विस्थापन अलग-अलग तरंगों के विस्थापनों के योग के बराबर होता है।

तरंगों का व्यतिकरण किसे कहते हैं?

दो कला-संबद्ध स्रोतों की तरंगों के अध्यारोपण से कुछ बिंदुओं पर परिणामी आयाम अधिकतम और कुछ पर न्यूनतम होने की घटना को व्यतिकरण कहते हैं।

संपोषी और विनाशी व्यतिकरण में क्या अंतर है?

संपोषी व्यतिकरण में पथांतर nλ होता है और आयाम A₁ + A₂ (दीप्त फ्रिंज); विनाशी में पथांतर (2n + 1)λ/2 होता है और आयाम |A₁ − A₂| (अदीप्त फ्रिंज)।

कला-संबद्ध स्रोत क्यों आवश्यक हैं?

केवल समान आवृत्ति और स्थिर कलांतर वाले स्रोत ही संपोषी और विनाशी बिंदुओं को एक जगह टिकाए रखते हैं। स्वतंत्र स्रोतों का पैटर्न इतनी तेज़ी से बदलता है कि केवल औसत प्रकाश दिखता है।

फ्रिंज चौड़ाई का सूत्र क्या है?

β = λD/d, जहाँ λ तरंगदैर्ध्य, D झिरियों से पर्दे की दूरी और d दोनों झिरियों के बीच की दूरी है।

व्यतिकरण और विवर्तन में क्या अंतर है?

व्यतिकरण में दो कला-संबद्ध स्रोतों की तरंगें मिलती हैं और फ्रिंज समान चौड़ी व समान चमकीली होती हैं; विवर्तन में एक ही तरंगाग्र के अलग भाग मिलते हैं, केंद्रीय फ्रिंज सबसे चौड़ी और बाकी धीरे-धीरे धुँधली होती हैं।

विनाशी व्यतिकरण में ऊर्जा कहाँ जाती है?

ऊर्जा संपोषी व्यतिकरण वाले स्थानों पर पहुँच जाती है। कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है — व्यतिकरण बस उसका पुनर्वितरण करता है।

इस विषय पर और पढ़ाई

एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।

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