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अवतल और उत्तल दर्पण: बिंब खिसकाएँ, प्रतिबिंब बनते देखें

गोलीय दर्पण किसी खोखले गोले का एक हिस्सा है जिसकी एक सतह परावर्तक बना दी गई हो। भीतर की ओर धँसी सतह परावर्तक हो तो अवतल दर्पण, जो समांतर किरणों को एक बिंदु पर मिलाता है; बाहर उभरी सतह परावर्तक हो तो उत्तल दर्पण, जो किरणों को फैलाता है। नीचे बिंब खिसकाकर प्रतिबिंब देखें।

बिंब के तीर को मुख्य अक्ष के साथ खींचें

बिंबआपतित किरणपरावर्तित किरणदर्पण के पीछे बढ़ाई रेखाप्रतिबिंबचिह्न परिपाटी: नई कार्तीय, दूरियाँ ध्रुव P से (1/v + 1/u = 1/f, m = −v/u)। u ऋणात्मक; अवतल दर्पण का f ऋणात्मक।
गति

नियंत्रण

दर्पण का प्रकार

30.0 cm
10.0 cm
5.0 cm

बिंब कहाँ रखें (अवतल दर्पण)

मापन

बिंब दूरी, u
-30.0cm
प्रतिबिंब दूरी, v
-15.0cm
फोकस दूरी, f
-10.0cm
वक्रता त्रिज्या, R
-20.0cm
आवर्धन, m = −v/u
-0.50
प्रतिबिंब की ऊँचाई, h′ = m × h
-2.5cm
प्रतिबिंब की प्रकृति
वास्तविक, उल्टा, छोटा

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. "दर्पण का प्रकार" में अवतल, उत्तल या समतल दर्पण चुनें। मुख्य अक्ष पर ध्रुव P, मुख्य फोकस F और वक्रता केंद्र C अंकित हैं।
  2. नीले बिंब-तीर को माउस या उँगली से मुख्य अक्ष के साथ खींचें, या "बिंब की दूरी" स्लाइडर चलाएँ।
  3. अवतल दर्पण में "बिंब कहाँ रखें" बटन दबाकर NCERT की छह स्थितियाँ एक क्लिक में देखें: अनंत, C से परे, C पर, F और C के बीच, F पर, F और P के बीच।
  4. "फोकस दूरी" स्लाइडर खिसकाने पर वक्रता त्रिज्या R = 2f अपने-आप बदलती है, इसलिए F और C साथ-साथ खिसकते हैं।
  5. नारंगी रेखाएँ आपतित किरणें और लाल रेखाएँ परावर्तित किरणें हैं। परावर्तित किरणें सचमुच दर्पण के सामने मिलें तो हरा प्रतिबिंब ठोस (वास्तविक), और केवल दर्पण के पीछे डैश वाली रेखाओं पर मिलें तो डैश (आभासी) बनता है।
  6. मापन पैनल में u, v, f, R, आवर्धन m और प्रतिबिंब की प्रकृति पढ़ें और नीचे हल किए गए प्रश्नों से मिलाएँ।

चम्मच में उल्टा चेहरा: दर्पण का रहस्य आपकी रसोई में

स्टील का एक चमकदार चम्मच उठाइए और उसके गड्ढे वाले भाग में झाँकिए। आपका चेहरा उल्टा दिखेगा, सिर नीचे और ठोड़ी ऊपर। अब चम्मच पलटकर उसकी पीठ में देखिए, चेहरा सीधा है पर छोटा और थोड़ा फैला हुआ। एक ही चम्मच, दो तरफ़ दो अलग तस्वीरें। वजह यह है कि चम्मच का भीतरी भाग अवतल दर्पण और पीठ उत्तल दर्पण की तरह काम करती है।

अब गड्ढे वाले भाग को धीरे-धीरे आँख के पास लाइए। एक जगह उल्टा चेहरा धुँधला हो जाएगा, और बहुत पास लाने पर बड़ा और सीधा चेहरा दिखने लगेगा। केवल दूरी बदलने से प्रतिबिंब उल्टे से सीधा हो गया। यही बात इस पूरे पेज की कहानी है, और ऊपर का सिमुलेशन आपको यही प्रयोग क़दम-दर-क़दम करने देता है।

घुमावदार दर्पण हर जगह हैं। बस, कार और बाइक का पीछे देखने वाला शीशा उत्तल दर्पण है। दंत चिकित्सक का छोटा दर्पण, दाढ़ी बनाने या मेकअप का दर्पण और टॉर्च के बल्ब के पीछे की चमकीली कटोरी अवतल दर्पण हैं। कुछ आसान नियम जान लें, तो पेंसिल और रूलर से आप बता सकते हैं कि इनमें से कोई भी दर्पण प्रतिबिंब कहाँ बनाएगा, सीधा या उल्टा, बड़ा या छोटा।

शुरुआत से: परावर्तन के दो नियम

जब प्रकाश किसी चिकनी, चमकदार सतह से टकराकर उसी माध्यम में लौट आता है, तो इसे प्रकाश का परावर्तन कहते हैं। घर का दर्पण काँच की एक परत है जिसके पीछे चाँदी या एल्युमिनियम की पतली परत चढ़ी होती है; यही परत प्रकाश को रोककर वापस भेजती है।

परावर्तन के दो नियम हैं और गोलीय दर्पण भी इन्हें ठीक समतल दर्पण की तरह मानते हैं। पहला: आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अभिलंब, तीनों एक ही तल में होते हैं। दूसरा: आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है, ∠i = ∠r।

घुमावदार दर्पण में बस एक दिक़्क़त है: हर बिंदु पर अभिलंब की दिशा अलग है। यहाँ ज्यामिति मदद करती है। गोले के किसी भी बिंदु पर अभिलंब हमेशा गोले के केंद्र से होकर जाता है। इसलिए वक्रता केंद्र से दर्पण के किसी बिंदु तक खींची रेखा ही उस बिंदु का अभिलंब है। इस पेज के सारे नियम इसी एक तथ्य से निकलते हैं।

रबर की एक खोखली गेंद का एक टुकड़ा काटिए। टुकड़े का भीतरी भाग चमकाया जाए तो अवतल दर्पण, बाहरी भाग चमकाया जाए तो उत्तल दर्पण। अवतल दर्पण समांतर किरणों को एक बिंदु पर मिलाता है, इसलिए इसे अभिसारी दर्पण कहते हैं। उत्तल दर्पण समांतर किरणों को फैला देता है, इसलिए इसे अपसारी दर्पण कहते हैं।

गोलीय दर्पण के ज़रूरी शब्द

किरण आरेख बनाने से पहले शब्द साफ़ कर लें। CBSE बोर्ड के एक-अंक वाले "परिभाषित करें" प्रश्न सीधे इसी तालिका से आते हैं, और सिमुलेशन का हर चिह्न भी यही है।

शब्दचिह्नआसान भाषा में अर्थ
ध्रुवPपरावर्तक सतह का केंद्र; सारी दूरियाँ यहीं से मापी जाती हैं
वक्रता केंद्रCउस खोखले गोले का केंद्र जिसका दर्पण एक भाग है
वक्रता त्रिज्याRउस गोले की त्रिज्या, यानी ध्रुव से वक्रता केंद्र की दूरी PC
मुख्य अक्ष—P और C से होकर जाने वाली सीधी रेखा (चित्र की क्षैतिज रेखा)
मुख्य फोकसFमुख्य अक्ष के समांतर किरणें परावर्तन के बाद जहाँ मिलती हैं (अवतल) या जहाँ से आती प्रतीत होती हैं (उत्तल)
फोकस दूरीfध्रुव से मुख्य फोकस की दूरी PF; f = R/2
द्वारक—परावर्तक सतह का व्यास, यानी दर्पण कितना चौड़ा है
वास्तविक प्रतिबिंब—जहाँ परावर्तित किरणें सचमुच मिलती हैं; पर्दे पर लिया जा सकता है
आभासी प्रतिबिंब—जहाँ परावर्तित किरणें केवल मिलती प्रतीत होती हैं (दर्पण के पीछे); पर्दे पर नहीं आता
आवर्धनmप्रतिबिंब की ऊँचाई और बिंब की ऊँचाई का अनुपात, m = h′/h

फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी क्यों: f = R/2

एक अवतल दर्पण लीजिए और मुख्य अक्ष के समांतर एक किरण जो दर्पण के बिंदु M पर गिरती है। CM रेखा M पर अभिलंब है, क्योंकि गोले की त्रिज्या सतह पर हमेशा लंब होती है। आपतन कोण को θ मान लीजिए।

आपतित किरण मुख्य अक्ष के समांतर है और CM दोनों को काटती है, इसलिए एकांतर कोण ∠MCP भी θ है। परावर्तन के नियम से परावर्तित किरण भी CM से θ कोण बनाती है और मुख्य अक्ष को F पर काटती है। अब त्रिभुज FMC के दो कोण बराबर हैं, यानी यह समद्विबाहु है और FM = FC।

छोटे द्वारक वाले दर्पण में M ध्रुव के बहुत पास होता है, इसलिए FM ≈ FP। तब FP = FC, यानी F ठीक P और C के बीच में है। अतः PF = PC/2, या f = R/2। उत्तल दर्पण में भी यही तर्क चलता है, बस F और C दोनों दर्पण के पीछे होते हैं।

f = R/2 या R = 2fछोटे द्वारक वाले गोलीय दर्पण के लिए

|f| = 10 cm हो तो |R| = 20 cmसिमुलेशन का डिफ़ॉल्ट दर्पण

किरण आरेख के चार आसान नियम

बिंब के सिरे से अनगिनत किरणें निकलती हैं, पर प्रतिबिंब ढूँढ़ने के लिए कोई भी दो किरणें काफ़ी हैं। जहाँ दो परावर्तित किरणें मिलें (या मिलती प्रतीत हों), वहीं सिरे का प्रतिबिंब बनता है। नीचे की चार किरणों का रास्ता हम पहले से जानते हैं, इसलिए आरेख इन्हीं से बनाया जाता है।

नियम 1: मुख्य अक्ष के समांतर किरण फोकस से होकर जाती है

अवतल दर्पण में मुख्य अक्ष के समांतर किरण परावर्तन के बाद मुख्य फोकस से होकर जाती है। उत्तल दर्पण में वही किरण ऐसे लौटती है मानो दर्पण के पीछे वाले फोकस से आ रही हो। सिमुलेशन में बिंब के सिरे से सीधी क्षैतिज निकलने वाली किरण यही है।

नियम 2: फोकस से होकर आने वाली किरण समांतर लौटती है

अवतल दर्पण में मुख्य फोकस से होकर आने वाली किरण परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समांतर लौटती है। यह नियम 1 का उल्टा रास्ता है, क्योंकि प्रकाश का पथ उत्क्रमणीय होता है। उत्तल दर्पण में पीछे वाले फोकस की ओर जाती किरण समांतर होकर लौटती है।

नियम 3: वक्रता केंद्र से होकर आने वाली किरण उसी रास्ते लौटती है

C से होकर जाने वाली किरण दर्पण पर अभिलंब की दिशा में गिरती है, इसलिए आपतन कोण शून्य है और किरण उसी रास्ते वापस लौट जाती है। उत्तल दर्पण में पीछे वाले C की ओर जाने वाली किरण भी उसी रास्ते लौटती है।

नियम 4: ध्रुव पर गिरने वाली किरण बराबर कोण पर लौटती है

ध्रुव पर मुख्य अक्ष ही अभिलंब है। इसलिए P पर तिरछी गिरने वाली किरण मुख्य अक्ष के दूसरी ओर बराबर कोण बनाकर परावर्तित होती है, ठीक वैसे जैसे गेंद फ़र्श से टप्पा खाती है। इसी किरण से आवर्धन m = h′/h = −v/u आसानी से सिद्ध होता है।

अवतल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब: बिंब की छह स्थितियाँ

यह तालिका इस अध्याय में सबसे ज़्यादा पूछी जाती है। अंतिम स्तंभ के मान नई कार्तीय चिह्न परिपाटी में f = -10 cm (R = -20 cm) वाले अवतल दर्पण के लिए दर्पण सूत्र से निकाले गए हैं। सिमुलेशन में "बिंब कहाँ रखें" बटन दबाकर हर पंक्ति मिलाएँ।

बिंब की स्थितिप्रतिबिंब की स्थितिप्रतिबिंब का साइज़ और प्रकृतिउदाहरण (f = -10 cm)
अनंत परF परवास्तविक, उल्टा, अत्यधिक छोटा (बिंदु के आकार का)u → −∞, v = f = -10
C से परेF और C के बीचवास्तविक, उल्टा, छोटाu = -30, v = -15, m = -0.50
C परC परवास्तविक, उल्टा, समान साइज़u = -20, v = -20, m = -1
C और F के बीचC से परेवास्तविक, उल्टा, आवर्धितu = -15, v = -30, m = -2
F परअनंत परअत्यधिक आवर्धित (परावर्तित किरणें समांतर)प्रतिबिंब अनंत पर
P और F के बीचदर्पण के पीछेआभासी, सीधा, आवर्धितu = -6, v = 15, m = 2.50

उत्तल और समतल दर्पण: हमेशा एक जैसा उत्तर

उत्तल दर्पण के सामने बिंब कहीं भी रखें, प्रतिबिंब हमेशा दर्पण के पीछे, P और F के बीच, आभासी, सीधा और छोटा बनता है। बिंब जितना दूर जाता है, प्रतिबिंब उतना छोटा होकर F की ओर खिसकता है, पर F को कभी पार नहीं करता। नीचे की तालिका f = +15 cm वाले उत्तल दर्पण के लिए नई कार्तीय परिपाटी में निकाली गई है।

इसीलिए वाहनों में पीछे देखने के लिए उत्तल दर्पण लगाए जाते हैं: छोटा प्रतिबिंब होने से छोटे-से दर्पण में पीछे का बहुत बड़ा क्षेत्र दिखता है, यानी दृष्टि-क्षेत्र बड़ा होता है, और प्रतिबिंब हमेशा सीधा होता है। कमी यह है कि चीज़ें असल से ज़्यादा दूर लगती हैं, इसलिए कई साइड मिरर पर लिखा होता है कि दर्पण में दिख रही वस्तुएँ असल में ज़्यादा पास हैं।

समतल दर्पण को ऐसा गोलीय दर्पण मान सकते हैं जिसकी वक्रता त्रिज्या अनंत है, इसलिए फोकस दूरी भी अनंत। दर्पण सूत्र में 1/f = 0 रखने पर v = −u आता है: प्रतिबिंब दर्पण के ठीक उतना पीछे जितना बिंब सामने है, और m = +1, यानी आभासी, सीधा और समान साइज़। सिमुलेशन में "समतल दर्पण" चुनकर देखें कि डैश वाली रेखाएँ बिंब के ठीक जुड़वाँ बिंदु पर मिलती हैं।

बिंब दूरी u (cm)प्रतिबिंब दूरी v (cm)आवर्धन m = −v/u
-1060.60
-30100.33
-60120.20

दर्पण सूत्र: 1/v + 1/u = 1/f

किरण आरेख से प्रतिबिंब की लगभग जगह पता चलती है; सटीक दूरी दर्पण सूत्र बताता है। यहाँ u बिंब दूरी, v प्रतिबिंब दूरी और f फोकस दूरी है, तीनों ध्रुव से मापी गईं।

NCERT नई कार्तीय चिह्न परिपाटी मानता है। ध्रुव मूल बिंदु है और बिंब हमेशा दर्पण के बाईं ओर रखा जाता है, जिससे आपतित प्रकाश बाएँ से दाएँ चलता है। आपतित प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरियाँ धनात्मक और उल्टी दिशा में ऋणात्मक; मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाई धनात्मक और नीचे की ऋणात्मक।

बिंब हमेशा दर्पण के सामने होता है, इसलिए u सदा ऋणात्मक है। अवतल दर्पण का फोकस सामने है, इसलिए उसकी f ऋणात्मक; उत्तल दर्पण का फोकस पीछे है, इसलिए उसकी f धनात्मक। दर्पण के सामने बने वास्तविक प्रतिबिंब का v ऋणात्मक और पीछे बने आभासी प्रतिबिंब का v धनात्मक होता है।

आवर्धन m = h′/h = −v/u। m ऋणात्मक हो तो प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा, धनात्मक हो तो आभासी और सीधा। |m| > 1 हो तो आवर्धित, |m| < 1 हो तो छोटा। ऊपर का मापन पैनल ठीक इन्हीं चिह्नों में मान दिखाता है।

1/v + 1/u = 1/fदर्पण सूत्र (नई कार्तीय परिपाटी)

m = h′/h = −v/uआवर्धन; ऋणात्मक → वास्तविक और उल्टा

v = uf/(u − f)सूत्र को v के लिए सीधे हल किया गया रूप

सूत्र कहाँ से आता है (संक्षेप में)

बिंब AB को C से परे रखें और प्रतिबिंब A′B′ मानें। ध्रुव पर गिरने वाली किरण से दो समरूप त्रिभुज मिलते हैं, जिनसे A′B′/AB = PB′/PB। C से होकर जाने वाली किरण से दूसरा जोड़ा मिलता है, जिससे A′B′/AB = CB′/CB = (PC − PB′)/(PB − PC)।

अब कार्तीय चिह्न रखें, PB = −u, PB′ = −v, PC = −R, और तिर्यक गुणा करके सरल करें: 2uv = R(u + v)। दोनों ओर uvR से भाग देने और R = 2f रखने पर 1/v + 1/u = 2/R = 1/f मिलता है। हर राशि अपना चिह्न साथ रखती है, इसलिए यही एक सूत्र अवतल और उत्तल, वास्तविक और आभासी सभी स्थितियों पर लागू होता है।

दूसरी परिपाटी: वास्तविक धनात्मक (1/u + 1/v = 1/f)

बांग्लादेश का NCTB पाठ्यक्रम और कुछ पुरानी किताबें "वास्तविक धनात्मक" परिपाटी मानती हैं: वास्तविक बिंब और वास्तविक प्रतिबिंब की दूरियाँ धनात्मक, आभासी प्रतिबिंब की ऋणात्मक, अवतल दर्पण की f धनात्मक, उत्तल की ऋणात्मक, और आवर्धन m = v/u।

उस परिपाटी में नीचे का प्रश्न 1 ऐसे लिखा जाएगा: u = 30 cm, f = 10 cm, v = 15 cm, m = 0.50। मान वही हैं, केवल चिह्न और m के चिह्न का अर्थ बदलता है। CBSE, JEE और NEET में नई कार्तीय परिपाटी ही लिखें और एक प्रश्न के बीच में कभी परिपाटी न बदलें।

सिमुलेशन में ये करके देखें

ये प्रयोग एक-एक करके करें और हर बार ख़ुद से पूछें, "ऐसा क्यों हुआ?"

प्रयोग 1: प्रतिबिंब का पीछा

10 cm फोकस दूरी वाला अवतल दर्पण रखकर बिंब को बिल्कुल बाईं ओर से धीरे-धीरे दर्पण की ओर खींचें। हरा उल्टा प्रतिबिंब F के पास से शुरू होकर C पार करता हुआ बाईं ओर भागता है और बड़ा होता जाता है। बिंब F पर पहुँचे तो प्रतिबिंब अनंत में खो जाता है, और F के अंदर आते ही दर्पण के पीछे डैश वाला सीधा प्रतिबिंब दिखता है।

प्रयोग 2: समान साइज़ वाला बिंदु

"C पर" बटन दबाएँ। पैनल में u = -20 cm, v = -20 cm और m = -1 दिखेगा: बिंब और प्रतिबिंब एक ही जगह हैं, बस प्रतिबिंब उल्टा है। फोकस दूरी बदलकर बिंब को फिर C पर रखें और देखें कि नतीजा बदलता है या नहीं।

प्रयोग 3: ज़िद्दी उत्तल दर्पण

"उत्तल दर्पण" चुनकर बिंब को कहीं भी खींचें। प्रतिबिंब कभी दर्पण के सामने नहीं आएगा, कभी उल्टा नहीं होगा, कभी बिंब से बड़ा नहीं होगा। आवर्धन हमेशा धनात्मक और 1 से कम रहेगा।

प्रयोग 4: समतल दर्पण

"समतल दर्पण" चुनकर बिंब खिसकाएँ। पैनल में हमेशा v = −u और m = 1 दिखेगा: प्रतिबिंब दर्पण के उतना पीछे जितना बिंब सामने, और साइज़ कभी नहीं बदलता।

प्रयोग 5: दाढ़ी बनाने का दर्पण डिज़ाइन करें

अवतल दर्पण में बिंब को F और P के बीच रखें, फिर फोकस दूरी बढ़ाएँ। एक ही बिंब दूरी पर लंबी फोकस दूरी वाला दर्पण कम आवर्धन देता है, और बिंब F के जितना पास हो, सीधा प्रतिबिंब उतना बड़ा। इसीलिए मेकअप दर्पण चेहरे के काफ़ी पास पकड़ा जाता है।

हल किए गए प्रश्न (नई कार्तीय परिपाटी)

हर प्रश्न में पहले दी गई राशियाँ चिह्न सहित लिखें, फिर सूत्र, फिर मान रखें। प्रश्न 1 सिमुलेशन की डिफ़ॉल्ट स्थिति है, इसलिए पेज खुलते ही पैनल में यही उत्तर दिखता है।

प्रश्न 1: 10 cm फोकस दूरी के अवतल दर्पण से 30 cm दूर बिंब

दिया है u = -30 cm, f = -10 cm (अवतल)। 1/v = 1/f − 1/u = −1/10 + 1/30 = −1/15, इसलिए v = -15 cm।

आवर्धन m = −v/u = −(-15)/(-30) = -0.50। v ऋणात्मक है, इसलिए प्रतिबिंब दर्पण के सामने, वास्तविक; m ऋणात्मक, इसलिए उल्टा; |m| < 1, इसलिए छोटा। बिंब C से परे और प्रतिबिंब F और C के बीच, ठीक तालिका की तरह।

प्रश्न 2: बिंब वक्रता केंद्र पर (20 cm)

R = 2f, इसलिए C ध्रुव से 20 cm पर है। u = -20 cm: 1/v = −1/10 + 1/20, इसलिए v = -20 cm और m = -1। प्रतिबिंब C पर, वास्तविक, उल्टा और बिल्कुल समान साइज़ का।

प्रश्न 3: बिंब F और C के बीच (15 cm)

u = -15 cm: 1/v = −1/10 + 1/15, इसलिए v = -30 cm और m = -2। प्रतिबिंब C से परे, वास्तविक, उल्टा और आवर्धित। दीवार पर बड़ी उल्टी तस्वीर डालनी हो तो बिंब यहीं रखना होगा।

प्रश्न 4: दाढ़ी बनाने का दर्पण, चेहरा 6 cm दूर

अब u = -6 cm, फोकस से भी पास। 1/v = −1/10 + 1/6 धनात्मक है, इसलिए v = +15 cm।

धनात्मक v का अर्थ है प्रतिबिंब दर्पण के पीछे, यानी आभासी। m = −v/u = 2.50: धनात्मक, इसलिए सीधा; 1 से बड़ा, इसलिए आवर्धित। दाढ़ी बनाते समय चेहरा बड़ा और सीधा इसी कारण दिखता है।

प्रश्न 5: वाहन का उत्तल दर्पण, f = +15 cm, बिंब 30 cm दूर

दिया है u = -30 cm, f = +15 cm (उत्तल)। 1/v = 1/15 + 1/30, इसलिए v = +10 cm।

प्रतिबिंब आभासी, दर्पण के पीछे, F से भी पास। m = 0.33: सीधा और छोटा। सिमुलेशन में उत्तल दर्पण, |f| = 15 cm और बिंब 30 cm रखकर मिलाएँ।

प्रश्न 6: पर्दे के प्रतिबिंब से फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या

प्रयोगशाला में अवतल दर्पण से 36 cm दूर मोमबत्ती रखने पर दर्पण के सामने 18 cm दूर पर्दे पर स्पष्ट प्रतिबिंब मिला। पर्दे पर आया, इसलिए वास्तविक और सामने: u = -36 cm, v = -18 cm।

1/f = 1/v + 1/u = −1/18 − 1/36, इसलिए f = -12 cm और R = 2f = -24 cm। ऋणात्मक चिह्न पुष्टि करता है कि दर्पण अवतल है। CBSE प्रायोगिक परीक्षा में "अवतल दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात करना" इसी तरह होता है।

प्रश्न 7: प्रतिबिंब कितना ऊँचा है?

प्रश्न 3 का बिंब 2 cm ऊँचा हो तो प्रतिबिंब की ऊँचाई h′ = m × h = -2 × 2 = -4 cm। ऋण चिह्न बताता है कि प्रतिबिंब उल्टा, मुख्य अक्ष के नीचे है। सिमुलेशन में बिंब की ऊँचाई 2 cm और दूरी 15 cm रखकर प्रतिबिंब की ऊँचाई वाला खाना देखें।

प्रश्न 8: दंत चिकित्सक को 3 गुना बड़ा सीधा प्रतिबिंब चाहिए

f = -10 cm वाले अवतल दर्पण से दाँत का 3 गुना बड़ा सीधा प्रतिबिंब चाहिए। सीधा यानी आभासी, इसलिए m = +3, जिससे v = −3u।

सूत्र में रखें: 1/(−3u) + 1/u = −1/10। सरल करने पर u = -6.67 cm और v = +20 cm, यानी प्रतिबिंब दर्पण के 20 cm पीछे। दर्पण को दाँत से फोकस दूरी से थोड़ा कम दूरी पर पकड़ना होता है।

प्रश्न 9: समतल दर्पण से 1.50 m दूर खड़े होना

प्रतिबिंब दर्पण के 1.50 m पीछे है, इसलिए आपके और आपके प्रतिबिंब के बीच 3 m दूरी है। 0.50 m आगे बढ़ें तो दूरी 2 m रह जाती है: प्रतिबिंब आपकी ओर 1 m पास आया, आपके चले क़दमों का दोगुना।

अवतल और उत्तल दर्पण में अंतर

"अंतर लिखिए" वाले प्रश्नों के लिए पूरी तुलना एक नज़र में:

आधारअवतल दर्पणउत्तल दर्पण
परावर्तक सतहगोले का भीतरी (धँसा) भागगोले का बाहरी (उभरा) भाग
प्रकाश पर प्रभावअभिसारीअपसारी
F और Cदर्पण के सामने, वास्तविकदर्पण के पीछे, आभासी
f का चिह्न (कार्तीय)ऋणात्मकधनात्मक
प्रतिबिंबबिंब की स्थिति के अनुसार वास्तविक या आभासीहमेशा आभासी, सीधा, छोटा
उपयोगदाढ़ी व मेकअप दर्पण, दंत चिकित्सक का दर्पण, टॉर्च व हेडलाइट, सौर भट्ठीवाहनों के पश्च-दृश्य दर्पण, सड़क मोड़ के दर्पण, दुकानों के सुरक्षा दर्पण

आम ग़लतियाँ

परीक्षक ये ग़लतियाँ बार-बार देखते हैं। अपने उत्तरों में इन्हें ढूँढ़ें।

  • u का चिह्न भूल जाना। नई कार्तीय परिपाटी में बिंब दूरी हमेशा ऋणात्मक होती है, क्योंकि बिंब दर्पण के सामने है।
  • अवतल दर्पण की f धनात्मक लिखना। अवतल दर्पण की f ऋणात्मक और उत्तल की धनात्मक होती है।
  • R और f में उलझना: प्रश्न में वक्रता त्रिज्या दी हो तो पहले उसे आधा करें।
  • दर्पण के पीछे वाला भाग ठोस रेखा से बनाना। हर आभासी रेखा और आभासी प्रतिबिंब डैश से बनता है।
  • किरणों पर तीर न लगाना या उल्टी दिशा में लगाना। प्रकाश बिंब से दर्पण की ओर जाता है और फिर दर्पण से लौटता है।
  • बिंब F पर हो तो प्रतिबिंब "F पर" लिखना। वास्तव में परावर्तित किरणें समांतर होती हैं और प्रतिबिंब अनंत पर बनता है।
  • दर्पण के लिए m = v/u लिखना। दर्पण में कार्तीय आवर्धन m = −v/u है, लेंस की तरह m = v/u नहीं।

दैनिक जीवन में गोलीय दर्पण

दाढ़ी बनाने और मेकअप के दर्पण: लंबी फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण। चेहरा F के अंदर रहता है, इसलिए सीधा और बड़ा प्रतिबिंब दिखता है जिसमें हर छोटी बात साफ़ नज़र आती है।

दंत चिकित्सक का दर्पण: हैंडल वाला छोटा अवतल दर्पण दाँत के पास रखा जाता है, जिससे दाँत का सीधा और आवर्धित प्रतिबिंब दिखता है। ENT डॉक्टर माथे पर जो गोल दर्पण पहनते हैं, वह भी अवतल है; वह प्रकाश को एक जगह केंद्रित करके कान या गले के अंदर रोशनी डालता है।

टॉर्च, वाहनों की हेडलाइट और सर्चलाइट: बल्ब अवतल परावर्तक के मुख्य फोकस पर रखा होता है। F से आने वाली किरणें परावर्तन के बाद समांतर हो जाती हैं (नियम 2), इसलिए प्रकाश फैलने के बजाय शक्तिशाली समांतर किरण-पुंज बनकर दूर तक जाता है।

सौर कुकर और सौर भट्ठी: बड़े अवतल दर्पण सूर्य की समांतर किरणों को फोकस पर केंद्रित करते हैं, जहाँ रखा काला बर्तन खाना पकाने लायक़ गर्म हो जाता है।

पश्च-दृश्य दर्पण: उत्तल दर्पण सीधा और छोटा प्रतिबिंब देता है, इसलिए छोटे दर्पण में पीछे की सड़क का बड़ा भाग दिखता है।

सड़क मोड़ और दुकानों के सुरक्षा दर्पण: पहाड़ी सड़कों के अंधे मोड़ों पर और सुपरमार्केट के कोनों में बड़े उत्तल दर्पण लगाए जाते हैं, ताकि मोड़ के पार आती गाड़ी या पूरी दुकान एक साथ दिख सके।

गोलीय विपथन और परवलयिक दर्पण (संक्षेप में)

f = R/2 नियम केवल छोटे द्वारक वाले दर्पणों के लिए सटीक है। चौड़े गोलीय दर्पण में किनारे के पास गिरने वाली समांतर किरणें F से थोड़ा पहले, दर्पण के पास, मुख्य अक्ष को काटती हैं। किरणें एक बिंदु पर न मिलकर एक छोटे क्षेत्र में फैल जाती हैं और प्रतिबिंब धुँधला हो जाता है। इस दोष को गोलीय विपथन कहते हैं।

इससे बचने के लिए टॉर्च, हेडलाइट, डिश एंटीना और बड़ी दूरबीनों में गोलीय के बजाय परवलयिक दर्पण लगते हैं। परवलय की विशेषता है कि अक्ष के समांतर हर किरण, किनारे की हो या बीच की, ठीक एक ही फोकस से होकर जाती है। NCERT की तरह यह सिमुलेशन भी छोटा द्वारक मानता है, इसलिए इसमें किरणें बिल्कुल एक बिंदु पर मिलती हैं।

परीक्षा कोना: CBSE बोर्ड, JEE और NEET

कक्षा 10 विज्ञान के "प्रकाश: परावर्तन तथा अपवर्तन" अध्याय से गोलीय दर्पण के प्रश्न हर साल आते हैं, और कक्षा 12 के "किरण प्रकाशिकी" में यही सूत्र फिर लगते हैं। JEE Main और NEET में इन पर चिह्न परिपाटी वाले तेज़ संख्यात्मक प्रश्न आते हैं। प्रश्न आमतौर पर इन ढाँचों में होते हैं:

  • परिभाषा (1 अंक): ध्रुव, वक्रता केंद्र, वक्रता त्रिज्या, मुख्य फोकस, फोकस दूरी, द्वारक, आवर्धन।
  • किरण आरेख (2–3 अंक): बिंब F और C के बीच या P और F के बीच हो तो प्रतिबिंब बनना दिखाइए और उसकी प्रकृति लिखिए।
  • संख्यात्मक (3 अंक): u और f (या R) दिए हों तो v, m और प्रतिबिंब की ऊँचाई सही चिह्नों के साथ ज्ञात कीजिए, जैसे ऊपर प्रश्न 1 से 8।
  • उपयोग (2 अंक): हेडलाइट, दाढ़ी के दर्पण या पश्च-दृश्य दर्पण में कौन सा दर्पण और क्यों।
  • JEE/NEET: f = R/2 की उत्पत्ति, बिंब के खिसकने पर प्रतिबिंब की गति, और m के चिह्न से प्रतिबिंब की प्रकृति पहचानना।

एक नज़र में रिवीज़न

परीक्षा से पहली रात केवल यही भाग पढ़ें, तो भी मुख्य बातें याद आ जाएँगी।

  • अवतल दर्पण अभिसारी, उत्तल दर्पण अपसारी; समतल दर्पण की फोकस दूरी अनंत।
  • f = R/2: फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी।
  • चार किरणें: समांतर → F से; F से → समांतर; C से → उसी रास्ते वापस; P पर → बराबर कोण पर दूसरी ओर।
  • दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f (कार्तीय, u ऋणात्मक); आवर्धन m = h′/h = −v/u।
  • अवतल दर्पण: बिंब F से परे → वास्तविक और उल्टा; P और F के बीच → आभासी, सीधा, आवर्धित।
  • बिंब C पर → C पर समान साइज़ का प्रतिबिंब; बिंब F पर → प्रतिबिंब अनंत पर।
  • उत्तल दर्पण → प्रतिबिंब सदा आभासी, सीधा, छोटा, P और F के बीच।
  • सिमुलेशन डिफ़ॉल्ट: f = -10 cm, u = -30 cm → v = -15 cm, m = -0.50।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अवतल दर्पण किसे कहते हैं?

जिस गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह गोले के भीतर की ओर धँसी हो, उसे अवतल दर्पण कहते हैं। यह मुख्य अक्ष के समांतर किरणों को परावर्तन के बाद मुख्य फोकस पर मिलाता है, इसलिए इसे अभिसारी दर्पण भी कहते हैं।

उत्तल दर्पण किसे कहते हैं?

जिस गोलीय दर्पण की परावर्तक सतह बाहर की ओर उभरी हो, उसे उत्तल दर्पण कहते हैं। यह समांतर किरणों को ऐसे फैलाता है मानो वे दर्पण के पीछे के फोकस से आ रही हों, इसलिए इसे अपसारी दर्पण कहते हैं।

वक्रता त्रिज्या और फोकस दूरी में क्या संबंध है?

छोटे द्वारक वाले गोलीय दर्पण की फोकस दूरी उसकी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है, f = R/2। जैसे R = 20 cm हो तो f = 10 cm।

अवतल दर्पण आभासी प्रतिबिंब कब बनाता है?

केवल तब, जब बिंब ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच हो। तब प्रतिबिंब दर्पण के पीछे, सीधा और आवर्धित बनता है। दाढ़ी बनाने का दर्पण इसी सिद्धांत पर काम करता है।

क्या उत्तल दर्पण वास्तविक प्रतिबिंब बना सकता है?

वास्तविक बिंब का नहीं। बिंब कहीं भी हो, उत्तल दर्पण सदा दर्पण के पीछे P और F के बीच आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।

वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण क्यों लगाते हैं?

क्योंकि यह सदा सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे छोटे-से दर्पण में पीछे का बहुत बड़ा क्षेत्र दिखता है। इसका दृष्टि-क्षेत्र उतने ही बड़े समतल दर्पण से कहीं अधिक होता है।

आवर्धन ऋणात्मक हो तो क्या अर्थ है?

नई कार्तीय परिपाटी में m = −v/u ऋणात्मक हो तो प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा है, धनात्मक हो तो आभासी और सीधा। "वास्तविक धनात्मक" परिपाटी (m = v/u) में चिह्न का अर्थ ठीक उल्टा हो जाता है।

बिंब वक्रता केंद्र पर हो तो प्रतिबिंब कहाँ बनता है?

वक्रता केंद्र पर ही: वास्तविक, उल्टा और समान साइज़ का। f = -10 cm और u = -20 cm हो तो v = -20 cm और m = -1।

टॉर्च और हेडलाइट में कौन सा दर्पण लगता है?

अवतल दर्पण (असल में परवलयिक)। बल्ब उसके फोकस पर रखा जाता है, इसलिए परावर्तित प्रकाश समांतर किरण-पुंज बनकर बिना फैले दूर तक जाता है।

दर्पण सूत्र में बिंब दूरी ऋणात्मक क्यों ली जाती है?

नई कार्तीय परिपाटी में दूरियाँ ध्रुव से मापी जाती हैं और आपतित प्रकाश की दिशा धनात्मक मानी जाती है। बिंब हमेशा दर्पण के सामने, इस दिशा के विपरीत होता है, इसलिए u ऋणात्मक आता है।

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एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।

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