स्लाइडर खिसकाएँ: प्रोटॉन बदलने से तत्व, न्यूट्रॉन से समस्थानिक, इलेक्ट्रॉन से आयन बदलता है
नियंत्रण
तैयार उदाहरण
मापन
- तत्व
- सोडियम (Na)
- परमाणु संख्या, Z
- 11
- द्रव्यमान संख्या, A = Z + N
- 23
- कुल आवेश
- 0
- कण का प्रकार
- उदासीन परमाणु
- समस्थानिक
- सोडियम-23 · स्थायी
- कोशों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
- 2, 8, 1
- उपकोशों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
- 1s² 2s² 2p⁶ 3s¹
- संयोजकता इलेक्ट्रॉन
- 1
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- "प्रोटॉन संख्या" स्लाइडर खिसकाइए: हर नया प्रोटॉन परमाणु को दूसरे तत्व में बदल देता है (सोडियम से मैग्नीशियम), और नया तत्व अपने सबसे सामान्य उदासीन रूप में आता है।
- अब सिर्फ़ "न्यूट्रॉन संख्या" बदलिए: नाम वही रहता है, द्रव्यमान संख्या बदलती है। यही समस्थानिक है, और मापन पैनल बताएगा कि वह स्थायी है या रेडियोधर्मी।
- एक "इलेक्ट्रॉन" घटाइए या जोड़िए: नाभिक वही रहता है पर परमाणु आयन बन जाता है। Na⁺ और Cl⁻ के तैयार उदाहरण दबाकर तुलना कीजिए।
- कोशों पर ध्यान दीजिए: K में अधिकतम 2, L में 8 और पहले 20 तत्वों में M में 8 इलेक्ट्रॉन आते हैं। सबसे बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन ही संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं।
- गति 0.25× करके इलेक्ट्रॉनों को धीरे देखिए। याद रखिए, यह बोर मॉडल का चित्र है; असली इलेक्ट्रॉन ग्रहों की तरह तय रास्ते पर नहीं, कक्षकों में "बादल" की तरह फैले होते हैं।
आपके हाथ के पेन से आसमान के तारों तक: सब परमाणु
चीनी का एक दाना लीजिए। उसे तोड़िए, फिर तोड़िए, और छोटा कीजिए। कहाँ तक तोड़ सकते हैं? लगभग ढाई हज़ार साल पहले यूनानी दार्शनिक डेमोक्रिटस ने सोचा कि आख़िर में ऐसा कण आएगा जिसे और नहीं तोड़ा जा सकता। उन्होंने उसे "एटमॉस" कहा, यानी अविभाज्य। भारत में महर्षि कणाद ने भी इसी तरह "परमाणु" की कल्पना की थी।
आपका शरीर, पानी, हवा, मोबाइल की स्क्रीन, आसमान के तारे, सब कुछ परमाणुओं से बना है। केवल 118 तरह के परमाणु (तत्व) अलग-अलग तरीकों से जुड़कर दुनिया के सारे पदार्थ बनाते हैं, जैसे वर्णमाला के कुछ अक्षरों से लाखों शब्द बनते हैं।
मज़े की बात यह है कि परमाणु असल में अविभाज्य नहीं है। उसके भीतर तीन और छोटे कण हैं: प्रोटॉन, न्यूट्रॉन और इलेक्ट्रॉन। इन तीनों की संख्या और व्यवस्था ही तय करती है कि परमाणु सोना बनेगा या ऑक्सीजन, और वह दूसरों से बंध बनाएगा या अकेला रहेगा। ऊपर के सिमुलेशन में आप ये कण जोड़-घटाकर खुद परमाणु बना सकते हैं।
बिल्कुल शुरू से: परमाणु किसे कहते हैं
परिभाषा: किसी तत्व का वह सबसे छोटा कण जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग ले सकता है, परमाणु कहलाता है। हर परमाणु के दो भाग हैं: केंद्र में नाभिक और बाहर कोशों में इलेक्ट्रॉन।
नाभिक अविश्वसनीय रूप से छोटा है। परमाणु की त्रिज्या लगभग 1 × 10⁻¹⁰ m है, पर नाभिक की सिर्फ़ 1 × 10⁻¹⁵ m, यानी परमाणु नाभिक से करीब 1,00,000 गुना बड़ा है। अगर नाभिक 1 सेंटीमीटर का कंचा हो, तो परमाणु लगभग 1 किलोमीटर चौड़ा मैदान होगा: बीच में एक कंचा और चारों ओर लगभग ख़ाली जगह जिसमें कुछ इलेक्ट्रॉन घूमते हैं।
तो फिर मेज़ ठोस क्यों लगती है? क्योंकि इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक होते हैं, और आपके हाथ के परमाणुओं के इलेक्ट्रॉन मेज़ के परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनों को ज़ोर से प्रतिकर्षित करते हैं। आप असल में कुछ "छूते" नहीं; जिसे ठोसपन महसूस करते हैं, वह यही प्रतिकर्षण है।
और लगभग सारा द्रव्यमान कहाँ है? नाभिक में। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन दोनों इलेक्ट्रॉन से लगभग दो हज़ार गुना भारी हैं, इसलिए परमाणु का द्रव्यमान असल में नाभिक का द्रव्यमान है।
परमाणु मॉडलों की कहानी: डाल्टन से आधुनिक मॉडल तक
किसी ने परमाणु के अंदर आँखों से नहीं देखा। वैज्ञानिकों ने प्रयोग किए, परिणाम समझाने वाला एक मॉडल सोचा, और जब नए प्रयोग ने पुराने मॉडल की कमी दिखाई तो नया मॉडल बनाया। यही विज्ञान का तरीका है, और परीक्षा में इस पूरी कड़ी से प्रश्न आते हैं।
डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (1803)
जॉन डाल्टन ने कहा कि सारा पदार्थ अविभाज्य परमाणुओं से बना है; एक तत्व के सभी परमाणु द्रव्यमान और गुणों में समान होते हैं; अलग तत्वों के परमाणु अलग होते हैं; और रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न बनते हैं न नष्ट होते हैं, केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं।
सीमाएँ: परमाणु विभाज्य है (उसमें प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन हैं), और समस्थानिकों के कारण एक तत्व के सभी परमाणुओं का द्रव्यमान समान नहीं होता। फिर भी द्रव्यमान संरक्षण और स्थिर अनुपात के नियम समझाने में डाल्टन का विचार क्रांतिकारी था।
टॉमसन का परमाणु मॉडल (1897–1904)
जे. जे. टॉमसन ने कैथोड किरण प्रयोगों में इलेक्ट्रॉन की खोज की। परमाणु उदासीन होता है, इसलिए उन्होंने सोचा कि परमाणु धनावेश का एक गोला है जिसमें इलेक्ट्रॉन तरबूज़ के बीजों की तरह धँसे हैं। इसे "प्लम पुडिंग" या तरबूज़ मॉडल कहते हैं।
सीमा: धनावेश पूरे परमाणु में फैला होने पर रदरफोर्ड के प्रयोग में कुछ अल्फा कणों का सीधे वापस लौटना समझाया नहीं जा सका।
रदरफोर्ड का स्वर्ण पन्नी प्रयोग और नाभिकीय मॉडल (1911)
अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने बहुत पतली सोने की पन्नी पर तेज़ अल्फा कण (धनात्मक हीलियम नाभिक) डाले। तीन बातें दिखीं: अधिकांश कण सीधे निकल गए; कुछ थोड़ा मुड़ गए; और बहुत कम, लगभग बीस हज़ार में एक, लगभग सीधे वापस लौट आए।
निष्कर्ष: परमाणु का अधिकांश भाग ख़ाली है; सारा धनावेश और लगभग सारा द्रव्यमान केंद्र के बहुत छोटे भाग में है, जिसे नाभिक कहा गया; और इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वैसे घूमते हैं जैसे सूर्य के चारों ओर ग्रह। इसलिए इसे ग्रहीय मॉडल भी कहते हैं।
सीमा: विद्युतचुंबकीय सिद्धांत के अनुसार घूमता आवेश ऊर्जा विकिरित करता है, तो इलेक्ट्रॉन को सर्पिल रास्ते से नाभिक में गिर जाना चाहिए, पर परमाणु स्थायी है। यह मॉडल परमाणु के रेखीय स्पेक्ट्रम को भी नहीं समझा सका।
बोर का परमाणु मॉडल (1913)
नील्स बोर ने दो मुख्य अभिगृहीत दिए। पहला, इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं जिनकी ऊर्जा निश्चित होती है; इन्हें ऊर्जा स्तर या कोश (K, L, M, N या n = 1, 2, 3, 4) कहते हैं, और इन स्थिर कक्षाओं में घूमते हुए इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकिरित नहीं करते।
दूसरा, इलेक्ट्रॉन जब एक स्तर से दूसरे में कूदता है तभी ऊर्जा अवशोषित या उत्सर्जित करता है, और वह ऊर्जा दोनों स्तरों के अंतर के बराबर होती है। इसी कारण आतिशबाज़ी में अलग तत्व अलग रंग देते हैं।
सीमा: बोर मॉडल हाइड्रोजन के स्पेक्ट्रम को बढ़िया समझाता है, पर कई इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं की बारीक रेखाएँ और इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति नहीं समझा पाता। ऊपर का सिमुलेशन बोर मॉडल का चित्र है, क्योंकि स्कूल में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इसी मॉडल में पढ़ाया जाता है।
आधुनिक (क्वांटम यांत्रिक) मॉडल
श्रोडिंगर, हाइज़ेनबर्ग आदि के काम से पता चला कि इलेक्ट्रॉन का कोई निश्चित रास्ता नहीं होता। हम केवल यह बता सकते हैं कि उसके मिलने की संभावना कहाँ सबसे अधिक है; संभावना के इस बादल को कक्षक (s, p, d, f) कहते हैं। इसलिए हर कोश में उपकोश होते हैं, और कक्षा 11 का 1s² 2s² 2p⁶ जैसा विन्यास इसी मॉडल से आता है।
परमाणु के तीन कण: प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन
परमाणु के तीन मूल कणों का परिचय एक तालिका में देखिए। द्रव्यमान किलोग्राम में और साथ में परमाणु द्रव्यमान इकाई (u) में दिया है। ध्यान दीजिए, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का द्रव्यमान लगभग बराबर है और इलेक्ट्रॉन उनकी तुलना में नगण्य है।
एक प्रोटॉन एक इलेक्ट्रॉन से लगभग 1,836 गुना भारी है। इसीलिए द्रव्यमान संख्या गिनते समय इलेक्ट्रॉन छोड़ दिए जाते हैं।
| कण | प्रतीक | आवेश | सापेक्ष आवेश | द्रव्यमान (kg) | द्रव्यमान (u) | कहाँ | खोजकर्ता |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्रोटॉन | p | +1.602 × 10⁻¹⁹ C | +1 | 1.673 × 10⁻²⁷ | 1.0073 | नाभिक में | रदरफोर्ड (1919) |
| न्यूट्रॉन | n | 0 | 0 | 1.675 × 10⁻²⁷ | 1.0087 | नाभिक में | चैडविक (1932) |
| इलेक्ट्रॉन | e | −1.602 × 10⁻¹⁹ C | −1 | 9.109 × 10⁻³¹ | 0.000549 | कोशों में | टॉमसन (1897) |
परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या
किसी परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या उसकी परमाणु संख्या (Z) कहलाती है। यह तत्व का "पहचान पत्र नंबर" है: 11 प्रोटॉन मतलब सोडियम, ब्रह्मांड में कहीं भी, किसी भी अवस्था में। एक प्रोटॉन जोड़िए और वह मैग्नीशियम बन जाता है। प्रोटॉन स्लाइडर से यह खुद देखिए।
नाभिक में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन की कुल संख्या द्रव्यमान संख्या (A) कहलाती है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को मिलाकर न्यूक्लिऑन कहते हैं, इसलिए द्रव्यमान संख्या न्यूक्लिऑनों की गिनती है।
उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों के बराबर होती है। प्रोटॉन का धनावेश और इलेक्ट्रॉन का ऋणावेश परिमाण में बराबर पर चिह्न में उल्टे हैं, इसलिए बराबर संख्या होने पर कुल आवेश शून्य हो जाता है। "परमाणु उदासीन क्यों है" का उत्तर यही है।
Z = प्रोटॉनों की संख्याउदासीन परमाणु में = इलेक्ट्रॉनों की संख्या
A = Z + Nद्रव्यमान संख्या = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन
N = A − Zन्यूट्रॉन की संख्या निकालने का सूत्र
ᴬ_Z Xप्रतीक के बाएँ ऊपर द्रव्यमान संख्या, नीचे परमाणु संख्या; जैसे ²³₁₁Na
समस्थानिक, समभारिक और समन्यूट्रॉनिक
एक ही तत्व के वे परमाणु जिनमें प्रोटॉन समान पर न्यूट्रॉन अलग होने से द्रव्यमान संख्या अलग होती है, समस्थानिक (आइसोटोप) कहलाते हैं। समस्थानिकों के रासायनिक गुण लगभग समान होते हैं (इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान है), पर द्रव्यमान, घनत्व या रेडियोधर्मिता जैसे भौतिक गुण अलग हो सकते हैं।
हाइड्रोजन के तीन समस्थानिकों के अपने नाम भी हैं: प्रोटियम (¹H, कोई न्यूट्रॉन नहीं), ड्यूटीरियम (²H, एक न्यूट्रॉन) और ट्राइटियम (³H, दो न्यूट्रॉन, रेडियोधर्मी)। सिमुलेशन में हाइड्रोजन लेकर न्यूट्रॉन 0, 1, 2 करके तीनों बनाइए।
अलग तत्वों के वे परमाणु जिनकी द्रव्यमान संख्या समान हो, समभारिक (आइसोबार) कहलाते हैं; और जिनके न्यूट्रॉन समान हों, वे समन्यूट्रॉनिक (आइसोटोन)। तालिका में उदाहरण मिलाइए।
| प्रकार | क्या समान | क्या अलग | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| समस्थानिक | प्रोटॉन (Z) | न्यूट्रॉन और द्रव्यमान संख्या | ¹²C, ¹³C, ¹⁴C (न्यूट्रॉन 6, 7, 8) |
| समभारिक | द्रव्यमान संख्या (A) | प्रोटॉन और न्यूट्रॉन | ⁴⁰Ar (22 न्यूट्रॉन) और ⁴⁰Ca (20 न्यूट्रॉन) |
| समन्यूट्रॉनिक | न्यूट्रॉन (N) | प्रोटॉन और द्रव्यमान संख्या | ¹⁴C और ¹⁶O (दोनों में 8 न्यूट्रॉन) |
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखने के नियम
किसी परमाणु के कोशों में इलेक्ट्रॉन जिस तरह व्यवस्थित होते हैं, उसे इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कहते हैं। इससे पता चलता है कि तत्व धातु है या अधातु, कितने बंध बनाएगा और आवर्त सारणी में कहाँ बैठेगा।
नियम 1: किसी कोश में अधिकतम 2n² इलेक्ट्रॉन
n-वें कोश में अधिकतम 2n² इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं: K (n = 1) में 2, L (n = 2) में 8, M (n = 3) में 18 और N (n = 4) में 32।
नियम 2: सबसे बाहरी कोश में 8 से अधिक नहीं
M में 18 आ सकते हैं, फिर भी किसी परमाणु के सबसे बाहरी कोश में 8 से अधिक इलेक्ट्रॉन नहीं होते। इसलिए पोटैशियम (Z = 19) का विन्यास 2, 8, 9 नहीं बल्कि 2, 8, 8, 1 है, और कैल्सियम का 2, 8, 8, 2। पहले 20 तत्वों के लिए स्कूल का नियम इसलिए 2, 8, 8, 2 बनता है।
नियम 3: कम ऊर्जा वाला पहले भरता है (आउफबाउ सिद्धांत)
इलेक्ट्रॉन पहले कम ऊर्जा वाले कोश और उपकोश भरते हैं। उपकोशों का क्रम: 1s → 2s → 2p → 3s → 3p → 4s → 3d …; s उपकोश में अधिकतम 2 और p उपकोश में 6 इलेक्ट्रॉन आते हैं। 4s पहले भरता है और 3d बाद में, इसलिए पोटैशियम का अंतिम इलेक्ट्रॉन 4s में जाता है।
| n | कोश | अधिकतम इलेक्ट्रॉन (2n²) |
|---|---|---|
| 1 | K | 2 × 1² = 2 |
| 2 | L | 2 × 2² = 8 |
| 3 | M | 2 × 3² = 18 |
| 4 | N | 2 × 4² = 32 |
पहले 20 तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (तालिका)
यह तालिका उसी नियम से बनी है जिससे सिमुलेशन चलता है, इसलिए प्रोटॉन स्लाइडर खिसकाने पर जो दिखेगा उससे हूबहू मिलेगी। पहले 20 तत्वों का विन्यास लगभग हर साल पूछा जाता है, इसलिए यह तालिका एक बार खुद लिखिए।
| Z | तत्व | कोश (K, L, M, N) | उपकोश विन्यास | संयोजकता इलेक्ट्रॉन |
|---|---|---|---|---|
| 1 | हाइड्रोजन (H) | 1 | 1s¹ | 1 |
| 2 | हीलियम (He) | 2 | 1s² | 2 |
| 3 | लीथियम (Li) | 2, 1 | 1s² 2s¹ | 1 |
| 4 | बेरिलियम (Be) | 2, 2 | 1s² 2s² | 2 |
| 5 | बोरॉन (B) | 2, 3 | 1s² 2s² 2p¹ | 3 |
| 6 | कार्बन (C) | 2, 4 | 1s² 2s² 2p² | 4 |
| 7 | नाइट्रोजन (N) | 2, 5 | 1s² 2s² 2p³ | 5 |
| 8 | ऑक्सीजन (O) | 2, 6 | 1s² 2s² 2p⁴ | 6 |
| 9 | फ्लुओरीन (F) | 2, 7 | 1s² 2s² 2p⁵ | 7 |
| 10 | निऑन (Ne) | 2, 8 | 1s² 2s² 2p⁶ | 8 |
| 11 | सोडियम (Na) | 2, 8, 1 | 1s² 2s² 2p⁶ 3s¹ | 1 |
| 12 | मैग्नीशियम (Mg) | 2, 8, 2 | 1s² 2s² 2p⁶ 3s² | 2 |
| 13 | ऐलुमिनियम (Al) | 2, 8, 3 | 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p¹ | 3 |
| 14 | सिलिकॉन (Si) | 2, 8, 4 | 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p² | 4 |
| 15 | फॉस्फोरस (P) | 2, 8, 5 | 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p³ | 5 |
| 16 | सल्फर (S) | 2, 8, 6 | 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁴ | 6 |
| 17 | क्लोरीन (Cl) | 2, 8, 7 | 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁵ | 7 |
| 18 | आर्गन (Ar) | 2, 8, 8 | 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ | 8 |
| 19 | पोटैशियम (K) | 2, 8, 8, 1 | 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 4s¹ | 1 |
| 20 | कैल्सियम (Ca) | 2, 8, 8, 2 | 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p⁶ 4s² | 2 |
संयोजकता इलेक्ट्रॉन, अष्टक नियम और आयन
सबसे बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉन संयोजकता इलेक्ट्रॉन कहलाते हैं। रसायन का लगभग सारा "खेल" इन्हीं से होता है: बंध बनाना, आयन बनना, अभिक्रिया करना। उत्कृष्ट गैसों (हीलियम, निऑन, आर्गन) का बाहरी कोश पूरा भरा होता है, इसलिए वे लगभग किसी से अभिक्रिया नहीं करतीं।
बाकी तत्व उत्कृष्ट गैसों की तरह बाहरी कोश में 8 इलेक्ट्रॉन (हाइड्रोजन के लिए 2) पाना चाहते हैं; इसे अष्टक नियम कहते हैं। जिनके बाहर 1, 2 या 3 इलेक्ट्रॉन हैं वे इन्हें छोड़ना चाहते हैं (धातुएँ); जिनके 5, 6 या 7 हैं वे और लेना चाहते हैं (अधातुएँ)।
इलेक्ट्रॉन छोड़ने पर प्रोटॉन अधिक हो जाते हैं, परमाणु धनायन बन जाता है, जैसे Na⁺। इलेक्ट्रॉन लेने पर ऋणायन बनता है, जैसे Cl⁻। नाभिक ज़रा भी नहीं बदलता, इसलिए तत्व वही रहता है।
संयोजकता वह संख्या है जितने इलेक्ट्रॉन परमाणु देता, लेता या साझा करता है। मैग्नीशियम के बाहर 2 इलेक्ट्रॉन हैं, तो संयोजकता 2। क्लोरीन के बाहर 7 हैं और अष्टक पूरा करने को 1 और चाहिए, तो संयोजकता 1। ऑक्सीजन की संयोजकता 2 है।
सिमुलेशन में खुद प्रयोग करके देखिए
हर प्रयोग से पहले अनुमान लगाइए कि क्या होगा, फिर स्लाइडर खिसकाकर जाँचिए। ग़लत अनुमान ही सबसे अच्छी तरह याद रहता है।
- प्रयोग 1: प्रोटॉन 1 से 20 तक एक-एक करके बढ़ाइए। किन तत्वों पर नया कोश शुरू होता है? (लीथियम, सोडियम, पोटैशियम।)
- प्रयोग 2: कार्बन लेकर न्यूट्रॉन 6, 7 और 8 कीजिए। पहले दो स्थायी हैं; तीसरा रेडियोधर्मी कार्बन-14 है, जिससे पुरानी चीज़ों की आयु मापी जाती है।
- प्रयोग 3: सोडियम (2, 8, 1) से एक इलेक्ट्रॉन हटाइए। विन्यास 2, 8 हो जाता है, बिल्कुल निऑन जैसा। इसी कारण सोडियम इतनी आसानी से Na⁺ बनता है।
- प्रयोग 4: क्लोरीन (2, 8, 7) में एक इलेक्ट्रॉन जोड़िए। अब 2, 8, 8, आर्गन जैसा पूरा अष्टक।
- प्रयोग 5: निऑन (Z = 10) बनाइए। संयोजकता इलेक्ट्रॉन 8, बाहरी कोश पूरा; इसीलिए निऑन निष्क्रिय है।
- प्रयोग 6: किसी तत्व को बहुत अधिक या बहुत कम न्यूट्रॉन दीजिए। पैनल बताएगा "प्रकृति में स्थायी नहीं", क्योंकि नाभिक टिकने के लिए प्रोटॉन-न्यूट्रॉन का संतुलन चाहिए।
हल किए गए उदाहरण, चरण दर चरण
नीचे का हर उत्तर इसी पेज के कोड से निकाला गया है, इसलिए सिमुलेशन से मेल खाता है। पहले कॉपी-पेन से खुद कोशिश कीजिए।
उदाहरण 1: सोडियम-23 के कण गिनना
सोडियम की परमाणु संख्या 11 और द्रव्यमान संख्या 23 है। न्यूट्रॉन = A − Z = 23 − 11 = 12। उदासीन है, तो इलेक्ट्रॉन 11। विन्यास 2, 8, 1, उपकोशों में 1s² 2s² 2p⁶ 3s¹, संयोजकता इलेक्ट्रॉन 1। सिमुलेशन इसी परमाणु से शुरू होता है।
उदाहरण 2: क्लोरीन का औसत परमाणु द्रव्यमान
प्राकृतिक क्लोरीन में लगभग 75% ³⁵Cl और 25% ³⁷Cl है। औसत द्रव्यमान = (35 × 75 + 37 × 25) ÷ 100 = 26.25 + 9.25 = 35.5। इसीलिए आवर्त सारणी में क्लोरीन का परमाणु द्रव्यमान पूर्ण संख्या नहीं है।
औसत द्रव्यमान = Σ (द्रव्यमान संख्या × % प्रचुरता) ÷ 100
उदाहरण 3: हर कोश की क्षमता
2n² में n = 1, 2, 3, 4 रखने पर 2, 8, 18 और 32 मिलते हैं। पर सबसे बाहरी कोश में 8 से अधिक नहीं होते, इसलिए कैल्सियम का विन्यास 2, 8, 8, 2 है।
उदाहरण 4: आयनों का विन्यास
ऐलुमिनियम (Z = 13) का उदासीन विन्यास 2, 8, 3 है। Al³⁺ तीन इलेक्ट्रॉन छोड़ता है, तो 10 बचते हैं: विन्यास 2, 8।
सल्फर (Z = 16) का उदासीन विन्यास 2, 8, 6 है। S²⁻ दो इलेक्ट्रॉन लेता है, तो 18 होते हैं: विन्यास 2, 8, 8। दोनों आयनों का बाहरी कोश पूरा अष्टक है।
उदाहरण 5: कार्बन-12 परमाणु का द्रव्यमान और इलेक्ट्रॉनों का हिस्सा
6 प्रोटॉन और 6 न्यूट्रॉन का द्रव्यमान 2.009 × 10⁻²⁶ kg है। 6 इलेक्ट्रॉन का 5.466 × 10⁻³⁰ kg। पूरा परमाणु 2.009 × 10⁻²⁶ kg, जिसमें इलेक्ट्रॉनों का हिस्सा सिर्फ़ 0.027% है: प्रमाण कि परमाणु का लगभग सारा द्रव्यमान नाभिक में है।
उदाहरण 6: प्रोटॉन इलेक्ट्रॉन से कितना भारी है
प्रोटॉन द्रव्यमान ÷ इलेक्ट्रॉन द्रव्यमान = 1.673 × 10⁻²⁷ ÷ 9.109 × 10⁻³¹ ≈ 1,836। यानी एक प्रोटॉन के बराबर द्रव्यमान के लिए लगभग 1,836 इलेक्ट्रॉन चाहिए।
उदाहरण 7: परमाणु कितना ख़ाली है
परमाणु त्रिज्या 1 × 10⁻¹⁰ m, नाभिकीय त्रिज्या 1 × 10⁻¹⁵ m; अनुपात = 1,00,000। नाभिक 1 cm का कंचा हो, तो परमाणु 1 cm × 1,00,000 = 1 km चौड़ा होगा।
उदाहरण 8: कार्बन-14 से आयु निर्धारण
कार्बन-14 की अर्धायु 5,730 वर्ष है। एक पुरानी लकड़ी में जीवित पेड़ की तुलना में सिर्फ़ 12.5% कार्बन-14 बचा है। 100 → 50 → 25 → 12.5, यानी 3 अर्धायु बीत चुकी हैं। आयु = 3 × 5,730 = 17,190 वर्ष।
ग़लतियाँ जो लगभग सब करते हैं
परीक्षक ये ग़लतियाँ सबसे ज़्यादा देखते हैं। एक बार पढ़ लीजिए, अंक नहीं कटेंगे।
- द्रव्यमान संख्या में इलेक्ट्रॉन जोड़ना। द्रव्यमान संख्या = केवल प्रोटॉन + न्यूट्रॉन।
- परमाणु संख्या को इलेक्ट्रॉनों की संख्या कहना। उदासीन परमाणु में दोनों बराबर हैं पर आयन में नहीं; परिभाषा में हमेशा "प्रोटॉनों की संख्या" लिखिए।
- पोटैशियम को 2, 8, 9 लिखना। बाहरी कोश में 8 से अधिक नहीं आते; सही उत्तर 2, 8, 8, 1 है।
- आयन बनने पर तत्व बदल जाता है, ऐसा मानना। आयन में केवल इलेक्ट्रॉन बदलते हैं; Na⁺ अब भी सोडियम है।
- समस्थानिकों को अलग तत्व मानना। उनके प्रोटॉन समान हैं, इसलिए वे एक ही तत्व हैं।
- रदरफोर्ड मॉडल को अंतिम मान लेना। उसकी बड़ी कमी (इलेक्ट्रॉन नाभिक में क्यों नहीं गिरता) बोर ने दूर की।
असल ज़िंदगी में परमाणु की संरचना
यह केवल परीक्षा का विषय नहीं; परमाणु की समझ रोज़ जान बचाती है और शहरों को बिजली देती है।
- कार्बन-14 डेटिंग: पुरातत्वविद पुरानी हड्डियों, लकड़ी और कपड़ों की आयु निकालते हैं।
- चिकित्सा: आयोडीन-131 थायरॉइड रोग में, कोबाल्ट-60 कैंसर की रेडियोथेरेपी में और टेक्नीशियम-99m स्कैन में उपयोग होता है।
- बिजली: तारापुर, कुडनकुलम जैसे परमाणु बिजलीघर यूरेनियम-235 के नाभिक तोड़कर ऊष्मा और बिजली बनाते हैं।
- कृषि: रेडियोधर्मी समस्थानिकों से फ़सलों की बेहतर किस्में और उर्वरकों की जाँच होती है।
- आतिशबाज़ी और निऑन साइन: इलेक्ट्रॉन कोश बदलते समय प्रकाश देते हैं, और हर तत्व का अपना रंग होता है।
- धुआँ संसूचक: अमेरिसियम-241 के अल्फा कण हवा को आयनित करते हैं, और धुआँ उस धारा को रोककर अलार्म बजाता है।
परीक्षा कॉर्नर: CBSE, NEET और JEE
NCERT कक्षा 9 के अध्याय "परमाणु की संरचना" में छोटे प्रश्न आमतौर पर परिभाषाओं (समस्थानिक, परमाणु संख्या, संयोजकता), परमाणु के उदासीन होने के कारण, स्वर्ण पन्नी प्रयोग के प्रेक्षण-निष्कर्ष और हर मॉडल की सीमाओं पर आते हैं।
लंबे प्रश्नों में कुछ तत्वों की परमाणु संख्या देकर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखने, आयन बनना दिखाने या औसत परमाणु द्रव्यमान निकालने को कहा जाता है। ऊपर के उदाहरण 2 और 4 बिल्कुल ऐसे ही हैं।
कक्षा 11 (NEET/JEE) में इसमें क्वांटम संख्याएँ, कक्षकों की आकृतियाँ, आउफबाउ, पाउली और हुंड के नियम तथा बोर के ऊर्जा स्तरों से हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम जुड़ते हैं, जो MCQ का पक्का स्रोत हैं।
एक नज़र में दोहराव
परीक्षा से पहले की रात बस यह सूची पढ़ लीजिए।
- परमाणु = नाभिक (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन) + कोशों में इलेक्ट्रॉन।
- Z = प्रोटॉनों की संख्या; A = प्रोटॉन + न्यूट्रॉन; N = A − Z।
- उदासीन परमाणु: प्रोटॉन = इलेक्ट्रॉन; इलेक्ट्रॉन कम तो धनायन, अधिक तो ऋणायन।
- समस्थानिक: Z समान; समभारिक: A समान; समन्यूट्रॉनिक: N समान।
- किसी कोश में अधिकतम 2n² इलेक्ट्रॉन; सबसे बाहरी कोश में 8 से अधिक नहीं।
- मॉडलों का क्रम: डाल्टन → टॉमसन → रदरफोर्ड → बोर → क्वांटम मॉडल।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
परमाणु की संरचना क्या है?
परमाणु के केंद्र में प्रोटॉन और न्यूट्रॉन से बना छोटा, घना, धनावेशित नाभिक होता है, और उसके चारों ओर कोशों में ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन होते हैं। लगभग सारा द्रव्यमान नाभिक में है और अधिकांश आयतन ख़ाली है।
परमाणु विद्युत रूप से उदासीन क्यों होता है?
परमाणु में प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या बराबर होती है। हर प्रोटॉन का धनावेश एक इलेक्ट्रॉन के ऋणावेश के बराबर होता है, इसलिए दोनों एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं। न्यूट्रॉन पर कोई आवेश नहीं होता।
समस्थानिक किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
एक ही तत्व के वे परमाणु जिनमें प्रोटॉन समान पर न्यूट्रॉन अलग होने से द्रव्यमान संख्या अलग हो, समस्थानिक कहलाते हैं। जैसे कार्बन-12, कार्बन-13 और कार्बन-14, या प्रोटियम, ड्यूटीरियम और ट्राइटियम।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के नियम क्या हैं?
हर कोश में अधिकतम 2n² इलेक्ट्रॉन, सबसे बाहरी कोश में 8 से अधिक नहीं, और कम ऊर्जा वाले कोश व उपकोश पहले भरते हैं (आउफबाउ क्रम 1s, 2s, 2p, 3s, 3p, 4s …)।
परमाणु संख्या और द्रव्यमान संख्या में क्या अंतर है?
परमाणु संख्या प्रोटॉनों की संख्या है, जो तत्व तय करती है। द्रव्यमान संख्या प्रोटॉन और न्यूट्रॉन का योग है, जो एक ही तत्व के समस्थानिकों में बदलती है।
रदरफोर्ड मॉडल की सीमाएँ क्या थीं?
यह नहीं समझा सका कि घूमता इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकिरित करके नाभिक में क्यों नहीं गिरता, यानी परमाणु की स्थिरता नहीं समझा सका। रेखीय स्पेक्ट्रम और इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था भी नहीं बता सका।
क्लोरीन का परमाणु द्रव्यमान 35.5 क्यों है?
क्लोरीन के दो समस्थानिक 35 और 37 लगभग 3:1 अनुपात में पाए जाते हैं। उनका प्रचुरता-भारित औसत 35.5 है, इसलिए क्लोरीन का परमाणु द्रव्यमान भिन्न में है।
कक्षा और कक्षक में क्या अंतर है?
कक्षा (orbit) बोर मॉडल का निश्चित वृत्ताकार रास्ता है। कक्षक (orbital) आधुनिक विचार है: नाभिक के चारों ओर वह त्रिविमीय क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉन मिलने की संभावना सबसे अधिक है। कक्षक का कोई तय रास्ता नहीं होता।
इस सिमुलेशन में 20 से अधिक तत्व क्यों नहीं हैं?
स्कूल का 2, 8, 8, 2 कोश नियम सीधे पहले 20 तत्वों पर लागू होता है। स्कैंडियम (Z = 21) से 3d उपकोश भरना शुरू होता है, जिसे साधारण कोश नियम नहीं दिखा सकता; वह कक्षा 11 के उपकोश नियमों का विषय है।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
SSC
SSC General Science
Textbook
Class 9-10 Science textbook
SSC
SSC Chemistry: syllabus and preparation
HSC
HSC Chemistry: syllabus and preparation
Textbook
Class 9-10 Chemistry textbook
Admission
Medical admission test preparation
Admission
Dhaka University science unit admission 2026-27
English
Paragraph: Environment Pollution
Bangla
রচনা: পরিবেশ দূষণ (बांग्ला में)
English
Composition: Wonders of Modern Science
SSC
SSC suggestions
HSC
HSC suggestions
Admission
University admission guide
SSC
SSC syllabus
HSC
HSC syllabus
रसायन विज्ञान के और एनिमेशन
कक्षा 7 · 10
अम्ल, क्षारक और pH मान
pH मान क्या है, pH स्केल कैसे काम करता है, अम्ल क्षार और लवण में अंतर, सूचक और उदासीनीकरण अभिक्रिया: ब्यूरेट से बूँद डालकर खुद अनुमापन करें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।
कक्षा 9 · 11
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किसे कहते हैं और कैसे लिखें: ऑफबाऊ सिद्धांत, पाउली अपवर्जन, हुंड का नियम, Cr-Cu अपवाद, आयन। इलेक्ट्रॉनों को एक-एक कर भरते देखें, 1–36 तत्व।
कक्षा 11
गैस नियम: बॉयल, चार्ल्स, गे-लुसाक, आवोगाद्रो और PV = nRT
बॉयल का नियम, चार्ल्स का नियम, गे-लुसाक और आवोगाद्रो नियम, आदर्श गैस समीकरण PV = nRT: पिस्टन खींचकर खुद देखें, ग्राफ़, R के मान, व्युत्पत्ति और हल किए गए प्रश्न।
कक्षा 10 · 11
आयनिक बंध कैसे बनता है
आयनिक बंध किसे कहते हैं, धातु के इलेक्ट्रॉन अधातु में जाकर आयन कैसे बनाते हैं, और सूत्र आवेश संतुलन से कैसे निकलता है: NaCl, MgO, CaCl2 चुनकर खुद देखें, सूत्र और हल सहित।
कक्षा 10 · 12
वैद्युत अपघटन और फैराडे के नियम
वैद्युत अपघटन किसे कहते हैं, कैथोड-एनोड पर क्या बनता है, और फैराडे के नियम से द्रव्यमान कैसे निकलता है: पिघला NaCl, CuSO4 या अम्लीकृत पानी चुनकर खुद देखें, सूत्र और हल सहित।
कक्षा 10 · 11
सहसंयोजक बंध
सहसंयोजक बंध किसे कहते हैं, एकल-द्वि-त्रिआबंध कैसे बनते हैं, अष्टक नियम क्या है: H₂O, NH₃, CH₄, CO₂ का डॉट-क्रॉस चित्र सिमुलेशन में खुद बनाएँ, ध्रुवता के साथ।
कक्षा 9 · 11
आवर्त सारणी की आवर्तिता
आवर्त सारणी में आवर्तिता क्या है: परमाणु त्रिज्या, आयनन ऊर्जा, इलेक्ट्रोनगेटिविटी और धात्विक गुण आवर्त व समूह में कैसे बदलते हैं। पहले 36 तत्वों के हीट मैप में खुद जाँचें, अपवादों के साथ।
अन्य विषयों के एनिमेशन
भौतिकी
प्रकाश का अपवर्तन
भौतिकी
ओम का नियम
भौतिकी
प्रक्षेप्य गति
भौतिकी
सरल लोलक
भौतिकी
विद्युत क्षेत्र
भौतिकी
तरंगों का व्यतिकरण
भौतिकी
मुक्त पतन
भौतिकी
लेंस द्वारा प्रतिबिंब
भौतिकी
न्यूटन के गति के नियम
भौतिकी
गोलीय दर्पण किरण आरेख
भौतिकी
विद्युत चुंबकीय प्रेरण
भौतिकी
संवेग संरक्षण और संघट्ट
भौतिकी
कार्य, ऊर्जा और शक्ति
भौतिकी
आनत तल
जीव विज्ञान
समसूत्री कोशिका विभाजन
जीव विज्ञान
विसरण और परासरण
जीव विज्ञान
प्रकाश संश्लेषण
जीव विज्ञान
मानव हृदय की संरचना और कार्य
जीव विज्ञान
मेंडल के आनुवंशिकता नियम
जीव विज्ञान
डीएनए प्रतिकृति
जीव विज्ञान
कोशिकीय श्वसन
जीव विज्ञान
एंजाइम क्रिया
जीव विज्ञान
तंत्रिका आवेग और एक्शन पोटेंशियल
जीव विज्ञान
नेफ्रॉन और मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
जीव विज्ञान
अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस)
जीव विज्ञान
पाचन तंत्र
गणित
पाइथागोरस प्रमेय
गणित
त्रिकोणमितीय अनुपात और इकाई वृत्त
गणित
द्विघात समीकरण और द्विघात फलन का ग्राफ़
गणित
वृत्त के प्रमेय
गणित
ऊँचाई और दूरी: उन्नयन कोण और अवनमन कोण
गणित
प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता
गणित
समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी
गणित






















