Home
Login

Color

Indigo
Red
Green
Teal
Blue
Purple
Rose

Mode

Light
EN

ओम का नियम समझें: विभवांतर, धारा और प्रतिरोध

ओम के नियम के अनुसार, यदि ताप और अन्य भौतिक अवस्थाएँ स्थिर रहें, तो किसी चालक से प्रवाहित विद्युत धारा उसके सिरों के बीच के विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होती है: V = IR। नीचे के परिपथ में बैटरी का विभवांतर और प्रतिरोध बदलें — अमीटर, वोल्टमीटर और V–I ग्राफ तुरंत बदलेंगे।

परंपरागत विद्युत धाराप्रतिरोध में उत्पन्न ऊष्मावर्तमान प्रतिरोध की रेखापिछले प्रतिरोध की रेखा
गति

नियंत्रण

12.0 V
4 Ω

परिपथ

मापन

विभवांतर, V
12V
तुल्य प्रतिरोध, R
4.00Ω
विद्युत धारा, I
3.00A
शक्ति, P = VI
36.0W

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. विभवांतर का स्लाइडर खिसकाएँ — प्रतिरोध स्थिर रहने पर अमीटर का पाठ उसी अनुपात में बदलता है।
  2. प्रतिरोध बढ़ाएँ: आवेश धीमे चलते हैं, धारा घटती है और V–I ग्राफ की रेखा अधिक खड़ी होती है — ढाल ही प्रतिरोध है।
  3. "श्रेणीक्रम" चुनें: दोनों प्रतिरोधों में एक ही धारा, पर विभवांतर बँट जाता है।
  4. "पार्श्वक्रम" चुनें: दोनों शाखाओं पर पूरा विभवांतर, और कम प्रतिरोध वाली शाखा में आवेश तेज़ चलते हैं।

शुरू करने से पहले: आपके घर में ओम का नियम

बिजली जाने पर जब इन्वर्टर चालू होता है, तो कभी-कभी पंखा थोड़ा धीमा और बल्ब थोड़ा मद्धम लगता है। पंखे का रेगुलेटर घुमाने पर उसकी गति बदल जाती है। घर की हर दीवार में लगी वायरिंग इस तरह बनाई जाती है कि हर उपकरण को सही वोल्टेज मिले। इन सब के पीछे एक ही सरल संबंध काम करता है — ओम का नियम।

नाम भले भारी लगे, पर बात सीधी है। तीन चीज़ें हैं — आवेश को कितना धक्का दिया जा रहा है (विभवांतर), कितना आवेश बह रहा है (धारा), और रास्ते में कितनी रुकावट है (प्रतिरोध)। इन तीनों का आपसी हिसाब समझ लिया, तो परिपथ के ज़्यादातर प्रश्न आप खुद हल कर लेंगे।

इस पेज पर हम बिल्कुल शुरुआत से चलेंगे — पहले धारणा, फिर नियम, फिर सिमुलेशन में प्रयोग, और अंत में हल प्रश्न और परीक्षा की तैयारी। जल्दबाज़ी नहीं, हर हिस्सा आराम से पढ़िए।

पानी के पाइप से बिजली को समझिए

किसी धातु के तार में बहुत सारे मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं। सामान्य स्थिति में वे इधर-उधर बेतरतीब घूमते हैं, किसी एक दिशा में नहीं जाते। तार के सिरों पर बैटरी लगाते ही वे एक दिशा में खिसकने लगते हैं — आवेश के इसी प्रवाह को विद्युत धारा कहते हैं।

अब छत पर रखी पानी की टंकी और उससे जुड़ा पाइप सोचिए। टंकी जितनी ऊँची, पानी का दबाव उतना ज़्यादा और पाइप से पानी उतनी तेज़ी से आता है। परिपथ में यही "दबाव" विभवांतर (वोल्टेज) है, और बैटरी वह पंप है जो दबाव बनाए रखती है।

पाइप से हर सेकंड कितना पानी गुज़रता है, वह धारा जैसा है। परिपथ में किसी बिंदु से हर सेकंड गुज़रने वाला आवेश (कूलॉम में) ही विद्युत धारा है, जिसका मात्रक ऐम्पियर है।

अगर पाइप पतला हो या उसमें कचरा फँसा हो, तो पानी कम आएगा। बिजली में यही रुकावट प्रतिरोध है। पतले, लंबे या कम चालक तार में उसी वोल्टेज पर कम धारा बहती है।

सीधी भाषा में: धक्का बढ़ाओ तो बहाव बढ़ता है, रुकावट बढ़ाओ तो बहाव घटता है। ओम का नियम यही बात गणित की भाषा में कहता है।

ज़रूरी शब्द एक नज़र में

परिभाषाएँ और मात्रक लगभग हर परीक्षा में पूछे जाते हैं, इसलिए यह तालिका अच्छी तरह याद कर लीजिए।

राशिप्रतीकSI मात्रकमापने का यंत्रआसान अर्थ
आवेशQकूलॉम (C)—जो चीज़ बहती है
विद्युत धाराIऐम्पियर (A)अमीटर (श्रेणीक्रम में)प्रति सेकंड आवेश, I = Q/t
विभवांतरVवोल्ट (V)वोल्टमीटर (पार्श्वक्रम में)आवेश को धकेलने वाला "दबाव"
प्रतिरोधRओम (Ω)ओममीटरधारा के रास्ते की रुकावट
शक्तिPवाट (W)वाटमीटरप्रति सेकंड खर्च ऊर्जा

ओम का नियम: कथन और सूत्र

जर्मन भौतिकविद् जॉर्ज साइमन ओम ने प्रयोग करके पाया कि किसी धातु के तार का ताप स्थिर रखें, तो उसके सिरों का विभवांतर दोगुना करने पर धारा भी दोगुनी हो जाती है।

कथन

यदि ताप और अन्य भौतिक अवस्थाएँ स्थिर रहें, तो किसी चालक से प्रवाहित विद्युत धारा उसके सिरों के बीच विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होती है।

"ताप स्थिर" वाली शर्त कभी मत छोड़िए। तार गरम होने पर प्रतिरोध बदल जाता है और सीधा अनुपात नहीं रहता।

V ∝ Iस्थिर ताप पर

V = IRआनुपातिकता स्थिरांक R ही प्रतिरोध है

सूत्र के तीन रूप

V, I और R में से कोई दो पता हों तो तीसरा निकाला जा सकता है। धारा चाहिए तो विभवांतर को प्रतिरोध से भाग दें; प्रतिरोध चाहिए तो विभवांतर को धारा से।

V = I × Rविभवांतर निकालने के लिए

I = V ÷ Rधारा निकालने के लिए

R = V ÷ Iप्रतिरोध निकालने के लिए

प्रतिरोध का मात्रक ओम

यदि किसी चालक के सिरों पर 1 वोल्ट का विभवांतर लगाने से उसमें 1 ऐम्पियर धारा बहे, तो उसका प्रतिरोध 1 ओम है: 1 Ω = 1 V/A।

प्रतिरोध किन बातों पर निर्भर करता है

एक ही पदार्थ का तार लंबा हो तो प्रतिरोध बढ़ता है — आवेश को ज़्यादा दूरी तय करनी होती है। मोटा हो तो प्रतिरोध घटता है — बहने की जगह ज़्यादा। पदार्थ बदलने पर (ताँबा, ऐलुमिनियम, नाइक्रोम) प्रतिरोध बदलता है; इस गुण को प्रतिरोधकता, ρ कहते हैं।

मान लीजिए किसी तार का प्रतिरोध 5 Ω है। लंबाई दोगुनी करने पर यह 10 Ω हो जाएगा, और लंबाई वही रखकर अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल दोगुना करने पर 2.5 Ω।

ताप का भी असर है: ज़्यादातर धातुओं का प्रतिरोध गरम होने पर बढ़ता है। जलते बल्ब का फिलामेंट ठंडे फिलामेंट से कहीं ज़्यादा प्रतिरोध दिखाता है।

R = ρL / AL = लंबाई, A = अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, ρ = प्रतिरोधकता

V–I ग्राफ: एक सीधी रेखा की कहानी

प्रतिरोध स्थिर रखकर विभवांतर धीरे-धीरे बढ़ाइए और हर बार धारा नापकर ग्राफ पर बिंदु लगाइए। सारे बिंदु मूलबिंदु से गुज़रने वाली एक सीधी रेखा पर आएँगे, क्योंकि शून्य विभवांतर पर धारा भी शून्य होती है।

V को ऊर्ध्वाधर और I को क्षैतिज अक्ष पर रखें तो रेखा का ढाल प्रतिरोध R है — प्रतिरोध ज़्यादा, रेखा ज़्यादा खड़ी। अक्ष उलट दें (I ऊर्ध्वाधर) तो ढाल 1/R हो जाता है। परीक्षा में पहले देख लें कि कौन सी राशि किस अक्ष पर है।

जो चालक यह सीधी रेखा देते हैं, वे ओमीय चालक हैं, जैसे स्थिर ताप पर ताँबे का तार। जो नहीं देते, जैसे जलता फिलामेंट या डायोड, वे अनओमीय हैं और उनका ग्राफ वक्र होता है।

सिमुलेशन में पाँच प्रयोग

पढ़कर समझना एक बात है, देखकर समझना और पक्का। ये प्रयोग एक-एक करके कीजिए और हर बार मापन पैनल के अंक देखिए।

  • "एक प्रतिरोध" चुनकर 4 Ω रखें। विभवांतर 12 V से 24 V करें — धारा 3 A से 6 A हो जाएगी। धक्का दोगुना, बहाव दोगुना।
  • विभवांतर स्थिर रखकर प्रतिरोध बढ़ाइए। आवेश के बिंदु धीमे हो जाएँगे और अमीटर का पाठ घटेगा — रुकावट बढ़ी, बहाव घटा।
  • विभवांतर शून्य कर दीजिए। सारे आवेश रुक जाएँगे, धारा शून्य। धक्का नहीं तो बहाव नहीं।
  • "श्रेणीक्रम" चुनिए: दोनों प्रतिरोधों में आवेश एक ही गति से चलते हैं (एक ही धारा), पर विभवांतर बँटता है — बड़े प्रतिरोध पर ज़्यादा।
  • "पार्श्वक्रम" चुनिए: मुख्य तार की धारा दो शाखाओं में बँटती है, कम प्रतिरोध वाली में ज़्यादा। फिर "इलेक्ट्रॉन प्रवाह" चालू करके देखिए कि इलेक्ट्रॉन असल में परंपरागत धारा की उल्टी दिशा में चलते हैं।

श्रेणीक्रम और पार्श्वक्रम संयोजन

प्रतिरोधों को एक के बाद एक, एक ही लाइन में जोड़ें तो वह श्रेणीक्रम है — आवेश के लिए एक ही रास्ता। दोनों के सिरे एक ही दो बिंदुओं से जोड़ें तो वह पार्श्वक्रम है — आवेश दो रास्तों में बँट जाता है।

श्रेणीक्रम में प्रतिरोध सीधे जुड़ते हैं, इसलिए तुल्य प्रतिरोध बढ़ता है। पार्श्वक्रम में रास्ते बढ़ते हैं, इसलिए तुल्य प्रतिरोध घटता है — सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम।

Rs = R₁ + R₂श्रेणीक्रम का तुल्य प्रतिरोध

1/Rp = 1/R₁ + 1/R₂पार्श्वक्रम का तुल्य प्रतिरोध

Rp = R₁R₂ / (R₁ + R₂)केवल दो प्रतिरोधों के लिए छोटा रूप

बिंदुश्रेणीक्रमपार्श्वक्रम
धारासभी में समानशाखाओं में बँटती है; कम प्रतिरोध में अधिक
विभवांतरप्रतिरोध के अनुपात में बँटता हैसभी शाखाओं पर समान
तुल्य प्रतिरोधसबसे बड़े से भी अधिकसबसे छोटे से भी कम
एक बल्ब फ्यूज़ हो जाएसब बंदबाकी जलते रहते हैं
उपयोगसजावटी झालर, फ्यूज़घरेलू वायरिंग

हल प्रश्न: कदम-दर-कदम

इन प्रश्नों के मान वही हैं जिनसे सिमुलेशन शुरू होता है, इसलिए हर उत्तर आप मापन पैनल में मिला सकते हैं। पहले "दिया है" और "ज्ञात करना है" लिख लीजिए — गलतियाँ आधी हो जाती हैं।

प्रश्न 1: एक प्रतिरोध में धारा

दिया है: V = 12 V, R = 4 Ω। ज्ञात करना है: I।

हल: I = V ÷ R = 12 ÷ 4 = 3 A। शक्ति P = VI = 12 × 3 = 36 W।

प्रश्न 2: मापे गए मानों से प्रतिरोध

एक तार के सिरों पर 6 V लगाने पर अमीटर 0.5 A दिखाता है। प्रतिरोध कितना है?

हल: R = V ÷ I = 6 ÷ 0.5 = 12 Ω। प्रयोगशाला में प्रतिरोध नापने का यही सबसे आसान तरीका है — वोल्टमीटर और अमीटर के पाठ का भाग।

प्रश्न 3: श्रेणीक्रम संयोजन

4 Ω और 6 Ω के प्रतिरोध श्रेणीक्रम में 12 V की बैटरी से जुड़े हैं।

चरण 1: Rs = 4 + 6 = 10 Ω। चरण 2: I = 12 ÷ 10 = 1.2 A। चरण 3: V₁ = 1.2 × 4 = 4.8 V, V₂ = 1.2 × 6 = 7.2 V।

जाँच: 4.8 + 7.2 = 12 V — बैटरी के बराबर। बड़े प्रतिरोध पर ज़्यादा विभवांतर गिरा, ध्यान दीजिए।

प्रश्न 4: पार्श्वक्रम संयोजन

वही दोनों प्रतिरोध अब पार्श्वक्रम में, उसी 12 V बैटरी पर।

चरण 1: Rp = (4 × 6) ÷ (4 + 6) = 2.4 Ω। चरण 2: कुल धारा I = 12 ÷ 2.4 = 5 A। चरण 3: शाखा धाराएँ I₁ = 12 ÷ 4 = 3 A, I₂ = 12 ÷ 6 = 2 A।

जाँच: 3 + 2 = 5 A। वही बैटरी पार्श्वक्रम में कहीं ज़्यादा धारा देती है, क्योंकि तुल्य प्रतिरोध बहुत कम है।

प्रश्न 5: शक्ति और घर का बल्ब

श्रेणीक्रम परिपथ में हर प्रतिरोध की शक्ति P = I²R: P₁ = 1.2² × 4 = 5.76 W, P₂ = 1.2² × 6 = 8.64 W। श्रेणीक्रम में बड़ा प्रतिरोध ज़्यादा गरम होता है।

एक बल्ब पर लिखा है 230 V, 100 W। सामान्य रूप से जलते समय धारा I = P ÷ V = 0.43 A और प्रतिरोध R = V² ÷ P = 529 Ω। ठंडी अवस्था में नापें तो इससे बहुत कम मिलेगा — क्योंकि फिलामेंट अनओमीय है।

P = VI = I²R = V²/Rओम का नियम लगाकर शक्ति के तीन रूप

वे गलतियाँ जो लगभग सब करते हैं

परीक्षक ये गलतियाँ बार-बार देखते हैं। पहले से जान लें तो आसानी से बच जाएँगे।

  • कथन में "स्थिर ताप पर" लिखना भूल जाना।
  • पार्श्वक्रम में 1/Rp निकालकर उसे ही उत्तर लिख देना — अंत में उलटकर Rp निकालना होता है।
  • अमीटर को पार्श्वक्रम और वोल्टमीटर को श्रेणीक्रम में जोड़ना — असल में इसका उल्टा।
  • mA या kΩ को A और Ω में बदले बिना सीधे सूत्र में रखना।
  • मान लेना कि हर चालक ओम का नियम मानता है — डायोड और बल्ब का फिलामेंट नहीं मानते।
  • इलेक्ट्रॉन और परंपरागत धारा की दिशा एक मानना — परंपरागत धारा + से − की ओर, इलेक्ट्रॉन उल्टी दिशा में।

परीक्षा कोना: CBSE, JEE और NEET

बोर्ड परीक्षा में ये बिंदु सबसे ज़्यादा पूछे जाते हैं, और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कुछ आगे की बातें भी।

कक्षा 10 बोर्ड के लिए

ओम के नियम का कथन (ताप स्थिर की शर्त के साथ), 1 ओम की परिभाषा, V–I ग्राफ बनाना, श्रेणी-पार्श्व क्रम के तुल्य प्रतिरोध, और "घरों में उपकरण पार्श्वक्रम में क्यों" — ये लगभग हर बार आते हैं।

  • प्रतिरोधकता पदार्थ और ताप पर निर्भर है, तार की लंबाई या मोटाई पर नहीं।
  • नाइक्रोम का उपयोग हीटर में क्योंकि उसकी प्रतिरोधकता अधिक और गलनांक ऊँचा है।

कक्षा 12, JEE और NEET के लिए

तार को खींचकर लंबाई दोगुनी करें तो आयतन स्थिर रहने से क्षेत्रफल आधा हो जाता है, इसलिए प्रतिरोध चार गुना होता है: 5 Ω का तार 20 Ω हो जाएगा। यह प्रश्न बार-बार आता है।

कक्षा 12 में धारा को अपवाह वेग से जोड़ा जाता है: I = neAv_d, और ओम के नियम का सूक्ष्म रूप J = σE है।

I = neAv_dn = इलेक्ट्रॉन घनत्व, v_d = अपवाह वेग

J = σEओम के नियम का सूक्ष्म रूप

झटपट दोहराई

परीक्षा से पहले की रात बस यह सूची पढ़ लीजिए, मुख्य बातें तुरंत याद आ जाएँगी।

  • V = IR, शर्त: ताप स्थिर।
  • 1 Ω = 1 V/A; प्रतिरोध लंबाई के साथ बढ़ता, अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के साथ घटता है, R = ρL/A।
  • V–I ग्राफ मूलबिंदु से गुज़रती सीधी रेखा; V बनाम I में ढाल = R।
  • श्रेणीक्रम: समान धारा, Rs = R₁ + R₂। पार्श्वक्रम: समान विभवांतर, 1/Rp = 1/R₁ + 1/R₂।
  • P = VI = I²R = V²/R।
  • अमीटर श्रेणीक्रम में, वोल्टमीटर पार्श्वक्रम में।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम का नियम क्या है समझाइए?

स्थिर ताप पर किसी चालक से बहने वाली धारा उसके सिरों के विभवांतर के अनुक्रमानुपाती होती है, यानी V = IR। विभवांतर दोगुना करें तो धारा भी दोगुनी हो जाती है।

प्रतिरोध का SI मात्रक क्या है?

प्रतिरोध का SI मात्रक ओम (Ω) है। 1 वोल्ट लगाने पर 1 ऐम्पियर धारा बहे तो प्रतिरोध 1 ओम होता है: 1 Ω = 1 V/A।

V-I ग्राफ का ढाल क्या दर्शाता है?

ओमीय चालक के लिए V–I ग्राफ मूलबिंदु से गुज़रती सीधी रेखा है। V को I के सापेक्ष खींचें तो ढाल प्रतिरोध R है; I को V के सापेक्ष खींचें तो ढाल 1/R है।

ओम के नियम की सीमाएँ क्या हैं?

ताप बदलने पर (जैसे जलता फिलामेंट) और डायोड, ट्रांज़िस्टर जैसे अनओमीय अवयवों पर नियम लागू नहीं होता; उनका V–I ग्राफ सीधी रेखा नहीं होता।

पार्श्वक्रम में तुल्य प्रतिरोध कम क्यों होता है?

पार्श्वक्रम में आवेश के लिए रास्ते बढ़ जाते हैं, जैसे सड़क में लेन बढ़ाने से जाम घटता है। इसलिए तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम हो जाता है।

अमीटर श्रेणीक्रम में और वोल्टमीटर पार्श्वक्रम में क्यों लगाते हैं?

अमीटर को पूरी धारा नापनी होती है, इसलिए वह धारा के रास्ते में श्रेणीक्रम में लगता है। वोल्टमीटर दो बिंदुओं का विभवांतर नापता है, इसलिए उन दोनों बिंदुओं के बीच पार्श्वक्रम में लगता है।

तार को खींचकर लंबाई दोगुनी करने पर प्रतिरोध कितना होता है?

आयतन स्थिर रहने से क्षेत्रफल आधा हो जाता है, इसलिए R = ρL/A के अनुसार प्रतिरोध चार गुना हो जाता है।

इस विषय पर और पढ़ाई

एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।

भौतिकी के और एनिमेशन

कक्षा 10 · 12

प्रकाश का अपवर्तन

प्रकाश का अपवर्तन किसे कहते हैं, अपवर्तन के नियम, अपवर्तनांक, क्रांतिक कोण व पूर्ण आंतरिक परावर्तन — आसान भाषा में, इंटरैक्टिव एनिमेशन और हल उदाहरण सहित।

कक्षा 11 · JEE

प्रक्षेप्य गति

प्रक्षेप्य गति किसे कहते हैं? कोण व वेग बदलकर पथ देखें — उड्डयन काल, अधिकतम ऊँचाई, क्षैतिज परास के सूत्र व हल उदाहरण। कक्षा 11, JEE/NEET।

कक्षा 11

सरल लोलक

सरल लोलक किसे कहते हैं, आवर्तकाल का सूत्र T=2π√(l/g), सरल आवर्त गति — लंबाई बदलकर देखें। g ज्ञात करने के हल उदाहरण।

कक्षा 12

विद्युत क्षेत्र

विद्युत क्षेत्र किसे कहते हैं, तीव्रता का सूत्र व SI मात्रक, क्षेत्र रेखाओं के गुण — आवेश रखकर रेखाएँ देखें। कूलॉम के नियम के हल उदाहरण।

कक्षा 11 · 12

तरंगों का व्यतिकरण

अध्यारोपण का सिद्धांत, संपोषी व विनाशी व्यतिकरण की शर्तें, फ्रिंज चौड़ाई β=λD/d — दो स्रोत खिसकाकर देखें। कक्षा 11-12 के हल उदाहरण।

कक्षा 9 · 11

मुक्त पतन

मुक्त पतन किसे कहते हैं, मुक्त पतन का त्वरण और सूत्र क्या है: सिक्का और पंख गिराकर खुद देखें, हवा के साथ और बिना हवा के। हल किए गए उदाहरणों सहित।

कक्षा 10 · 12

लेंस द्वारा प्रतिबिंब

उत्तल लेंस और अवतल लेंस के किरण आरेख इंटरैक्टिव: बिंब खिसकाकर सभी छह स्थितियाँ देखें, लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f, आवर्धन और लेंस की क्षमता तुरंत पढ़ें।

कक्षा 9 · 11

न्यूटन के गति के नियम

न्यूटन के गति के तीनों नियम, जड़त्व, संवेग, F = ma, आवेग और क्रिया-प्रतिक्रिया: ट्रॉली धकेलकर खुद देखें, उदाहरण और हल किए गए प्रश्नों के साथ (कक्षा 9, 11)।

कक्षा 10 · 12

गोलीय दर्पण किरण आरेख

अवतल और उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब बनना, ध्रुव, वक्रता केंद्र, मुख्य फोकस, दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f और आवर्धन m = −v/u: बिंब खींचकर किरण आरेख ख़ुद देखें।

कक्षा 10 · 12

विद्युत चुंबकीय प्रेरण

विद्युत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं? चुंबक को कुंडली से गुज़ारो और सेंटर-ज़ीरो गैल्वेनोमीटर देखो। फैराडे का नियम e = −N dΦ/dt और लेंज़ का नियम हल किए गए उदाहरणों के साथ।

कक्षा 9 · 11

संवेग संरक्षण और संघट्ट

संवेग संरक्षण का नियम क्या है? दो गाड़ियों को टकराओ और प्रत्यावस्थान गुणांक e को 0 (चिपकना) से 1 (प्रत्यास्थ) तक बदलो। संवेग और गतिज ऊर्जा के बार-चार्ट लाइव देखो, हल किए गए उदाहरणों के साथ।

कक्षा 9 · 11

कार्य, ऊर्जा और शक्ति

कार्य किसे कहते हैं, गतिज व स्थितिज ऊर्जा और शक्ति के सूत्र क्या हैं: घुमावदार पथ पर लुढ़कती कार्ट की सिमुलेशन में ऊर्जा का रूपांतरण देखें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।

कक्षा 11 · JEE

आनत तल

ढलान पर भार कैसे दो भागों में बँटता है, विराम कोण क्या है, घर्षण ब्लॉक को कब रोकता है और कब फिसलने देता है — कोण बदलकर बल-चित्र में स्वयं देखें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।

अन्य विषयों के एनिमेशन

रसायन विज्ञान

परमाणु की संरचना

रसायन विज्ञान

अम्ल, क्षारक और pH मान

रसायन विज्ञान

इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

रसायन विज्ञान

गैस नियम: बॉयल, चार्ल्स, गे-लुसाक, आवोगाद्रो और PV = nRT

रसायन विज्ञान

आयनिक बंध कैसे बनता है

रसायन विज्ञान

वैद्युत अपघटन और फैराडे के नियम

रसायन विज्ञान

सहसंयोजक बंध

रसायन विज्ञान

आवर्त सारणी की आवर्तिता

जीव विज्ञान

समसूत्री कोशिका विभाजन

जीव विज्ञान

विसरण और परासरण

जीव विज्ञान

प्रकाश संश्लेषण

जीव विज्ञान

मानव हृदय की संरचना और कार्य

जीव विज्ञान

मेंडल के आनुवंशिकता नियम

जीव विज्ञान

डीएनए प्रतिकृति

जीव विज्ञान

कोशिकीय श्वसन

जीव विज्ञान

एंजाइम क्रिया

जीव विज्ञान

तंत्रिका आवेग और एक्शन पोटेंशियल

जीव विज्ञान

नेफ्रॉन और मूत्र निर्माण की प्रक्रिया

जीव विज्ञान

अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस)

जीव विज्ञान

पाचन तंत्र

गणित

पाइथागोरस प्रमेय

गणित

त्रिकोणमितीय अनुपात और इकाई वृत्त

गणित

द्विघात समीकरण और द्विघात फलन का ग्राफ़

गणित

वृत्त के प्रमेय

गणित

ऊँचाई और दूरी: उन्नयन कोण और अवनमन कोण

गणित

प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता

गणित

समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी

गणित

माध्य, माध्यिका और बहुलक