सामने से दृश्य: हृदय का दायाँ भाग आपके बाईं ओर है
नियंत्रण
कौन-सा परिसंचरण उभारें
मापन
- हृदय दर
- 75धड़कन/मिनट
- हृद चक्र का समय = 60 ÷ दर
- 0.80s
- वर्तमान अवस्था
- आलिंद प्रकुंचन
- चक्र के भीतर समय
- 0.00s
- हृद निकास = प्रवाह आयतन × दर
- 5.25L/min
- खुले कपाट
- त्रिवलनी कपाट · द्विवलनी (मिट्रल) कपाट
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- चलाएँ और एक धड़कन ध्यान से देखें: पहले आलिंद सिकुड़ते हैं (समय-रेखा का नारंगी भाग), फिर निलय (बीच का लंबा भाग), फिर सब कक्ष शिथिल होते हैं।
- महाशिरा से आने वाले एक नीले बिंदु का पीछा करें: दाएँ आलिंद और दाएँ निलय से होकर वह फेफड़ों में जाता है और फुप्फुस शिराओं से लाल होकर बाईं ओर लौटता है।
- पीले कपाट-पल्लों को देखें: निलय के सिकुड़ते ही त्रिवलनी और द्विवलनी कपाट बंद होते हैं और पैनल में “लब” दिखता है; निलय शिथिल होने पर अर्धचंद्राकार कपाट बंद होते हैं और “डब” दिखता है।
- हृदय दर 75 से 150 करें: हृद चक्र का समय, अवस्थाओं की पट्टियाँ और ईसीजी सब तेज़ हो जाते हैं, और चक्र का समय आधा रह जाता है।
- प्रवाह आयतन बदलकर हृद निकास देखें, फिर उभारने वाले बटनों से फुप्फुसीय और दैहिक परिसंचरण अलग-अलग देखें।
एक पंप जो कभी छुट्टी नहीं लेता
अपनी कलाई के अंदर की ओर, अंगूठे के नीचे, दो उँगलियाँ हल्के से दबाइए। जो धक-धक महसूस हो रही है, वही आपके हृदय का काम है। यह आपके जन्म से महीनों पहले चलना शुरू हुआ था और तब से एक बार भी नहीं रुका: न नींद में, न परीक्षा हॉल में, न इस वाक्य को पढ़ते समय।
आराम की अवस्था में लगभग 72 धड़कन प्रति मिनट मानें, तो एक दिन में हृदय 1,03,680 बार धड़कता है। 70 वर्षों में यह लगभग 265 करोड़ धड़कनें बनती हैं, और एक बार भी आपको याद नहीं दिलाना पड़ता। इंसान की बनाई कोई मशीन बिना सर्विस के इतने दिन नहीं चलती।
किसी घर की छत पर लगे पानी के मोटर-पंप के बारे में सोचिए। वह नीचे की टंकी से पानी खींचकर हर नल तक पहुँचाता है। हृदय यही काम रुधिर के साथ करता है: शिराओं से रुधिर खींचता है और धमनियों से आगे धकेलता है, ताकि हर कोशिका को ऑक्सीजन और भोजन मिले और अपशिष्ट हटाया जा सके। यह सब कैसे होता है, इस पेज के चलते चित्र में आप ख़ुद नियंत्रित करके देख सकते हैं।
हृदय कहाँ है और उसकी रक्षा कैसे होती है: हृदयावरण
हृदय वक्ष गुहा के बीच में, दोनों फेफड़ों के बीच, उरोस्थि (स्टर्नम) के पीछे स्थित होता है। यह थोड़ा तिरछा रखा होता है, इसलिए इसका लगभग दो-तिहाई भाग मध्य रेखा के बाईं ओर होता है। इसी कारण धड़कन बाईं ओर ज़्यादा महसूस होती है, हालाँकि पूरा हृदय बाईं ओर नहीं है।
वयस्क का हृदय लगभग बंद मुट्ठी जितना, करीब 12 सेमी लंबा और लगभग 250 से 350 ग्राम भारी होता है। इसका आकार कुछ उलटे शंकु जैसा है: चौड़ा आधार ऊपर, जहाँ बड़ी रुधिर वाहिकाएँ जुड़ती हैं, और नुकीला सिरा (शिखर या एपेक्स) नीचे और बाईं ओर।
हृदय एक दोहरी झिल्ली वाली थैली में लिपटा होता है जिसे हृदयावरण (पेरिकार्डियम) कहते हैं। दोनों परतों के बीच हृदयावरणी द्रव भरा रहता है। जैसे मशीन में तेल घर्षण कम करता है, वैसे ही यह द्रव हर घंटे हज़ारों धड़कनों के दौरान घर्षण घटाता है और हृदय को छोटे झटकों से बचाता है। बाहर से पसलियाँ और उरोस्थि हड्डियों की मज़बूत ढाल बनाती हैं।
हृदय की दीवार और बाहरी संरचना
हृदय की दीवार में तीन परतें होती हैं। बाहरी पतली परत एपिकार्डियम, बीच की मोटी परत मायोकार्डियम और भीतर की चिकनी परत एंडोकार्डियम। मायोकार्डियम हृद पेशी से बना है, जो लय में सिकुड़ती है और हाथ की पेशियों की तरह थकती नहीं। एंडोकार्डियम कपाटों को भी ढकती है।
बाहर से एक खाँच दिखती है जो ऊपर के कक्षों (आलिंद) को नीचे के कक्षों (निलय) से अलग करती है; आगे और पीछे भी खाँचें होती हैं जहाँ दोनों निलय मिलते हैं। इन खाँचों में कोरोनरी धमनियाँ चलती हैं। ये हृदय की अपनी भोजन-लाइन हैं: कक्षों से होकर जाने वाले रुधिर से हृद पेशी ऑक्सीजन नहीं लेती, कोरोनरी धमनियों से लेती है।
ऊपर की ओर बड़ी वाहिकाएँ दिखती हैं: मुड़कर ऊपर उठती महाधमनी, उसके आगे फुप्फुस धमनी का तना, दाईं ओर ऊर्ध्व महाशिरा और पीछे फुप्फुस शिराएँ।
चार कक्ष: आलिंद और निलय, और बायाँ निलय सबसे मोटा क्यों
अंदर से हृदय एक पेशीय दीवार, पट (सेप्टम), द्वारा दाएँ और बाएँ दो भागों में बँटा है। स्वस्थ हृदय में दोनों ओर का रुधिर कभी नहीं मिलता। हर भाग में दो कक्ष हैं: ऊपर पतली दीवार वाला आलिंद (एट्रियम), जो रुधिर ग्रहण करता है, और नीचे मोटी दीवार वाला निलय (वेंट्रिकल), जो रुधिर पंप करके बाहर भेजता है।
किताब के चित्र और इस सिमुलेशन में दिशा पर ध्यान दें: यह आपकी ओर मुँह किए व्यक्ति का सामने से दृश्य है, इसलिए हृदय का दायाँ भाग आपके बाईं ओर दिखता है। दायाँ आलिंद और दायाँ निलय चित्र में बाईं ओर बने हैं।
दीवारों की मोटाई इतनी अलग क्यों? जिस कक्ष का काम जितना कठिन, उसकी दीवार उतनी मोटी। आलिंद रुधिर को बस कुछ सेंटीमीटर नीचे निलय में भेजते हैं, इसलिए उनकी दीवार पतली है। दायाँ निलय रुधिर पास के फेफड़ों में भेजता है जहाँ प्रतिरोध कम है, इसलिए उसकी दीवार मध्यम मोटी है। बाएँ निलय को सिर से पैर की उँगलियों तक पूरे शरीर में, बहुत अधिक दाब पर, रुधिर भेजना होता है, इसलिए उसकी दीवार सबसे मोटी है, दाएँ निलय से लगभग तीन गुना। सिमुलेशन में बाएँ निलय की दीवार इसी कारण सबसे मोटी बनाई गई है।
| कक्ष | रुधिर कहाँ से आता है | रुधिर कहाँ जाता है | रुधिर का प्रकार | दीवार |
|---|---|---|---|---|
| दायाँ आलिंद | ऊर्ध्व और निम्न महाशिरा | दायाँ निलय | विऑक्सीजनित | पतली |
| दायाँ निलय | दायाँ आलिंद | फेफड़े (फुप्फुस धमनी) | विऑक्सीजनित | अधिक मोटी |
| बायाँ आलिंद | फेफड़े (फुप्फुस शिराएँ) | बायाँ निलय | ऑक्सीजनित | पतली |
| बायाँ निलय | बायाँ आलिंद | पूरा शरीर (महाधमनी) | ऑक्सीजनित | सबसे मोटी |
कपाट और लब-डब ध्वनि
कपाट (वाल्व) एकतरफ़ा दरवाज़े हैं। सही दिशा से रुधिर धकेले तो खुलते हैं, और रुधिर उलटा बहना चाहे तो धप से बंद हो जाते हैं। हृदय में ऐसे चार कपाट हैं।
दाएँ आलिंद और दाएँ निलय के बीच तीन पल्लों वाला त्रिवलनी कपाट (ट्राइकस्पिड) होता है। बाएँ आलिंद और बाएँ निलय के बीच दो पल्लों वाला द्विवलनी कपाट (बाइकस्पिड) होता है, जिसे मिट्रल कपाट भी कहते हैं। इन दोनों को मिलाकर आलिंद-निलय (AV) कपाट कहते हैं। कंडरा रज्जु (कॉर्डी टेंडिनी) नाम के पतले धागे इन पल्लों को पैपिलरी पेशियों से बाँधे रखते हैं, ताकि निलय के सिकुड़ने पर पल्ले उलटकर आलिंद में न चले जाएँ।
निलयों के निकास पर दो अर्धचंद्राकार कपाट होते हैं, हर एक में आधे चाँद जैसी तीन जेबें: फुप्फुस धमनी के आरंभ में फुप्फुसीय कपाट और महाधमनी के आरंभ में महाधमनी कपाट। निलय शिथिल होने पर ये रुधिर को वापस निलय में गिरने से रोकते हैं।
डॉक्टर स्टेथोस्कोप से जो आवाज़ सुनते हैं, वह कपाट बंद होने की आवाज़ है। पहली ध्वनि “लब” लंबी और भारी होती है: निलय प्रकुंचन की शुरुआत में AV कपाटों का बंद होना। दूसरी ध्वनि “डब” छोटी और तीखी होती है: निलय के शिथिल होने की शुरुआत में अर्धचंद्राकार कपाटों का बंद होना। सिमुलेशन के पैनल में देखिए, त्रिवलनी और द्विवलनी पल्ले बंद होते ही “लब” और अर्धचंद्राकार पल्ले बंद होते ही “डब” चमकता है।
| कपाट | स्थान | पल्ले | उलटा प्रवाह कहाँ रोकता है | बंद होने की ध्वनि |
|---|---|---|---|---|
| त्रिवलनी | दायाँ आलिंद → दायाँ निलय | 3 | दाएँ आलिंद में | लब (पहली ध्वनि) |
| द्विवलनी (मिट्रल) | बायाँ आलिंद → बायाँ निलय | 2 | बाएँ आलिंद में | लब (पहली ध्वनि) |
| फुप्फुसीय अर्धचंद्राकार | दायाँ निलय → फुप्फुस धमनी | 3 जेबें | दाएँ निलय में | डब (दूसरी ध्वनि) |
| महाधमनी अर्धचंद्राकार | बायाँ निलय → महाधमनी | 3 जेबें | बाएँ निलय में | डब (दूसरी ध्वनि) |
धमनी, शिरा और केशिका
हृदय रुधिर को नलिकाओं के एक विशाल जाल में भेजता है। धमनियाँ रुधिर को हृदय से दूर ले जाती हैं। शिराएँ रुधिर को हृदय की ओर लाती हैं। केशिकाएँ बहुत पतली वाहिकाएँ हैं जिनकी दीवार केवल एक कोशिका मोटी होती है; ये छोटी धमनियों को छोटी शिराओं से जोड़ती हैं, और ऑक्सीजन, ग्लूकोज़ तथा अपशिष्ट का असली आदान-प्रदान यहीं होता है।
एक आम जाल: “धमनियाँ ऑक्सीजनित रुधिर ले जाती हैं” ज़्यादातर धमनियों के लिए सही है, सबके लिए नहीं। फुप्फुस धमनी विऑक्सीजनित रुधिर हृदय से फेफड़ों तक ले जाती है, और फुप्फुस शिराएँ ऑक्सीजनित रुधिर फेफड़ों से हृदय तक लाती हैं। परिभाषा दिशा पर आधारित है (हृदय से दूर या हृदय की ओर), ऑक्सीजन पर नहीं।
| लक्षण | धमनी | शिरा | केशिका |
|---|---|---|---|
| दिशा | हृदय से दूर | हृदय की ओर | धमनियों को शिराओं से जोड़ती है |
| दीवार | मोटी, पेशीय, लचीली | पतली, कम पेशी | एक कोशिका मोटी |
| अवकाशिका (ल्यूमेन) | संकरी | चौड़ी | बहुत संकरी, एक बार में एक रुधिर कोशिका |
| कपाट | नहीं | होते हैं, उलटा प्रवाह रोकते हैं | नहीं |
| दाब | अधिक, हर धड़कन के साथ घटता-बढ़ता | कम, स्थिर | कम |
| आमतौर पर रुधिर | ऑक्सीजनित (फुप्फुस धमनी को छोड़कर) | विऑक्सीजनित (फुप्फुस शिराओं को छोड़कर) | आदान-प्रदान यहीं होता है |
दोहरा परिसंचरण: एक हृदय, दो रास्ते
मनुष्य में शरीर का एक पूरा चक्कर लगाने में रुधिर दो बार हृदय से होकर गुजरता है। इसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं (कक्षा 10 की NCERT पुस्तक का “जैव प्रक्रम” अध्याय और कक्षा 11 का “शरीर द्रव तथा परिसंचरण” अध्याय)। सिमुलेशन में दोनों रास्ते बने हैं ताकि आप उनका पीछा कर सकें।
फुप्फुसीय परिसंचरण छोटा रास्ता है: दायाँ निलय → फुप्फुस धमनी → फेफड़े → फुप्फुस शिराएँ → बायाँ आलिंद। फेफड़ों में रुधिर कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है और ऑक्सीजन लेता है, इसलिए चित्र में नीले से लाल हो जाता है।
दैहिक (सिस्टेमिक) परिसंचरण लंबा रास्ता है: बायाँ निलय → महाधमनी → धमनियाँ → हर अंग की केशिकाएँ → शिराएँ → ऊर्ध्व और निम्न महाशिरा → दायाँ आलिंद। शरीर की केशिकाओं में रुधिर कोशिकाओं को ऑक्सीजन देता है और उनकी कार्बन डाइऑक्साइड लेता है, इसलिए लाल से फिर नीला हो जाता है।
इसका फ़ायदा क्या है? दोनों ओर का रुधिर कभी नहीं मिलता, इसलिए शरीर को हमेशा पूरी तरह ऑक्सीजनित रुधिर ऊँचे दाब पर मिलता है। मछली का हृदय दो कक्षों वाला है और परिसंचरण एकल, इसलिए क्लोम (गिल) से गुजरते हुए रुधिर का दाब घट जाता है। मेंढक में तीन कक्ष होते हैं और रुधिर कुछ मिल जाता है। पक्षी और स्तनधारी अपने शरीर का ताप स्थिर रखने में बहुत ऊर्जा खर्च करते हैं, इसलिए उनमें चार कक्ष और पूर्ण दोहरा परिसंचरण होता है।
- फुप्फुसीय परिसंचरण: हृदय → फेफड़े → हृदय (छोटा रास्ता, कम दाब)।
- दैहिक परिसंचरण: हृदय → शरीर → हृदय (लंबा रास्ता, अधिक दाब)।
- एक पंक्ति में रुधिर का मार्ग: महाशिरा → दायाँ आलिंद → दायाँ निलय → फुप्फुस धमनी → फेफड़े → फुप्फुस शिराएँ → बायाँ आलिंद → बायाँ निलय → महाधमनी → शरीर।
हृद चक्र: एक धड़कन कदम-दर-कदम
एक धड़कन में होने वाली सारी घटनाओं को मिलाकर हृद चक्र (कार्डियक साइकिल) कहते हैं। सिकुड़ने को प्रकुंचन (सिस्टोल) और ढीला होने को अनुशिथिलन (डायस्टोल) कहते हैं। एक चक्र का समय = 60 सेकंड ÷ हृदय दर: 75 धड़कन प्रति मिनट पर 60 ÷ 75 = 0.8 सेकंड।
किताबें इन 0.8 सेकंड को तीन अवस्थाओं में बाँटती हैं। आलिंद प्रकुंचन (लगभग 0.1 s): आलिंद सिकुड़कर निलयों को पूरा भर देते हैं, हालाँकि निलय पहले से ही ज़्यादातर भर चुके होते हैं। निलय प्रकुंचन (लगभग 0.3 s): निलय सिकुड़ते हैं, AV कपाट बंद होते हैं (लब), अर्धचंद्राकार कपाट खुलते हैं और रुधिर फुप्फुस धमनी तथा महाधमनी में दौड़ता है। संयुक्त अनुशिथिलन (लगभग 0.4 s): सारे कक्ष शिथिल होते हैं, अर्धचंद्राकार कपाट बंद होते हैं (डब), शिराओं से रुधिर आलिंदों में आता है और खुले AV कपाटों से सीधे निलयों में उतरता है।
दो छोटे पल ऐसे होते हैं जब चारों कपाट बंद रहते हैं: “लब” के ठीक बाद निलय में दाब बढ़ रहा होता है पर अभी अर्धचंद्राकार कपाट खुले नहीं होते; और “डब” के ठीक बाद निलय शिथिल हो रहे होते हैं पर दाब अभी इतना नहीं गिरा कि AV कपाट खुलें। सिमुलेशन की “खुले कपाट” रीडिंग में इन पलों में “सभी बंद” झलकता है।
संख्याओं के बारे में एक बात: NCERT की पुस्तक 72 धड़कन प्रति मिनट और 0.8 सेकंड का हृद चक्र बताती है। हिसाब लगाएँ तो 60 ÷ 72 = 0.83 सेकंड; ठीक 0.8 सेकंड 75 धड़कन प्रति मिनट पर होता है, इसलिए सिमुलेशन वहीं से शुरू होता है। दूसरी बात: दर बढ़ाने पर सिमुलेशन तीनों अवस्थाओं को बराबर अनुपात में छोटा करता है। असली हृदय में मुख्यतः अनुशिथिलन का समय घटता है, इसलिए बहुत तेज़ धड़कन में निलयों को भरने का समय कम मिलता है।
| दर (धड़कन/मिनट) | हृद चक्र | आलिंद प्रकुंचन | निलय प्रकुंचन | अनुशिथिलन | 70 mL पर हृद निकास |
|---|---|---|---|---|---|
| 50 | 1.20 s | 0.15 s | 0.45 s | 0.60 s | 3.50 L/min |
| 60 | 1.00 s | 0.13 s | 0.38 s | 0.50 s | 4.20 L/min |
| 75 | 0.80 s | 0.10 s | 0.30 s | 0.40 s | 5.25 L/min |
| 100 | 0.60 s | 0.08 s | 0.22 s | 0.30 s | 7.00 L/min |
| 120 | 0.50 s | 0.06 s | 0.19 s | 0.25 s | 8.40 L/min |
| 150 | 0.40 s | 0.05 s | 0.15 s | 0.20 s | 10.50 L/min |
गतिप्रेरक (पेसमेकर): हृदय को धड़कने को कौन कहता है?
हृदय तक जाने वाली तंत्रिकाएँ काट दी जाएँ तब भी हृदय धड़कता रहता है; प्रत्यारोपण के लिए निकाला गया हृदय भी कुछ देर धड़कता है। कारण यह है कि हर धड़कन का संकेत हृदय के भीतर ही बनता है। ऐसे हृदय को पेशीजनक (मायोजेनिक) हृदय कहते हैं।
प्राकृतिक गतिप्रेरक शिराअलिंद पर्व (SA नोड, SAN) है, जो दाएँ आलिंद की दीवार में ऊर्ध्व महाशिरा के प्रवेश के पास विशेष पेशी का एक छोटा हिस्सा है। आराम में यह प्रति मिनट लगभग 70 से 75 विद्युत आवेग बनाता है। आवेग दोनों आलिंदों में फैलता है और आलिंद सिकुड़ते हैं।
फिर आवेग आलिंद-निलय पर्व (AV नोड, AVN) तक पहुँचता है, जो दोनों आलिंदों के बीच की दीवार के निचले भाग में है। AV नोड संकेत को लगभग एक सेकंड के दसवें भाग तक रोक कर रखता है। इस छोटी देरी से आलिंदों को निलयों में रुधिर पूरा उँडेलने का समय मिल जाता है।
AV नोड से संकेत पट के भीतर हिस के बंडल से नीचे उतरता है, दाईं और बाईं शाखाओं में बँटता है, और निलय की दीवारों में पुरकिंजे तंतुओं से फैल जाता है। तब निलय नीचे से ऊपर की ओर सिकुड़ते हैं, जैसे टूथपेस्ट की ट्यूब नीचे से दबाई जाए, और रुधिर ऊपर से बाहर निकलता है।
तंत्रिकाएँ और हार्मोन धड़कन शुरू नहीं करते, पर उसकी गति बदलते हैं। दौड़ते समय या डर लगने पर अनुकंपी तंत्रिकाएँ और एड्रीनलीन हार्मोन SA नोड को तेज़ करते हैं; आराम में वेगस तंत्रिका उसे धीमा करती है।
- शिराअलिंद पर्व (गतिप्रेरक) → आलिंद प्रकुंचन
- आलिंद-निलय पर्व (थोड़ी देरी)
- हिस का बंडल → दाईं और बाईं शाखाएँ
- पुरकिंजे तंतु → निलय प्रकुंचन
ईसीजी की बुनियादी बातें: P, QRS और T
विद्युत हृद लेख (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम, ECG) त्वचा पर लगे इलेक्ट्रोड से हृदय के विद्युत संकेत रिकॉर्ड करता है। यह रुधिर प्रवाह नहीं नापता, बल्कि वे विद्युत तरंगें नापता है जो हर संकुचन को शुरू करती हैं। सिमुलेशन में एक सरल योजनाबद्ध रेखा अवस्थाओं के साथ ताल मिलाकर चलती है।
P तरंग छोटी और गोल होती है: आलिंद प्रकुंचन से ठीक पहले आलिंदों का विद्युत उत्तेजन (विध्रुवण)। QRS सम्मिश्र ऊँची, नुकीली चोटी है: निलयों का उत्तेजन, निलय प्रकुंचन से ठीक पहले। T तरंग एक नरम उभार है: निलयों का सामान्य अवस्था में लौटना (पुनर्ध्रुवण), जब वे शिथिल हो रहे होते हैं। आलिंद भी लौटते हैं, पर वह छोटा संकेत QRS के भीतर छिप जाता है।
डॉक्टर आकृतियों के साथ दूरियाँ भी देखते हैं। एक R चोटी से अगली R चोटी तक एक पूरा चक्र है, इसलिए हृदय दर = 60 ÷ (R–R अंतराल सेकंड में)। असली ईसीजी की व्याख्या केवल प्रशिक्षित डॉक्टर ही कर सकते हैं; यह पेज तरंगों का अर्थ समझाने के लिए है, अपनी रिपोर्ट पढ़ने के लिए नहीं।
| तरंग | विद्युत रूप से क्या होता है | उसके बाद यांत्रिक रूप से क्या होता है |
|---|---|---|
| P | आलिंदों का विध्रुवण | आलिंद प्रकुंचन |
| QRS | निलयों का विध्रुवण (आलिंदों का पुनर्ध्रुवण इसमें छिपा) | निलय प्रकुंचन, “लब” |
| T | निलयों का पुनर्ध्रुवण | निलय शिथिल होते हैं, अंत के पास “डब” |
नाड़ी, रक्तचाप और हृद निकास
बायाँ निलय जब भी महाधमनी में रुधिर धकेलता है, दाब की एक लहर धमनियों में दौड़ती है। जहाँ धमनी त्वचा के पास किसी हड्डी के ऊपर से गुजरती है, वहाँ यह लहर नाड़ी (पल्स) के रूप में महसूस होती है: कलाई पर (रेडियल धमनी) और गर्दन के किनारे (कैरोटिड धमनी)। 15 सेकंड गिनकर 4 से गुणा करने पर हृदय दर मिलती है। आराम में वयस्क की सामान्य दर मोटे तौर पर 60 से 100 प्रति मिनट होती है; बच्चों और नवजातों की दर अधिक, और नियमित खिलाड़ियों की अक्सर कम।
रक्तचाप धमनियों की दीवार पर रुधिर का दाब है, जिसे स्फिग्मोमैनोमीटर से पारे के मिलीमीटर (mm Hg) में नापा जाता है। इसे दो संख्याओं में लिखते हैं, जैसे 120/80। ऊपर की संख्या (प्रकुंचन दाब, सिस्टोलिक) निलय प्रकुंचन के समय का अधिकतम दाब है; नीचे की संख्या (अनुशिथिलन दाब, डायस्टोलिक) हृदय के शिथिल रहने के समय का न्यूनतम दाब। 120/80 mm Hg किताबों में दिया स्वस्थ वयस्क का सामान्य मान है। बार-बार नापने पर भी दाब ऊँचा रहे तो उसे उच्च रक्तचाप कहते हैं, और यह तय करना केवल डॉक्टर का काम है।
हृद निकास (कार्डियक आउटपुट) यह है कि एक निलय एक मिनट में कितना रुधिर पंप करता है: हृद निकास = प्रवाह आयतन × हृदय दर। सिमुलेशन के शुरुआती मानों पर 70 mL × 75 = 5,250 mL, यानी हर मिनट 5.25 लीटर। वयस्क के शरीर में केवल लगभग 5 लीटर रुधिर होता है, इसलिए मोटे तौर पर हर मिनट पूरा रुधिर एक चक्कर लगा लेता है।
हृद चक्र का समय (s) = 60 ÷ दर (धड़कन/मिनट)60 ÷ 75 = 0.8 s
हृद निकास = प्रवाह आयतन × दर70 mL × 75 = 5,250 mL/min = 5.25 L/min
दर = 60 ÷ R–R अंतरालईसीजी से
नाड़ी दाब = प्रकुंचन दाब − अनुशिथिलन दाब120 − 80 = 40 mm Hg
सिमुलेशन में ख़ुद करके देखें
हर प्रयोग एक मिनट से कम लेता है और एक अवधारणा पक्की कर देता है।
1. “लब” पकड़िए
गति 0.25× करें। त्रिवलनी और द्विवलनी पल्लों को देखें। समय-रेखा का नारंगी भाग ख़त्म होकर निलय के सिकुड़ना शुरू करते ही दोनों पल्ले बंद होते हैं और “लब” दिखता है। ध्यान दें, ईसीजी की QRS चोटी उससे ठीक पहले आती है: पहले बिजली, फिर संकुचन।
2. “डब” पकड़िए
0.25× पर ही निलयों के ऊपर के दो छोटे अर्धचंद्राकार कपाट देखें। “लब” के थोड़ी देर बाद ये खुलते हैं और निलय शिथिल होने पर “डब” के साथ बंद होते हैं। ईसीजी की T तरंग तभी ख़त्म हुई होती है।
3. एक रुधिर कोशिका का पीछा
फुप्फुसीय परिसंचरण उभारें और दाएँ निलय से निकलता एक बिंदु चुनें। देखें कि फेफड़ों में जाकर वह नीले से लाल हो जाता है। फिर दैहिक चुनें और बाएँ निलय से महाधमनी होकर शरीर तक जाते एक लाल बिंदु का पीछा करें; शरीर में वह फिर नीला हो जाता है।
4. व्यायाम
दर 150 और प्रवाह आयतन 100 mL करें। हृद चक्र का समय 0.4 सेकंड रह जाता है और हृद निकास बढ़कर 15 लीटर प्रति मिनट हो जाता है, आराम का लगभग 2.9 गुना। क्रिकेट मैच में दौड़ते समय ठीक यही होता है।
5. नींद
दर घटाकर 50 करें। हृद चक्र एक सेकंड से लंबा हो जाता है और ईसीजी की चोटियाँ दूर-दूर हो जाती हैं। आराम या नींद में शरीर को कम ऑक्सीजन चाहिए, इसलिए हृदय धीमा चलता है।
हल किए गए प्रश्न
नीचे का हर उत्तर सिमुलेशन के अपने मॉडल से निकाला गया है, इसलिए आप मापन पैनल पर मिलान कर सकते हैं।
प्रश्न 1: एक हृद चक्र का समय
एक हृदय प्रति मिनट 75 बार धड़कता है। एक हृद चक्र कितना लंबा है, और हर अवस्था कितनी देर की है?
हृद चक्र = 60 ÷ 75 = 0.8 s। आलिंद प्रकुंचन = 0.1 s, निलय प्रकुंचन = 0.3 s, अनुशिथिलन = 0.4 s। ध्यान दें कि हर चक्र का आधा समय हृदय आराम करता है; उसी समय वह भरता है और उसकी अपनी पेशी को सबसे अधिक रुधिर मिलता है।
प्रश्न 2: हृद निकास
प्रवाह आयतन 70 mL और दर 75 धड़कन प्रति मिनट है। हृद निकास लीटर प्रति मिनट में ज्ञात कीजिए।
हृद निकास = 70 × 75 = 5,250 mL/min। 1,000 से भाग देकर: 5.25 L/min।
प्रश्न 3: धीमा हृदय, तेज़ हृदय
60 और 120 धड़कन प्रति मिनट पर हृद चक्र का समय और सिमुलेशन के अनुपात से अनुशिथिलन का समय ज्ञात कीजिए।
60 पर: 60 ÷ 60 = 1.0 s, अनुशिथिलन = 0.50 s। 120 पर: 60 ÷ 120 = 0.5 s, अनुशिथिलन = 0.25 s। दर दोगुनी होने पर भरने का समय आधा हो जाता है।
प्रश्न 4: एक दिन की धड़कनें
72 धड़कन प्रति मिनट और हर धड़कन में 70 mL रुधिर हो तो एक दिन में कितनी धड़कनें और कितने लीटर रुधिर?
एक दिन = 1,440 मिनट। धड़कनें = 72 × 1,440 = 1,03,680। रुधिर = 72 × 70 × 1,440 = 72,57,600 mL ≈ 7,257.6 लीटर, पानी की एक बड़ी टंकी भरने जितना, और यह सब पंप करता है आपकी मुट्ठी जितना एक अंग।
प्रश्न 5: नाड़ी और ईसीजी से दर
(a) 15 सेकंड में 18 नाड़ी-धड़कनें गिनी गईं। (b) ईसीजी में R–R अंतराल 0.75 सेकंड है। दोनों में हृदय दर ज्ञात कीजिए।
(a) 18 × (60 ÷ 15) = 18 × 4 = 72 धड़कन प्रति मिनट। (b) 60 ÷ 0.75 = 80 धड़कन प्रति मिनट।
प्रश्न 6: प्रवाह आयतन निकालना
हृद निकास 6 लीटर प्रति मिनट और दर 80 धड़कन प्रति मिनट है। प्रवाह आयतन कितना है?
प्रवाह आयतन = हृद निकास ÷ दर = 6,000 ÷ 80 = 75 mL प्रति धड़कन।
प्रश्न 7: नाड़ी दाब और माध्य धमनी दाब
रक्तचाप 120/80 mm Hg है। नाड़ी दाब और अनुमानित माध्य धमनी दाब (MAP ≈ अनुशिथिलन दाब + नाड़ी दाब ÷ 3) ज्ञात कीजिए।
नाड़ी दाब = 120 − 80 = 40 mm Hg। MAP ≈ 80 + 40 ÷ 3 = 80 + 13.3 = 93.3 mm Hg। औसत अनुशिथिलन दाब के पास है, क्योंकि हृदय सिकुड़ने से ज़्यादा देर शिथिल रहता है।
प्रश्न 8: पूरा रुधिर एक चक्कर में कितना समय लेता है?
शरीर में लगभग 5 लीटर रुधिर है और हृद निकास 5.25 लीटर प्रति मिनट। पूरे रुधिर को एक बार हृदय से गुजरने में मोटे तौर पर कितना समय लगेगा?
समय = 5 ÷ 5.25 = 0.95 मिनट, लगभग 57 सेकंड, एक मिनट से थोड़ा कम।
प्रश्न 9: व्यायाम के दौरान निकास
कठिन व्यायाम में दर 150 और प्रवाह आयतन 100 mL हो जाता है। हृद निकास ज्ञात कर आराम से तुलना कीजिए।
हृद निकास = 100 × 150 = 15 लीटर प्रति मिनट, जो आराम के 5.25 L/min का 2.9 गुना है।
आम ग़लतियाँ
हृदय के प्रश्नों में ज़्यादातर अंक इन्हीं कुछ चूकों से कटते हैं। कॉपी जमा करने से पहले एक बार मिला लें।
- दायाँ आलिंद पन्ने के दाईं ओर बनाना। सामने से दृश्य में हृदय का दायाँ भाग आपके बाईं ओर होता है।
- कहना कि सभी धमनियाँ ऑक्सीजनित रुधिर ले जाती हैं। फुप्फुस धमनी विऑक्सीजनित रुधिर ले जाती है।
- कपाटों में गड़बड़: त्रिवलनी दाईं ओर, द्विवलनी (मिट्रल) बाईं ओर।
- “लब” को अर्धचंद्राकार कपाटों की ध्वनि बताना। “लब” AV कपाटों के बंद होने की, “डब” अर्धचंद्राकार कपाटों के बंद होने की ध्वनि है।
- हृदय ध्वनि को पेशी के सिकुड़ने की आवाज़ समझना। ध्वनि कपाटों के बंद होने से आती है।
- दाएँ निलय को सबसे मोटा बताना। पूरे शरीर में रुधिर भेजने के कारण बायाँ निलय सबसे मोटा है।
- सोचना कि मस्तिष्क हर धड़कन शुरू करता है। शुरुआत हृदय के भीतर का SA नोड करता है; तंत्रिकाएँ केवल गति बदलती हैं।
- प्रश्न में लीटर प्रति मिनट माँगा हो तो mL से न बदलना।
हृदय की देखभाल: रोज़ की आदतें
भारत में मृत्यु के प्रमुख कारणों में हृदय रोग शामिल है, पर इसके कई कारण हमारी आदतें हैं जिन्हें बदला जा सकता है, और ये आदतें स्कूल की उम्र में ही बनती हैं।
रोज़ हिलिए-डुलिए। WHO जैसे स्वास्थ्य संगठन बच्चों और किशोरों को दिन में कम से कम एक घंटा सक्रिय रहने की सलाह देते हैं: मैदान में क्रिकेट या कबड्डी, साइकिल से स्कूल जाना, रस्सी कूदना, योग, या दोस्तों के साथ तेज़ चलना। व्यायाम हृद पेशी को मज़बूत करता है, जिससे हर धड़कन में अधिक रुधिर पंप होता है और आराम में दर कम हो जाती है।
नमक कम खाइए। हमारे खाने में नमक अक्सर ज़्यादा होता है: अचार, पापड़, नमकीन, चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स, और फलों पर ऊपर से छिड़का नमक। सालों तक ज़्यादा नमक खाने से रक्तचाप बढ़ता है। WHO वयस्कों को दिन में 5 ग्राम से कम नमक, यानी कुल मिलाकर लगभग एक चम्मच, की सलाह देता है।
कभी धूम्रपान शुरू न करें, और गुटखा, खैनी, पान मसाला जैसे तंबाकू से भी दूर रहें। तंबाकू रुधिर वाहिकाओं को संकरा और क्षतिग्रस्त करता है; दूसरों का धुआँ भी हृदय को नुकसान पहुँचाता है। पूरी नींद लें, कोल्ड ड्रिंक की जगह पानी पिएँ, सब्ज़ियाँ, दालें और मौसमी फल ख़ूब खाएँ, और ज़्यादातर समय तले हुए नाश्ते की जगह भुने चने या मेवे चुनें।
हृदय के कुछ सामान्य रोग संक्षेप में
नाम जानने से स्वास्थ्य समाचार समझने और डॉक्टर से बात करने में आसानी होती है; पर यह किसी भी तरह जाँच का विकल्प नहीं है।
| रोग | आसान शब्दों में |
|---|---|
| उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) | लंबे समय तक रुधिर धमनियों की दीवार पर ज़्यादा दाब डालता है; अक्सर कोई लक्षण नहीं होते, इसलिए नापने से ही पता चलता है। |
| कोरोनरी धमनी रोग | वसा जमने से हृद पेशी को भोजन देने वाली कोरोनरी धमनियाँ संकरी हो जाती हैं। |
| हार्ट अटैक (हृद्पेशी रोधगलन) | कोरोनरी धमनी बंद होने से हृद पेशी के एक भाग को ऑक्सीजन नहीं मिलती। यह आपात स्थिति है। |
| हृदपात (हार्ट फ़ेल्योर) | शरीर की ज़रूरत जितना रुधिर हृदय पंप नहीं कर पाता; इसका अर्थ हृदय का रुक जाना नहीं है। |
| आमवाती हृदय रोग | गले के स्ट्रेप संक्रमण का इलाज न होने पर आमवाती ज्वर से कपाटों को क्षति; दक्षिण एशिया में अब भी दिखता है, समय पर इलाज से रोका जा सकता है। |
| जन्मजात हृदय दोष | जन्म से मौजूद कोई अंतर, जैसे पट में छेद; कई का इलाज संभव है। |
परीक्षा कोना: CBSE बोर्ड, NEET और JEE
कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा (अध्याय “जैव प्रक्रम”) में मानव हृदय का नामांकित चित्र और दोहरे परिसंचरण की व्याख्या बार-बार पूछी जाती है। चारों कक्ष, पट, चारों कपाट, महाशिराएँ, फुप्फुस धमनी, फुप्फुस शिराएँ और महाधमनी वाला सामने से दृश्य बनाने का अभ्यास करें, और तीरों से रुधिर की दिशा दिखाएँ। 2–3 अंक के प्रश्न: “बाएँ निलय की दीवार मोटी क्यों?”, “कपाट क्यों ज़रूरी हैं?”, “पक्षियों और स्तनधारियों में ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर का अलग होना क्यों आवश्यक है?”
NEET के लिए कक्षा 11 का “शरीर द्रव तथा परिसंचरण” अध्याय अहम है: हृद चक्र की अवस्थाएँ और समय (0.8 s), प्रवाह आयतन (लगभग 70 mL) और हृद निकास (लगभग 5 लीटर प्रति मिनट), SAN–AVN–हिस का बंडल–पुरकिंजे तंतु का क्रम, P-QRS-T का अर्थ, लब-डब ध्वनि किस कपाट से, और द्विवलनी कपाट का दूसरा नाम मिट्रल। कथन-कारण और मिलान वाले प्रश्नों में अक्सर “फुप्फुस धमनी विऑक्सीजनित रुधिर ले जाती है” जैसे अपवाद फँसाते हैं।
JEE में जीवविज्ञान नहीं होता, पर JEE के साथ बोर्ड की तैयारी कर रहे PCM छात्रों के लिए इस पेज के संख्यात्मक प्रश्न (दर से चक्र का समय, हृद निकास, R–R अंतराल) भौतिकी जैसी ही इकाई-सावधानी सिखाते हैं। हर हिसाब में पहले सूत्र लिखें, इकाई के साथ मान रखें, उत्तर इकाई के साथ दें।
एक नज़र में दोहराव
परीक्षा से पहले की रात यह सूची पढ़ लें; हर पंक्ति एक संभावित प्रश्न है।
- हृदय: मुट्ठी जितना, दोनों फेफड़ों के बीच, थोड़ा बाईं ओर झुका, हृदयावरण में लिपटा।
- चार कक्ष: पतले दो आलिंद ग्रहण करते हैं, मोटे दो निलय पंप करते हैं; बायाँ निलय सबसे मोटा।
- पट ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर को अलग रखता है।
- कपाट: त्रिवलनी (दाएँ), द्विवलनी/मिट्रल (बाएँ), फुप्फुसीय और महाधमनी अर्धचंद्राकार।
- ध्वनि: लब = AV कपाट बंद; डब = अर्धचंद्राकार कपाट बंद।
- दोहरा परिसंचरण: फुप्फुसीय (हृदय–फेफड़े–हृदय) + दैहिक (हृदय–शरीर–हृदय)।
- 75 धड़कन प्रति मिनट पर हृद चक्र 0.8 s = 0.1 s आलिंद प्रकुंचन + 0.3 s निलय प्रकुंचन + 0.4 s अनुशिथिलन।
- आवेग का मार्ग: SA नोड → AV नोड → हिस का बंडल → पुरकिंजे तंतु।
- ईसीजी: P = आलिंद, QRS = निलयों का उत्तेजन, T = निलयों का पुनर्ध्रुवण।
- हृद निकास = प्रवाह आयतन × दर = 70 × 75 = 5.25 L/min; सामान्य रक्तचाप 120/80 mm Hg।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मानव हृदय का मुख्य कार्य क्या है?
पूरे शरीर में लगातार रुधिर पंप करना। दायाँ भाग विऑक्सीजनित रुधिर फेफड़ों में भेजता है, बायाँ भाग ऑक्सीजनित रुधिर हर अंग तक, ताकि कोशिकाओं को ऑक्सीजन व पोषक तत्व मिलें और कार्बन डाइऑक्साइड व अपशिष्ट हटें।
मानव हृदय में कितने कक्ष होते हैं?
चार: दायाँ आलिंद, दायाँ निलय, बायाँ आलिंद और बायाँ निलय। ऊपर के आलिंद रुधिर ग्रहण करते हैं, नीचे के निलय उसे पंप करके बाहर भेजते हैं।
बाएँ निलय की दीवार सबसे मोटी क्यों होती है?
क्योंकि बायाँ निलय महाधमनी द्वारा पूरे शरीर में रुधिर भेजता है, जिसके लिए बहुत अधिक दाब चाहिए; दायाँ निलय केवल पास के फेफड़ों में रुधिर भेजता है।
दोहरा परिसंचरण क्या है?
वह परिसंचरण जिसमें शरीर का एक पूरा चक्कर लगाने में रुधिर दो बार हृदय से गुजरता है: एक बार फुप्फुसीय परिसंचरण में (हृदय से फेफड़े और वापस) और एक बार दैहिक परिसंचरण में (हृदय से शरीर और वापस)।
लब और डब ध्वनि क्यों होती है?
कपाटों के बंद होने से। निलय प्रकुंचन की शुरुआत में त्रिवलनी और द्विवलनी कपाट बंद होने से “लब”, और निलय शिथिल होने की शुरुआत में अर्धचंद्राकार कपाट बंद होने से “डब” ध्वनि होती है।
कौन-सी धमनी विऑक्सीजनित रुधिर ले जाती है?
फुप्फुस धमनी। यह दाएँ निलय से विऑक्सीजनित रुधिर फेफड़ों तक ले जाती है; इसलिए धमनी की परिभाषा दिशा से होती है, ऑक्सीजन से नहीं।
हृदय का गतिप्रेरक (पेसमेकर) क्या है?
दाएँ आलिंद की दीवार में स्थित शिराअलिंद पर्व (SA नोड)। आराम में यह प्रति मिनट लगभग 70 से 75 विद्युत आवेग बनाकर हर धड़कन शुरू करता है।
एक हृद चक्र में कितना समय लगता है?
60 सेकंड को हृदय दर से भाग देने पर: 75 धड़कन प्रति मिनट पर 0.8 सेकंड। NCERT आराम की अवस्था के लिए लगभग 0.8 सेकंड बताती है।
रक्तचाप 120/80 का क्या अर्थ है?
पहली संख्या (120 mm Hg) निलय प्रकुंचन के समय का प्रकुंचन दाब है, दूसरी (80 mm Hg) हृदय के शिथिल रहने के समय का अनुशिथिलन दाब। यह स्वस्थ वयस्क का सामान्य मान है।
हृद निकास क्या है और कैसे निकालते हैं?
एक निलय द्वारा एक मिनट में पंप किया गया रुधिर: प्रवाह आयतन × दर। 70 mL और 75 धड़कन प्रति मिनट पर यह 5.25 L/min है।
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एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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