हवा न हो तो सिक्का और पंख एक साथ गिरते हैं
नियंत्रण
गुरुत्वीय त्वरण, g (m/s²)
मापन
- समय, t
- 0.00s
- सूत्र से समय, √(2h/g)
- 2.02s
- सिक्के का वेग, v
- 0.0m/s
- पंख का वेग
- 0.0m/s
- सिक्के द्वारा तय दूरी
- 0.0m
- पंख द्वारा तय दूरी
- 0.0m
- सिक्का ज़मीन पर पहुँचा
- …s
- पंख ज़मीन पर पहुँचा
- …s
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- पहले कुछ न बदलें, बस देखें: हवा बंद है, इसलिए सिक्का और पंख साथ-साथ गिरते हैं और एक ही पल में ज़मीन पर पहुँचते हैं।
- “वायु प्रतिरोध चालू करें” पर टिक करें: सिक्का लगभग पहले जैसा गिरता है, पर पंख धीरे-धीरे तैरता हुआ उतरता है।
- स्ट्रोब चालू रखें: बराबर समय पर ली गई स्थितियों के बीच की दूरियाँ 1 : 3 : 5 : 7 के अनुपात में बढ़ती हैं, अंक सिक्के के पास लिखे हैं।
- दाईं ओर के दो ग्राफ़ देखें: v–t एक सीधी रेखा है और h–t एक वक्र (परवलय)।
- ऊँचाई और ग्रह बदलें, फिर मापन पैनल में “सूत्र से समय” और “सिक्का ज़मीन पर पहुँचा” की तुलना करें।
आम, बारिश की बूँद और हाथ से गिरा मोबाइल
पेड़ से एक पका आम टपका। शुरू में वह धीरे चलता लगता है, पर ज़मीन तक पहुँचते-पहुँचते इतनी तेज़ी से गिरता है कि घास में गड्ढा बन जाता है। यानी गिरते हुए उसका वेग लगातार बढ़ रहा था। कितना बढ़ रहा था, और हर सेकंड वह कितने मीटर नीचे आया? इसी सवाल का जवाब है मुक्त पतन।
सब जानते हैं कि मेज़ से गिरा मोबाइल शायद बच जाए, पर दूसरी मंज़िल की बालकनी से गिरा तो गया। पर क्या ऊँचाई दोगुनी करने से गिरने का समय भी दोगुना हो जाता है? मज़े की बात है, नहीं। ऊँचाई दोगुनी करने पर समय लगभग 1.4 गुना ही होता है। इस पेज के अंत तक आप यह खुद हिसाब लगाकर बता पाएँगे।
और एक पुरानी पहेली: एक भारी पत्थर और हल्का कागज़ एक साथ छोड़ें तो पहले कौन गिरेगा? ज़्यादातर लोग कहेंगे पत्थर, और दो हज़ार साल तक बड़े-बड़े विद्वान भी यही मानते थे। असली जवाब है “हवा पर निर्भर करता है”। ऊपर के सिमुलेशन में हवा बंद करके देखिए: सिक्का और पंख साथ-साथ गिरते हैं।
बिल्कुल शुरू से: मुक्त पतन किसे कहते हैं
पृथ्वी हर वस्तु को अपने केंद्र की ओर खींचती है। इस खिंचाव को गुरुत्वाकर्षण बल कहते हैं, और m द्रव्यमान की वस्तु पर यह उसका भार mg होता है। अगर किसी वस्तु को छोड़ दें और उस पर कोई दूसरा बल (हवा का धक्का, धागे का तनाव, हाथ का बल) न लगे, तो उसकी गति केवल गुरुत्व तय करता है। यही मुक्त पतन है।
स्कूल के प्रश्नों में मुक्त पतन के साथ आमतौर पर दो शर्तें होती हैं: वस्तु विराम से गिरती है (प्रारंभिक वेग u = 0), और वायु प्रतिरोध को नगण्य माना जाता है। असल ज़िंदगी में हवा हमेशा होती है, पर पत्थर, सिक्के या गेंद जैसी छोटी और भारी चीज़ों पर कुछ मीटर की गिरावट में उसका असर इतना कम होता है कि उसे छोड़ा जा सकता है।
गुरुत्व गिरती वस्तु का वेग हर सेकंड एक तय मात्रा से बढ़ाता है। पृथ्वी की सतह के पास यह मात्रा लगभग 9.8 मीटर प्रति सेकंड, हर सेकंड है। इसे गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं और g से दर्शाते हैं। गिरने के 1 सेकंड बाद वेग 9.8 m/s, 2 सेकंड बाद उसका दोगुना, 3 सेकंड बाद तीन गुना। वेग एकसमान दर से बढ़ता है, इसलिए मुक्त पतन एकसमान त्वरित गति है।
यह बात बहुत काम की है। त्वरण नहीं बदलता, इसलिए “सरल रेखा में गति” के तीनों गति के समीकरण (v = u + at आदि) मुक्त पतन पर ज्यों के त्यों लागू होते हैं। बस a की जगह g और s की जगह h लिख दीजिए। मुक्त पतन कोई नई भौतिकी नहीं, एकसमान त्वरण का सबसे जाना-पहचाना उदाहरण है।
और सबसे सुंदर बात: g वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता। भारी वस्तु को पृथ्वी ज़्यादा ज़ोर से खींचती है, पर भारी वस्तु को चलाने के लिए भी ज़्यादा बल चाहिए, क्योंकि उसका जड़त्व ज़्यादा है। ये दोनों ठीक एक ही अनुपात में बढ़ते हैं और कट जाते हैं। इसलिए बिना हवा के हाथी और चींटी एक ही त्वरण से गिरते हैं।
मुक्त पतन के मुख्य शब्द
सूत्रों से पहले शब्द साफ़ कर लें; परिभाषा वाले प्रश्न सीधे इसी तालिका से आते हैं।
| शब्द | संकेत | आसान भाषा में अर्थ | SI मात्रक |
|---|---|---|---|
| भार (गुरुत्वाकर्षण बल) | mg | पृथ्वी द्वारा वस्तु पर अपने केंद्र की ओर लगाया गया बल | न्यूटन (N) |
| गुरुत्वीय त्वरण | g | गिरती वस्तु का वेग हर सेकंड कितना बढ़ता है | m/s² |
| प्रारंभिक वेग | u | शुरुआत का वेग; छोड़ने पर u = 0 | m/s |
| अंतिम वेग | v | t समय बाद या ज़मीन पर पहुँचते समय का वेग | m/s |
| ऊँचाई या तय दूरी | h | वस्तु कितना नीचे आई | मीटर (m) |
| समय | t | छोड़ने के बाद बीता समय | सेकंड (s) |
| वायु प्रतिरोध | — | गति के विपरीत हवा का बल; वेग बढ़ने पर बढ़ता है | न्यूटन (N) |
| सीमांत वेग | vₜ | वह वेग जिस पर वायु प्रतिरोध भार के बराबर हो जाता है और वेग बढ़ना रुक जाता है | m/s |
किसने खोजा: अरस्तू बनाम गैलीलियो
लगभग 2,300 साल पहले यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने कहा था कि भारी वस्तुएँ हल्की वस्तुओं से तेज़ गिरती हैं, और जितना ज़्यादा भार, उतनी ज़्यादा तेज़। बात समझदारी की लगती है और रोज़ के अनुभव से मेल भी खाती है (पत्थर पत्ते से पहले गिरता है), इसलिए लगभग दो हज़ार साल तक किसी ने इसे जाँचने की ज़रूरत नहीं समझी।
सोलहवीं सदी के अंत में इटली के वैज्ञानिक गैलीलियो गैलिली (1564–1642) ने सवाल उठाया। मशहूर किस्सा है कि उन्होंने पीसा की झुकी मीनार से अलग-अलग द्रव्यमान की दो गेंदें गिराईं; इतिहासकारों को इस पर शक है। पक्की बात यह है कि उन्होंने चिकने आनत तल पर गेंदें लुढ़काकर बहुत सावधानी से समय नापा। कम ढलान पर गेंद धीरे चलती है, इसलिए पानी की घड़ी से भी नापा जा सकता था।
इन प्रयोगों से गैलीलियो ने निष्कर्ष निकाला: प्रतिरोध न हो तो सभी वस्तुएँ एक ही दर से गिरती हैं, वेग समय के अनुपात में बढ़ता है, और दूरी समय के वर्ग के अनुपात में। यही तीन बातें आज गिरती वस्तुओं के नियम कहलाती हैं।
उनका एक विचार-प्रयोग भी शानदार है। मान लीजिए भारी पत्थर तेज़ और हल्का पत्थर धीरे गिरता है। अब दोनों को रस्सी से बाँध दीजिए। हल्का पत्थर भारी को पीछे खींचेगा, तो जोड़ी भारी पत्थर से धीरे गिरनी चाहिए। पर जोड़ी का कुल द्रव्यमान ज़्यादा है, तो उसे और तेज़ गिरना चाहिए! एक ही चीज़ एक साथ धीरे और तेज़ नहीं गिर सकती, इसलिए अरस्तू की धारणा ग़लत थी।
गिरती वस्तुओं के तीन नियम
तीनों नियमों की शर्त एक है: वस्तु विराम से गिरना शुरू करे और बिना प्रतिरोध के गिरे। परीक्षा में नियम लिखते समय यह शर्त सबसे पहले लिखें।
पहला नियम: सभी वस्तुएँ समान समय में समान दूरी तय करती हैं
एक ही ऊँचाई से विराम से छोड़ी गई और बिना प्रतिरोध के गिरती सभी वस्तुएँ समान समय में समान दूरी तय करती हैं।
यानी भारी हो या हल्की, बड़ी हो या छोटी, हवा न हो तो सब एक साथ ज़मीन पर पहुँचती हैं। सिमुलेशन में हवा बंद रखें तो सिक्के और पंख के “ज़मीन पर पहुँचा” के समय बिल्कुल बराबर होते हैं, क्योंकि g द्रव्यमान पर निर्भर नहीं है।
दूसरा नियम: वेग समय के अनुक्रमानुपाती है
विराम से मुक्त रूप से गिरती वस्तु द्वारा प्राप्त वेग गिरने के समय के अनुक्रमानुपाती होता है।
समय दोगुना तो वेग दोगुना। यह v = u + gt से आता है: u = 0 रखने पर v = gt, और g नियत है, इसलिए v ∝ t। इसीलिए v–t ग्राफ़ मूल बिंदु से गुज़रती सीधी रेखा है, जिसकी ढलान g = 9.8 है।
v ∝ tv₁ / v₂ = t₁ / t₂
तीसरा नियम: दूरी समय के वर्ग के अनुक्रमानुपाती है
विराम से मुक्त रूप से गिरती वस्तु द्वारा तय दूरी गिरने के समय के वर्ग के अनुक्रमानुपाती होती है।
समय दोगुना तो दूरी चार गुना, तीन गुना तो नौ गुना। यह h = ut + ½gt² से आता है: u = 0 रखने पर h = ½gt², यानी h ∝ t²। इसीलिए h–t ग्राफ़ सीधी रेखा नहीं, ऊपर मुड़ता परवलय है।
h ∝ t²h₁ / h₂ = t₁² / t₂²
मुक्त पतन के सूत्र और वे कहाँ से आते हैं
एकसमान त्वरण के गति के समीकरणों में a = g और s = h रखें, और छोड़ी गई वस्तु के लिए u = 0। ये चार सूत्र मुक्त पतन का हर प्रश्न हल करते हैं।
v = u + gtविराम से: v = gt
h = ut + ½gt²विराम से: h = ½gt²
v² = u² + 2ghविराम से: v = √(2gh)
t = √(2h/g)ज़मीन तक पहुँचने का समय
वेग v = gt क्यों
त्वरण यानी हर सेकंड वेग में वृद्धि। हर सेकंड g बढ़े तो t सेकंड में कुल g × t बढ़ेगा। शुरू में वेग शून्य था, इसलिए t सेकंड बाद वेग gt।
ऊँचाई h = ½gt² क्यों
वेग 0 से एकसमान बढ़कर gt हुआ, इसलिए इस समय का औसत वेग दोनों के बीच का है: (0 + gt) ÷ 2 = ½gt। दूरी = औसत वेग × समय = ½gt × t = ½gt²। यही v–t ग्राफ़ के नीचे के त्रिभुज का क्षेत्रफल भी है: ½ × आधार t × ऊँचाई gt।
तीसरा समीकरण और गिरने का समय
पहले दो समीकरणों से t हटाएँ तो v² = 2gh मिलता है, जो तब काम आता है जब ऊँचाई पता हो पर समय नहीं। h = ½gt² से t निकालें तो t = √(2h/g)। यहीं मोबाइल वाली पहेली सुलझती है: t ∝ √h, इसलिए ऊँचाई दोगुनी होने पर समय √2 ≈ 1.41 गुना होता है, दोगुना नहीं।
मुक्त पतन का त्वरण: g = 9.8 m/s² का अर्थ
g = 9.8 m/s² का अर्थ है कि मुक्त रूप से गिरती वस्तु का वेग हर सेकंड 9.8 m/s बढ़ता है। अंतरराष्ट्रीय मानक मान 9.80665 m/s² है, पर स्कूल के प्रश्नों में 9.8 लिया जाता है (कुछ प्रश्न जल्दी हिसाब के लिए 10 लेते हैं; प्रश्न ध्यान से पढ़ें)।
एक जगह पर g हर वस्तु के लिए समान है, पर हर जगह समान नहीं। पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है, इसलिए वहाँ वस्तु केंद्र के थोड़ा पास होती है: ध्रुवों पर g लगभग 9.83 और भूमध्य रेखा पर 9.78 m/s² है। पहाड़ पर चढ़ने या खदान में गहरे जाने पर भी g थोड़ा घटता है।
दूसरे ग्रह पर g बहुत बदल जाता है, क्योंकि यह ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर निर्भर करता है। तालिका में सिमुलेशन की शुरुआती 20 m की गिरावट हर ग्रह पर हल की गई है।
| ग्रह | g | 20 m गिरने का समय | ज़मीन पर वेग |
|---|---|---|---|
| पृथ्वी | 9.80 m/s² | 2.02 s | 19.8 m/s |
| चंद्रमा | 1.62 m/s² | 4.97 s | 8.0 m/s |
| मंगल | 3.71 m/s² | 3.28 s | 12.2 m/s |
| बृहस्पति | 24.79 m/s² | 1.27 s | 31.5 m/s |
हवा हो तो क्या होता है: पंख धीरे क्यों गिरता है
असल ज़िंदगी में पंख तैरता हुआ और कागज़ डोलता हुआ गिरता है। कारण गुरुत्व नहीं, हवा है। हवा से गुज़रती वस्तु को सामने की हवा पीछे धकेलती है। यह वायु प्रतिरोध वेग बढ़ने पर बढ़ता है, और बड़ी सतह व कम द्रव्यमान वाली वस्तुओं पर इसका असर सबसे ज़्यादा होता है।
छोड़ने के पल प्रतिरोध लगभग शून्य होता है, इसलिए पंख भी लगभग g से गिरना शुरू करता है। वेग बढ़ता है तो प्रतिरोध बढ़ता है, जब तक वह भार के बराबर न हो जाए। तब परिणामी बल शून्य, त्वरण शून्य और वेग बढ़ना बंद। इस स्थिर वेग को सीमांत वेग कहते हैं। सिमुलेशन का पंख लगभग 1.5 m/s और सिक्का लगभग 45 m/s के सीमांत वेग वाला है, इसीलिए कम ऊँचाई पर सिक्के को हवा का असर लगभग पता ही नहीं चलता।
हवा हटा दें तो दोनों साथ गिरते हैं, और यह सच में दिखाया गया है। अठारहवीं सदी में हवा निकाली गई काँच की नली में सोने का सिक्का (गिनी) और पंख एक साथ गिराने का प्रयोग मशहूर हुआ। 1971 में अपोलो 15 के अंतरिक्ष यात्री डेविड स्कॉट ने चंद्रमा पर, जहाँ हवा नहीं है, एक हथौड़ा और एक बाज़ का पंख एक साथ छोड़ा। दोनों एक साथ चंद्रमा की सतह पर गिरे, ठीक जैसा गैलीलियो ने कहा था।
ऊर्जा का हिसाब: स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा बनती है
ऊँचाई पर रखी वस्तु में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा mgh जमा रहती है। गिरते समय ऊँचाई घटती है, तो स्थितिज ऊर्जा घटती है। पर ऊर्जा खोती नहीं; वेग बढ़ रहा है, इसलिए गतिज ऊर्जा ½mv² ठीक उतनी ही बढ़ती है। हवा न हो तो हर पल स्थितिज + गतिज ऊर्जा नियत रहती है। यही ऊर्जा संरक्षण है।
इससे ज़मीन पर वेग निकालने का दूसरा रास्ता मिलता है: शुरू की पूरी mgh नीचे ½mv² बन जाती है, तो mgh = ½mv² और v = √(2gh)। दोनों ओर m कट जाता है, यानी फिर साबित हुआ कि वेग द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता। हवा हो तो कुछ ऊर्जा हवा को धकेलने और गरम करने में लगती है, इसलिए पंख बहुत कम वेग से गिरता है।
सिमुलेशन में खुद प्रयोग करें
कॉपी-पेन लेकर बैठिए। हर प्रयोग से पहले अनुमान लगाइए, फिर चलाकर जाँचिए।
- ऊँचाई 20 m रखकर “सूत्र से समय” पढ़ें, फिर चलाकर “सिक्का ज़मीन पर पहुँचा” से मिलाएँ। दोनों 2.02 s होने चाहिए।
- ऊँचाई 20 m से 80 m करें (चार गुना)। समय कितना गुना हुआ? दोगुना, क्योंकि t ∝ √h।
- स्ट्रोब चालू रखकर सिक्के के पास के अंक पढ़ें: 1, 3, 5, 7। फिर हवा चालू करें और देखें कि सिक्के के अंक लगभग नहीं बदलते।
- हवा चालू करके v–t ग्राफ़ पर पंख की रेखा देखें: शुरू में खड़ी, फिर सपाट। सपाट हिस्सा ही सीमांत वेग है।
- बृहस्पति चुनें: सब इतनी तेज़ी से होता है कि 0.25× गति चाहिए होगी। फिर मंगल पर हवा चालू करें; वहाँ हवा इतनी पतली है कि पंख भी लगभग सिक्के के साथ गिरता है।
मुक्त पतन के हल किए गए उदाहरण
हर प्रश्न में पहले दी गई राशियाँ लिखें, फिर सूत्र, फिर मान रखें। परीक्षा में उत्तर भी ऐसे ही लिखें। सभी प्रश्नों में वायु प्रतिरोध नगण्य माना गया है।
उदाहरण 1: 20 m ऊँचाई से छोड़ी गई वस्तु (सिमुलेशन का शुरुआती मान)
दिया है: h = 20 m, u = 0, g = 9.8 m/s²। ज़मीन तक पहुँचने का समय t और वेग v ज्ञात करें।
t = √(2h/g) = √(40 / 9.8) = √4.08 = 2.02 s। v = √(2gh) = 19.80 m/s। सिमुलेशन खोलें तो मापन पैनल में यही मान दिखते हैं।
उदाहरण 2: 3 s बाद वेग और दूरी
छत से एक पत्थर छोड़ा गया। 3 s बाद उसका वेग कितना होगा और वह कितना नीचे आ चुका होगा?
v = gt = 9.8 × 3 = 29.4 m/s। h = ½gt² = ½ × 9.8 × 3² = 44.1 m।
उदाहरण 3: कुएँ की गहराई
कुएँ में गिराया गया पत्थर 2.5 s बाद पानी से टकराने की आवाज़ करता है (आवाज़ के ऊपर आने का समय नगण्य मानें)। पानी की सतह कितनी गहरी है?
h = ½gt² = ½ × 9.8 × 2.5² = 30.625 m, और पत्थर पानी से v = gt = 24.5 m/s पर टकराता है। असल में आवाज़ को ऊपर आने में भी थोड़ा समय लगता है, इसलिए सही गहराई थोड़ी कम होगी।
उदाहरण 4: ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंकी गई गेंद
एक गेंद 19.6 m/s से सीधी ऊपर फेंकी गई। शीर्ष तक पहुँचने में कितना समय लगेगा, वह कितनी ऊँची जाएगी, और कब हाथ में लौटेगी?
ऊपर जाते समय g वेग घटाता है। शीर्ष पर v = 0, इसलिए 0 = u − gt और t = u/g = 19.6 / 9.8 = 2 s। अधिकतम ऊँचाई H = u²/2g = 19.6 m। नीचे आने में भी उतना ही समय, इसलिए कुल 4 s। नीचे आने वाला आधा हिस्सा मुक्त पतन ही है।
उदाहरण 5: वही गिरावट चंद्रमा पर
चंद्रमा पर g = 1.62 m/s² है। 20 m की गिरावट में कितना समय लगेगा और वस्तु किस वेग से गिरेगी?
t = √(2h/g) = 4.97 s और v = √(2gh) = 8.05 m/s। पृथ्वी की तुलना में समय √(9.8/1.62) = 2.46 गुना है। सिमुलेशन में चंद्रमा चुनकर मिलाइए।
उदाहरण 6: 3वें सेकंड में तय दूरी
n वें सेकंड में तय दूरी का सूत्र hₙ = ½g(2n − 1) है। n = 3 रखने पर h = 4.9 × 5 = 24.5 m।
पहले तीन सेकंड की तुलना करें: 4.9 m, फिर 14.7 m, फिर 24.5 m, अनुपात 1 : 3 : 5, ठीक स्ट्रोब की तरह। NEET और JEE में यह प्रश्न बार-बार आता है।
उदाहरण 7: दूसरे नियम से वेग की तुलना
मुक्त रूप से गिरती वस्तु का वेग 2 s बाद 19.6 m/s है। 6 s बाद वेग कितना होगा?
दूसरे नियम से v₂/v₁ = t₂/t₁ = 6/2 = 3, इसलिए v₂ = 3 × 19.6 = 58.8 m/s। g दिया न हो तब भी अनुपात से उत्तर निकल आता है।
उदाहरण 8: तीसरे नियम से दूरी की तुलना
एक वस्तु पहले 2 s में 19.6 m गिरती है। पहले 4 s में कितना गिरेगी?
तीसरे नियम से h₂/h₁ = (t₂/t₁)² = (4/2)² = 4, इसलिए h₂ = 4 × 19.6 = 78.4 m। समय दोगुना, दूरी चार गुना।
उदाहरण 9: ऊर्जा से वेग
2 kg की वस्तु 20 m से छोड़ी गई। शुरुआत में स्थितिज ऊर्जा कितनी है, और ज़मीन पर वेग कितना?
स्थितिज ऊर्जा = mgh = 2 × 9.8 × 20 = 392 J। ज़मीन पर यह पूरी गतिज ऊर्जा बन जाती है: ½mv² = 392 J, इसलिए v = 19.80 m/s, उदाहरण 1 जैसा ही उत्तर।
एक नज़र में: हर सेकंड वेग और दूरी
g = 9.8 m/s² लेकर विराम से गिरती वस्तु का हिसाब। आखिरी स्तंभ की विषम संख्याओं पर ध्यान दें।
| समय | वेग, v = gt | कुल दूरी, h = ½gt² | उस सेकंड में दूरी | अनुपात |
|---|---|---|---|---|
| 1 s | 9.8 m/s | 4.9 m | 4.9 m | 1 |
| 2 s | 19.6 m/s | 19.6 m | 14.7 m | 3 |
| 3 s | 29.4 m/s | 44.1 m | 24.5 m | 5 |
| 4 s | 39.2 m/s | 78.4 m | 34.3 m | 7 |
| 5 s | 49.0 m/s | 122.5 m | 44.1 m | 9 |
आम ग़लतियाँ
इनसे बचें तो मुक्त पतन के प्रश्न आसान अंक बन जाते हैं।
- “भारी वस्तुएँ तेज़ गिरती हैं” लिखना। बिना वायु प्रतिरोध के सब साथ गिरती हैं; अंतर केवल हवा के कारण होता है।
- नियम लिखते समय “विराम से” और “बिना प्रतिरोध” की शर्त छोड़ देना।
- ऊँचाई दोगुनी होने पर समय दोगुना मानना। t ∝ √h, इसलिए समय √2 गुना होता है।
- n वें सेकंड की दूरी ½g(2n − 1) को पहले n सेकंड की कुल दूरी ½gn² से मिला देना।
- ऊपर फेंकी वस्तु में चिह्न ग़लत लेना। ऊपर को धनात्मक मानें तो g ऋणात्मक लें।
- शीर्ष बिंदु पर त्वरण को शून्य समझना। वहाँ वेग शून्य है; त्वरण तब भी g, नीचे की ओर।
- g का मात्रक m/s लिखना। यह त्वरण है, इसलिए मात्रक m/s² है।
असल ज़िंदगी में मुक्त पतन
मुक्त पतन के नियम परीक्षा से कहीं ज़्यादा चीज़ें समझाते हैं।
- पैराशूट: बड़ी छतरी वायु प्रतिरोध बहुत बढ़ाकर सीमांत वेग इतना घटा देती है कि सुरक्षित उतरा जा सके।
- बारिश की बूँदें: किलोमीटरों ऊपर से गिरकर भी कम सीमांत वेग पर पहुँच जाती हैं, इसलिए गोली की तरह नहीं लगतीं।
- निर्माण स्थल पर हेलमेट: ऊँचाई से गिरा छोटा पेंच भी तेज़ पहुँचता है, क्योंकि v = √(2gh)।
- गहराई का अंदाज़ा: कुएँ या खाई में पत्थर गिराकर समय गिनें और h = ½gt² लगाएँ।
- कैच पकड़ना: ऊँचे कैच के नीचे खड़ा फ़ील्डर मन में मुक्त पतन का हिसाब ही लगाता है।
- कक्षा में भारहीनता: अंतरिक्ष स्टेशन और यात्री एक साथ पृथ्वी की ओर गिर रहे हैं, इसलिए यात्री तैरते हैं। यह भी मुक्त पतन है।
परीक्षा कोना: CBSE, JEE और NEET
मुक्त पतन कक्षा 9 के “गुरुत्वाकर्षण” और कक्षा 11 के “सरल रेखा में गति” में आता है। CBSE बोर्ड में परिभाषा, “g का मान 9.8 m/s² का क्या अर्थ है” और ऊँचाई-समय-वेग के आंकिक प्रश्न आते हैं। JEE और NEET में n वें सेकंड की दूरी, 1 : 3 : 5 अनुपात, ऊपर फेंकी वस्तु और v–t ग्राफ़ पढ़ने वाले प्रश्न पसंदीदा हैं।
एक आम बोर्ड प्रश्न
प्रश्न: 20 m ऊँची इमारत से एक पत्थर छोड़ा गया। (क) मुक्त पतन किसे कहते हैं? (ख) पत्थर ज़मीन तक कितने समय में पहुँचेगा? (ग) ज़मीन से टकराते समय उसका वेग क्या होगा? (घ) यदि उसी समय एक कागज़ भी छोड़ा जाए तो क्या दोनों साथ पहुँचेंगे? कारण दें।
उत्तर: (ख) t = √(2h/g) = 2.02 s। (ग) v = √(2gh) = 19.80 m/s। (घ) नहीं, हवा में कागज़ पर वायु प्रतिरोध का असर बहुत ज़्यादा है; निर्वात में दोनों साथ पहुँचते, जैसे चंद्रमा पर हथौड़ा और पंख पहुँचे थे।
रिवीज़न सारांश
परीक्षा से पहली रात यह सूची और ऊपर की तालिका एक बार देख लें।
- मुक्त पतन: केवल गुरुत्व के प्रभाव में, विराम से, बिना प्रतिरोध के गति।
- g ≈ 9.8 m/s², एक जगह पर हर वस्तु के लिए समान; ध्रुवों पर ज़्यादा, भूमध्य रेखा पर कम।
- पहला नियम: समान समय में समान दूरी। दूसरा: v ∝ t। तीसरा: h ∝ t²।
- सूत्र: v = gt, h = ½gt², v² = 2gh, t = √(2h/g)।
- बराबर समय अंतराल में दूरियाँ 1 : 3 : 5 : 7; n वें सेकंड में ½g(2n − 1)।
- हवा में हल्की और चौड़ी वस्तुएँ सीमांत वेग पर पहुँचती हैं; निर्वात में पंख और सिक्का साथ गिरते हैं।
- गिरते समय स्थितिज ऊर्जा घटती है और उतनी ही गतिज ऊर्जा बढ़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुक्त पतन किसे कहते हैं?
जब कोई वस्तु केवल गुरुत्वाकर्षण बल के प्रभाव में गिरती है और उस पर वायु प्रतिरोध या कोई दूसरा बल नहीं लगता, तो उस गति को मुक्त पतन कहते हैं। पृथ्वी के पास इसका त्वरण लगभग 9.8 m/s² होता है।
मुक्त पतन का त्वरण क्या है?
मुक्त पतन का त्वरण ही गुरुत्वीय त्वरण g है। पृथ्वी की सतह के पास इसका मान लगभग 9.8 m/s² है और यह गिरती वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता।
मुक्त पतन का सूत्र क्या है?
विराम से गिरती वस्तु के लिए v = gt, h = ½gt², v² = 2gh और गिरने का समय t = √(2h/g)। ये गति के समीकरणों में a = g रखकर मिलते हैं।
मुक्त पतन के कुछ उदाहरण बताइए।
पेड़ से गिरता फल, छत से छोड़ा गया पत्थर, निर्वात नली में गिरता पंख, चंद्रमा पर छोड़ा गया हथौड़ा और पृथ्वी की परिक्रमा करता अंतरिक्ष स्टेशन। हवा में गिरता पंख या पैराशूट मुक्त पतन नहीं, क्योंकि उन पर वायु प्रतिरोध बड़ा है।
क्या भारी वस्तुएँ तेज़ गिरती हैं?
बिना हवा के नहीं। भारी वस्तु पर गुरुत्व बल ज़्यादा है, पर उसका जड़त्व भी उसी अनुपात में ज़्यादा है, इसलिए त्वरण समान रहता है। हवा में बड़ी सतह और कम द्रव्यमान वाली वस्तुएँ ज़्यादा धीमी होती हैं।
g का मान 9.8 m/s² का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि मुक्त रूप से गिरती वस्तु का वेग हर सेकंड 9.8 m/s बढ़ता है: 1 s बाद 9.8 m/s, 2 s बाद उसका दोगुना, और इसी तरह।
सीमांत वेग किसे कहते हैं?
हवा में गिरती वस्तु का वह नियत वेग जिस पर वायु प्रतिरोध उसके भार के बराबर हो जाता है। तब परिणामी बल और त्वरण शून्य होते हैं, इसलिए वेग आगे नहीं बढ़ता।
अंतरिक्ष यात्री भारहीन क्यों महसूस करते हैं?
स्टेशन और यात्री दोनों केवल गुरुत्व के प्रभाव में पृथ्वी की ओर लगातार गिर रहे हैं, यानी मुक्त पतन में हैं। साथ गिरने से कोई किसी पर दबाव नहीं डालता, इसलिए वे भारहीन महसूस करते हैं।
ऊपर फेंकी वस्तु के शीर्ष बिंदु पर त्वरण कितना होता है?
शीर्ष पर वेग क्षण भर के लिए शून्य होता है, पर त्वरण तब भी g = 9.8 m/s² नीचे की ओर होता है। त्वरण शून्य होता तो वस्तु वहीं रुकी रहती और वापस न गिरती।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
SSC
SSC General Science
SSC
SSC Physics: syllabus and preparation
HSC
HSC Physics: syllabus and preparation
Textbook
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Engineering admission test preparation
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Dhaka University science unit admission 2026-27
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Composition: The Uses of Electricity
Bangla
প্রতিবেদন: বিজ্ঞান মেলা (बांग्ला में)
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Paragraph: Science in Everyday Life
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भौतिकी के और एनिमेशन
कक्षा 10 · 12
प्रकाश का अपवर्तन
प्रकाश का अपवर्तन किसे कहते हैं, अपवर्तन के नियम, अपवर्तनांक, क्रांतिक कोण व पूर्ण आंतरिक परावर्तन — आसान भाषा में, इंटरैक्टिव एनिमेशन और हल उदाहरण सहित।
कक्षा 10 · 12
ओम का नियम
ओम का नियम क्या है, सूत्र V=IR, V-I ग्राफ और श्रेणी-पार्श्व क्रम — विभवांतर व प्रतिरोध बदलकर धारा देखें। कक्षा 10 व 12 के हल प्रश्न।
कक्षा 11 · JEE
प्रक्षेप्य गति
प्रक्षेप्य गति किसे कहते हैं? कोण व वेग बदलकर पथ देखें — उड्डयन काल, अधिकतम ऊँचाई, क्षैतिज परास के सूत्र व हल उदाहरण। कक्षा 11, JEE/NEET।
कक्षा 11
सरल लोलक
सरल लोलक किसे कहते हैं, आवर्तकाल का सूत्र T=2π√(l/g), सरल आवर्त गति — लंबाई बदलकर देखें। g ज्ञात करने के हल उदाहरण।
कक्षा 12
विद्युत क्षेत्र
विद्युत क्षेत्र किसे कहते हैं, तीव्रता का सूत्र व SI मात्रक, क्षेत्र रेखाओं के गुण — आवेश रखकर रेखाएँ देखें। कूलॉम के नियम के हल उदाहरण।
कक्षा 11 · 12
तरंगों का व्यतिकरण
अध्यारोपण का सिद्धांत, संपोषी व विनाशी व्यतिकरण की शर्तें, फ्रिंज चौड़ाई β=λD/d — दो स्रोत खिसकाकर देखें। कक्षा 11-12 के हल उदाहरण।
कक्षा 10 · 12
लेंस द्वारा प्रतिबिंब
उत्तल लेंस और अवतल लेंस के किरण आरेख इंटरैक्टिव: बिंब खिसकाकर सभी छह स्थितियाँ देखें, लेंस सूत्र 1/v − 1/u = 1/f, आवर्धन और लेंस की क्षमता तुरंत पढ़ें।
कक्षा 9 · 11
न्यूटन के गति के नियम
न्यूटन के गति के तीनों नियम, जड़त्व, संवेग, F = ma, आवेग और क्रिया-प्रतिक्रिया: ट्रॉली धकेलकर खुद देखें, उदाहरण और हल किए गए प्रश्नों के साथ (कक्षा 9, 11)।
कक्षा 10 · 12
गोलीय दर्पण किरण आरेख
अवतल और उत्तल दर्पण द्वारा प्रतिबिंब बनना, ध्रुव, वक्रता केंद्र, मुख्य फोकस, दर्पण सूत्र 1/v + 1/u = 1/f और आवर्धन m = −v/u: बिंब खींचकर किरण आरेख ख़ुद देखें।
कक्षा 10 · 12
विद्युत चुंबकीय प्रेरण
विद्युत चुंबकीय प्रेरण किसे कहते हैं? चुंबक को कुंडली से गुज़ारो और सेंटर-ज़ीरो गैल्वेनोमीटर देखो। फैराडे का नियम e = −N dΦ/dt और लेंज़ का नियम हल किए गए उदाहरणों के साथ।
कक्षा 9 · 11
संवेग संरक्षण और संघट्ट
संवेग संरक्षण का नियम क्या है? दो गाड़ियों को टकराओ और प्रत्यावस्थान गुणांक e को 0 (चिपकना) से 1 (प्रत्यास्थ) तक बदलो। संवेग और गतिज ऊर्जा के बार-चार्ट लाइव देखो, हल किए गए उदाहरणों के साथ।
कक्षा 9 · 11
कार्य, ऊर्जा और शक्ति
कार्य किसे कहते हैं, गतिज व स्थितिज ऊर्जा और शक्ति के सूत्र क्या हैं: घुमावदार पथ पर लुढ़कती कार्ट की सिमुलेशन में ऊर्जा का रूपांतरण देखें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।
कक्षा 11 · JEE
आनत तल
ढलान पर भार कैसे दो भागों में बँटता है, विराम कोण क्या है, घर्षण ब्लॉक को कब रोकता है और कब फिसलने देता है — कोण बदलकर बल-चित्र में स्वयं देखें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।
अन्य विषयों के एनिमेशन
रसायन विज्ञान
परमाणु की संरचना
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अम्ल, क्षारक और pH मान
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इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
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गैस नियम: बॉयल, चार्ल्स, गे-लुसाक, आवोगाद्रो और PV = nRT
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आयनिक बंध कैसे बनता है
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वैद्युत अपघटन और फैराडे के नियम
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सहसंयोजक बंध
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आवर्त सारणी की आवर्तिता
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समसूत्री कोशिका विभाजन
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विसरण और परासरण
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प्रकाश संश्लेषण
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मानव हृदय की संरचना और कार्य
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मेंडल के आनुवंशिकता नियम
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डीएनए प्रतिकृति
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कोशिकीय श्वसन
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एंजाइम क्रिया
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तंत्रिका आवेग और एक्शन पोटेंशियल
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नेफ्रॉन और मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
जीव विज्ञान
अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस)
जीव विज्ञान
पाचन तंत्र
गणित
पाइथागोरस प्रमेय
गणित
त्रिकोणमितीय अनुपात और इकाई वृत्त
गणित
द्विघात समीकरण और द्विघात फलन का ग्राफ़
गणित
वृत्त के प्रमेय
गणित
ऊँचाई और दूरी: उन्नयन कोण और अवनमन कोण
गणित
प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता
गणित
समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी
गणित






















