स्लाइडर बदलकर देखें अलग-अलग धारा और समय में कितना द्रव्यमान जमा होता है
नियंत्रण
वैद्युत अपघट्य चुनें
मापन
- कुल आवेश, Q = It
- 1,200.0C
- इलेक्ट्रॉनों के मोल, Q/F
- 0.0124mol
- कैथोड का उत्पाद
- Na
- कैथोड पर जमा द्रव्यमान, m = MIt/(nF)
- 0.286g
- एनोड का उत्पाद
- Cl₂
- एनोड पर बना/क्षय हुआ द्रव्यमान
- 0.442g
- उत्पादों का मोल अनुपात (कैथोड : एनोड)
- 2 : 1
- अभी
- क्लोराइड आयन खुद सीधे ऑक्सीकृत होकर क्लोरीन गैस बनाता है
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- पहले डिफ़ॉल्ट सेटिंग देखें: पिघला NaCl, धारा 2A, समय 10 मिनट। चलाएँ दबाएँ: बाईं ओर कैथोड पर सोडियम धातु की बूँद जमने लगेगी, दाईं ओर एनोड से क्लोरीन गैस के बुलबुले उठेंगे।
- तारों पर छोटे नारंगी बिंदु देखें: ये इलेक्ट्रॉन हैं, बैटरी के (−) सिरे से कैथोड की ओर, और एनोड से बैटरी के (+) सिरे की ओर जा रहे हैं।
- "वैद्युत अपघट्य चुनें" से CuSO₄ चुनें, फिर "एनोड की धातु" से कॉपर चुनें: अब एनोड धीरे-धीरे क्षय होकर छोटा होता दिखेगा, क्योंकि कॉपर खुद घुल रहा है।
- उसी CuSO₄ में "अक्रिय इलेक्ट्रोड" चुनें: अब एनोड क्षय नहीं होता, बल्कि वहाँ से ऑक्सीजन गैस के बुलबुले उठते हैं।
- अम्लीकृत पानी चुनकर धारा बदलें: मापन पैनल में H₂ और O₂ का मोल अनुपात हमेशा 2 : 1 रहता है, यह देखें।
गहनों की सुनहरी परत से लेकर हवाई जहाज़ के पुर्ज़ों तक
चांदी के चम्मच पर सोने की पतली परत, सस्ते गहनों पर सोने जैसी चमक, गाड़ी के पुर्ज़ों पर जंग रोकने के लिए क्रोमियम की चमकदार परत — इन सबके पीछे एक ही तरकीब है: वैद्युत अपघटन। विद्युत धारा से एक धातु के आयन को खींचकर किसी दूसरी वस्तु की सतह पर जमाया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे इस पन्ने के सिमुलेशन में कॉपर एक इलेक्ट्रोड पर जमता दिखेगा।
उद्योग में इसका दायरा और बड़ा है। बॉक्साइट से एल्युमिनियम निकालना, खारे पानी से क्लोरीन-हाइड्रोजन-सोडियम हाइड्रॉक्साइड अलग करना (क्लोर-क्षार उद्योग), अशुद्ध कॉपर को शुद्ध करना — ये सब वैद्युत अपघटन के औद्योगिक रूप हैं। फिर भी इतने बड़े कामों का सिद्धांत इतना सरल है कि आप इसे खुद ऊपर के सिमुलेशन में आज़मा सकते हैं।
सवाल यह है कि धारा प्रवाहित करने भर से यौगिक क्यों टूट जाता है, कौन-सा आयन किस इलेक्ट्रोड की ओर जाता है, और पहले से यह कैसे बताया जा सकता है कि कितनी धातु या गैस बनेगी? यह पन्ना और सिमुलेशन मिलकर यह जवाब आपको खुद खोजने देंगे।
बिल्कुल शुरुआत से: वैद्युत अपघटन और वैद्युत अपघट्य
ऐसा पदार्थ जो पिघली या घुली अवस्था में विद्युत का चालन करता है और उस विद्युत के प्रभाव से रासायनिक रूप से टूट जाता है, उसे वैद्युत अपघट्य कहते हैं। ठोस NaCl विद्युत का चालन नहीं करता (आयन क्रिस्टल जालक में बँधे रहते हैं), पर उसे पिघलाने या पानी में घोलने पर आयन स्वतंत्र होकर चल सकते हैं, तभी वह वैद्युत अपघट्य की तरह काम करता है।
दो चालक छड़ों या पत्तियों को वैद्युत अपघट्य में डुबोकर बैटरी से जोड़ने पर वैद्युत अपघटनी सेल बनता है। जो इलेक्ट्रोड बैटरी के ऋणात्मक सिरे से जुड़ा है उसे कैथोड कहते हैं; जो धनात्मक सिरे से जुड़ा है वह एनोड है। बैटरी कैथोड में इलेक्ट्रॉन धकेलती है, इसीलिए वैद्युत अपघटन में कैथोड ऋणात्मक इलेक्ट्रोड होता है — यह याद रखना ज़रूरी है, क्योंकि सामान्य बैटरी में यह उल्टा होता है।
विलयन के धनायन ऋणात्मक कैथोड की ओर आकर्षित होते हैं, वहाँ इलेक्ट्रॉन पाकर अपचयित होते हैं। ऋणायन धनात्मक एनोड की ओर आकर्षित होते हैं, वहाँ इलेक्ट्रॉन छोड़कर ऑक्सीकृत होते हैं। याद रखने की आसान तरकीब: कैथोड पर अपचयन, एनोड पर ऑक्सीकरण — अंग्रेज़ी में "रेड कैट, ऐन ऑक्स" कहकर याद रखा जाता है।
वैद्युत अपघटन और साधारण बैटरी (गैल्वैनिक सेल) एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं। बैटरी में एक स्वतःस्फूर्त रासायनिक अभिक्रिया अपने आप बिजली पैदा करती है। वैद्युत अपघटन में उल्टा होता है — अभिक्रिया अपने आप नहीं होती, इसलिए बाहर से विद्युत धारा देकर उसे ज़बरदस्ती करवाया जाता है। इसीलिए वैद्युत अपघटन में ऊर्जा खर्च होती है, जबकि बैटरी ऊर्जा देती है।
वैद्युत रसायन के ज़रूरी शब्द
नियमों पर जाने से पहले शब्दावली पक्की कर लें; परीक्षा के परिभाषा वाले सवाल यहीं से आते हैं।
| शब्द | सरल अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| वैद्युत अपघट्य | पिघली या घुली अवस्था में विद्युत चालन करने वाला यौगिक | पिघला NaCl, CuSO₄ विलयन |
| वैद्युत अपघटन | धारा प्रवाहित करके वैद्युत अपघट्य को अवयवी तत्वों में तोड़ना | NaCl → Na + Cl₂ |
| कैथोड | बैटरी के (−) सिरे से जुड़ा इलेक्ट्रोड, जहाँ अपचयन होता है | Na⁺ + e⁻ → Na |
| एनोड | बैटरी के (+) सिरे से जुड़ा इलेक्ट्रोड, जहाँ ऑक्सीकरण होता है | 2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻ |
| फैराडे स्थिरांक, F | 1 मोल इलेक्ट्रॉनों का कुल आवेश | 96,485 कूलॉम/मोल |
| आवेश, Q | धारा और समय का गुणनफल | Q = It |
| दर्शक आयन | विलयन में मौजूद पर इलेक्ट्रोड अभिक्रिया में भाग न लेने वाला आयन | CuSO₄ में SO₄²⁻ |
फैराडे का नियम: आवेश से द्रव्यमान तक
माइकल फैराडे ने देखा कि किसी इलेक्ट्रोड पर जमा या मुक्त होने वाला द्रव्यमान प्रवाहित कुल आवेश के समानुपाती होता है, और यह द्रव्यमान इस पर भी निर्भर करता है कि उस तत्व के हर आयन को कितने इलेक्ट्रॉन चाहिए। ये दोनों अवलोकन आमतौर पर दो अलग नियमों के रूप में लिखे जाते हैं, पर हल करने के लिए दोनों को एक ही समीकरण में मिलाया जा सकता है।
Q = Itआवेश = धारा × समय
n(इलेक्ट्रॉन) = Q/Fप्रवाहित इलेक्ट्रॉनों के मोल
m = MIt/(nF)फैराडे का नियम: M मोलर द्रव्यमान, n प्रति आयन इलेक्ट्रॉन संख्या
फैराडे स्थिरांक असल में क्या है
फैराडे स्थिरांक बस 1 मोल इलेक्ट्रॉनों का कुल आवेश है। हर इलेक्ट्रॉन का आवेश 1.602 × 10⁻¹⁹ कूलॉम होता है, और 1 मोल में एवोगाद्रो संख्या (6.022 × 10²³) कण होते हैं। दोनों को गुणा करने पर मिलता है F = 6.022 × 10²³ × 1.602 × 10⁻¹⁹ ≈ 96,485 कूलॉम/मोल।
चार वैद्युत अपघट्यों की पास-पास तुलना
नीचे की सारणी में सिमुलेशन की चारों अवस्थाएँ (पिघला NaCl, कॉपर एनोड वाला CuSO₄, अक्रिय एनोड वाला CuSO₄, और अम्लीकृत पानी) साथ रखी गई हैं। ध्यान दें, क्लोराइड आयन ही अकेला है जो खुद ऑक्सीकृत होता है; बाकी तीनों में असल में पानी ऑक्सीकृत होता है (या कॉपर इलेक्ट्रोड खुद), सल्फेट आयन सिर्फ दर्शक रहता है।
| वैद्युत अपघट्य | कैथोड का उत्पाद | एनोड का उत्पाद | मोल अनुपात (कैथोड : एनोड) |
|---|---|---|---|
| पिघला NaCl | Na | Cl₂ | 2 : 1 |
| CuSO₄ विलयन — अक्रिय एनोड | Cu | O₂ | 2 : 1 |
| CuSO₄ विलयन — कॉपर एनोड | Cu | Cu (↓) | 1 : 1 |
| अम्लीकृत पानी | H₂ | O₂ | 2 : 1 |
सिमुलेशन में खुद आज़माएँ
हर प्रयोग से पहले अनुमान लगाएँ, फिर चलाकर मिलाएँ।
- पिघले NaCl में धारा 2A और समय 10 मिनट रखकर मापन पैनल में "कैथोड पर जमा द्रव्यमान" देखें, फिर नीचे प्रश्न 1 के हाथ से किए हल से मिलाएँ।
- CuSO₄ चुनकर कॉपर और अक्रिय एनोड के बीच बदलें: कैथोड पर कॉपर जमने की दर दोनों में एक जैसी रहती है, सिर्फ एनोड का व्यवहार बदलता है।
- धारा दोगुनी करें: कैथोड पर जमा द्रव्यमान भी ठीक दोगुना हो जाता है (प्रश्न 7 देखें), क्योंकि m सीधे I के समानुपाती है।
- अम्लीकृत पानी में कोई भी धारा चुनें, H₂ और O₂ का "मोल अनुपात" देखें — यह हमेशा 2 : 1 रहेगा, धारा चाहे जो हो।
- समय स्लाइडर बढ़ाते जाएँ और देखें बुलबुले या परत कैसे लगातार बढ़ते जाते हैं, क्योंकि द्रव्यमान सीधे t के समानुपाती भी है।
हल किए गए प्रश्न
हर हल में पहले आवेश Q = It निकालेंगे, फिर फैराडे का नियम m = MIt/(nF) लगाएँगे।
प्रश्न 1: पिघला NaCl (सिमुलेशन के डिफ़ॉल्ट मान)
धारा I = 2 A, समय t = 10 मिनट = 600 सेकंड। आवेश Q = It = 2 × 600 = 1,200 कूलॉम। इलेक्ट्रॉनों के मोल = Q/F = 1,200/96,485 = 0.01244 mol।
कैथोड पर सोडियम (M = 23, n = 1): m = MIt/(nF) = 23 × 1,200 / (1 × 96,485) = 0.286 g। एनोड पर क्लोरीन गैस (M = 71, n = 2): m = 71 × 1,200 / (2 × 96,485) = 0.442 g। मोल अनुपात Na : Cl₂ = 2 : 1।
प्रश्न 2: कॉपर शोधन (कॉपर एनोड वाला CuSO₄)
धारा 2 A, समय 30 मिनट = 1,800 s। आवेश Q = 3,600 C, इलेक्ट्रॉनों के मोल = 0.03731 mol।
Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu (n = 2, M = 63.5): कैथोड पर जमा द्रव्यमान = 1.185 g। एनोड का कॉपर ठीक उसी दर से घुलता है: 1.185 g, क्योंकि दोनों इलेक्ट्रोड का n बराबर है। मोल अनुपात 1 : 1 — एक आयन की कमी तुरंत दूसरे से पूरी हो जाती है, इसलिए विलयन का नीला रंग लगभग एक जैसा रहता है।
प्रश्न 3: अक्रिय एनोड वाला CuSO₄
धारा 1.5 A, समय 20 मिनट = 1,200 s। आवेश Q = 1,800 C।
कैथोड पर कॉपर पहले जैसा ही 0.592 g जमता है। पर एनोड पर अब कॉपर न होने से पानी ऑक्सीकृत होकर ऑक्सीजन गैस बनाता है (O₂, n = 4, M = 32): 0.149 g। मोल अनुपात Cu : O₂ = 2 : 1।
प्रश्न 4: अम्लीकृत पानी — H₂ और O₂ का अनुपात
धारा 3 A, समय 500 s। आवेश Q = 1,500 C।
कैथोड पर H₂ (n = 2, M = 2): 0.016 g। एनोड पर O₂ (n = 4, M = 32): 0.124 g। मोल अनुपात H₂ : O₂ = 2 : 1 — एक जैसे आवेश पर हमेशा H₂ के मोल O₂ से दोगुने बनते हैं, क्योंकि H₂ के हर अणु को सिर्फ 2 इलेक्ट्रॉन चाहिए, O₂ को 4।
प्रश्न 5 (तीन प्रीसेट से आगे): चांदी की परत
गहनों पर चांदी की परत चढ़ाने में Ag⁺ + e⁻ → Ag अभिक्रिया इस्तेमाल होती है (n = 1, M = 108)। 0.5 A धारा 30 मिनट चलाने पर आवेश Q = 900 C।
जमी चांदी का द्रव्यमान m = 108 × 900 / (1 × 96,485) = 1.007 g। तीनों प्रीसेट से बाहर किसी भी धातु पर यही सूत्र लागू होता है, बस M और n बदलते हैं।
प्रश्न 6: फैराडे स्थिरांक का मतलब, समय में
प्रश्न: 5 A धारा पर ठीक 1 मोल इलेक्ट्रॉन (यानी 1 फैराडे आवेश) गुज़रने में कितना समय लगेगा?
t = F/I = 96,485 / 5 = 19,297 s ≈ 5.36 घंटे। यही फैराडे स्थिरांक का असली मतलब है — 1 मोल इलेक्ट्रॉन खिसकाने में ठीक कितना आवेश लगता है, उसकी संख्या।
प्रश्न 7: धारा दोगुनी तो द्रव्यमान भी दोगुना
एक जैसे 10 मिनट (600 s) में अक्रिय एनोड वाले CuSO₄ के कैथोड पर 1 A और 4 A धारा पर कितना कॉपर जमता है, तुलना करें।
1 A पर m = 0.197 g, 4 A पर m = 0.790 g। 0.790 ÷ 0.197 ≈ 4, ठीक धाराओं के अनुपात के बराबर — क्योंकि फैराडे के नियम में m सीधे I के समानुपाती है।
जो गलतियाँ सब करते हैं
इनसे बचने पर परिभाषा और गणना, दोनों तरह के सवालों में नंबर नहीं कटते।
- वैद्युत अपघटन में कैथोड को धनात्मक मान लेना। असल में कैथोड ऋणात्मक होता है, एनोड धनात्मक — साधारण बैटरी में ठीक उल्टा होता है, इसीलिए यह सबसे आम गलती है।
- अपचयन और ऑक्सीकरण को उलट देना। कैथोड पर हमेशा अपचयन, एनोड पर हमेशा ऑक्सीकरण — यह नियम हर वैद्युत रासायनिक सेल में एक जैसा है।
- सल्फेट आयन को एनोड पर अभिक्रिया करता मान लेना। CuSO₄ या अम्लीकृत पानी में सल्फेट सिर्फ दर्शक आयन है; असल में पानी ऑक्सीकृत होता है (या कॉपर इलेक्ट्रोड हो तो कॉपर खुद)।
- फैराडे के नियम में n गलत डालना। n का मतलब है प्रति आयन/अणु कितने इलेक्ट्रॉन चाहिए (Cu²⁺ में 2, Na⁺ में 1, O₂ में 4) — कुल आवेश या धारा नहीं।
- समय मिनट में ही सूत्र में डाल देना। फैराडे के नियम में t हमेशा सेकंड में डालना चाहिए, मिनट या घंटे में नहीं।
- यह मान लेना कि धारा दोगुनी करने पर द्रव्यमान दोगुना करने के लिए समय भी दोगुना करना पड़ेगा। असल में I और t दोनों अलग-अलग द्रव्यमान के समानुपाती हैं (m ∝ It), इसलिए किसी एक को भी दोगुना करने पर द्रव्यमान दोगुना हो जाता है।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में वैद्युत अपघटन
वैद्युत अपघटन सिर्फ परीक्षा का विषय नहीं है — भारी उद्योग से लेकर गहनों तक, कई चीज़ों के पीछे यही प्रक्रिया है।
- विद्युत लेपन (इलेक्ट्रोप्लेटिंग): सस्ते गहनों पर सोने या चांदी की पतली परत, गाड़ी के पुर्ज़ों पर क्रोमियम या निकेल की परत चढ़ाकर जंग रोकना।
- कॉपर शोधन: अशुद्ध कॉपर को एनोड बनाकर वैद्युत अपघटन करने पर शुद्ध कॉपर कैथोड पर जमता है, बिजली के तारों के लिए ज़रूरी शुद्धता इसी तरह मिलती है।
- एल्युमिनियम निष्कर्षण: बॉक्साइट से मिले एल्युमिना को पिघलाकर वैद्युत अपघटन से एल्युमिनियम धातु निकाली जाती है (हॉल-एरू प्रक्रिया), क्योंकि एल्युमिनियम इतना क्रियाशील है कि सामान्य रासायनिक अपचयन से शुद्ध नहीं मिलता।
- क्लोर-क्षार उद्योग: खारे पानी (ब्राइन) के वैद्युत अपघटन से क्लोरीन गैस, हाइड्रोजन गैस और सोडियम हाइड्रॉक्साइड (कास्टिक सोडा) एक साथ बनते हैं, जो साबुन-ब्लीच उद्योग की नींव है।
- कार की बैटरी चार्ज करना: चार्ज करते समय बैटरी असल में एक वैद्युत अपघटनी सेल की तरह काम करती है, बाहर से बिजली लेकर अपनी भीतरी रासायनिक अभिक्रिया को उल्टा कर देती है।
परीक्षा के लिए सुझाव: CBSE बोर्ड और JEE/NEET
CBSE कक्षा 12 के "वैद्युतरसायन" अध्याय में वैद्युत अपघटन और फैराडे के नियम मुख्य भाग हैं। बोर्ड परीक्षा में परिभाषा और अर्ध-अभिक्रियाएँ लिखने वाले सवाल आते हैं; JEE और NEET में फैराडे के नियम पर संख्यात्मक सवाल और मोल अनुपात पर आधारित बहुविकल्पीय सवाल पूछे जाते हैं।
एक हल किया गया परीक्षा-जैसा प्रश्न
प्रश्न: एक सेल में अक्रिय प्लैटिनम इलेक्ट्रोड से CuSO₄ विलयन का वैद्युत अपघटन 1.5 A धारा से 20 मिनट तक किया जाता है।
(क) वैद्युत अपघट्य की परिभाषा दें। (ख) कैथोड और एनोड की अर्ध-अभिक्रियाएँ लिखें। (ग) कैथोड पर जमा कॉपर का द्रव्यमान निकालें। (घ) "अक्रिय इलेक्ट्रोड की जगह कॉपर इलेक्ट्रोड इस्तेमाल करने पर एनोड पर कोई गैस न बनती" — इस कथन की पुष्टि करें।
(ग) का उत्तर: m = MIt/(nF) = 63.5 × 1,800 / (2 × 96,485) = 0.592 g। (घ) का सार: कॉपर इलेक्ट्रोड होने पर एनोड पर सल्फेट या पानी की जगह कॉपर खुद ऑक्सीकृत होकर Cu²⁺ बनकर विलयन में घुल जाता है (Cu → Cu²⁺ + 2e⁻), कोई गैस नहीं बनती।
रिवीज़न: एक स्क्रीन का सारांश
परीक्षा से पहली रात सिर्फ यह सूची और फैराडे के नियम की तीन पंक्तियाँ देख लेना काफ़ी है।
- वैद्युत अपघटन: बाहरी धारा से अस्वतःस्फूर्त अभिक्रिया करवाई जाती है; कैथोड ऋणात्मक (अपचयन), एनोड धनात्मक (ऑक्सीकरण)।
- फैराडे का नियम: Q = It, इलेक्ट्रॉनों के मोल = Q/F, m = MIt/(nF); F = 96,485 कूलॉम/मोल।
- पिघले NaCl में क्लोराइड आयन खुद ऑक्सीकृत होता है; जलीय CuSO₄ और अम्लीकृत पानी में आमतौर पर पानी ऑक्सीकृत होता है, सल्फेट सिर्फ दर्शक रहता है।
- कॉपर एनोड के साथ CuSO₄ का वैद्युत अपघटन करने पर एनोड खुद घुल जाता है, कोई गैस नहीं बनती — यही कॉपर शोधन का सिद्धांत है।
- अम्लीकृत पानी में H₂ और O₂ हमेशा 2 : 1 मोल अनुपात में बनते हैं, क्योंकि H₂ में n = 2 और O₂ में n = 4 है।
- द्रव्यमान सीधे धारा और समय दोनों के समानुपाती है (m ∝ It); किसी एक को भी दोगुना करने पर जमा द्रव्यमान दोगुना हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वैद्युत अपघटन किसे कहते हैं?
बाहरी विद्युत धारा प्रवाहित करके किसी वैद्युत अपघट्य (पिघले या घुले आयनिक यौगिक) को रासायनिक रूप से उसके अवयवी तत्वों में तोड़ने की प्रक्रिया को वैद्युत अपघटन कहते हैं। यह एक अस्वतःस्फूर्त प्रक्रिया है, इसलिए चलाए रखने के लिए विद्युत ऊर्जा चाहिए।
वैद्युत अपघटन में कैथोड और एनोड कौन-सा है?
कैथोड बैटरी के ऋणात्मक सिरे से जुड़ा इलेक्ट्रोड है, जहाँ धनायन इलेक्ट्रॉन पाकर अपचयित होते हैं। एनोड धनात्मक सिरे से जुड़ा इलेक्ट्रोड है, जहाँ ऋणायन इलेक्ट्रॉन छोड़कर ऑक्सीकृत होते हैं।
फैराडे का वैद्युत अपघटन नियम क्या है?
m = MIt/(nF)। यहाँ m जमा द्रव्यमान है, M मोलर द्रव्यमान, I धारा (एम्पियर में), t समय (सेकंड में), n प्रति आयन इलेक्ट्रॉन संख्या, और F = 96,485 कूलॉम/मोल फैराडे स्थिरांक है।
फैराडे स्थिरांक क्या है और इसका मान कितना है?
फैराडे स्थिरांक 1 मोल इलेक्ट्रॉनों पर कुल आवेश है, जिसका मान लगभग 96,485 कूलॉम/मोल है। यह एवोगाद्रो संख्या और एक इलेक्ट्रॉन के आवेश को गुणा करने से मिलता है।
पिघले NaCl का वैद्युत अपघटन करने पर क्या बनता है?
कैथोड पर सोडियम धातु बनती है (Na⁺ + e⁻ → Na) और एनोड पर क्लोरीन गैस बनती है (2Cl⁻ → Cl₂ + 2e⁻)। शुद्ध सोडियम धातु उद्योग में इसी तरीके से बनाई जाती है।
CuSO₄ विलयन में कॉपर और अक्रिय इलेक्ट्रोड के नतीजे अलग क्यों होते हैं?
दोनों में कैथोड पर कॉपर जमता है। पर कॉपर एनोड में कॉपर खुद विलयन में घुल जाता है (कोई गैस नहीं बनती), जबकि अक्रिय एनोड में पानी ऑक्सीकृत होकर ऑक्सीजन गैस बनाता है, क्योंकि अक्रिय इलेक्ट्रोड खुद अभिक्रिया नहीं करता।
अम्लीकृत पानी के वैद्युत अपघटन में H₂ और O₂ हमेशा 2 : 1 अनुपात में क्यों बनते हैं?
H₂ बनने में हर अणु को सिर्फ 2 इलेक्ट्रॉन चाहिए (2H⁺ + 2e⁻ → H₂), पर O₂ बनने में 4 इलेक्ट्रॉन चाहिए (2H₂O → O₂ + 4H⁺ + 4e⁻)। एक जैसे आवेश पर इसलिए H₂ के मोल हमेशा O₂ से दोगुने होते हैं।
वैद्युत अपघटन और साधारण बैटरी (गैल्वैनिक सेल) में क्या फ़र्क़ है?
गैल्वैनिक सेल में एक स्वतःस्फूर्त रासायनिक अभिक्रिया अपने आप बिजली बनाती है। वैद्युत अपघटनी सेल में उल्टा होता है: अभिक्रिया अपने आप नहीं होती, इसलिए बाहर से बिजली देकर उसे ज़बरदस्ती करवाया जाता है। इसी वजह से दोनों तरह के सेल में कैथोड-एनोड का आवेश भी उल्टा होता है।
धारा दोगुनी करने पर क्या जमा द्रव्यमान भी दोगुना होता है?
हाँ। फैराडे के नियम में m सीधे I के समानुपाती है (एक जैसे समय पर), इसलिए धारा दोगुनी करने पर जमा द्रव्यमान भी ठीक दोगुना हो जाता है। समय के साथ भी यही बात सच है।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
HSC
HSC Chemistry: syllabus and preparation
Admission
Engineering admission test preparation
SSC
SSC Chemistry: syllabus and preparation
Textbook
Class 9-10 Chemistry textbook
Admission
Medical admission test preparation
Admission
Dhaka University science unit admission 2026-27
English
Paragraph: Environment Pollution
Bangla
রচনা: পরিবেশ দূষণ (बांग्ला में)
English
Composition: Wonders of Modern Science
SSC
SSC suggestions
HSC
HSC suggestions
Admission
University admission guide
SSC
SSC syllabus
HSC
HSC syllabus
रसायन विज्ञान के और एनिमेशन
कक्षा 9 · 11
परमाणु की संरचना
परमाणु की संरचना चित्र और एनिमेशन के साथ: प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन, परमाणु संख्या, द्रव्यमान संख्या, समस्थानिक और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, हल किए गए उदाहरणों सहित।
कक्षा 7 · 10
अम्ल, क्षारक और pH मान
pH मान क्या है, pH स्केल कैसे काम करता है, अम्ल क्षार और लवण में अंतर, सूचक और उदासीनीकरण अभिक्रिया: ब्यूरेट से बूँद डालकर खुद अनुमापन करें, हल किए गए प्रश्नों के साथ।
कक्षा 9 · 11
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास किसे कहते हैं और कैसे लिखें: ऑफबाऊ सिद्धांत, पाउली अपवर्जन, हुंड का नियम, Cr-Cu अपवाद, आयन। इलेक्ट्रॉनों को एक-एक कर भरते देखें, 1–36 तत्व।
कक्षा 11
गैस नियम: बॉयल, चार्ल्स, गे-लुसाक, आवोगाद्रो और PV = nRT
बॉयल का नियम, चार्ल्स का नियम, गे-लुसाक और आवोगाद्रो नियम, आदर्श गैस समीकरण PV = nRT: पिस्टन खींचकर खुद देखें, ग्राफ़, R के मान, व्युत्पत्ति और हल किए गए प्रश्न।
कक्षा 10 · 11
आयनिक बंध कैसे बनता है
आयनिक बंध किसे कहते हैं, धातु के इलेक्ट्रॉन अधातु में जाकर आयन कैसे बनाते हैं, और सूत्र आवेश संतुलन से कैसे निकलता है: NaCl, MgO, CaCl2 चुनकर खुद देखें, सूत्र और हल सहित।
कक्षा 10 · 11
सहसंयोजक बंध
सहसंयोजक बंध किसे कहते हैं, एकल-द्वि-त्रिआबंध कैसे बनते हैं, अष्टक नियम क्या है: H₂O, NH₃, CH₄, CO₂ का डॉट-क्रॉस चित्र सिमुलेशन में खुद बनाएँ, ध्रुवता के साथ।
कक्षा 9 · 11
आवर्त सारणी की आवर्तिता
आवर्त सारणी में आवर्तिता क्या है: परमाणु त्रिज्या, आयनन ऊर्जा, इलेक्ट्रोनगेटिविटी और धात्विक गुण आवर्त व समूह में कैसे बदलते हैं। पहले 36 तत्वों के हीट मैप में खुद जाँचें, अपवादों के साथ।
अन्य विषयों के एनिमेशन
भौतिकी
प्रकाश का अपवर्तन
भौतिकी
ओम का नियम
भौतिकी
प्रक्षेप्य गति
भौतिकी
सरल लोलक
भौतिकी
विद्युत क्षेत्र
भौतिकी
तरंगों का व्यतिकरण
भौतिकी
मुक्त पतन
भौतिकी
लेंस द्वारा प्रतिबिंब
भौतिकी
न्यूटन के गति के नियम
भौतिकी
गोलीय दर्पण किरण आरेख
भौतिकी
विद्युत चुंबकीय प्रेरण
भौतिकी
संवेग संरक्षण और संघट्ट
भौतिकी
कार्य, ऊर्जा और शक्ति
भौतिकी
आनत तल
जीव विज्ञान
समसूत्री कोशिका विभाजन
जीव विज्ञान
विसरण और परासरण
जीव विज्ञान
प्रकाश संश्लेषण
जीव विज्ञान
मानव हृदय की संरचना और कार्य
जीव विज्ञान
मेंडल के आनुवंशिकता नियम
जीव विज्ञान
डीएनए प्रतिकृति
जीव विज्ञान
कोशिकीय श्वसन
जीव विज्ञान
एंजाइम क्रिया
जीव विज्ञान
तंत्रिका आवेग और एक्शन पोटेंशियल
जीव विज्ञान
नेफ्रॉन और मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
जीव विज्ञान
अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस)
जीव विज्ञान
पाचन तंत्र
गणित
पाइथागोरस प्रमेय
गणित
त्रिकोणमितीय अनुपात और इकाई वृत्त
गणित
द्विघात समीकरण और द्विघात फलन का ग्राफ़
गणित
वृत्त के प्रमेय
गणित
ऊँचाई और दूरी: उन्नयन कोण और अवनमन कोण
गणित
प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता
गणित
समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी
गणित






















