आपतन कोण बदलने के लिए प्रकाश स्रोत को खींचें
नियंत्रण
पहला माध्यम (ऊपर)
दूसरा माध्यम (नीचे)
मापन
- आपतन कोण, θ₁
- 30.0°
- अपवर्तन कोण, θ₂
- 19.5°
- पहले माध्यम का अपवर्तनांक, n₁
- 1.00
- दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक, n₂
- 1.50
- क्रांतिक कोण, θc
- नहीं
- परावर्तित प्रकाश का अंश
- 4.2%
- पहले माध्यम में प्रकाश की चाल, v₁
- 3.00× 10⁸ m/s
- दूसरे माध्यम में प्रकाश की चाल, v₂
- 2.00× 10⁸ m/s
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- प्रकाश स्रोत (पीला बिंदु) को खींचें या स्लाइडर खिसकाकर आपतन कोण बदलें।
- दोनों माध्यम चुनें — सघन माध्यम में तरंगाग्र पास-पास आते हैं और धीमे चलते हैं, यही किरण के मुड़ने का कारण है।
- "माध्यम आपस में बदलें" दबाएँ ताकि प्रकाश काँच से वायु में जाए, फिर कोण बढ़ाकर क्रांतिक कोण पार करें।
- क्रांतिक कोण के बाद अपवर्तित किरण गायब हो जाती है और सारा प्रकाश लौट आता है — पूर्ण आंतरिक परावर्तन।
पानी के गिलास में पेंसिल टूटी हुई क्यों दिखती है?
एक काँच के गिलास में पानी भरिए और उसमें एक पेंसिल या चम्मच तिरछा डाल दीजिए। बगल से देखने पर लगेगा कि पानी की सतह पर आकर पेंसिल टूट गई है या मुड़ गई है। बाहर निकालें तो वह बिल्कुल सीधी है। यानी गड़बड़ पेंसिल में नहीं, बल्कि उससे आने वाले प्रकाश के रास्ते में है।
गाँव के तालाब या किसी बावड़ी में झाँकें तो तली असल से ऊपर दिखती है, इसलिए पानी कम गहरा लगता है। कटोरी में रखा सिक्का पानी डालते ही ऊपर उठता हुआ सा दिखता है। और गर्मियों की दोपहर में हाईवे पर दूर सड़क गीली चमकती दिखती है, पर पास पहुँचने पर वहाँ पानी नहीं मिलता।
इन सब घटनाओं के पीछे एक ही कारण है: प्रकाश जब एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाता है, तो सीधा न जाकर थोड़ा मुड़ जाता है। इसी मुड़ने को अपवर्तन कहते हैं। इस पेज पर हम शुरू से समझेंगे कि प्रकाश क्यों मुड़ता है, कितना मुड़ता है, उसकी गणना कैसे होती है, और कब वह बाहर निकलने के बजाय अंदर ही फँस जाता है।
बिल्कुल शुरुआत से: प्रकाश मुड़ता क्यों है?
पहली बात याद रखिए: प्रकाश हर माध्यम में एक ही चाल से नहीं चलता। निर्वात में उसकी चाल लगभग 3 × 10⁸ m/s है, हवा में लगभग उतनी ही, पानी में कम, काँच में और कम, और हीरे में सबसे कम। जिस माध्यम में प्रकाश धीमे चलता है उसे प्रकाशिक रूप से सघन माध्यम कहते हैं, और जिसमें तेज़ चलता है उसे विरल माध्यम।
अब एक साइकिल की कल्पना कीजिए जो पक्की सड़क से रेत वाले मैदान में उतर रही है। अगर वह सीधे (लंबवत) उतरे तो दोनों तरफ़ एक साथ रेत में धीमी होगी और दिशा नहीं बदलेगी। पर अगर तिरछी उतरे, तो उसका एक हिस्सा पहले रेत में धीमा हो जाता है जबकि दूसरा हिस्सा अभी भी सड़क पर तेज़ है। नतीजा, साइकिल अपने-आप थोड़ी मुड़ जाती है।
प्रकाश के तरंगाग्र के साथ बिल्कुल यही होता है। तरंगाग्र का जो हिस्सा पहले सघन माध्यम में घुसता है, वह पहले धीमा होता है, बाकी हिस्सा तब भी तेज़ चल रहा होता है। इसलिए पूरा तरंगाग्र घूम जाता है और किरण की दिशा बदल जाती है। यही कारण है कि लंबवत (0° आपतन कोण) पड़ने वाला प्रकाश नहीं मुड़ता।
परेड करते सैनिकों की कतार को भी सोचिए, जो सड़क से कीचड़ में तिरछी घुसती है। जो सैनिक पहले कीचड़ में पहुँचते हैं वे धीमे हो जाते हैं, और कतार घूम जाती है। सिमुलेशन में "चलते तरंगाग्र" चालू रखें तो आप यही होते देखेंगे — सघन माध्यम में तरंगाग्र पास-पास आ जाते हैं।
- विरल से सघन (जैसे वायु → पानी): प्रकाश धीमा होता है, किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है, इसलिए अपवर्तन कोण आपतन कोण से छोटा होता है।
- सघन से विरल (जैसे पानी → वायु): प्रकाश तेज़ होता है, किरण अभिलंब से दूर हटती है, इसलिए अपवर्तन कोण बड़ा होता है।
- लंबवत पड़ने पर (आपतन कोण 0°): चाल बदलती है, दिशा नहीं।
ज़रूरी शब्द और उनके आसान अर्थ
अपवर्तन के हर प्रश्न में ये शब्द बार-बार आते हैं। इन्हें एक बार ध्यान से पढ़ लीजिए, आगे सब आसान लगेगा।
| शब्द | आसान अर्थ |
|---|---|
| अंतरापृष्ठ (सीमा-तल) | जहाँ दो माध्यम मिलते हैं, जैसे पानी की ऊपरी सतह। |
| आपतित किरण | पहले माध्यम से आकर सीमा पर पड़ने वाली किरण। |
| अपवर्तित किरण | मुड़कर दूसरे माध्यम में जाने वाली किरण। |
| अभिलंब | आपतन बिंदु पर सीमा-तल के लंबवत खींची गई रेखा। सभी कोण इसी से मापे जाते हैं। |
| आपतन कोण (θ₁) | आपतित किरण और अभिलंब के बीच का कोण। |
| अपवर्तन कोण (θ₂) | अपवर्तित किरण और अभिलंब के बीच का कोण। |
| अपवर्तनांक (n) | माध्यम प्रकाश को कितना धीमा करता है: n = c/v। इसका कोई मात्रक नहीं। |
| क्रांतिक कोण (θc) | सघन से विरल में जाते समय वह आपतन कोण जिस पर अपवर्तन कोण 90° हो जाए। |
| पूर्ण आंतरिक परावर्तन | आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा होने पर सारा प्रकाश पहले माध्यम में लौट आना। |
अपवर्तन के नियम और स्नेल का नियम
अपवर्तन मनमाने ढंग से नहीं होता, यह हमेशा दो नियमों का पालन करता है। इन्हें अपवर्तन के नियम कहते हैं।
पहला नियम: सब एक ही तल में
आपतित किरण, अपवर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अंतरापृष्ठ पर खींचा गया अभिलंब — तीनों एक ही तल में होते हैं। आसान शब्दों में, प्रकाश कागज़ के पन्ने के तल में ही मुड़ता है, अचानक पन्ने से बाहर नहीं निकलता। इसलिए एक समतल चित्र से ही अपवर्तन समझाया जा सकता है।
दूसरा नियम: स्नेल का नियम
किसी दिए गए माध्यम-युग्म और दिए गए रंग के प्रकाश के लिए, आपतन कोण की ज्या (sine) और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात हमेशा स्थिर रहता है। यही स्थिरांक पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक है।
यदि दोनों माध्यमों के निरपेक्ष अपवर्तनांक n₁ और n₂ पता हों, तो नियम का सबसे साफ़ रूप है: n₁ sinθ₁ = n₂ sinθ₂। याद रखने का तरीका — "हर तरफ़ अपना n और अपना कोण।"
sinθ₁ / sinθ₂ = ₁n₂ (नियतांक)स्नेल का नियम
n₁ sinθ₁ = n₂ sinθ₂निरपेक्ष अपवर्तनांक वाला रूप
अपवर्तनांक और प्रकाश की चाल
किसी माध्यम का निरपेक्ष अपवर्तनांक निर्वात में प्रकाश की चाल और उस माध्यम में प्रकाश की चाल का अनुपात है। जिस माध्यम में प्रकाश जितना धीमा चलता है, उसका n उतना बड़ा होता है। इसलिए n देखकर ही बताया जा सकता है कि कौन-सा माध्यम अधिक सघन है।
सिमुलेशन में ये मान हैं: वायु 1.00, पानी 1.33, काँच 1.50, हीरा 2.42। दो माध्यमों का आपेक्षिक अपवर्तनांक निकालने के लिए दूसरे के n को पहले के n से भाग दें। जैसे पानी के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक = 1.50 ÷ 1.33 = 1.13।
n = c / vनिरपेक्ष अपवर्तनांक
₁n₂ = n₂ / n₁ = v₁ / v₂आपेक्षिक अपवर्तनांक
₁n₂ × ₂n₁ = 1उल्टी दिशा का अपवर्तनांक व्युत्क्रम होता है
क्रांतिक कोण और पूर्ण आंतरिक परावर्तन
अब प्रकाश को उल्टी दिशा में भेजिए — सघन से विरल माध्यम में, जैसे पानी से हवा में। अब किरण अभिलंब से दूर मुड़ती है, इसलिए अपवर्तन कोण हमेशा आपतन कोण से बड़ा होता है। आपतन कोण धीरे-धीरे बढ़ाते जाएँ तो अपवर्तित किरण सतह की ओर झुकती जाती है।
एक खास आपतन कोण पर अपवर्तित किरण ठीक सतह को छूती हुई चलती है, यानी अपवर्तन कोण 90° हो जाता है। यही विशेष आपतन कोण क्रांतिक कोण कहलाता है। स्नेल के नियम में θ₂ = 90° और sin 90° = 1 रखने पर sinθc = n₂/n₁ मिलता है। विरल माध्यम हवा हो तो sinθc = 1/n।
क्रांतिक कोण से आगे क्या होता है? तब स्नेल के नियम के अनुसार sinθ₂ का मान 1 से बड़ा चाहिए, जो किसी भी कोण के लिए संभव नहीं। इसलिए प्रकाश दूसरे माध्यम में जा ही नहीं पाता और पूरा का पूरा पहले माध्यम में लौट आता है। इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं। साधारण दर्पण कुछ प्रकाश सोख लेता है, पर यहाँ लगभग सारा प्रकाश लौटता है — यह दर्पण से भी अच्छा दर्पण है।
sinθc = n₂ / n₁ = 1 / ₂n₁क्रांतिक कोण (n₁ > n₂)
sinθc = 1 / nमाध्यम से वायु में जाते समय
- शर्त 1: प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाना चाहिए।
- शर्त 2: आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा होना चाहिए।
- विरल से सघन में जाते समय पूर्ण आंतरिक परावर्तन कभी नहीं होता, कोण चाहे जो हो।
सिमुलेशन में खुद प्रयोग करें
सिर्फ़ पढ़ने से कम याद रहता है, खुद करके देखने से बहुत ज़्यादा। ऊपर के एनिमेशन में ये प्रयोग एक-एक करके कीजिए।
प्रयोग 1: पहला माध्यम वायु और दूसरा काँच रखें। आपतन कोण 0° करें — किरण बिल्कुल नहीं मुड़ती। अब कोण धीरे-धीरे बढ़ाएँ; अपवर्तन कोण भी बढ़ता है, पर हमेशा आपतन कोण से छोटा रहता है।
प्रयोग 2: कोण वही रखकर दूसरा माध्यम काँच से पानी और फिर हीरा करें। हीरे में किरण सबसे ज़्यादा मुड़ती है, क्योंकि उसका अपवर्तनांक सबसे बड़ा है। मापन पैनल में v₂ देखें — हीरे में प्रकाश सबसे धीमा है।
प्रयोग 3: "माध्यम आपस में बदलें" दबाएँ ताकि प्रकाश काँच से वायु में जाए। कोण बढ़ाते हुए लाल डैश वाली क्रांतिक कोण की रेखा पार करें। अपवर्तित किरण अचानक गायब होगी और "पूर्ण आंतरिक परावर्तन" लिखा आएगा।
प्रयोग 4: परावर्तित किरण की चमक देखें। छोटे कोण पर वह फीकी है (ज़्यादातर प्रकाश अंदर चला जाता है), पर क्रांतिक कोण के पास पहुँचते-पहुँचते तेज़ होती जाती है — असल में भी ऐसा ही होता है।
चरण-दर-चरण हल उदाहरण
अब कुछ प्रश्न हल करते हैं। हर प्रश्न में पहले ज्ञात राशियाँ लिखें, फिर सूत्र, फिर मान रखें — बोर्ड परीक्षा में इस तरह लिखने से पूरे अंक मिलते हैं।
उदाहरण 1: वायु से काँच में (सिमुलेशन के शुरुआती मान)
प्रकाश वायु (n₁ = 1.00) से काँच (n₂ = 1.50) में 30° आपतन कोण पर जाता है। अपवर्तन कोण ज्ञात कीजिए।
स्नेल का नियम: n₁ sinθ₁ = n₂ sinθ₂। इसलिए sinθ₂ = (1.00 × sin 30°) ÷ 1.50 = (1.00 × 0.50) ÷ 1.50 = 0.333। अतः θ₂ = 19.5°। किरण अभिलंब की ओर मुड़ी, क्योंकि काँच सघन है।
उदाहरण 2: तालाब में सूर्य का प्रकाश
सूर्य का प्रकाश तालाब के पानी (n = 1.33) पर 45° कोण पर पड़ता है। पानी में किरण अभिलंब से कितना कोण बनाएगी?
sinθ₂ = sin 45° ÷ 1.33 = 0.707 ÷ 1.33 = 0.532, इसलिए θ₂ = 32.1°।
उदाहरण 3: काँच, पानी और हीरे के क्रांतिक कोण
sinθc = 1/n से: काँच के लिए sinθc = 1 ÷ 1.50 = 0.667, अतः θc = 41.8°। पानी के लिए sinθc = 0.752, θc = 48.8°। हीरे के लिए sinθc = 0.413, θc = 24.4°।
ध्यान दें: अपवर्तनांक जितना बड़ा, क्रांतिक कोण उतना छोटा। इसलिए सघन माध्यम में प्रकाश को फँसाना आसान है।
उदाहरण 4: अलग-अलग माध्यमों में प्रकाश की चाल
v = c/n और c = 3 × 10⁸ m/s। पानी में v = 3 ÷ 1.33 = 2.26 × 10⁸ m/s, काँच में 2.00 × 10⁸ m/s और हीरे में केवल 1.24 × 10⁸ m/s। हीरे में प्रकाश निर्वात की आधी चाल से भी धीमा चलता है!
उदाहरण 5: तालाब की आभासी गहराई
एक तालाब की वास्तविक गहराई 2 m है। ऊपर से लगभग सीधा देखने पर वह कितना गहरा लगेगा? आभासी गहराई = वास्तविक गहराई ÷ n = 2 ÷ 1.33 = 1.50 m।
यानी तली लगभग 0.50 m ऊपर उठी हुई लगती है। इसीलिए पानी जितना दिखता है, उससे ज़्यादा गहरा होता है — तैरना न आता हो तो सावधान रहें!
आभासी गहराई = वास्तविक गहराई / nलगभग लंबवत देखने पर
उदाहरण 6: काँच से वायु में — प्रकाश निकलेगा या नहीं?
काँच के अंदर से प्रकाश 30° पर सतह से टकराता है। sinθ₂ = 1.50 × sin 30° = 0.75, अतः θ₂ = 48.6° — प्रकाश बाहर निकल जाता है।
पर 45° पर sinθ₂ = 1.50 × sin 45° = 1.06, जो 1 से बड़ा है। ऐसा कोई कोण नहीं होता, इसलिए प्रकाश बाहर नहीं निकल सकता — पूर्ण आंतरिक परावर्तन। मिलाकर देखें: 45° काँच के क्रांतिक कोण 41.8° से बड़ा है।
छात्र अक्सर ये गलतियाँ करते हैं
कुछ गलतियाँ बार-बार होती हैं। इन्हें पहले से जान लेने से आसान अंक नहीं कटते।
- कोण सतह से मापना — गलत! आपतन और अपवर्तन कोण हमेशा अभिलंब से मापे जाते हैं।
- "सघन माध्यम में प्रकाश तेज़ चलता है" — उल्टा है। सघन माध्यम में प्रकाश धीमा होता है, इसलिए n बड़ा होता है।
- विरल से सघन में जाते समय क्रांतिक कोण ढूँढना — इस दिशा में क्रांतिक कोण होता ही नहीं।
- अपवर्तनांक का मात्रक लिखना — n दो चालों का अनुपात है, इसका कोई मात्रक नहीं।
- यह मानना कि अपवर्तन में आवृत्ति बदलती है — नहीं, आवृत्ति वही रहती है; चाल और तरंगदैर्ध्य बदलते हैं।
- कैलकुलेटर रेडियन मोड में रखकर sin निकालना — पहले देख लें कि डिग्री मोड चालू है।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अपवर्तन
अपवर्तन सिर्फ़ किताब का विषय नहीं है, यह हर दिन हमारे आसपास हो रहा है।
- प्रकाशिक तंतु (ऑप्टिकल फ़ाइबर): बाल से भी पतले काँच के तार में प्रकाश बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन से आगे बढ़ता है। इंटरनेट का डेटा और अस्पतालों की एंडोस्कोपी इसी पर चलती है।
- हीरे की चमक: हीरे का क्रांतिक कोण बहुत छोटा है, इसलिए अंदर गया प्रकाश बार-बार परावर्तित होकर ऊपर से निकलता है और हीरा जगमगाता है।
- मरीचिका: गर्मी में सड़क या रेगिस्तान के ऊपर गर्म हवा की परतों में प्रकाश मुड़ते-मुड़ते पूर्ण आंतरिक परावर्तन कर लेता है, और आकाश का प्रतिबिंब पानी जैसा दिखता है।
- पानी में पेंसिल का मुड़ा दिखना, तालाब का उथला लगना, कटोरी में सिक्के का ऊपर उठना — सब अपवर्तन है।
- चश्मे, कैमरे और सूक्ष्मदर्शी के लेंस अपवर्तन से ही प्रकाश को एक बिंदु पर लाते हैं।
- इंद्रधनुष: बारिश की बूँदों में अपवर्तन, आंतरिक परावर्तन और हर रंग के अलग-अलग मुड़ने से आकाश में सात रंग बनते हैं।
परीक्षा की तैयारी: CBSE बोर्ड और JEE/NEET
यह अध्याय कक्षा 10 (प्रकाश: परावर्तन तथा अपवर्तन) और कक्षा 12 (किरण प्रकाशिकी) दोनों में आता है। नीचे मुख्य प्रश्न-प्रकार और उनके उत्तर का तरीका दिया है।
परिभाषा वाले प्रश्न (बोर्ड)
अपवर्तन, अपवर्तनांक और क्रांतिक कोण की परिभाषा एक-एक सटीक वाक्य में लिखें। क्रांतिक कोण में "सघन से विरल माध्यम" और "अपवर्तन कोण 90°" ज़रूर लिखें।
कारण बताइए (बोर्ड)
पानी में डूबी पेंसिल मुड़ी क्यों दिखती है? डूबे हिस्से से आने वाला प्रकाश पानी से हवा में जाते समय अभिलंब से दूर मुड़ता है और आँख उसे सीधी रेखा में पीछे की ओर मानती है, इसलिए डूबा हिस्सा ऊपर दिखता है। उत्तर में मुड़ने की दिशा और आँख का किरणों को पीछे बढ़ाना ज़रूर लिखें।
संख्यात्मक प्रश्न (बोर्ड व JEE/NEET)
स्नेल का नियम, n = c/v, क्रांतिक कोण और आभासी गहराई — ऊपर के उदाहरणों जैसे प्रश्न आते हैं। JEE/NEET में अक्सर इन्हें जोड़ा जाता है, जैसे दो माध्यमों की परतें या किसी माध्यम में चाल देकर क्रांतिक कोण पूछना। सूत्र, मान रखना और मात्रक — तीनों दिखाएँ।
अवधारणा वाले MCQ (JEE/NEET)
याद रखें: अपवर्तन में आवृत्ति नहीं बदलती; अपवर्तनांक जितना बड़ा, क्रांतिक कोण उतना छोटा; और पूर्ण आंतरिक परावर्तन केवल सघन से विरल में होता है। ज़्यादातर अवधारणात्मक विकल्प इन्हीं तीन बातों से हल हो जाते हैं।
एक नज़र में दोहराव
परीक्षा से पहले की रात यह तालिका पूरा अध्याय एक स्क्रीन पर दिखा देती है।
| विषय | मुख्य बात |
|---|---|
| अपवर्तन का कारण | अलग-अलग माध्यम में प्रकाश की चाल अलग |
| स्नेल का नियम | n₁ sinθ₁ = n₂ sinθ₂ |
| अपवर्तनांक | n = c/v, कोई मात्रक नहीं |
| विरल → सघन | अभिलंब की ओर मुड़ती है, θ₂ < θ₁ |
| सघन → विरल | अभिलंब से दूर हटती है, θ₂ > θ₁ |
| क्रांतिक कोण | sinθc = n₂/n₁ (वायु में sinθc = 1/n) |
| पूर्ण आंतरिक परावर्तन | सघन → विरल और θ₁ > θc |
| आभासी गहराई | वास्तविक गहराई ÷ n |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रकाश का अपवर्तन किसे कहते हैं?
प्रकाश जब एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में तिरछा जाता है तो सीमा पर उसकी दिशा बदल जाती है, इसे अपवर्तन कहते हैं। इसका कारण दोनों माध्यमों में प्रकाश की चाल का अलग होना है।
प्रकाश का अपवर्तन क्यों होता है?
क्योंकि अलग-अलग माध्यमों में प्रकाश की चाल अलग होती है। तिरछे पड़ने पर तरंगाग्र का एक हिस्सा पहले धीमा होता है, जिससे पूरा तरंगाग्र घूम जाता है और किरण मुड़ जाती है।
अपवर्तन के नियम क्या हैं?
पहला: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब एक ही तल में होते हैं। दूसरा (स्नेल का नियम): दिए गए माध्यम-युग्म और रंग के लिए sinθ₁/sinθ₂ स्थिर रहता है, यानी n₁ sinθ₁ = n₂ sinθ₂।
क्रांतिक कोण किसे कहते हैं?
सघन से विरल माध्यम में जाते समय वह आपतन कोण जिस पर अपवर्तन कोण 90° हो जाता है, क्रांतिक कोण कहलाता है। sinθc = n₂/n₁।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन की शर्तें क्या हैं?
दो शर्तें: प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाए, और आपतन कोण क्रांतिक कोण से बड़ा हो।
अपवर्तनांक का मात्रक क्या है?
अपवर्तनांक का कोई मात्रक नहीं होता, क्योंकि यह दो चालों का अनुपात है (n = c/v)।
क्या अपवर्तन में प्रकाश की आवृत्ति बदलती है?
नहीं। आवृत्ति वही रहती है; सघन माध्यम में चाल और तरंगदैर्ध्य दोनों n गुना कम हो जाते हैं।
हीरा इतना क्यों चमकता है?
हीरे का अपवर्तनांक बहुत अधिक (2.42) है, इसलिए उसका क्रांतिक कोण केवल लगभग 24.4° है। अंदर गया प्रकाश बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन करके ऊपर से निकलता है, इसलिए हीरा जगमगाता है।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
SSC
SSC Physics: syllabus and preparation
HSC
HSC Physics: syllabus and preparation
Textbook
Class 9-10 Physics textbook
Admission
Engineering admission test preparation
Admission
Dhaka University science unit admission 2026-27
English
Composition: The Uses of Electricity
Bangla
প্রতিবেদন: বিজ্ঞান মেলা (बांग्ला में)
English
Paragraph: Science in Everyday Life
SSC
SSC suggestions
HSC
HSC suggestions
Admission
University admission guide
SSC
SSC syllabus
HSC
HSC syllabus
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ओम का नियम क्या है, सूत्र V=IR, V-I ग्राफ और श्रेणी-पार्श्व क्रम — विभवांतर व प्रतिरोध बदलकर धारा देखें। कक्षा 10 व 12 के हल प्रश्न।
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प्रक्षेप्य गति किसे कहते हैं? कोण व वेग बदलकर पथ देखें — उड्डयन काल, अधिकतम ऊँचाई, क्षैतिज परास के सूत्र व हल उदाहरण। कक्षा 11, JEE/NEET।
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सरल लोलक किसे कहते हैं, आवर्तकाल का सूत्र T=2π√(l/g), सरल आवर्त गति — लंबाई बदलकर देखें। g ज्ञात करने के हल उदाहरण।
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विद्युत क्षेत्र किसे कहते हैं, तीव्रता का सूत्र व SI मात्रक, क्षेत्र रेखाओं के गुण — आवेश रखकर रेखाएँ देखें। कूलॉम के नियम के हल उदाहरण।
कक्षा 11 · 12
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अध्यारोपण का सिद्धांत, संपोषी व विनाशी व्यतिकरण की शर्तें, फ्रिंज चौड़ाई β=λD/d — दो स्रोत खिसकाकर देखें। कक्षा 11-12 के हल उदाहरण।
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