2 सेकंड बाद धक्का रुक जाता है; बर्फ़ पर ट्रॉली एकसमान वेग से चलती रहती है
नियंत्रण
कौन-सा नियम देखें
मापन
- नेट बल, F_net
- 0.0N
- त्वरण, a
- 0.00m/s²
- वेग, v
- 0.00m/s
- विस्थापन, x
- 0.0m
- घर्षण बल, f
- 0.0N
- संवेग, p = mv
- 0.0kg·m/s
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- पहले “पहला नियम: जड़त्व” चुनकर चलाएँ: 2 सेकंड के धक्के के बाद बल हट जाता है, फिर भी बर्फ़ पर ट्रॉली उसी वेग से चलती रहती है।
- ट्रॉली के दीवार से टकराकर अचानक रुकने पर ऊपर रखे यात्री डिब्बे को देखें: वह आगे फिसल जाता है। बल बहुत बढ़ा दें तो शुरुआत में वह पीछे फिसलता है।
- “दूसरा नियम: F = ma” चुनें: v–t ग्राफ़ का ढाल ही त्वरण है। द्रव्यमान दोगुना करें, नई रेखा पिछली (धूसर) रेखा के आधे ढाल से चढ़ती है।
- घर्षण चालू करके बल घटाएँ: जब तक F, μmg से कम है, ट्रॉली हिलती ही नहीं; मापन में घर्षण बल ठीक लगाए गए बल के बराबर दिखता है।
- “तीसरा नियम” चुनकर दोनों ट्रॉलियों के द्रव्यमान अलग रखें: धक्के बराबर और विपरीत हैं, हल्की ट्रॉली तेज़ भागती है और कुल संवेग हमेशा शून्य रहता है।
बस के अचानक ब्रेक लगाने पर आप आगे क्यों गिरते हैं
भीड़ भरी बस में आप खड़े हैं और ड्राइवर ने अचानक ज़ोर से ब्रेक लगाया। किसी ने आपको धक्का नहीं दिया, फिर भी आप आगे की ओर लड़खड़ा गए। और जब रुकी हुई बस अचानक चल पड़ती है, तो आप पीछे की ओर झुक जाते हैं। यह अदृश्य धक्का आया कहाँ से?
मैदान में पड़ी फ़ुटबॉल अपने-आप कभी गोल में नहीं जाती; किसी को किक मारनी पड़ती है, और किक जितनी ज़ोरदार, गेंद उतनी तेज़। लेकिन उतनी ही ज़ोर से एक ईंट को किक मारें तो वह मुश्किल से हिलती है और उल्टा पैर में दर्द होता है। एक जैसी मेहनत, इतना अलग नतीजा क्यों?
नाव से किनारे पर कूदें तो नाव पीछे खिसक जाती है, और तैरते समय आप हाथों से पानी को पीछे धकेलते हैं तभी आगे बढ़ते हैं। इन सब रोज़मर्रा की पहेलियों का जवाब तीन छोटे नियमों में है, जिन्हें सर आइज़क न्यूटन ने 1687 में अपनी पुस्तक “प्रिंसिपिया” में लिखा था। ऊपर के सिमुलेशन में ट्रॉली धकेलकर आप तीनों नियम खुद जाँच सकते हैं।
बिल्कुल शुरुआत से: बल क्या है
बल एक धक्का या खिंचाव है। यह किसी वस्तु की विराम अवस्था या गति की अवस्था को बदलता है या बदलने की कोशिश करता है: वस्तु को चलाना, रोकना, तेज़ या धीमा करना, या उसकी दिशा मोड़ना, सब बल का काम है। बल का परिमाण भी होता है और दिशा भी, इसलिए यह सदिश राशि है। इसका SI मात्रक न्यूटन (N) है।
लगभग दो हज़ार साल तक लोग अरस्तू की बात मानते रहे कि किसी चीज़ को चलाए रखने के लिए लगातार धक्का चाहिए, क्योंकि रोज़ यही दिखता है: इंजन बंद करो तो गाड़ी कुछ देर में रुक जाती है। गैलीलियो ने पहली बार समझा कि चीज़ें घर्षण के कारण रुकती हैं, गति के “ख़त्म” होने से नहीं। सतह जितनी चिकनी, गेंद उतनी दूर लुढ़कती है; बिल्कुल घर्षण-रहित सतह पर वह कभी न रुकती।
न्यूटन ने इस विचार को तीन साफ़ नियमों में बाँधा। पहला बताता है कि नेट बल न हो तो क्या होता है, दूसरा बताता है कि बल होने पर गति कितनी बदलती है, और तीसरा बताता है कि बल हमेशा जोड़े में आते हैं। साइकिल से लेकर रॉकेट तक, स्कूल में मिलने वाली लगभग हर गति इन्हीं तीन से समझ आती है।
न्यूटन के नियमों के ज़रूरी शब्द
“परिभाषित कीजिए” वाले प्रश्न सीधे इसी तालिका से आते हैं, इसे एक बार ध्यान से पढ़ लें।
| शब्द | प्रतीक | आसान भाषा में अर्थ | मात्रक |
|---|---|---|---|
| बल | F | धक्का या खिंचाव जो वस्तु की गति बदलता है या बदलने की कोशिश करता है | न्यूटन (N) |
| जड़त्व | — | वस्तु की अपनी अवस्था बनाए रखने की प्रवृत्ति | कोई नहीं (द्रव्यमान इसका माप है) |
| द्रव्यमान | m | वस्तु में पदार्थ की मात्रा; जड़त्व का माप | किलोग्राम (kg) |
| संवेग | p = mv | द्रव्यमान और वेग का गुणनफल; “गति की मात्रा” | kg·m/s |
| संतुलित बल | — | ऐसे बल जिनका परिणामी शून्य हो; गति नहीं बदलती | N |
| असंतुलित (नेट) बल | F_net | शून्य से अलग परिणामी बल; इससे त्वरण होता है | N |
| आवेग | J = FΔt | बल × समय जितनी देर बल लगा; संवेग में परिवर्तन के बराबर | N·s |
| आवेगी बल | — | बहुत कम समय के लिए लगने वाला बहुत बड़ा बल, जैसे बल्ले की चोट | N |
| क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म | — | दो वस्तुएँ एक-दूसरे पर जो बराबर और विपरीत बल लगाती हैं | N |
| घर्षण बल | f | दो सतहों के बीच आपेक्षिक गति का विरोध करने वाला बल | N |
| अभिलंब बल | N | सतह द्वारा वस्तु पर लंबवत लगाया गया धक्का | N |
न्यूटन का गति का प्रथम नियम: जड़त्व का नियम
कथन: प्रत्येक वस्तु अपनी विराम अवस्था या सरल रेखा में एकसमान गति की अवस्था में बनी रहती है, जब तक कि उस पर कोई बाहरी असंतुलित बल कार्य न करे।
नियम का पहला हिस्सा आसान लगता है: मेज़ पर रखी किताब तब तक वहीं रहती है जब तक कोई उसे हटाए नहीं। दूसरा हिस्सा चौंकाता है: चलती वस्तु अपने-आप धीमी नहीं होती। जब भी कोई चीज़ धीमी होती है, कोई बल यह कर रहा होता है, आमतौर पर घर्षण या हवा का प्रतिरोध।
बर्फ़ पर ट्रॉली ठीक यही दिखाती है। 5 kg की ट्रॉली को 10 N बल से 2 सेकंड धकेला जाता है। फिर बल शून्य हो जाता है, लेकिन ट्रॉली 4 m/s से चलती रहती है, जब तक दीवार न आ जाए। वेग न बढ़ता है न घटता है, क्योंकि नेट बल शून्य है; इसलिए v–t ग्राफ़ का यह हिस्सा बिल्कुल सपाट है।
पहले नियम से ही बल की परिभाषा मिलती है: जो वस्तु की विराम या गति की अवस्था बदले। वस्तु का वह गुण जो इस बदलाव का विरोध करता है, जड़त्व कहलाता है। इसीलिए पहले नियम को जड़त्व का नियम भी कहते हैं।
विराम का जड़त्व
स्थिर वस्तु स्थिर रहना चाहती है। बस अचानक चलती है तो आपके पैर फ़र्श के साथ आगे बढ़ जाते हैं, पर शरीर का ऊपरी हिस्सा वहीं रहना चाहता है, इसलिए आप पीछे झुक जाते हैं।
NCERT का मशहूर प्रयोग आज़माएँ: गिलास पर एक पोस्टकार्ड और उस पर एक सिक्का रखें, फिर कार्ड को उँगली से तेज़ी से झटका दें। कार्ड उड़ जाता है, लेकिन सिक्का विराम के जड़त्व के कारण सीधा गिलास में गिरता है। दरी को डंडे से पीटने पर धूल भी इसी कारण निकलती है: दरी हिलती है, धूल वहीं रहना चाहती है।
सिमुलेशन में बल 40–50 N कर दें और द्रव्यमान घटाएँ। ट्रॉली इतनी तेज़ी से चल पड़ती है कि डिब्बा पीछे फिसल जाता है, क्योंकि डिब्बे और ट्रॉली के बीच का घर्षण उसे इतना त्वरण नहीं दे पाता।
गति का जड़त्व
चलती वस्तु चलती रहना चाहती है। बस ब्रेक लगाती है तो आपके पैर फ़र्श के साथ रुक जाते हैं, पर शरीर का ऊपरी हिस्सा आगे बढ़ता रहता है, इसलिए आप आगे गिरते हैं।
लंबी कूद से पहले खिलाड़ी दौड़ता है, क्योंकि दौड़ का गति-जड़त्व छलाँग में जुड़ जाता है। चलती ट्रेन से उतरें तो आगे की ओर कुछ कदम दौड़ना पड़ता है, वरना पैर रुक जाते हैं और शरीर आगे जाकर मुँह के बल गिरता है।
सिमुलेशन में ट्रॉली दीवार से टकराकर रुक जाती है, पर यात्री डिब्बा पुराने वेग से आगे बढ़ता रहता है और ट्रॉली के अगले किनारे पर जाकर टकराता है। सीट बेल्ट न पहनने वाले यात्री के साथ दुर्घटना में यही होता है।
द्रव्यमान जड़त्व का माप है
ख़ाली ठेला धकेलना आसान है, ईंटों से भरा ठेला मुश्किल; और चलते भरे ठेले को रोकना भी मुश्किल। जिसका द्रव्यमान अधिक, उसका जड़त्व अधिक; उसकी अवस्था बदलने के लिए अधिक बल चाहिए। इसलिए द्रव्यमान को जड़त्व का माप कहते हैं। कुछ पुस्तकें जड़त्व का तीसरा प्रकार, दिशा का जड़त्व, भी बताती हैं: मोड़ पर कार में आप बाहर की ओर खिसकते हैं।
संतुलित और असंतुलित बल
किसी वस्तु पर कई बल लगें तो उनका मिला-जुला असर परिणामी या नेट बल कहलाता है। नेट बल शून्य हो तो बल संतुलित हैं और गति नहीं बदलती: स्थिर वस्तु स्थिर, चलती वस्तु एकसमान वेग से चलती रहती है। नेट बल शून्य न हो तो बल असंतुलित हैं और वस्तु में त्वरण होता है।
मेज़ पर रखी किताब पर भार नीचे और मेज़ का अभिलंब बल ऊपर लगता है। दोनों बराबर और विपरीत हैं, इसलिए संतुलित हैं और किताब नहीं हिलती। सिमुलेशन में 5 kg ट्रॉली का भार W = mg = 49 N है, और हरा तीर N भी ठीक 49 N है; दोनों तीर बराबर लंबे हैं।
घर्षण चालू करें (μ = 0.1) और 4 N बल लगाएँ। ट्रॉली नहीं हिलती, क्योंकि स्थैतिक घर्षण ठीक 4 N होकर उल्टी दिशा में लगता है: धक्का और घर्षण संतुलित हैं। बल 4.9 N से ऊपर ले जाएँ तो संतुलन टूटता है और ट्रॉली चल पड़ती है।
ध्यान दें: एकसमान वेग से चलना भी संतुलित बलों का ही मतलब है। धक्के के बाद बर्फ़ पर ट्रॉली चल रही है, पर उस पर नेट बल शून्य है। “चल रही है तो आगे की ओर कोई बल होगा” सोचना अरस्तू वाली भूल है।
संवेग: गति की मात्रा
किसी वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को उसका संवेग कहते हैं: p = mv। संवेग की दिशा वेग की दिशा होती है, इसलिए यह सदिश है। मात्रक kg·m/s है, जो N·s के बराबर है।
संवेग बताता है कि किसी चलती चीज़ को रोकना कितना कठिन है। एक ही चाल से आती साइकिल और ट्रक में ट्रक को रोकना कहीं कठिन है, क्योंकि उसका द्रव्यमान बहुत अधिक है। गोली का द्रव्यमान बहुत कम है, पर वेग इतना अधिक कि उसका संवेग ख़तरनाक होता है।
सिमुलेशन में धक्का ख़त्म होने पर 5 kg ट्रॉली का वेग 4 m/s है, इसलिए संवेग p = 5 × 4 = 20 kg·m/s। मापन पैनल में संवेग वाले ख़ाने में यही दिखेगा।
p = mvसंवेग = द्रव्यमान × वेग, मात्रक kg·m/s
न्यूटन का गति का द्वितीय नियम और F = ma
कथन: किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर उस पर लगने वाले असंतुलित बल के समानुपाती होती है और संवेग में परिवर्तन बल की दिशा में होता है।
आसान शब्दों में: बल जितना बड़ा, वेग उतनी जल्दी बदलता है; द्रव्यमान जितना बड़ा, उसी बल से वेग उतना धीरे बदलता है। इसी नियम से भौतिकी का सबसे प्रसिद्ध समीकरण F = ma निकलता है।
F = maबल = द्रव्यमान × त्वरण
a = F_net / mत्वरण नेट बल के समानुपाती, द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती
F = (mv − mu) / tसंवेग परिवर्तन की दर
व्युत्पत्ति: संवेग परिवर्तन की दर से F = ma
मान लीजिए m द्रव्यमान की वस्तु का प्रारंभिक वेग u है। उस पर F बल t समय तक लगता है और अंतिम वेग v हो जाता है। प्रारंभिक संवेग mu, अंतिम संवेग mv, और संवेग में परिवर्तन mv − mu।
संवेग परिवर्तन की दर = (mv − mu)/t = m(v − u)/t। लेकिन (v − u)/t त्वरण a है, इसलिए संवेग परिवर्तन की दर = ma। द्वितीय नियम से F ∝ ma, यानी F = kma, जहाँ k एक नियतांक है।
मात्रक ऐसे चुने गए हैं कि 1 kg द्रव्यमान में 1 m/s² त्वरण पैदा करने वाला बल 1 न्यूटन हो। तब k = 1 और नियम बनता है F = ma। (यह रूप तब है जब द्रव्यमान नियत रहे; रॉकेट जैसे ईंधन खोने वाले पिंड के लिए संवेग परिवर्तन की दर वाला मूल रूप लगाते हैं, जो कक्षा 11 और JEE में आता है।)
F ∝ (mv − mu) / tद्वितीय नियम का गणितीय रूप
F ∝ m(v − u) / t = maक्योंकि (v − u)/t = a
F = maन्यूटन की परिभाषा से k = 1
बल का मात्रक न्यूटन
1 kg द्रव्यमान की वस्तु में 1 m/s² का त्वरण उत्पन्न करने वाले बल को 1 न्यूटन कहते हैं, यानी 1 N = 1 kg·m/s²। CGS पद्धति में बल का मात्रक डाइन है; 1 N = 10⁵ डाइन।
अंदाज़ा लगाने के लिए: एक मध्यम सेब का भार लगभग 1 न्यूटन है, और 50 kg के विद्यार्थी का भार लगभग 490 न्यूटन।
सिमुलेशन में द्वितीय नियम
बर्फ़ पर (घर्षण बंद) 5 kg ट्रॉली पर 10 N बल से a = F/m = 10/5 = 2 m/s²। 8 सेकंड में वेग 16 m/s हो जाता है और ट्रॉली 64 m चलती है। v–t ग्राफ़ मूल बिंदु से जाने वाली सीधी रेखा है, ढाल 2।
अब द्रव्यमान 10 kg करें। उसी बल से त्वरण 1 m/s², पहले का आधा। धूसर रेखा पिछली बार की है, नई रेखा उसके आधे ढाल से चढ़ती है, और हरी बिंदुदार रेखा पहले से ही यह बता देती है।
आवेग: कैच पकड़ते समय हाथ पीछे क्यों
कुछ बल बहुत बड़े होते हैं पर बहुत कम समय के लिए लगते हैं: बल्ले से गेंद पर चोट, हथौड़े से कील पर प्रहार, फ़ुटबॉल पर किक। इन्हें आवेगी बल कहते हैं। इतने कम समय में बल मापना कठिन है, इसलिए हम बल × समय मापते हैं, जिसे आवेग कहते हैं: J = F × t।
द्वितीय नियम F = (mv − mu)/t को थोड़ा बदलें तो F × t = mv − mu। यानी आवेग = संवेग में परिवर्तन। इससे एक बढ़िया तरकीब मिलती है: अगर संवेग में परिवर्तन तय है, तो समय बढ़ाने पर बल घट जाता है।
क्रिकेट खिलाड़ी कैच पकड़ते समय हाथ पीछे क्यों खींचता है? 0.16 kg की गेंद 30 m/s (लगभग 108 km/h) से आए तो उसका संवेग 4.8 kg·m/s है। सख़्त हाथों से 0.05 s में रोकें तो हाथों पर 96 N बल लगता है। हाथ पीछे खींचकर रुकने का समय 0.4 s कर दें तो बल सिर्फ़ 12 N, यानी 8 गुना कम। चोट कम लगती है और गेंद हाथ से उछलकर नहीं निकलती।
इसी कारण ऊँचाई से कूदने पर घुटने मोड़ते हैं, ऊँची कूद के पीछे मोटा गद्दा रखते हैं, काँच के सामान को फ़ोम में पैक करते हैं, और कारों में क्रम्पल ज़ोन व एयरबैग होते हैं। हर जगह रुकने का समय बढ़ाकर बल घटाया जाता है।
J = F × tआवेग, मात्रक N·s
F × t = mv − muआवेग = संवेग में परिवर्तन
न्यूटन का गति का तृतीय नियम: क्रिया और प्रतिक्रिया
कथन: प्रत्येक क्रिया के समान एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है। अधिक सटीक रूप में: जब एक वस्तु दूसरी वस्तु पर बल लगाती है, तो दूसरी वस्तु भी उसी क्षण पहली पर बराबर परिमाण का, विपरीत दिशा में बल लगाती है।
क्रिया और प्रतिक्रिया दोनों बल हैं, और किसे “क्रिया” कहें यह सिर्फ़ नाम की बात है; दोनों साथ पैदा होते हैं, साथ ख़त्म होते हैं। और दोनों हमेशा एक ही प्रकार के होते हैं: संपर्क वाले धक्के का जवाब संपर्क वाला धक्का, गुरुत्वीय खिंचाव का जवाब गुरुत्वीय खिंचाव।
दीवार पर मुक्का मारें तो हाथ में दर्द होता है, क्योंकि दीवार भी उतने ही बल से हाथ को धकेलती है। चलते समय पैर ज़मीन को पीछे धकेलता है, ज़मीन हमें आगे धकेलती है। चप्पू पानी को पीछे धकेलता है, पानी नाव को आगे। पक्षी पंखों से हवा को नीचे धकेलता है, हवा उसे ऊपर उठाती है।
बराबर और विपरीत, फिर भी एक-दूसरे को निरस्त क्यों नहीं करते
यह परीक्षा का पसंदीदा प्रश्न है। अगर दोनों बल बराबर और विपरीत हैं, तो परिणामी शून्य होकर कुछ भी नहीं हिलना चाहिए, है ना? नहीं, क्योंकि क्रिया और प्रतिक्रिया दो अलग-अलग वस्तुओं पर लगती हैं। बल एक-दूसरे को तभी निरस्त कर सकते हैं जब वे एक ही वस्तु पर लगें।
घोड़ा गाड़ी को खींचता है और गाड़ी भी घोड़े को उतने ही बल से पीछे खींचती है, फिर भी गाड़ी चलती है। गाड़ी पर लगने वाले बल हैं घोड़े का खिंचाव और सड़क का घर्षण; गाड़ी का खिंचाव तो घोड़े पर लगता है। कोई वस्तु त्वरित होगी या नहीं, यह सिर्फ़ उस पर लगने वाले बल तय करते हैं।
संतुलित बलों और क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म को मत मिलाइए। किताब का भार (मान लें 49 N) और मेज़ का अभिलंब बल बराबर और विपरीत हैं, पर दोनों किताब पर ही लगते हैं, इसलिए वे संतुलित बल हैं, तृतीय नियम वाला युग्म नहीं। किताब के भार की प्रतिक्रिया है किताब द्वारा पृथ्वी को ऊपर की ओर खींचना।
सिमुलेशन में तृतीय नियम: दो ट्रॉलियों का आपसी धक्का
दो ट्रॉलियाँ आमने-सामने सटी हैं, बीच में एक दबी हुई स्प्रिंग है। छोड़ने पर स्प्रिंग 0.5 s तक दोनों को 10 N से धकेलती है। नीला और नारंगी तीर हमेशा बराबर लंबे और विपरीत दिशा में रहते हैं।
आवेग दोनों पर बराबर है: 10 × 0.5 = 5 N·s। इसलिए 5 kg वाली ट्रॉली 1 को 1 m/s (बाईं ओर) और 10 kg वाली ट्रॉली 2 को 0.5 m/s (दाईं ओर) वेग मिलता है। द्रव्यमान 2 गुना, वेग 2 गुना कम: वेग द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती है।
संवेग संरक्षण का नियम: बंदूक और रॉकेट
दो वस्तुएँ एक-दूसरे पर बल लगाएँ तो तृतीय नियम से बल बराबर और विपरीत हैं, और समय भी एक ही है। इसलिए एक का संवेग जितना बढ़ता है, दूसरे का ठीक उतना घटता है। बाहरी बल न हो तो वस्तुओं का कुल संवेग कभी नहीं बदलता। यही संवेग संरक्षण का नियम है।
सिमुलेशन में शुरू में दोनों ट्रॉलियाँ स्थिर हैं, कुल संवेग शून्य। धक्के के बाद ट्रॉली 1 का संवेग −5 और ट्रॉली 2 का +5 kg·m/s; योग फिर शून्य। “कुल संवेग” देखिए: द्रव्यमान कुछ भी रखें, घर्षण बंद हो तो यह शून्य ही रहता है। घर्षण चालू करें तो यह बदलता है, क्योंकि घर्षण बाहरी बल है।
बंदूक का पीछे हटना (प्रतिक्षेप) यही कहानी है। गोली चलने से पहले बंदूक और गोली दोनों स्थिर हैं। 0.02 kg की गोली 400 m/s से आगे जाए तो उसका संवेग 8 kg·m/s है, इसलिए 4 kg की बंदूक को 2 m/s से पीछे हटना पड़ता है ताकि कुल संवेग शून्य रहे। इसीलिए राइफ़ल को कंधे से कसकर दबाकर रखते हैं।
रॉकेट पीछे की ओर बहुत तेज़ी से गर्म गैस फेंकता है; गैस पीछे संवेग ले जाती है और रॉकेट को उतना ही संवेग आगे मिलता है। उसे धकेलने के लिए हवा की ज़रूरत नहीं, इसलिए रॉकेट अंतरिक्ष में भी चलता है। फुलाए गुब्बारे का मुँह छोड़ दें तो वह सर्र से भागता है, उसी कारण।
m₁u₁ + m₂u₂ = m₁v₁ + m₂v₂बाहरी बल न हो तो कुल संवेग नियत
m₁v₁ = −m₂v₂जब दोनों शुरू में स्थिर हों
| ट्रॉली 2 का द्रव्यमान | ट्रॉली 1 का वेग | ट्रॉली 2 का वेग | कुल संवेग |
|---|---|---|---|
| 5 kg | -1.00 m/s | 1.00 m/s | 0 kg·m/s |
| 10 kg | -1.00 m/s | 0.50 m/s | 0 kg·m/s |
| 20 kg | -1.00 m/s | 0.25 m/s | 0 kg·m/s |
घर्षण और मुक्त-पिंड आरेख
दो सतहें एक-दूसरे पर फिसलें या फिसलने की कोशिश करें तो उनके बीच जो विरोधी बल पैदा होता है, उसे घर्षण कहते हैं। यह हमेशा आपेक्षिक गति का विरोध करता है। स्थैतिक घर्षण वस्तु के हिलने से पहले लगता है और एक सीमा तक बढ़ सकता है; सर्पी (गतिज) घर्षण फिसलते समय लगता है; लोटनिक घर्षण बहुत कम होता है, इसीलिए पहिया इतना बड़ा आविष्कार था; और तरल घर्षण पानी व हवा में लगता है।
सिमुलेशन में घर्षण बल f = μmg है। 5 kg ट्रॉली पर μ = 0.1 हो तो f = 0.1 × 5 × 9.8 = 4.9 N। सरलता के लिए यहाँ स्थैतिक और गतिज घर्षण का गुणांक एक ही रखा गया है; असल में सीमांत स्थैतिक घर्षण थोड़ा अधिक होता है।
किसी वस्तु पर कौन-कौन से बल लग रहे हैं, यह समझने के लिए वस्तु को एक डिब्बे या बिंदु की तरह बनाकर उस पर लगने वाले हर बल को तीर से दिखाते हैं। इसे मुक्त-पिंड आरेख (free-body diagram) कहते हैं, और कक्षा 11 व JEE के लगभग हर यांत्रिकी प्रश्न का पहला क़दम यही है। ट्रॉली पर बने तीर ठीक यही आरेख हैं, सब एक ही पैमाने पर: बल दोगुना तो तीर भी दोगुना।
| तीर | बल | दिशा | मान (5 kg, 10 N, μ = 0.1) |
|---|---|---|---|
| नीला, F | लगाया गया बल | आगे | 10 N |
| लाल, f | घर्षण बल | गति के विपरीत | 4.9 N |
| हरा, N | अभिलंब बल | ऊपर | 49 N |
| धूसर, W | भार | नीचे | 49 N |
| नारंगी, ΣF | नेट बल | आगे | 5.1 N |
सिमुलेशन में ये प्रयोग करके देखें
कॉपी-पेन लेकर बैठें। हर प्रयोग से पहले अनुमान लिखें, फिर चलाकर मिलाएँ।
- पहले नियम वाले मोड में घर्षण बंद रखकर चलाएँ। 2 सेकंड बाद “बल नहीं, अपने-आप चल रही है” लिखा आता है, फिर भी वेग 4 m/s पर टिका रहता है।
- अब घर्षण चालू करें। धक्का ख़त्म होने पर वेग 2.04 m/s है, फिर घर्षण हर सेकंड 0.98 m/s वेग घटाता है और लगभग 2.08 s बाद 2.12 m जाकर ट्रॉली रुकती है। रोका घर्षण ने, “बल ख़त्म होने” ने नहीं।
- बल 50 N और द्रव्यमान 1 kg करें: अचानक शुरुआत में यात्री डिब्बा पीछे फिसलता है (विराम का जड़त्व), दीवार से टक्कर पर आगे फिसलता है (गति का जड़त्व)।
- दूसरे नियम वाले मोड में 5 kg और 10 N से चलाएँ, फिर द्रव्यमान 10 kg करके दोबारा चलाएँ। क्या नई रेखा का ढाल आधा है?
- घर्षण चालू रखकर बल 4 N करें: ट्रॉली नहीं हिलती और “स्थैतिक घर्षण बल को रोक रहा है” लिखा आता है। किस बल पर ट्रॉली चलने लगती है? उत्तर: 4.9 N से ज़रा ऊपर।
- तीसरे नियम वाले मोड में दोनों ट्रॉलियों का द्रव्यमान बराबर रखें: दोनों बराबर वेग से विपरीत दिशा में जाती हैं। एक को चार गुना भारी करें: उसका वेग एक-चौथाई। क्या कुल संवेग कभी शून्य के अलावा कुछ और दिखा?
हल किए गए प्रश्न
हर हल में पहले दी गई राशियाँ, फिर सूत्र, फिर मान। बोर्ड परीक्षा में इसी तरह लिखेंगे तो स्टेप मार्किंग में पूरे अंक मिलेंगे।
प्रश्न 1: सिमुलेशन के शुरुआती मान से त्वरण, वेग और संवेग
दिया है: m = 5 kg, F = 10 N, घर्षण नहीं, बल t = 2 s तक लगता है। ज्ञात करें: त्वरण, 2 s बाद वेग, तय दूरी और संवेग।
a = F/m = 10/5 = 2 m/s²। v = u + at = 0 + 2 × 2 = 4 m/s। s = ½at² = 4 m। p = mv = 20 kg·m/s। उसके बाद बल न होने से पहले नियम के अनुसार ट्रॉली 4 m/s से चलती रहेगी।
प्रश्न 2: घर्षण के साथ नेट बल और त्वरण
उसी ट्रॉली पर μ = 0.1 हो तो घर्षण बल, नेट बल और त्वरण ज्ञात करें (g = 9.8 m/s²)।
f = μmg = 0.1 × 5 × 9.8 = 4.9 N। F_net = F − f = 10 − 4.9 = 5.1 N। a = F_net/m = 1.02 m/s²। घर्षण ने त्वरण लगभग आधा कर दिया।
प्रश्न 3: द्रव्यमान दोगुना करने पर त्वरण
10 N बल 5 kg में 2 m/s² त्वरण देता है। वही बल 10 kg में कितना त्वरण देगा?
a = F/m = 10/10 = 1 m/s²। F नियत हो तो a ∝ 1/m, इसलिए द्रव्यमान दोगुना करने पर त्वरण आधा।
प्रश्न 4: वेग में परिवर्तन से बल
2 kg की गेंद का वेग 2 s में 3 m/s से 7 m/s हो जाता है। उस पर कितना बल लगा?
संवेग में परिवर्तन = m(v − u) = 2 × (7 − 3) = 8 kg·m/s। F = संवेग परिवर्तन ÷ समय = 8/2 = 4 N। या a = (v − u)/t = 2 m/s² और F = ma = 4 N; दोनों तरीक़ों से एक ही उत्तर।
प्रश्न 5: क्रिकेट गेंद का कैच
0.16 kg की क्रिकेट गेंद 30 m/s से आकर हाथों में रुकती है। रुकने का समय (क) 0.05 s और (ख) 0.4 s हो तो हाथों पर बल ज्ञात करें।
संवेग में परिवर्तन = 0.16 × 30 = 4.8 kg·m/s। (क) F = 4.8/0.05 = 96 N। (ख) F = 4.8/0.4 = 12 N। समय 8 गुना बढ़ा तो बल 8 गुना घटा।
प्रश्न 6: बंदूक का प्रतिक्षेप वेग
4 kg की बंदूक से 0.02 kg की गोली 400 m/s से छोड़ी जाती है। बंदूक का प्रतिक्षेप वेग ज्ञात करें।
गोली चलने से पहले कुल संवेग शून्य, इसलिए Mv + mv′ = 0: 4 × v = −0.02 × 400 = −8। v = −2 m/s; ऋण चिह्न का अर्थ है बंदूक गोली की उल्टी दिशा में हटती है।
प्रश्न 7: दो ट्रॉलियों का आपसी धक्का (सिमुलेशन का तीसरा नियम)
5 kg और 10 kg की दो स्थिर ट्रॉलियाँ 10 N बल से 0.5 s तक एक-दूसरे को धकेलती हैं। प्रत्येक का वेग ज्ञात करें।
आवेग = 10 × 0.5 = 5 N·s, दोनों पर बराबर। v₁ = 5/5 = 1 m/s, v₂ = 5/10 = 0.5 m/s, विपरीत दिशाओं में। कुल संवेग = 5 − 5 = 0।
प्रश्न 8: सीट बेल्ट जान क्यों बचाती है
60 kg का यात्री 20 m/s (72 km/h) से चलती कार में है। दुर्घटना में (क) बिना बेल्ट डैशबोर्ड से टकराकर 0.1 s में, (ख) बेल्ट के खिंचने से 0.5 s में रुकने पर कितना बल लगेगा?
संवेग में परिवर्तन = 60 × 20 = 1,200 kg·m/s। (क) F = 1,200/0.1 = 12,000 N। (ख) F = 1,200/0.5 = 2,400 N। बेल्ट समय 5 गुना बढ़ाकर बल 5 गुना घटा देती है, और उसे छाती व कूल्हे की मज़बूत हड्डियों पर फैला देती है।
प्रश्न 9: ट्रॉली को हिलाने के लिए न्यूनतम बल
μ = 0.1 और m = 5 kg हो तो ट्रॉली हिलाने के लिए न्यूनतम कितना बल चाहिए? 4 N लगाने पर क्या होगा?
सीमांत स्थैतिक घर्षण μmg = 4.9 N है, इसलिए बल 4.9 N से अधिक होना चाहिए। 4 N लगाने पर घर्षण भी 4 N होकर उल्टा लगता है; नेट बल शून्य और ट्रॉली स्थिर रहती है, धक्का और घर्षण संतुलित हैं।
एक नज़र में: एक ही बल, अलग-अलग द्रव्यमान
घर्षण-रहित पटरी पर 10 N बल 2 s तक लगाने पर। आख़िरी कॉलम देखें: द्रव्यमान कुछ भी हो, एक ही बल उतने ही समय में एक ही संवेग देता है, क्योंकि संवेग में परिवर्तन = आवेग।
| द्रव्यमान | त्वरण, a = F/m | 2 s बाद वेग | 2 s में दूरी | संवेग |
|---|---|---|---|---|
| 2.5 kg | 4.00 m/s² | 8.00 m/s | 8.00 m | 20 kg·m/s |
| 5.0 kg | 2.00 m/s² | 4.00 m/s | 4.00 m | 20 kg·m/s |
| 10.0 kg | 1.00 m/s² | 2.00 m/s | 2.00 m | 20 kg·m/s |
| 20.0 kg | 0.50 m/s² | 1.00 m/s | 1.00 m | 20 kg·m/s |
आम ग़लतियाँ
इनसे बचें तो न्यूटन के नियमों के प्रश्न पक्के अंक दिलाते हैं।
- यह सोचना कि चलती वस्तु पर हमेशा आगे की ओर बल होता है। एकसमान वेग पर नेट बल शून्य है।
- क्रिया को प्रतिक्रिया से निरस्त कर देना। वे अलग-अलग वस्तुओं पर लगती हैं, इसलिए कभी निरस्त नहीं होतीं।
- भार और अभिलंब बल को क्रिया-प्रतिक्रिया युग्म कहना। दोनों एक ही वस्तु पर हैं, इसलिए संतुलित बल हैं।
- घर्षण होने पर F = ma में लगाया गया बल रख देना। नेट बल F − f रखना है।
- जड़त्व को बल समझना। जड़त्व पदार्थ का गुण है, धक्का या खिंचाव नहीं।
- द्रव्यमान और भार को मिला देना। द्रव्यमान kg में, हर जगह एक; भार = mg, न्यूटन में, जगह के साथ बदलता है।
- संवेग की दिशा भूल जाना। उल्टी दिशा का वेग ऋणात्मक लें, वरना संरक्षण वाले प्रश्न नहीं मिलेंगे।
रोज़मर्रा की ज़िंदगी में न्यूटन के नियम
तीनों नियम पहचान लिए तो ये आपको हर जगह दिखेंगे।
- सीट बेल्ट और एयरबैग: जड़त्व से आगे जाते यात्री को थामते हैं और रुकने का समय बढ़ाकर बल घटाते हैं।
- खेल: कैच में हाथ पीछे खींचना, गोलकीपर के गद्देदार दस्ताने, सब आवेग का हिसाब है।
- रॉकेट और जेट इंजन: गैस पीछे फेंककर आगे बढ़ना, तीसरा नियम और संवेग संरक्षण।
- चलना, तैरना, नाव खेना: ज़मीन या पानी को पीछे धकेलो, प्रतिक्रिया आगे धकेलती है।
- भारी ट्रक को रुकने में ज़्यादा दूरी लगती है, क्योंकि अधिक द्रव्यमान यानी अधिक जड़त्व; इसलिए ट्रक के पीछे ज़्यादा फ़ासला रखते हैं।
- पेड़ की डाल हिलाकर फल गिराना, गीले हाथ झटककर पानी हटाना: जड़त्व का कमाल।
परीक्षा कॉर्नर: CBSE बोर्ड, JEE और NEET
NCERT कक्षा 9 के अध्याय “बल तथा गति के नियम” में तीनों नियम, जड़त्व, संवेग और F = ma आते हैं, और कक्षा 11 के अध्याय “गति के नियम” में आवेग, संवेग संरक्षण, घर्षण और मुक्त-पिंड आरेख गहराई से। CBSE बोर्ड में 1 अंक के प्रश्न (जड़त्व का माप क्या है, 1 N की परिभाषा), 2–3 अंक के कारण बताइए प्रश्न (कैच में हाथ पीछे क्यों, बंदूक पीछे क्यों हटती है, बस में यात्री आगे क्यों गिरते हैं) और 3–5 अंक के आंकिक प्रश्न (F = ma, संवेग परिवर्तन, प्रतिक्षेप वेग) पक्के मानिए।
JEE Main और NEET में यही नियम कठिन रूप में आते हैं: जुड़े हुए पिंड और डोरी का तनाव, नत तल पर घर्षण, F–t ग्राफ़ के नीचे का क्षेत्रफल = आवेग, और टक्कर में संवेग संरक्षण। हर प्रश्न से पहले मुक्त-पिंड आरेख बनाने की आदत डालें, F = ma में नेट बल ही रखें, और एक दिशा को धनात्मक मानकर उस पर टिके रहें। बांग्लादेश की NCTB पुस्तकें यही अध्याय “বল” नाम से पढ़ाती हैं, और वहाँ आवेगी बल को “ঘাত বল” कहा जाता है।
एक नमूना बोर्ड प्रश्न (केस-आधारित)
एक विद्यार्थी ने चिकने फ़र्श पर रखी 5 kg की ट्रॉली को 10 N बल से 2 s तक धकेला और छोड़ दिया। उसके दोस्त ने कहा: “अब तुमने धकेलना बंद कर दिया, ट्रॉली रुक जाएगी।”
(क) जड़त्व की परिभाषा दीजिए। (ख) द्रव्यमान को जड़त्व का माप क्यों कहते हैं? (ग) धक्का ख़त्म होने के क्षण ट्रॉली का संवेग ज्ञात कीजिए। (घ) न्यूटन के प्रथम नियम के आधार पर दोस्त के कथन की जाँच कीजिए।
(ग) का उत्तर: a = 2 m/s², v = 4 m/s, p = 20 kg·m/s। (घ) की मुख्य बात: चिकने फ़र्श पर धक्के के बाद नेट बल शून्य है, इसलिए ट्रॉली 4 m/s से चलती रहेगी; कथन ग़लत है। असली फ़र्श पर थोड़ा घर्षण उसे धीमा करेगा, पर रोकेगा घर्षण बल, “धक्के का ख़त्म होना” नहीं।
रिवीज़न: आख़िरी पलों का सारांश
परीक्षा से पहले की रात बस यह सूची एक बार पढ़ लें।
- पहला नियम: बाहरी असंतुलित बल न हो तो स्थिर वस्तु स्थिर, गतिमान वस्तु एकसमान वेग से सरल रेखा में; यही जड़त्व का नियम है।
- जड़त्व: विराम का, गति का (और दिशा का); द्रव्यमान जड़त्व का माप है।
- संतुलित बलों का परिणामी शून्य, गति नहीं बदलती; असंतुलित बल से त्वरण।
- संवेग p = mv, मात्रक kg·m/s; दूसरा नियम: संवेग परिवर्तन की दर ∝ बल, इसलिए F = ma।
- 1 N = 1 kg·m/s²; आवेग J = Ft = संवेग में परिवर्तन; समय बढ़ाओ तो बल घटता है।
- तीसरा नियम: हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया, अलग वस्तु पर, इसलिए कभी निरस्त नहीं।
- बाहरी बल न हो तो कुल संवेग संरक्षित: बंदूक का प्रतिक्षेप, रॉकेट।
- घर्षण f = μmg, गति के विरुद्ध; F = ma में नेट बल रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
न्यूटन के गति के तीन नियम कौन-से हैं?
पहला: बाहरी असंतुलित बल न लगे तो वस्तु विराम में या एकसमान वेग से सरल रेखा में चलती रहती है। दूसरा: संवेग परिवर्तन की दर लगाए गए बल के समानुपाती और उसी दिशा में होती है, जिससे F = ma मिलता है। तीसरा: प्रत्येक क्रिया के समान एवं विपरीत प्रतिक्रिया होती है।
जड़त्व क्या है? यह कितने प्रकार का होता है?
वस्तु की अपनी विराम या एकसमान गति की अवस्था बनाए रखने की प्रवृत्ति को जड़त्व कहते हैं। मुख्य प्रकार हैं विराम का जड़त्व और गति का जड़त्व; कई पुस्तकें दिशा का जड़त्व भी जोड़ती हैं। द्रव्यमान जड़त्व का माप है।
बस के अचानक रुकने पर यात्री आगे की ओर क्यों गिरते हैं?
गति के जड़त्व के कारण। बस रुकने पर यात्री के पैर फ़र्श के साथ रुक जाते हैं, पर शरीर का ऊपरी भाग पहले वाली गति से आगे बढ़ता रहना चाहता है, इसलिए यात्री आगे की ओर झुक जाता है।
संवेग किसे कहते हैं? इसका SI मात्रक क्या है?
किसी वस्तु के द्रव्यमान और वेग के गुणनफल को संवेग कहते हैं, p = mv। यह सदिश राशि है और इसकी दिशा वेग की दिशा होती है। SI मात्रक kg·m/s है, जो N·s के बराबर है।
द्वितीय नियम से F = ma कैसे निकलता है?
m द्रव्यमान की वस्तु का वेग t समय में u से v हो तो संवेग परिवर्तन की दर (mv − mu)/t = m(v − u)/t = ma। द्वितीय नियम से F ∝ ma, यानी F = kma, और 1 न्यूटन की परिभाषा से k = 1, इसलिए F = ma।
1 न्यूटन बल किसे कहते हैं?
1 kg द्रव्यमान की वस्तु में 1 m/s² का त्वरण उत्पन्न करने वाले बल को 1 न्यूटन कहते हैं। 1 N = 1 kg·m/s² = 10⁵ डाइन।
आवेग और आवेगी बल क्या हैं?
बहुत कम समय के लिए लगने वाला बहुत बड़ा बल आवेगी बल कहलाता है, जैसे बल्ले की चोट। बल और उसके लगने के समय का गुणनफल आवेग है, J = Ft; यह संवेग में परिवर्तन के बराबर होता है और इसका मात्रक N·s है।
क्रिया और प्रतिक्रिया बराबर और विपरीत होकर भी एक-दूसरे को निरस्त क्यों नहीं करतीं?
क्योंकि वे दो अलग-अलग वस्तुओं पर लगती हैं। बल एक-दूसरे को तभी निरस्त करते हैं जब वे एक ही वस्तु पर लगें। हर वस्तु की गति केवल उस पर लगने वाले बलों से तय होती है।
गोली चलाने पर बंदूक पीछे क्यों हटती है?
संवेग संरक्षण के कारण। गोली चलने से पहले कुल संवेग शून्य है; गोली को आगे संवेग मिलता है तो बंदूक को उतना ही संवेग पीछे मिलना चाहिए। बंदूक बहुत भारी है, इसलिए उसका प्रतिक्षेप वेग बहुत कम होता है।
क्रिकेट खिलाड़ी कैच पकड़ते समय हाथ पीछे क्यों खींचता है?
गेंद के संवेग में परिवर्तन तय है। हाथ पीछे खींचने से गेंद अधिक समय में रुकती है, और F = Δp/t के अनुसार हाथों पर लगने वाला बल घट जाता है, इसलिए चोट कम लगती है और गेंद हाथ से नहीं उछलती।
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