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गैस नियम: पिस्टन दबाकर बॉयल और चार्ल्स का नियम खुद देखें

स्थिर ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन उसके दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है (बॉयल का नियम, PV = स्थिरांक); स्थिर दाब पर आयतन परम ताप के समानुपाती होता है (चार्ल्स का नियम, V/T = स्थिरांक)। आवोगाद्रो नियम के साथ मिलकर ये आदर्श गैस समीकरण PV = nRT देते हैं, जहाँ R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹।

गैस के अणुतेज़ अणुनियम का वक्रबढ़ाया गया भागपार की गई अवस्थाएँवर्तमान अवस्था

T और n स्थिर: पिस्टन खींचें या दबाएँ और दाब देखें

गति

नियंत्रण

नियम चुनें

25.0 L

मापन

दाब, P
99.8kPa
दाब (atm)
0.985atm
आयतन, V
25.0L
मोल, n
1.0mol
परम ताप, T
300K
सेल्सियस में ताप
26.85°C
PV (स्थिर रहता है)
2,494kPa·L
PV/T
8.314kPa·L/K
पिस्टन पर प्रति सेकंड टक्करें
0.0/s
PV/nRT (टक्करें गिनकर)
1.00

सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें

  1. शुरू में "बॉयल" चुना हुआ है। माउस या उँगली से पिस्टन का हैंडल नीचे खींचें (या आयतन का स्लाइडर घटाएँ): अणु पास-पास आते हैं, पिस्टन पर टक्करें बढ़ती हैं और दाबमापी की सुई ऊपर जाती है।
  2. दाईं ओर P–V ग्राफ़ पर लाल बिंदु एक वक्र (अतिपरवलय) पर चलता है। मापन पैनल में "PV (स्थिर रहता है)" देखें, यह संख्या नहीं बदलती।
  3. "चार्ल्स" चुनें और ताप बढ़ाएँ: नीचे की लौ बड़ी होती है, अणु तेज़ दौड़ते हैं और भार रखा पिस्टन ऊपर उठता है। ग्राफ़ की सीधी रेखा को पीछे की ओर देखें, वह −273.15 °C पर शून्य होती है।
  4. "गे-लुसाक" चुनकर यही करें: अब पिस्टन बंद है, आयतन वही रहता है पर दाब सीधी रेखा में बढ़ता है। "आवोगाद्रो" चुनकर मोल बढ़ाएँ, नए अणु आते हैं और आयतन बढ़ता है।
  5. "आदर्श गैस" चुनें और तीनों स्लाइडर चलाएँ। कुछ भी करें, "R = PV/nT" वही रहता है, और टक्करें गिनकर निकला "PV/nRT" 1 के आसपास डोलता है।

गुब्बारा, सिरिंज और गर्मियों का टायर

जन्मदिन का गुब्बारा धूप में रखी कार में छोड़ दें तो फट सकता है, और फ्रिज में रखें तो थोड़ा पिचक जाता है। अंदर की हवा वही है, न कोई अंदर डाली, न बाहर निकली। तो आकार क्यों बदला? जवाब है ताप: गर्म गैस फैलती है, ठंडी गैस सिकुड़ती है।

खाली सिरिंज का मुँह अँगूठे से बंद करके पिस्टन दबाइए। शुरू में आसानी से जाता है, पर जितना अंदर दबाएँगे उतना ज़्यादा ज़ोर लगेगा, मानो अंदर की हवा उल्टा धक्का दे रही हो। छोड़ते ही पिस्टन वापस बाहर आ जाता है। आयतन घटाओ तो दाब बढ़ता है: यही बॉयल का नियम है।

गर्मियों की दोपहर में स्कूटर या कार के टायर का दाब सुबह से ज़्यादा होता है, इसलिए मैकेनिक ठंडे टायर में हवा भरने को कहते हैं। टायर का आयतन लगभग नहीं बदलता, पर ताप बढ़ने से दाब बढ़ जाता है। यह गे-लुसाक का नियम है।

इन तीनों कहानियों में चार राशियाँ काम कर रही हैं: दाब (P), आयतन (V), ताप (T) और गैस की मात्रा यानी मोलों की संख्या (n)। हर गैस नियम बस इतना बताता है कि एक-दो राशियाँ स्थिर रखें तो बाकी आपस में कैसे बदलती हैं। ऊपर के सिमुलेशन में आप खुद इन्हें बदलकर देख सकते हैं।

शुरू से समझें: गैस दाब क्यों डालती है

सोचिए एक बंद कमरे में हज़ारों छोटी गेंदें पागलों की तरह दौड़ रही हैं और दीवारों से टकराकर लौट रही हैं। गैस ठीक ऐसी ही है। इसके अणु एक-दूसरे से बहुत दूर होते हैं, हर दिशा में सीधी रेखा में चलते हैं और बर्तन की दीवारों से लगातार टकराते हैं। हर टक्कर दीवार को एक छोटा धक्का देती है। हर सेकंड अरबों-खरबों धक्कों से दीवार के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर जो बल बनता है, वही गैस का दाब है।

इस सोच को गैसों का अणुगति सिद्धांत कहते हैं। इसकी मुख्य अभिधारणाएँ सरल शब्दों में: (1) गैस बहुत सारे सूक्ष्म अणुओं से बनी है जिनका अपना आयतन बर्तन के आयतन की तुलना में नगण्य है; (2) अणु यादृच्छिक रूप से सीधी रेखाओं में चलते हैं; (3) अणुओं के बीच कोई आकर्षण या प्रतिकर्षण बल नहीं होता; (4) अणुओं की आपस में और दीवार से टक्कर पूर्णतः प्रत्यास्थ होती है, कोई ऊर्जा नष्ट नहीं होती; (5) अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा परम ताप के समानुपाती होती है।

आखिरी बात सबसे ज़रूरी है: ताप अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा का माप है। गैस गर्म करें तो अणु तेज़ दौड़ते हैं। तेज़ अणु दो काम करते हैं: दीवार से ज़्यादा बार टकराते हैं, और हर टक्कर ज़्यादा ज़ोरदार होती है। दोनों मिलकर दाब बढ़ाते हैं। सिमुलेशन में ताप बढ़ाकर "पिस्टन पर प्रति सेकंड टक्करें" बढ़ते देखिए।

सारे अणु एक ही चाल से नहीं चलते। कुछ धीमे, कुछ बहुत तेज़, ज़्यादातर बीच में। चालों के इस फैलाव को मैक्सवेल–बोल्ट्ज़मान वितरण कहते हैं। सिमुलेशन में तेज़ अणु अलग रंग में दिखते हैं। ताप बढ़ाने पर पूरा वितरण तेज़ चालों की ओर खिसक जाता है; औसत चाल परम ताप के वर्गमूल के अनुपात में बढ़ती है।

गैस नियमों के मुख्य शब्द

परिभाषा वाले प्रश्नों में ये शब्द बिल्कुल सही लिखने होते हैं।

शब्दअर्थमात्रक
दाब (P)अणुओं की टक्करों से दीवार के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बलPa, kPa, bar, atm, mmHg
आयतन (V)गैस द्वारा घेरी गई जगह; गैस हमेशा पूरा बर्तन भर देती हैL, mL, m³, dm³
परम ताप (T)केल्विन पैमाने पर ताप, T = t °C + 273.15K
मोलों की संख्या (n)गैस की मात्रा; 1 मोल में 6.022 × 10²³ अणुmol
परम शून्यवह ताप जिस पर आदर्श गैस का आयतन शून्य हो जाता0 K = −273.15 °C
आदर्श गैसवह गैस जो हर ताप और दाब पर गैस नियमों का पूरी तरह पालन करे—
सार्वत्रिक गैस नियतांक (R)PV = nRT का नियतांक, सभी गैसों के लिए समान8.314 J mol⁻¹ K⁻¹
समतापी प्रक्रमस्थिर ताप पर होने वाला परिवर्तन; बॉयल का नियम इसका उदाहरण—
समदाबी / समआयतनिकस्थिर दाब पर (चार्ल्स) / स्थिर आयतन पर (गे-लुसाक)—

बॉयल का नियम: दबाओ तो दाब बढ़े

कथन: स्थिर ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन उसके दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है। रॉबर्ट बॉयल ने 1662 में J आकार की काँच की नली में हवा बंद करके और पारा डालकर यह प्रयोग किया था।

व्युत्क्रमानुपाती का मतलब है एक दोगुना हो तो दूसरा आधा। दाब तीन गुना करें तो आयतन एक-तिहाई। इसलिए दाब और आयतन का गुणनफल हमेशा वही रहता है। बॉयल मोड में पिस्टन कहीं भी खींचिए, "PV (स्थिर रहता है)" नहीं बदलता।

ऐसा क्यों? आयतन आधा हो तो वही अणु आधी जगह में ठुँस जाते हैं। हर अणु को पिस्टन तक आधा रास्ता तय करना पड़ता है, इसलिए वह दोगुनी बार टकराता है। ताप वही है, इसलिए हर टक्कर का ज़ोर वही। दोगुनी टक्करें, उतने ही ज़ोर की: दाब दोगुना।

V ∝ 1/P (T, n स्थिर)

PV = kk ताप और गैस की मात्रा पर निर्भर करता है

p₁V₁ = p₂V₂प्रश्न हल करने का सूत्र

बॉयल के नियम के ग्राफ़

P और V का ग्राफ़ एक वक्र होता है जिसे आयताकार अतिपरवलय कहते हैं; यह किसी अक्ष को नहीं छूता। हर ताप का अपना वक्र होता है, जिसे समतापी वक्र (isotherm) कहते हैं; ऊँचे ताप का वक्र मूलबिंदु से दूर होता है।

P और 1/V का ग्राफ़ मूलबिंदु से जाती सीधी रेखा है। PV और P का ग्राफ़ क्षैतिज सीधी रेखा है, क्योंकि PV स्थिर है। परीक्षा में ये तीनों आकार पहचानने को आते हैं।

चार्ल्स का नियम: गर्म करो तो फैले

कथन: स्थिर दाब पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन उसके परम ताप के समानुपाती होता है। जैक्स चार्ल्स ने 1787 के आसपास इसे देखा और गे-लुसाक ने 1802 में सटीक माप प्रकाशित किए।

सेल्सियस वाला पुराना रूप भी किताबों में मिलता है: स्थिर दाब पर ताप में हर 1 °C की वृद्धि पर गैस का आयतन 0 °C वाले आयतन का 1/273 भाग बढ़ता है, यानी Vₜ = V₀(1 + t/273)।

चार्ल्स मोड में पिस्टन पर एक स्थिर भार रखा है, इसलिए दाब नहीं बदल सकता। गैस गर्म करने पर तेज़ अणु पिस्टन को ऊपर धकेलते हैं, और आयतन तब तक बढ़ता है जब तक अंदर का दाब फिर से भार के बराबर न हो जाए।

V ∝ T (P, n स्थिर)T केल्विन में ही

V/T = k

V₁/T₁ = V₂/T₂प्रश्न हल करने का सूत्र

वह ग्राफ़ जिसने परम शून्य खोजा

V और T (केल्विन) का ग्राफ़ मूलबिंदु से जाती सीधी रेखा है। V और t (°C) का ग्राफ़ भी सीधी रेखा है, पर मूलबिंदु से नहीं जाता; इसे पीछे बढ़ाएँ (बहिर्वेशन करें) तो यह −273.15 °C पर शून्य आयतन पर पहुँचता है। अलग-अलग दाबों पर खींची सभी रेखाएँ ठीक इसी बिंदु पर मिलती हैं।

यानी −273.15 °C पर आदर्श गैस का आयतन शून्य हो जाता, और इससे ठंडा कुछ नहीं हो सकता क्योंकि ऋणात्मक आयतन का कोई अर्थ नहीं। इस ताप को परम शून्य कहते हैं। वास्तविक गैसें इससे बहुत पहले द्रव बन जाती हैं, इसलिए सिमुलेशन में रेखा का वह भाग डैश में है।

गे-लुसाक का नियम (दाब–ताप नियम): आयतन बंद, दाब ऊपर

कथन: स्थिर आयतन पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का दाब उसके परम ताप के समानुपाती होता है। इसे दाब–ताप संबंध भी कहते हैं।

इस मोड में पिस्टन पिन से बंद है। गैस गर्म करने पर अणु उन्हीं दीवारों से ज़्यादा बार और ज़्यादा ज़ोर से टकराते हैं, इसलिए दाबमापी ऊपर जाता है। P–t ग्राफ़ भी सीधी रेखा है जो पीछे बढ़ाने पर −273.15 °C पर शून्य होती है।

P ∝ T (V, n स्थिर)

p₁/T₁ = p₂/T₂प्रेशर कुकर, टायर, एरोसोल कैन

आवोगाद्रो नियम: ज़्यादा गैस, ज़्यादा जगह

कथन: समान ताप और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है। दूसरे शब्दों में, स्थिर ताप और दाब पर गैस का आयतन उसके मोलों की संख्या के समानुपाती होता है।

मज़े की बात यह है कि गैस कौन-सी है, इससे फ़र्क नहीं पड़ता। हाइड्रोजन हो, ऑक्सीजन या कार्बन डाइऑक्साइड, समान T और P पर हर एक का 1 मोल समान आयतन घेरता है, क्योंकि आदर्श गैस में अणु का अपना आकार नगण्य है और केवल संख्या मायने रखती है। आवोगाद्रो मोड में n बढ़ाइए, नए अणु आते हैं और भार वाला पिस्टन ऊपर उठता है।

V ∝ n (P, T स्थिर)

V₁/n₁ = V₂/n₂

आदर्श गैस समीकरण PV = nRT की व्युत्पत्ति और संयुक्त गैस नियम

अब तीनों नियम जोड़ते हैं। बॉयल से V ∝ 1/P, चार्ल्स से V ∝ T और आवोगाद्रो से V ∝ n। तीनों एक साथ बदलें तो V ∝ nT/P।

समानुपात चिह्न हटाने के लिए एक नियतांक R लगाएँ: V = nRT/P, यानी PV = nRT। यही आदर्श गैस समीकरण है, और R सार्वत्रिक गैस नियतांक है। R सभी गैसों के लिए समान है, इसीलिए इसे "सार्वत्रिक" कहते हैं।

गैस की निश्चित मात्रा (n स्थिर) के लिए PV/T = nR = स्थिरांक, इसलिए p₁V₁/T₁ = p₂V₂/T₂। इसे संयुक्त गैस नियम कहते हैं; जब एक ही प्रश्न में दाब, आयतन और ताप तीनों बदलें, तब यही काम आता है। सिमुलेशन में "PV/T" देखिए: n न बदले तो यह स्थिर रहता है।

V ∝ nT/Pतीनों नियम एक साथ

PV = nRTआदर्श गैस समीकरण

p₁V₁/T₁ = p₂V₂/T₂संयुक्त गैस नियम (n स्थिर)

PV = (m/M)RTद्रव्यमान m और मोलर द्रव्यमान M दिया हो तो

सार्वत्रिक गैस नियतांक R के विभिन्न मान

R एक ही भौतिक राशि है, सिर्फ़ मात्रक बदलने से संख्या बदलती है। नीचे के सारे मान SI मान से बदलकर निकाले गए हैं (1 atm = 101.325 kPa = 760 mmHg, 1 bar = 100 kPa, 1 cal = 4.184 J)। R का असली मात्रक "ऊर्जा प्रति मोल प्रति केल्विन" है, क्योंकि दाब × आयतन = कार्य।

R का मानमात्रककब उपयोग करें
8.314J mol⁻¹ K⁻¹Pa, m³ (SI)
8.314kPa L mol⁻¹ K⁻¹kPa, L
0.08314L bar mol⁻¹ K⁻¹bar, L
0.0821L atm mol⁻¹ K⁻¹atm, L
62.36L mmHg mol⁻¹ K⁻¹mmHg, L
1.987cal mol⁻¹ K⁻¹cal

परम शून्य और केल्विन पैमाना

गैस नियमों में ताप हमेशा केल्विन में डालना होता है। केल्विन पैमाना परम शून्य, −273.15 °C, से शुरू होता है, और एक केल्विन एक डिग्री सेल्सियस के बराबर है, इसलिए बदलना सिर्फ़ जोड़ना है: T (K) = t (°C) + 273.15। ज़्यादातर प्रश्नों में इसे 273 कर लेते हैं।

सेल्सियस क्यों नहीं? 0 °C से 10 °C होने पर ताप "अनंत गुना" नहीं बढ़ा। गैस केल्विन ताप के अनुपात में फैलती है: 273 K से 283 K, केवल लगभग 4%। अनुपात में सेल्सियस डालेंगे तो शून्य और ऋणात्मक संख्याएँ पूरा हिसाब बिगाड़ देंगी।

परम शून्य पर अणुओं की ऊर्जा न्यूनतम होती। प्रयोगशालाओं में परमाणुओं को परम शून्य से एक केल्विन के अरबवें हिस्से तक ठंडा किया गया है, पर ठीक 0 K तक पहुँचना असंभव है।

कहाँसेल्सियसकेल्विन
परम शून्य-273.15 °C0.00 K
बहुत ठंडी गैस-100.00 °C173.15 K
बर्फ़ पिघलती है0.00 °C273.15 K
कमरे का ताप25.00 °C298.15 K
शरीर का ताप37.00 °C310.15 K
पानी उबलता है100.00 °C373.15 K

STP पर मोलर आयतन: 22.4 L या 22.7 L?

पुरानी परिभाषा में STP = 0 °C (273 K) और 1 atm। वहाँ किसी भी आदर्श गैस के 1 मोल का आयतन V = RT/P = 0.0821 × 273 ÷ 1 = 22.41 L, यानी प्रसिद्ध 22.4 L।

ध्यान दें: IUPAC 1982 से मानक दाब 1 bar (100 kPa) मानता है, और NCERT की रसायन पुस्तक भी इसी को अपनाती है। 273.15 K और 1 bar पर मोलर आयतन 22.71 L है। दोनों मान सही हैं, बस परिभाषा अलग है। प्रश्न में जो शर्त दी हो वही लें; CBSE/NCERT के प्रश्नों में 22.7 L आता है, जबकि कई पुरानी किताबों और राज्य बोर्डों में 22.4 L।

डाल्टन का आंशिक दाब नियम (संक्षेप में)

अक्रियाशील गैसों के मिश्रण का कुल दाब हर गैस के आंशिक दाबों के योग के बराबर होता है। आंशिक दाब वह दाब है जो वह गैस अकेले पूरे बर्तन में होने पर डालती।

अणुगति सिद्धांत से यह स्वाभाविक है: हर अणु अपने आप दीवार से टकराता है, दीवार को फ़र्क नहीं पड़ता कि वह नाइट्रोजन है या ऑक्सीजन। इसलिए किसी गैस का आंशिक दाब = उसका मोल अंश × कुल दाब।

p(कुल) = p₁ + p₂ + p₃ + …

p₁ = x₁ × p(कुल)x₁ = n₁ / n(कुल), मोल अंश

आदर्श गैस बनाम वास्तविक गैस

आदर्श गैस एक मॉडल है। वास्तविक गैस के अणु कुछ जगह घेरते हैं और आपस में थोड़ा आकर्षण भी रखते हैं। कम दाब और ऊँचे ताप पर अणु दूर-दूर और तेज़ होते हैं, दोनों प्रभाव नगण्य होते हैं, और वास्तविक गैसें लगभग आदर्श व्यवहार करती हैं।

ऊँचे दाब पर अणु ठुँस जाते हैं, तब उनका अपना आयतन नगण्य नहीं रहता। कम ताप पर वे धीमे होते हैं, आकर्षण उन्हें खींचता है, और आख़िर में गैस द्रव बन जाती है। इन हालात में संपीड्यता गुणांक Z = PV/nRT, 1 से हट जाता है। वान्डर वाल्स समीकरण इन दोनों प्रभावों को सुधारता है।

सिमुलेशन में खुद प्रयोग करें

कॉपी-पेन लेकर बैठिए। पहले अनुमान लगाइए, फिर चलाकर मिलाइए।

प्रयोग 1: आयतन आधा करें (बॉयल)

शुरुआत में V = 25 L, T = 300 K, n = 1 mol, दाब 99.77 kPa। आयतन 12.5 L करें। अनुमान: दाब कितना? उत्तर 199.5 kPa, ठीक दोगुना, और प्रति सेकंड टक्करें भी लगभग दोगुनी।

प्रयोग 2: केल्विन दोगुना करें (चार्ल्स)

चार्ल्स मोड में ताप 300 K से 600 K करें। आयतन 25 L से 50.0 L, ठीक दोगुना। पर सेल्सियस में यह 26.85 °C से 326.85 °C था, लगभग 12.2 गुना। यही सबूत है कि नियम में केल्विन चाहिए।

प्रयोग 3: परम शून्य खोजें

चार्ल्स या गे-लुसाक मोड में हरी रेखा को उसके डैश वाले भाग के साथ पीछे ले जाइए, जहाँ वह ताप अक्ष से मिलती है: −273.15 °C पर लाल बिंदु। मोल या दाब बदलकर फिर देखिए, ढाल बदलता है, मिलन-बिंदु नहीं।

प्रयोग 4: टक्करें गिनकर दाब मापें

आदर्श गैस मोड में "PV/nRT (टक्करें गिनकर)" देखिए। सिमुलेशन सचमुच हर अणु की पिस्टन से टक्कर गिनकर धक्का जोड़ता है। मान 1 के आसपास डोलता है क्योंकि यहाँ कुछ दर्जन अणु ही हैं। असली 1 मोल में 6 × 10²³ अणु होते हैं, इसलिए असली दाब बिल्कुल स्थिर दिखता है।

हल किए गए प्रश्न

हर हल में पहले दी गई राशियाँ, फिर सूत्र, फिर मान। ताप पहले केल्विन में बदलें (T = t + 273, जैसा ज़्यादातर किताबें करती हैं)।

प्रश्न 1: सिमुलेशन की शुरुआती अवस्था का दाब

दिया है: n = 1 mol, T = 300 K, V = 25 L, R = 8.314 kPa L mol⁻¹ K⁻¹। ज्ञात करें: P।

P = nRT/V = 1 × 8.314 × 300 ÷ 25 = 2,494.2 ÷ 25 = 99.77 kPa = 0.985 atm। सिमुलेशन खोलते ही मापन पैनल में यही मान दिखता है।

प्रश्न 2: सिरिंज दबाना (बॉयल का नियम)

एक बंद सिरिंज में 1 atm पर 60 mL हवा है। स्थिर ताप पर पिस्टन दबाकर आयतन 20 mL किया गया। नया दाब?

p₁V₁ = p₂V₂, इसलिए p₂ = p₁V₁/V₂ = 1 × 60 ÷ 20 = 3 atm। आयतन एक-तिहाई, दाब 3 गुना।

प्रश्न 3: धूप में गुब्बारा (चार्ल्स का नियम)

27 °C पर एक गुब्बारे का आयतन 2.0 L है। स्थिर दाब पर इसे 87 °C तक गर्म किया गया। नया आयतन?

T₁ = 27 + 273 = 300 K, T₂ = 87 + 273 = 360 K। V₂ = V₁T₂/T₁ = 2.0 × 360 ÷ 300 = 2.4 L। सेल्सियस से भाग देने पर उत्तर बिल्कुल गलत आता।

प्रश्न 4: गर्म सड़क पर टायर (गे-लुसाक का नियम)

सुबह 27 °C पर टायर का दाब 200 kPa है। दोपहर में अंदर की हवा 57 °C हो जाती है। आयतन स्थिर मानकर दाब ज्ञात करें।

p₂ = p₁T₂/T₁ = 200 × 330 ÷ 300 = 220 kPa, यानी 20 kPa की बढ़त। इसीलिए ठंडे टायर में दाब जाँचा जाता है।

प्रश्न 5: और गैस भरना (आवोगाद्रो नियम)

एक गुब्बारे में 0.20 mol गैस का आयतन 5.0 L है। समान T और P पर 0.10 mol गैस और डाली गई। नया आयतन?

n₂ = 0.20 + 0.10 = 0.30 mol, इसलिए V₂ = V₁n₂/n₁ = 5.0 × 0.30 ÷ 0.20 = 7.5 L।

प्रश्न 6: STP पर बदलना (संयुक्त गैस नियम)

27 °C और 800 mmHg पर एक गैस का आयतन 380 mL है। 273 K और 760 mmHg पर इसका आयतन?

V₂ = p₁V₁T₂/(T₁p₂) = 800 × 380 × 273 ÷ (300 × 760) = 364.0 mL।

प्रश्न 7: सिलिंडर में ऑक्सीजन (PV = nRT)

10 L के सिलिंडर में 27 °C और 5 atm पर ऑक्सीजन है। इसमें कितने मोल और कितने ग्राम O₂ है?

n = PV/RT = (5 × 10) ÷ (0.0821 × 300) = 50 ÷ 24.63 = 2.030 mol। द्रव्यमान = n × M = 2.030 × 32 = 65.0 g।

प्रश्न 8: मोलर आयतन सिद्ध करना

273.15 K और 1 bar पर 1 मोल आदर्श गैस का आयतन ज्ञात करें।

V = nRT/P = 1 × 8.314 × 273.15 ÷ 100 = 22.71 L (P kPa में)। पुरानी STP (273 K, 1 atm) पर V = 0.0821 × 273 = 22.41 L ≈ 22.4 L।

प्रश्न 9: मिश्रण के आंशिक दाब (डाल्टन का नियम)

एक पात्र में 2 mol N₂ और 1 mol O₂ है, कुल दाब 150 kPa। हर गैस का आंशिक दाब?

मोल अंश: x(N₂) = 0.667, x(O₂) = 0.333। p(N₂) = 0.667 × 150 = 100 kPa और p(O₂) = 50 kPa, जोड़ने पर फिर 150 kPa।

प्रश्न 10: एरोसोल कैन आग में

एक स्प्रे कैन में 27 °C पर दाब 3 atm है। कैन आग में 327 °C तक पहुँचे तो दाब?

p₂ = p₁T₂/T₁ = 3 × 600 ÷ 300 = 6 atm। केल्विन ताप दोगुना, दाब दोगुना; कैन इतना सह नहीं पाए तो फट जाता है। इसीलिए उस पर "आग में न डालें" लिखा होता है।

प्रश्न 11: गोताखोर का बुलबुला

समुद्र में हर लगभग 10 m गहराई पर दाब लगभग 1 atm बढ़ता है। 20 m गहराई (कुल लगभग 3 atm) पर 1.0 L का बुलबुला छोड़ा गया। सतह (1 atm) पर उसका आयतन, स्थिर ताप पर?

V₂ = p₁V₁/p₂ = 3 × 1.0 ÷ 1 = 3.0 L। इसीलिए गोताखोर ऊपर आते समय साँस नहीं रोकते, फेफड़ों की हवा भी ऐसे ही फैलती है।

आम गलतियाँ

इन गलतियों से बचें तो गैस नियमों के प्रश्न पक्के अंक हैं।

  • सेल्सियस में ताप डालना। चार्ल्स, गे-लुसाक और PV = nRT में हमेशा केल्विन।
  • नियम के कथन से शर्तें छोड़ देना: "स्थिर ताप पर" और "गैस की निश्चित मात्रा" कथन का हिस्सा हैं।
  • मात्रक से मेल न खाता R लेना: atm-लीटर के लिए 0.0821, bar-लीटर के लिए 0.08314, Pa-m³ के लिए 8.314।
  • बॉयल के P–V ग्राफ़ को सीधी रेखा बनाना। यह वक्र है; सीधी रेखा P और 1/V की होती है।
  • PV = nRT में mL और L मिलाना। p₁V₁ = p₂V₂ में बस दोनों ओर मात्रक समान होने चाहिए।
  • "गर्म करने पर अणु बड़े होते हैं" लिखना। अणु बड़े नहीं होते; तेज़ चलते हैं और दूर-दूर फैलते हैं।
  • 22.4 L को हर ताप पर लगाना। यह केवल 0 °C और 1 atm पर 1 मोल का आयतन है।

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में गैस नियम

गैस नियम सिर्फ़ परीक्षा के लिए नहीं हैं; आसपास की हर सीटी, फुस्स और उड़ान इन्हीं से समझ आती है।

  • सिरिंज से दवा खींचना: पिस्टन खींचने पर अंदर का आयतन बढ़ता है, दाब घटता है (बॉयल), और बाहर का ज़्यादा दाब द्रव को अंदर धकेलता है।
  • साइकिल पंप: हैंडल दबाने पर हवा का आयतन घटता है, दाब बढ़ता है, और टायर के दाब से ज़्यादा होते ही हवा अंदर जाती है।
  • गर्म हवा का गुब्बारा: गर्म हवा फैलती है (चार्ल्स), उसी आयतन में कम हवा रहती है, हल्की हवा गुब्बारे को ऊपर उठाती है।
  • प्रेशर कुकर: बंद बर्तन में भाप गर्म होकर दाब बढ़ाती है, जिससे पानी का क्वथनांक 100 °C से ऊपर चला जाता है और खाना जल्दी पकता है।
  • एरोसोल कैन: उस पर लिखा होता है कि 50 °C से ज़्यादा ताप पर न रखें और आग में न डालें, क्योंकि गर्मी से दाब बढ़कर (गे-लुसाक) कैन फट सकता है।
  • गर्मियों में टायर: गर्म दिनों में दाब बढ़ता है, इसलिए ठंडे टायर में सुझाया गया दाब भरें।
  • स्कूबा डाइविंग: गहराई पर फेफड़ों की हवा सिकुड़ती है; ऊपर आते समय फैलती है, इसलिए गोताखोर धीरे ऊपर आते हैं और साँस नहीं रोकते।
  • साँस लेना: डायाफ्राम छाती का आयतन बढ़ाता है, फेफड़ों का दाब बाहर से कम होता है और हवा अंदर आती है।

परीक्षा कॉर्नर: CBSE बोर्ड, JEE और NEET

पुरानी NCERT कक्षा 11 रसायन में यह अध्याय "द्रव्य की अवस्थाएँ" (States of Matter) था। 2023 से संशोधित (rationalised) NCERT में यह अध्याय रसायन से हटा दिया गया है, और आदर्श गैस समीकरण, बॉयल व चार्ल्स के नियम अब कक्षा 11 भौतिकी के "अणुगति सिद्धांत" (Kinetic Theory) अध्याय में पढ़ाए जाते हैं। कई राज्य बोर्ड और पुरानी किताबें अब भी रसायन वाला अध्याय पढ़ाती हैं, इसलिए अपने बोर्ड का ताज़ा सिलेबस ज़रूर मिलाएँ।

CBSE बोर्ड में नियम का कथन, ग्राफ़ पहचानना, PV = nRT की व्युत्पत्ति और एक-दो चरण के संख्यात्मक प्रश्न आते हैं। JEE और NEET में यही समीकरण अणुगति सिद्धांत और ऊष्मागतिकी के प्रश्नों की नींव हैं: मिश्रण, आंशिक दाब, घनत्व d = PM/RT, और ग्राफ़ पढ़ने वाले प्रश्न। तीन आदतें अंक दिलाती हैं: पहले ताप केल्विन में, फिर सूत्र, फिर मात्रक देखकर R।

एक नमूना प्रश्न

10 L के सिलिंडर में 27 °C और 5 atm पर ऑक्सीजन भरी है।

(क) परम शून्य की परिभाषा दें। (ख) अणुगति सिद्धांत से समझाइए कि स्थिर ताप पर गैस को दबाने से उसका दाब क्यों बढ़ता है। (ग) सिलिंडर में ऑक्सीजन का द्रव्यमान ज्ञात करें। (घ) एक छात्र कहता है कि सेल्सियस ताप दोगुना करने पर दाब दोगुना होगा। इस कथन की जाँच करें।

(ग) 65.0 g (प्रश्न 7 देखें)। (घ) 27 °C से 54 °C का मतलब 300 K से 327 K, केवल लगभग 9% वृद्धि; इसलिए दाब भी लगभग 9% ही बढ़ेगा, दोगुना नहीं।

रिवीज़न: एक नज़र में

परीक्षा से पहली रात यह सूची और R की तालिका एक बार देख लें, बस।

  • गैस का दाब = अनगिनत टक्करों से दीवार के प्रति एकांक क्षेत्रफल पर बल; ताप = अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा का माप।
  • बॉयल: T, n स्थिर → PV = स्थिरांक, p₁V₁ = p₂V₂; P–V ग्राफ़ अतिपरवलय।
  • चार्ल्स: P, n स्थिर → V/T = स्थिरांक; V–t रेखा −273.15 °C पर मिलती है।
  • गे-लुसाक: V, n स्थिर → P/T = स्थिरांक। आवोगाद्रो: P, T स्थिर → V/n = स्थिरांक।
  • संयुक्त गैस नियम p₁V₁/T₁ = p₂V₂/T₂; आदर्श गैस समीकरण PV = nRT।
  • R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ = 0.08314 bar L mol⁻¹ K⁻¹ = 0.0821 L atm mol⁻¹ K⁻¹।
  • T (K) = t (°C) + 273.15; मोलर आयतन 1 bar पर 22.71 L, 1 atm पर 22.4 L।
  • कुल दाब = आंशिक दाबों का योग; कम दाब और ऊँचे ताप पर वास्तविक गैस आदर्श जैसी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बॉयल का नियम क्या है?

स्थिर ताप पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन उसके दाब के व्युत्क्रमानुपाती होता है: PV = स्थिरांक, या p₁V₁ = p₂V₂।

बॉयल का नियम किसने दिया?

आयरिश-अंग्रेज़ वैज्ञानिक रॉबर्ट बॉयल ने 1662 में, J आकार की नली में बंद हवा पर पारा डालकर किए गए प्रयोगों से।

चार्ल्स का नियम क्या है?

स्थिर दाब पर किसी गैस की निश्चित मात्रा का आयतन उसके परम ताप के समानुपाती होता है: V/T = स्थिरांक, या V₁/T₁ = V₂/T₂, T केल्विन में।

गे-लुसाक का नियम क्या है?

स्थिर आयतन पर गैस की निश्चित मात्रा का दाब उसके परम ताप के समानुपाती होता है: p₁/T₁ = p₂/T₂।

आदर्श गैस समीकरण क्या है?

PV = nRT, जहाँ P दाब, V आयतन, n मोलों की संख्या, T परम ताप और R सार्वत्रिक गैस नियतांक है। यह बॉयल, चार्ल्स और आवोगाद्रो नियमों को मिलाकर मिलता है।

सार्वत्रिक गैस नियतांक R का मान क्या है?

R = 8.314 J mol⁻¹ K⁻¹ = 0.08314 bar L mol⁻¹ K⁻¹ = 0.0821 L atm mol⁻¹ K⁻¹ = 1.987 cal mol⁻¹ K⁻¹। एक ही नियतांक अलग मात्रकों में।

परम शून्य ताप कितना है?

0 K या −273.15 °C: वह ताप जिस पर आदर्श गैस का आयतन शून्य होता और अणुओं की ऊर्जा न्यूनतम। इसके पास पहुँचा जा सकता है, इसे छुआ नहीं जा सकता।

गैस नियमों में ताप केल्विन में क्यों लेते हैं?

आयतन और दाब परम ताप के समानुपाती हैं, जो परम शून्य से शुरू होता है। सेल्सियस का शून्य मनमाना है, इसलिए उसके अनुपात अर्थहीन हैं और ऋणात्मक भी हो सकते हैं।

मोलर आयतन 22.4 L है या 22.7 L?

दोनों, अलग परिभाषाओं में: 0 °C और 1 atm पर 22.41 L (≈ 22.4 L), और 0 °C व 1 bar पर 22.71 L। NCERT 1 bar वाली परिभाषा अपनाती है।

संयुक्त गैस नियम क्या है?

गैस की निश्चित मात्रा के लिए p₁V₁/T₁ = p₂V₂/T₂। जब दाब, आयतन और ताप तीनों बदलें तब इसका उपयोग करें।

वास्तविक गैस आदर्श गैस जैसा व्यवहार कब करती है?

कम दाब और ऊँचे ताप पर, जब अणु दूर-दूर और तेज़ होते हैं, जिससे उनका अपना आयतन और आपसी आकर्षण नगण्य हो जाता है।

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एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।

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