गतियाँ बढ़ाकर दिखाई गई हैं; आँकड़े पाठ्यपुस्तक के अनुमानित मान हैं।
नियंत्रण
गतिविधि
मॉडल
मापन
- श्वसन दर
- 15बार/मिनट
- गहराई (ज्वारीय आयतन)
- 500mL
- प्रति मिनट संवातन = दर × ज्वारीय आयतन
- 7.50L/min
- अभी की अवस्था
- अंतःश्वसन (साँस लेना)
- फुफ्फुस का दाब (वायुमंडल की तुलना में)
- 0.00mm Hg
- सामान्य स्तर से ऊपर फुफ्फुस में हवा
- 0mL
- प्रति श्वास अवशोषित O₂ (लगभग)
- 25.0mL
- प्रति श्वास निकली CO₂ (लगभग)
- 19.8mL
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- चलाकर एक पूरी साँस देखें: डायाफ्राम लाल होकर चपटा होता है, पसलियाँ ऊपर-बाहर सरकती हैं, दाब मापक की सूई वायुमंडल के नीचे जाती है और श्वासनली में हवा के बिंदु नीचे उतरते हैं। सब शिथिल होने पर दाब वायुमंडल से ऊपर जाता है और हवा बाहर निकल जाती है।
- स्पाइरोमीटर आलेख देखें। हर लहर एक साँस है और धारीदार रेखा ज्वारीय आयतन, यानी लहर की ऊँचाई बताती है।
- बड़ी करके दिखाई गई कूपिका देखें: ऑक्सीजन (हरी) पतली दीवार पार करके रक्त में जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड (नारंगी) उलटी दिशा में बाहर आती है।
- श्वसन दर और गहराई के स्लाइडर चलाकर प्रति मिनट संवातन, यानी दर × ज्वारीय आयतन, को बदलते देखें।
- "व्यायाम में" चुनने पर तेज़ और गहरी साँस दिखेगी, जिसमें छोड़ते समय भी पेशियाँ काम करती हैं। फिर मॉडल को बेल जार में बदलकर वक्ष से मिलाएँ।
एक मिनट अपनी साँसें गिनकर देखें
चुपचाप बैठें, घड़ी देखें और गिनें कि एक मिनट में आपकी छाती कितनी बार ऊपर उठती है। साँस को नियंत्रित करने की कोशिश न करें, ध्यान देते ही गति बदल जाती है; हो सके तो किसी दोस्त से गिनवाएँ। आराम में ज़्यादातर लोगों की संख्या 12 से 18 के बीच आती है। आपने अभी अपनी श्वसन दर नाप ली।
अब थोड़ा हिसाब। प्रति मिनट 15 साँसें और प्रत्येक में लगभग 500 mL हवा हो, तो प्रति मिनट 7.5 लीटर हवा फुफ्फुस में आती-जाती है। एक साँस में लगभग 4 सेकंड लगते हैं: 2 सेकंड भीतर, 2 सेकंड बाहर। एक दिन में लगभग 21,600 साँसें और 10,800 लीटर हवा होती है, और आपने एक बार भी इसका फ़ैसला नहीं किया। मस्तिष्क पीछे बैठकर हृदय की धड़कन की तरह यह काम चलाता रहता है।
इस पृष्ठ पर हम देखेंगे कि यह कैसे होता है। हैरानी की बात है कि फुफ्फुस में अपनी कोई पेशी नहीं होती। वह ख़ुद हवा नहीं खींच सकता। असल में एक यांत्रिक तरकीब काम करती है: पेशियाँ उस डिब्बे का आकार बदलती हैं जिसमें फुफ्फुस रखे हैं, और हवा दाब के पीछे-पीछे चलती है। तरकीब समझ में आ जाए तो इस अध्याय के प्रश्न "आगे क्या होता है?" वाली एक छोटी कड़ी बन जाते हैं।
श्वासोच्छ्वास और श्वसन एक चीज़ नहीं हैं
पाठ्यपुस्तकों में दो मिलते-जुलते शब्द आते हैं, और इस अध्याय में अंक गँवाने का सबसे आम कारण इन्हें आपस में मिला देना है।
श्वासोच्छ्वास (साँस लेना, अंग्रेज़ी में ब्रीदिंग) फुफ्फुस में हवा भरने और निकालने की भौतिक क्रिया है। यह पेशियों और हड्डियों का यांत्रिक काम है, और यह एनिमेशन यही दिखाता है। श्वसन (रेस्पिरेशन) हर जीवित कोशिका के भीतर होने वाली रासायनिक क्रिया है, जिसमें ऑक्सीजन से ग्लूकोज़ टूटकर कोशिका के लिए ऊर्जा देता है। श्वासोच्छ्वास ऑक्सीजन को रक्त तक पहुँचाता है और कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालता है; शरीर को ऑक्सीजन की ज़रूरत श्वसन के कारण ही है।
C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा (ATP)कोशिकीय श्वसन, माइटोकॉन्ड्रिया में
| श्वासोच्छ्वास | कोशिकीय श्वसन | |
|---|---|---|
| क्या है | फुफ्फुस में हवा का आना-जाना | ग्लूकोज़ टूटकर ऊर्जा मिलना |
| प्रकृति | भौतिक, यांत्रिक | रासायनिक, एंज़ाइम-नियंत्रित |
| कहाँ होता है | नाक, श्वासनली, फुफ्फुस, वक्ष की दीवार | हर कोशिका में (माइटोकॉन्ड्रिया में) |
| ऊर्जा | थोड़ी ऊर्जा लगती है (पेशियों का काम) | ऊर्जा (ATP) मुक्त होती है |
| फुफ्फुस चाहिए? | मनुष्य में हाँ | नहीं: पौधे, यीस्ट और जीवाणु भी श्वसन करते हैं |
हवा का रास्ता: नथुने से कूपिका तक
हवा एक तय रास्ते से जाती है। वह नथुनों (या मुँह) से घुसती है, गले और स्वर-यंत्र से गुज़रकर श्वासनली से नीचे उतरती है। श्वासनली उपास्थि के C-आकार के छल्लों से खुली रहती है, इसलिए भीतर का दाब घटने पर भी वह पिचकती नहीं। गले के सामने हल्का दबाने पर इन छल्लों का आभास होता है।
नीचे श्वासनली दो भागों में बँटकर दो श्वसनी बनाती है, हर फुफ्फुस के लिए एक। हर श्वसनी बार-बार बँटकर और पतली नलियों, श्वसनिकाओं, में बदल जाती है, जैसे उलटा रखा हुआ पेड़। सबसे पतली श्वसनिकाओं के सिरे पर अंगूर के गुच्छे जैसी छोटी-छोटी थैलियाँ होती हैं, कूपिकाएँ (एल्वियोलाई)। इनकी संख्या करोड़ों में है, और रक्त असल में हवा से यहीं मिलता है।
नाक और श्वासनली का अस्तर एक और काम करता है। बाल और चिपचिपा श्लेष्म धूल व कीटाणुओं को रोकता है, और सूक्ष्म बाल जैसे पक्ष्माभ (सिलिया) श्लेष्म को गले की ओर ठेल देते हैं ताकि वह निगल लिया जाए या खाँसकर निकल जाए। रास्ते में हवा गरम और नम भी होती है, इसलिए नाज़ुक कूपिकाओं को साफ़, गुनगुनी, नम हवा मिलती है।
- नथुने: बालों और श्लेष्म से छानते हैं, हवा को गरम और नम करते हैं।
- श्वासनली: उपास्थि के छल्लों से खुली नली, भीतर पक्ष्माभ।
- श्वसनी: दो शाखाएँ, हर फुफ्फुस में एक।
- श्वसनिकाएँ: लगातार पतली होती शाखाएँ।
- कूपिकाएँ: पतली दीवार वाली थैलियाँ जहाँ गैसों का विनिमय होता है।
चलायमान फ़र्श वाला डिब्बा: वक्ष गुहा
वक्ष गुहा को एक डिब्बा समझिए। पीछे की दीवार रीढ़ है, सामने की दीवार उरोस्थि (स्टर्नम)। बग़लें पसलियों से बनी हैं: बारह जोड़ी मुड़ी हुई हड्डियाँ, पीछे रीढ़ से जुड़ी और ज़्यादातर आगे उरोस्थि से। छत गर्दन की जड़ में है। और फ़र्श गुंबद जैसा उठा हुआ पेशी का परदा है, डायाफ्राम (मध्यपट), जो छाती को पेट से अलग करता है। चित्र साफ़ रखने के लिए सिमुलेशन में छह जोड़ी पसलियाँ बनाई गई हैं।
दो पास-पास की पसलियों के बीच पेशियों की दो पतली परतें होती हैं: अंतरापर्शुक पेशियाँ (अंतरा = बीच में, पर्शुका = पसली)। बाह्य अंतरापर्शुक पेशियों के तंतु नीचे और आगे की ओर ढलान वाले होते हैं, वैसे ही जैसे पैंट की जेब में हाथ डालने पर उँगलियाँ जाती हैं। आंतरिक अंतरापर्शुक पेशियाँ उनके नीचे उलटी ढलान में होती हैं, इसलिए दोनों परतें मिलकर कैंची की तरह क्रॉस बनाती हैं। बाह्य पेशियाँ सिकुड़ें तो हर पसली ऊपर वाली पसली की ओर खिंचती है, और ऊपरी पसली स्थिर रहती है, इसलिए पूरा पिंजर ऊपर-बाहर झूलता है। सिमुलेशन में पसलियों के बीच लाल X के निशान देखें।
फुफ्फुस इस डिब्बे के भीतर दोहरी झिल्ली, फुफ्फुसावरण (प्लूरा), में लिपटे होते हैं। दोनों परतों के बीच थोड़ा तरल होता है, जो परतों को एक-दूसरे पर फिसलने देता है और फुफ्फुस की सतह को वक्ष की दीवार के भीतर चिपकाए रखता है, गीली काँच की दो पट्टियों की तरह, जो फिसलती हैं पर अलग करना कठिन होता है। इसीलिए वक्ष की दीवार हिले तो फुफ्फुस उसके साथ चलता है। इस जगह में हवा घुस जाए तो चिपकाव टूट जाता है और फुफ्फुस पिचक सकता है।
| अंग | क्या है | श्वासोच्छ्वास में भूमिका |
|---|---|---|
| डायाफ्राम (मध्यपट) | फुफ्फुस के नीचे गुंबद जैसा पेशीय परदा | सिकुड़कर चपटा होता है और छाती को ऊपर-नीचे लंबा करता है |
| बाह्य अंतरापर्शुक पेशियाँ | पसलियों के बीच की पेशियाँ, तंतु नीचे-आगे ढलान | सिकुड़कर पसलियों को ऊपर-बाहर उठाती हैं |
| आंतरिक अंतरापर्शुक पेशियाँ | गहरी पेशियाँ, उलटी ढलान के तंतु | ज़ोर से साँस छोड़ने पर सिकुड़कर पसलियाँ नीचे-भीतर खींचती हैं |
| पसलियाँ और उरोस्थि | हड्डी का पिंजर | फुफ्फुस की रक्षा; बाल्टी के हत्थे की तरह ऊपर-बाहर झूलती हैं |
| फुफ्फुसावरण | बीच में तरल वाली दोहरी झिल्ली | फुफ्फुस को सहजता से वक्ष की दीवार के साथ चलने देता है |
| फुफ्फुस | लचीले, स्पंज जैसे अंग, अपनी पेशी नहीं | निष्क्रिय: छाती बदलती है इसीलिए इनका आकार बदलता है |
सबके पीछे का नियम: बॉयल का नियम
रॉबर्ट बॉयल ने दिखाया कि गैस की निश्चित मात्रा का तापमान स्थिर रहे तो दाब और आयतन व्युत्क्रमानुपाती होते हैं। बर्तन बड़ा करें तो गैस फैलती है, इसलिए दीवार के हर वर्ग सेंटीमीटर पर प्रति सेकंड कम अणु टकराते हैं, यानी दाब घटता है। बर्तन छोटा करें तो दाब बढ़ता है। साइकिल के पंप के मुँह पर उँगली दबाकर हत्था दबाएँ तो दाब बढ़ता महसूस होगा।
अब दूसरा आधा हिस्सा। हवा हमेशा अधिक दाब वाली जगह से कम दाब वाली जगह की ओर जाती है, कभी उलटी नहीं। इसलिए फुफ्फुस के भीतर का दाब बाहर की हवा से ज़रा-सा भी कम हो तो हवा श्वसन-मार्ग से भीतर आती है, जब तक दोनों दाब बराबर न हो जाएँ। भीतर का दाब थोड़ा अधिक हो तो हवा बाहर निकलती है। श्वासोच्छ्वास बस इतना ही है।
पेशियों का एक ही काम है वक्ष का आयतन बदलना। दाब और प्रवाह अपने-आप उसके पीछे आते हैं।
P₁ × V₁ = P₂ × V₂बॉयल का नियम: तापमान स्थिर, गैस की मात्रा निश्चित
हवा अधिक दाब से कम दाब की ओर जाती हैदिशा का नियम
अंतःश्वसन चरण-दर-चरण
अंतःश्वसन (साँस भीतर लेना) हमेशा सक्रिय होता है: इसमें पेशियों को काम करना पड़ता है। पूरा क्रम नीचे है, सिमुलेशन में आप इसी क्रम में देख सकते हैं।
| चरण | क्या होता है | क्यों महत्वपूर्ण |
|---|---|---|
| 1 | मस्तिष्क का श्वसन केंद्र तंत्रिकाओं से संकेत भेजता है (डायाफ्राम को फ़्रेनिक तंत्रिका, पसली की पेशियों को अंतरापर्शुक तंत्रिकाएँ) | आदेश के बिना पेशियाँ नहीं सिकुड़तीं |
| 2 | डायाफ्राम सिकुड़ता है, गुंबद चपटा होकर नीचे उतरता है | छाती ऊपर-नीचे लंबी होती है |
| 3 | बाह्य अंतरापर्शुक पेशियाँ सिकुड़ती हैं, पसलियाँ और उरोस्थि ऊपर-बाहर सरकती हैं | छाती चौड़ी और गहरी होती है |
| 4 | वक्ष गुहा का आयतन बढ़ता है; फुफ्फुसावरण से चिपके फुफ्फुस भी फैलते हैं | फुफ्फुस बड़े होते हैं |
| 5 | फुफ्फुस के भीतर का दाब वायुमंडलीय दाब से कम हो जाता है (बॉयल का नियम) | दाब का अंतर बनता है |
| 6 | बाहर की (अधिक दाब की) हवा श्वसन-मार्ग से कूपिकाओं (कम दाब) में आती है | फुफ्फुस भरते हैं |
| 7 | भीतर और बाहर का दाब बराबर होने पर प्रवाह रुकता है | अंतःश्वसन समाप्त |
उच्छ्वसन चरण-दर-चरण
आराम में उच्छ्वसन (साँस बाहर छोड़ना) के लिए किसी पेशी को काम नहीं करना पड़ता, यह निष्क्रिय होता है। फुफ्फुस लचीले होते हैं, खिंचे गुब्बारे की तरह; पेशियाँ खिंचाव छोड़ें तो वे अपने-आप पुराने आकार में लौट आते हैं। इसीलिए शांत साँस में ऊर्जा बहुत कम लगती है।
| चरण | क्या होता है | क्यों महत्वपूर्ण |
|---|---|---|
| 1 | तंत्रिका संकेत रुकते हैं, डायाफ्राम और बाह्य अंतरापर्शुक पेशियाँ शिथिल होती हैं | अब कोई खींच नहीं रहा |
| 2 | डायाफ्राम का गुंबद फिर ऊपर उठ आता है | छाती छोटी होती है |
| 3 | पसलियाँ और उरोस्थि नीचे-भीतर आती हैं, गुरुत्व और उपास्थि की लचक मदद करती है | छाती संकरी होती है |
| 4 | वक्ष गुहा का आयतन घटता है; लचीले फुफ्फुस सिकुड़ते हैं | फुफ्फुस छोटे होते हैं |
| 5 | फुफ्फुस के भीतर का दाब वायुमंडलीय दाब से अधिक हो जाता है | उलटी दिशा में दाब का अंतर बनता है |
| 6 | कूपिकाओं से हवा श्वसन-मार्ग से शरीर के बाहर जाती है | फुफ्फुस ख़ाली होते हैं |
| 7 | दाब फिर बराबर हो तो प्रवाह रुकता है | उच्छ्वसन समाप्त, अगली साँस के लिए तैयार |
"कम दाब" यानी कितना कम? संख्याओं में देखें
समुद्र तल पर वायुमंडल लगभग 760 mm Hg का दाब डालता है। शांत साँस में फुफ्फुस का दाब इससे केवल लगभग 1 mm Hg अलग होता है: अंतःश्वसन में ज़रा कम, उच्छ्वसन में ज़रा अधिक। इसीलिए सिमुलेशन का मापक वायुमंडल की तुलना में नापा गया है, बीच में शून्य। प्रति मिनट 15 साँस और 500 mL, इस डिफ़ॉल्ट पर मॉडल का मापक लगभग −1.0 से +1.0 mm Hg के बीच झूलता है।
अंतर छोटा है, पर हवा हल्की है और श्वसन-मार्ग चौड़ा, इसलिए इतना ही काफ़ी है। प्रवाह सबसे अधिक हर आधे चक्र के बीच में होता है, तभी दाब का अंतर भी सबसे अधिक होता है; प्रवाह रुकने पर, हर आधे चक्र के अंत में, अंतर शून्य हो जाता है। ध्यान दें, अंतःश्वसन के अंत में फुफ्फुस सबसे भरे होते हैं, फिर भी मापक शून्य दिखाता है। हवा को दाब का अंतर चलाता है; फुफ्फुस भरे होने का मतलब दाब होना नहीं है।
| साँस/मिनट | ज्वारीय आयतन (mL) | प्रति मिनट संवातन (L/min) | मॉडल में दाब का झूलना (± mm Hg) |
|---|---|---|---|
| 12 | 500 | 6.0 | 0.8 |
| 15 | 500 | 7.5 | 1.0 |
| 18 | 500 | 9.0 | 1.2 |
| 30 | 250 | 7.5 | 1.0 |
| 25 | 1,500 | 37.5 | 5.0 |
बेल जार मॉडल: एक जाना-पहचाना चित्र
लगभग हर पाठ्यपुस्तक में गुब्बारों वाले बेल जार का चित्र होता है। बॉयल के नियम को आँखों से देखने का यह सबसे सस्ता तरीका है, और परीक्षा में इससे प्रश्न बहुत आते हैं। सिमुलेशन में "बेल जार मॉडल" चुनकर इसे हिलते देखें।
मॉडल का हर हिस्सा मनुष्य की छाती के एक हिस्से से मेल खाता है। काँच का बेल जार वक्ष गुहा है। ऊपर डाट में से गुज़री Y-आकार की काँच की नली श्वासनली और दो श्वसनियाँ हैं। Y की दोनों भुजाओं पर बँधे दो गुब्बारे फुफ्फुस हैं। जार का निचला मुँह ढकने वाली तनी हुई रबर की झिल्ली डायाफ्राम है, जिसके बीच में खींचने के लिए एक गुटका है।
रबर की झिल्ली को नीचे खींचें। जार के भीतर का आयतन बढ़ता है, इसलिए जार की हवा का दाब बाहर के वायुमंडल से कम हो जाता है। बाहर की अधिक दाब की हवा Y-नली से भीतर दौड़ती है और गुब्बारे फूल जाते हैं। झिल्ली छोड़ें तो आयतन घटता है, जार का दाब बढ़ता है, और गुब्बारों से हवा निकलकर वे पिचक जाते हैं। सिमुलेशन में देखेंगे कि झिल्ली नीचे होने पर जार के भीतर हवा के बिंदु विरल हो जाते हैं।
| मॉडल का भाग | शरीर का भाग | कार्य |
|---|---|---|
| बेल जार | वक्ष गुहा | फुफ्फुस को घेरे रहती है |
| Y-नली | श्वासनली और श्वसनी | हवा भीतर-बाहर करती है |
| गुब्बारे | फुफ्फुस | हवा से फूलते और पिचकते हैं |
| रबर की झिल्ली | डायाफ्राम | नीचे खींचने पर आयतन बढ़ता है |
फुफ्फुस के आयतन और स्पाइरोमीटर
स्पाइरोमीटर ऐसा उपकरण है जो दर्ज करता है कि आप कितनी हवा भीतर-बाहर कर रहे हैं। हर अंतःश्वसन पर रेखा ऊपर जाती है और हर उच्छ्वसन पर नीचे आती है; इसलिए शांत साँस में नियमित लहरें बनती हैं, सिमुलेशन के दाहिनी ओर वाले आलेख जैसी।
एक लहर की ऊँचाई ही ज्वारीय आयतन है: एक सामान्य साँस में जितनी हवा भीतर आती या बाहर जाती है। स्वस्थ वयस्क में आराम के समय यह लगभग 500 mL होता है। नाम ज्वार-भाटे से आया है: हवा लहरों की तरह आती-जाती है, और फुफ्फुस कभी पूरी तरह ख़ाली नहीं होते। सिमुलेशन में धारीदार रेखा ज्वारीय आयतन दिखाती है; गहराई का स्लाइडर सरकाएँ तो रेखा भी सरकती है।
जान-बूझकर बहुत गहरी साँसों के साथ स्पाइरोमीटर चलाएँ तो पाठ्यपुस्तकों में कुछ और आयतनों के नाम मिलते हैं। अंतःश्वसनीय सुरक्षित आयतन वह अतिरिक्त हवा है जो सामान्य अंतःश्वसन के बाद भी ज़ोर लगाकर भीतर ली जा सकती है। उच्छ्वसनीय सुरक्षित आयतन वह अतिरिक्त हवा है जो सामान्य उच्छ्वसन के बाद भी ज़ोर लगाकर बाहर निकाली जा सकती है। अवशिष्ट आयतन वह हवा है जो सबसे ज़ोरदार उच्छ्वसन के बाद भी फुफ्फुस में बची रहती है; वह कूपिकाओं को पिचकने नहीं देती। जैव क्षमता (वाइटल कैपेसिटी) एक साँस में भीतर-बाहर की जा सकने वाली हवा की अधिकतम मात्रा है। गहरी साँस के ये मान व्यक्ति-व्यक्ति में बहुत अलग होते हैं, इसलिए इस पृष्ठ पर हम केवल ज्वारीय आयतन का उपयोग करते हैं।
प्रति मिनट संवातन = श्वसन दर × ज्वारीय आयतन15 × 500 mL = 7,500 mL/min = 7.5 L/min
गैसों का विनिमय: कूपिका में क्या होता है
बड़ा करके दिखाए गए भाग में इन सारी हलचलों का असली उद्देश्य दिखता है। हर कूपिका एक कोशिका मोटी दीवार वाली छोटी थैली है, जिसे रुधिर केशिकाओं का जाल घेरे हुए है, जिनकी दीवार भी एक कोशिका मोटी है। दोनों दीवारें इतनी पास हैं कि सेकंड के अंश में गैसें हवा और रक्त के बीच आ-जा सकती हैं। दीवार नम रहती है, जिससे गैसें पार करते समय उसमें घुल सकती हैं।
पार करने की यह क्रिया विसरण है: अणु जहाँ घने हैं वहाँ से जहाँ कम हैं वहाँ फैलते हैं। कूपिका की हवा में ऑक्सीजन अधिक और कार्बन डाइऑक्साइड कम है। केशिका में आने वाला रक्त शरीर घूमकर आया है, इसलिए उसमें ऑक्सीजन कम और कार्बन डाइऑक्साइड अधिक है। अतः ऑक्सीजन हवा से रक्त में विसरित होती है और कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से हवा में। हर नई साँस ऑक्सीजन भरती रहती है और कार्बन डाइऑक्साइड बुहारती रहती है, जिससे अंतर बड़ा बना रहता है। साँस रुकना क्यों नहीं चलता, इसका दूसरा कारण यही है।
रक्त में ऑक्सीजन लाल रुधिर कोशिकाओं के हीमोग्लोबिन से जुड़कर हृदय तक जाती है, फिर पूरे शरीर में। कार्बन डाइऑक्साइड का अधिकांश भाग बाइकार्बोनेट के रूप में प्लाज़्मा में घुलकर उलटी दिशा में जाता है। सिमुलेशन में दिखेगा कि कूपिका पार करते समय केशिका का रंग नीले (ऑक्सीजन-रहित) से लाल (ऑक्सीजन-युक्त) हो जाता है।
भीतर जाने वाली हवा और बाहर आने वाली हवा एक जैसी नहीं होती। पाठ्यपुस्तक के अनुमानित मान सारणी में हैं। छोड़ी हुई हवा में कार्बन डाइऑक्साइड लगभग 100 गुना अधिक और ऑक्सीजन 5 प्रतिशत-बिंदु कम होती है, यानी फुफ्फुस सचमुच आई हवा का एक हिस्सा रख लेते हैं।
| गैस | अंतःश्वसन की हवा (लगभग) | उच्छ्वसन की हवा (लगभग) | परिवर्तन |
|---|---|---|---|
| ऑक्सीजन | 21% | 16% | 5 प्रतिशत-बिंदु कम |
| कार्बन डाइऑक्साइड | 0.04% | 4% | लगभग 100 गुना अधिक |
| नाइट्रोजन | लगभग 78% | लगभग 78% | शरीर उपयोग नहीं करता |
| जलवाष्प | मौसम के अनुसार बदलती है | अधिक, लगभग संतृप्त | श्वसन-मार्ग और फुफ्फुस में जुड़ती है |
दर और गहराई: आराम और व्यायाम में साँस
आराम में स्वस्थ वयस्क प्रति मिनट लगभग 12 से 18 बार साँस लेता है। प्रति मिनट संवातन एक मिनट में भीतर-बाहर हुई हवा का कुल आयतन है। यह दर और ज्वारीय आयतन का गुणनफल है, इसलिए 500 mL लेने पर यह सीमा 6.0 से 9.0 L/min आती है।
सीढ़ियाँ दौड़कर चढ़ें तो पेशी कोशिकाएँ तेज़ी से श्वसन करती हैं। ऑक्सीजन अधिक लगती है, कार्बन डाइऑक्साइड भी अधिक बनती है, और रक्त अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड को फुफ्फुस तक लौटा लाता है। मस्तिष्क के मेडुला (मस्तिष्क स्तंभ) में श्वसन केंद्र होता है, जो रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर देखता रहता है। स्तर बढ़ने पर वह और तेज़ और ज़ोरदार संकेत भेजता है: आप तेज़ (दर बढ़ती है) और गहरी (ज्वारीय आयतन बढ़ता है) साँस लेते हैं, और प्रति मिनट संवातन उछल जाता है। मुख्य उद्दीपक कार्बन डाइऑक्साइड का बढ़ना है, ऑक्सीजन का घटना नहीं, जो कई विद्यार्थी उलटा सोचते हैं।
सिमुलेशन का "व्यायाम में" बटन प्रति मिनट 25 साँस और 1,500 mL लेता है, जिससे प्रति मिनट संवातन 37.5 L/min होता है। बदलाव साफ़ दिखाने के लिए ये उदाहरण-मान हैं, चिकित्सकीय मानक नहीं: व्यक्ति और परिश्रम के अनुसार शरीर कितना बढ़ाता है, यह अलग-अलग होता है।
सिमुलेशन में ख़ुद करके देखें
हर प्रयोग में एक मिनट से कम लगता है और एक विचार पक्का हो जाता है।
1. एक साँस को शुरू से अंत तक देखें
गति 0.25× करके एक पूरी साँस देखें। पहले डायाफ्राम लाल होकर चपटा होता है, पसलियाँ उठती हैं, मापक की सूई शून्य से नीचे जाती है और हवा के बिंदु श्वासनली में उतरते हैं। फिर सब शांत हो जाता है और गुंबद ऊपर लौट आता है; सूई शून्य से ऊपर आती है और बिंदु बाहर निकल जाते हैं।
2. सबसे कम दाब का क्षण खोजें
अंतःश्वसन के बीच में रोकें। मापक लगभग −1.0 mm Hg दिखाएगा, क्योंकि तब हवा का प्रवाह सबसे अधिक है। अब अंतःश्वसन के अंत तक चलने दें: फुफ्फुस सबसे बड़े हैं, पर मापक फिर 0 पर। हवा को दाब का अंतर चलाता है, आकार नहीं।
3. स्पाइरोमीटर से ज्वारीय आयतन पढ़ें
डिफ़ॉल्ट सेटिंग पर आलेख को स्क्रीन भरने दें। धारीदार रेखा 500 mL पर है और लहरें ठीक उसी रेखा को छूती हैं। अब गहराई का स्लाइडर बढ़ाएँ: लहरें बड़ी होती हैं और धारीदार रेखा उनके साथ चलती है।
4. कुल वही, ढंग अलग
दर 30 और गहराई 250 mL करें। प्रति मिनट संवातन 7.5 L/min आता है, ठीक डिफ़ॉल्ट 7.5 L/min के बराबर, भले स्पाइरोमीटर पर अब दोगुनी लहरें हैं, हर एक आधी ऊँची। सूत्र केवल दोनों संख्याओं का गुणनफल देखता है।
5. व्यायाम पर जाएँ
"व्यायाम में" दबाएँ। दर 25, गहराई 1,500 mL और प्रति मिनट संवातन 37.5 L/min हो जाता है, आराम का लगभग 5 गुना। मापक दोनों ओर कहीं अधिक झूलता है (लगभग 5.0 mm Hg), और साँस छोड़ते समय आंतरिक अंतरापर्शुक और पेट की पेशियाँ अब लाल होती हैं। "आराम में" लौटने पर वे फिर शांत।
6. वक्ष की जगह बेल जार
"बेल जार मॉडल" चुनें। रबर की झिल्ली को नीचे उतरते और गुब्बारों को फूलते देखें, और ध्यान दें कि झिल्ली नीचे होने पर जार के भीतर के धूसर हवा के बिंदु विरल हो जाते हैं। फिर जार के हर भाग का वक्ष के संगत भाग से मिलान करें।
हल किए गए प्रश्न
हर उत्तर सिमुलेशन के अपने मॉडल से निकाला गया है, इसलिए आप उसे मापन पैनल से मिला सकते हैं।
प्रश्न 1: आराम में प्रति मिनट संवातन
एक विद्यार्थी प्रति मिनट 15 बार साँस लेता है और हर बार 500 mL हवा भीतर-बाहर होती है। प्रति मिनट संवातन लीटर/मिनट में कितना है?
प्रति मिनट संवातन = दर × ज्वारीय आयतन
- प्रति मिनट संवातन = 15 × 500 = 7,500 mL/min
- लीटर में बदलने के लिए 1,000 से भाग: 7.5 L/min
प्रश्न 2: पूरे दिन की साँसें
प्रश्न 1 के मान लेकर बताइए कि एक व्यक्ति दिन में कितनी साँसें लेता है और कितनी हवा फुफ्फुस से गुज़रती है।
साँसें: प्रति मिनट 15 × दिन के 1,440 मिनट = 21,600। हवा: 7.5 L/min × 1,440 = प्रतिदिन 10,800 लीटर।
प्रश्न 3: आधा मिनट गिनकर दर निकालना
एक नर्स ने 30 सेकंड में 8 साँसें गिनीं। श्वसन दर क्या है? हर साँस 500 mL हो तो प्रति मिनट संवातन क्या है?
पूरे एक मिनट के लिए 2 से गुणा: 8 × 2 = 16 बार/मिनट। प्रति मिनट संवातन = 16 × 500 mL = 8,000 mL/min = 8.0 L/min।
प्रश्न 4: ज्वारीय आयतन निकालना
एक व्यक्ति प्रति मिनट 18 बार साँस लेता है और प्रति मिनट संवातन 9 L/min है। ज्वारीय आयतन क्या है?
प्रति मिनट संवातन को बदलें: 9 L = 9,000 mL। ज्वारीय आयतन = प्रति मिनट संवातन ÷ दर = 9,000 ÷ 18 = 500 mL।
प्रश्न 5: एक साँस में अवशोषित ऑक्सीजन
पाठ्यपुस्तक के अनुमानित मान लीजिए (अंतःश्वसन की हवा में 21% ऑक्सीजन, उच्छ्वसन की हवा में 16%)। 500 mL की एक साँस से शरीर कितनी ऑक्सीजन लेता है, और प्रति मिनट 15 साँसों में कितनी?
अंतर 21 − 16 = 5 प्रतिशत-बिंदु। प्रति साँस: 500 × 5 ÷ 100 = 25 mL। प्रति मिनट: 15 × 25 = 375 mL। यह पूर्णांकित पाठ्यपुस्तकीय प्रतिशतों से निकाला मोटा अनुमान है, विचार समझने के लिए ठीक है, किसी व्यक्ति को नापने के लिए नहीं।
प्रश्न 6: बाहर निकली कार्बन डाइऑक्साइड
अंतःश्वसन की हवा में 0.04% और उच्छ्वसन की हवा में लगभग 4% कार्बन डाइऑक्साइड हो, तो 500 mL की एक साँस कितनी कार्बन डाइऑक्साइड जोड़ती है? छोड़ी हुई हवा कितने गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड वाली है?
अंतर: 4 − 0.04 = 3.96 प्रतिशत-बिंदु। प्रति साँस जुड़ी: 500 × 3.96 ÷ 100 = 19.8 mL। अनुपात: 4 ÷ 0.04 = 100 गुना।
प्रश्न 7: बंद फुफ्फुस पर बॉयल का नियम
एक विचार-प्रयोग: मान लीजिए बाहर से पूरी तरह बंद एक फुफ्फुस में 760 mm Hg दाब पर 2,500 mL हवा है। वक्ष गुहा 500 mL बढ़ती है, तो फुफ्फुस 3,000 mL का हो जाता है। दाब कितना होगा?
P₂ = P₁ × V₁ ÷ V₂ = 760 × 2,500 ÷ 3,000 = 633.3 mm Hg, यानी 126.7 mm Hg की गिरावट। असली फुफ्फुस में श्वसन-मार्ग खुला है, इसलिए ज़रा-सा अंतर बनते ही हवा भीतर आ जाती है और दाब लगभग 1 mm Hg से अधिक नहीं गिरता। बंद फुफ्फुस का हिसाब दिखाता है कि हवा को भीतर आना ही पड़ता है: नहीं तो दाब बहुत गिर जाता।
प्रश्न 8: व्यायाम के दौरान साँस
सिमुलेशन की व्यायाम सेटिंग में दर 25 बार/मिनट और ज्वारीय आयतन 1,500 mL है। प्रति मिनट संवातन निकालिए, आराम से तुलना कीजिए, और वही प्रतिशत लेकर प्रति साँस अवशोषित ऑक्सीजन का अनुमान लगाइए।
प्रति मिनट संवातन = 25 × 1,500 = 37,500 mL/min = 37.5 L/min। आराम के 7.5 L/min की तुलना में यह 5 गुना है। प्रति साँस ऑक्सीजन ≈ 1,500 × 5 ÷ 100 = 75 mL। असली व्यायाम में छोड़ी हवा की ऑक्सीजन का प्रतिशत बदल जाता है, इसलिए इसे मात्रा के अंदाज़ के रूप में लें।
आम ग़लतियाँ
इस विषय में ज़्यादातर अंक कुछ ही चूकों से कटते हैं। कॉपी जमा करने से पहले एक-एक करके मिला लें।
- "फुफ्फुस हवा खींचते हैं" लिखना। फुफ्फुस में पेशी नहीं होती; डायाफ्राम और पसलियों की पेशियाँ वक्ष का आयतन बदलती हैं और दाब का अंतर हवा को चलाता है।
- श्वासोच्छ्वास और श्वसन को एक कहना। श्वासोच्छ्वास हवा का यांत्रिक आना-जाना है; श्वसन कोशिकाओं में ग्लूकोज़ से ऊर्जा मुक्त करने की रासायनिक क्रिया है।
- अंतःश्वसन में डायाफ्राम ऊपर उठता है लिखना। वह सिकुड़ता है, चपटा होता है और नीचे आता है।
- अंतःश्वसन में पसलियाँ नीचे-भीतर जाती हैं लिखना। वे ऊपर-बाहर जाती हैं।
- दाब उलटा लिखना: अंतःश्वसन में फुफ्फुस का दाब वायुमंडल से कम होता है, अधिक नहीं।
- शांत उच्छ्वसन को सक्रिय कहना। आराम में यह निष्क्रिय है: पेशियाँ शिथिल होती हैं, लचीले फुफ्फुस सिकुड़ते हैं।
- यह मानना कि हम केवल कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। छोड़ी हुई हवा में भी लगभग 16% ऑक्सीजन और लगभग 78% नाइट्रोजन होती है।
- बेल जार में अंतःश्वसन के समय झिल्ली ऊपर उठती दिखाना। झिल्ली नीचे खींची जाती है।
- गणना में इकाई भूल जाना: L/min में प्रति मिनट संवातन देना हो तो पहले mL को लीटर में बदलें।
वास्तविक जीवन और स्वास्थ्य
ऊपर की सारी बातें स्वस्थ फुफ्फुस की हैं। रोज़मर्रा के स्वास्थ्य के कई विषय असल में इस कड़ी की किसी एक कड़ी के बिगड़ने से जुड़े हैं। यह पाठ्यपुस्तक के स्तर की पृष्ठभूमि है, चिकित्सकीय सलाह नहीं; किसी वास्तविक व्यक्ति की समस्या में डॉक्टर ही सही व्यक्ति हैं।
दमा (अस्थमा) एक दीर्घकालिक स्थिति है जिसमें श्वसन-मार्ग सूजकर संकरे हो जाते हैं, इसलिए हवा का आना-जाना कठिन होता है, ख़ासकर बाहर निकलना। डॉक्टर के बताए इन्हेलर की दवाएँ श्वसन-मार्ग को शिथिल करके खोल देती हैं।
धूम्रपान पूरे तंत्र को नुकसान पहुँचाता है। तंबाकू के धुएँ का टार और रसायन पक्ष्माभों को नष्ट करते हैं, इसलिए श्लेष्म और कीटाणु अब बुहारकर बाहर नहीं निकलते। वर्षों में श्वसन-मार्ग में सूजन आ जाती है और कूपिकाओं की पतली दीवारें टूट सकती हैं, जिससे छोटी-छोटी थैलियों की जगह कम संख्या में बड़ी ख़ाली जगहें रह जाती हैं और गैस विनिमय की सतह घट जाती है। धुएँ की कार्बन मोनोऑक्साइड हीमोग्लोबिन से जुड़कर रक्त की ऑक्सीजन ढोने की क्षमता भी घटाती है।
वायु प्रदूषण कई शहरों की रोज़ की बात है, जब धूल और धुएँ के कण साँस के साथ गहराई तक पहुँचते हैं। मास्क, स्वच्छ ईंधन और कचरा कम जलाना श्वसन-मार्ग पर बोझ घटाते हैं।
दाब और आयतन का यही विचार बचाव-श्वास के पीछे भी है। छोड़ी हुई हवा में अब भी लगभग 16% ऑक्सीजन रहती है, इसलिए प्रशिक्षित बचावकर्ता की दी हुई साँसें उस व्यक्ति की मदद कर सकती हैं जिसकी साँस रुक गई हो। यह और छाती पर दबाव देने की विधि कोई भी प्रमाणित प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण में सीख सकता है, और पृष्ठ पढ़कर नहीं, प्रशिक्षक से सीखना ही बेहतर है। आपात स्थिति में सबसे पहले आपातकालीन सेवा के नंबर पर फ़ोन करें।
ऊँचे पहाड़ों पर लोग तेज़ साँस लेते हैं, क्योंकि पतली हवा के हर घूँट में ऑक्सीजन कम होती है। और साँस रोकने पर साँस लेने की तलब मुख्य रूप से रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड जमा होने से आती है, ऑक्सीजन ख़त्म होने से नहीं।
परीक्षा कोना: CBSE बोर्ड, NEET और अन्य
इस विषय से हर स्तर पर अनुमान योग्य प्रश्न आते हैं। बिना देखे लिख पाने तक अभ्यास करें।
CBSE के लिए यह कक्षा 10 के विज्ञान के अध्याय "जैव प्रक्रम" में और अधिक विस्तार से कक्षा 11 के जीव विज्ञान के अध्याय "श्वसन और गैसों का विनिमय" में आता है, जहाँ फुफ्फुस के आयतन (ज्वारीय आयतन, अंतःश्वसनीय सुरक्षित आयतन, उच्छ्वसनीय सुरक्षित आयतन, अवशिष्ट आयतन, जैव क्षमता) भी पूछे जाते हैं। NEET जैसी प्रवेश परीक्षाओं में डायाफ्राम, पसलियों की गति, गैसों के आंशिक दाब और कूपिका की संरचना से बहुविकल्पीय प्रश्न आते हैं।
परिभाषाएँ: श्वासोच्छ्वास, श्वसन, अंतःश्वसन, उच्छ्वसन, ज्वारीय आयतन, प्रति मिनट संवातन। चित्र: श्वासनली, श्वसनी, फुफ्फुस, कूपिका और डायाफ्राम नामांकित मानव श्वसन तंत्र; चार भाग नामांकित बेल जार मॉडल; केशिका सहित कूपिका का बड़ा चित्र जिसमें ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के तीर हों। गति की दिशा बताने के लिए हमेशा तीर लगाएँ।
लघु उत्तरीय प्रश्न: फुफ्फुस पिचकते क्यों नहीं (फुफ्फुसावरण); श्वासनली में उपास्थि के छल्ले क्यों हैं; कूपिकाओं की दीवार पतली और रक्त आपूर्ति भरपूर क्यों है; बेल जार के गुब्बारे और रबर की झिल्ली किसके प्रतीक हैं। अंतःश्वसन और उच्छ्वसन की तुलना सारणी में डायाफ्राम, पसलियाँ, वक्ष का आयतन, फुफ्फुस का दाब और हवा की गति की पंक्तियों में करें।
गणनाएँ: प्रति मिनट संवातन = दर × ज्वारीय आयतन (mL को लीटर में बदलें), 30 सेकंड की गिनती से दर, और स्पाइरोमीटर से ज्वारीय आयतन। पहले सूत्र लिखें, इकाई सहित संख्याएँ रखें और उत्तर में इकाई दें।
एक नज़र में दोहराव
परीक्षा से पहले की रात इसे पढ़ लें; हर पंक्ति एक संभावित प्रश्न है।
- श्वासोच्छ्वास यांत्रिक है (हवा का आना-जाना); श्वसन रासायनिक है (कोशिका में ग्लूकोज़ और ऑक्सीजन से ऊर्जा)।
- हवा का रास्ता: नथुने, श्वासनली, श्वसनी, श्वसनिकाएँ, कूपिकाएँ।
- अंतःश्वसन: डायाफ्राम सिकुड़कर चपटा, बाह्य अंतरापर्शुक पेशियाँ पसलियाँ उठाती हैं, आयतन बढ़ा, दाब घटा, हवा भीतर।
- आराम का उच्छ्वसन: पेशियाँ शिथिल, डायाफ्राम ऊपर, पसलियाँ नीचे, आयतन घटा, दाब बढ़ा, हवा बाहर।
- ज़ोर के उच्छ्वसन में आंतरिक अंतरापर्शुक और पेट की पेशियाँ काम करती हैं।
- बॉयल का नियम: दाब × आयतन स्थिर; हवा अधिक दाब से कम दाब की ओर जाती है।
- बेल जार: जार = वक्ष गुहा, Y-नली = श्वसन-मार्ग, गुब्बारे = फुफ्फुस, रबर की झिल्ली = डायाफ्राम।
- आराम में ज्वारीय आयतन ≈ 500 mL; प्रति मिनट संवातन = दर × ज्वारीय आयतन = 15 × 500 = 7.5 L/min।
- अंतःश्वसन की हवा ≈ 21% O₂ और 0.04% CO₂; उच्छ्वसन की हवा ≈ 16% O₂ और 4% CO₂।
- गैसों का विनिमय विसरण से, एक कोशिका मोटी दीवार के पार: O₂ रक्त में, CO₂ बाहर।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्वसन की क्रियाविधि क्या है?
पेशियाँ वक्ष का आयतन बदलती हैं और बाक़ी काम दाब करता है। अंतःश्वसन में डायाफ्राम सिकुड़कर चपटा होता है और बाह्य अंतरापर्शुक पेशियाँ पसलियाँ उठाती हैं, तो आयतन बढ़ता है, दाब वायुमंडल से कम होता है और हवा भीतर आती है। उच्छ्वसन में पेशियाँ शिथिल होती हैं, आयतन घटता है, दाब बढ़ता है और हवा बाहर जाती है।
श्वासोच्छ्वास में डायाफ्राम की क्या भूमिका है?
डायाफ्राम फुफ्फुस के नीचे गुंबद जैसी पेशी है। सिकुड़ने पर यह चपटा होकर नीचे आता है, छाती लंबी होती है और भीतर का दाब घटता है। शिथिल होने पर गुंबद ऊपर उठकर हवा बाहर धकेलता है। शांत साँस का ज़्यादातर काम यही पेशी करती है।
श्वासोच्छ्वास और श्वसन में क्या अंतर है?
श्वासोच्छ्वास फुफ्फुस में हवा आने-जाने की यांत्रिक क्रिया है। श्वसन हर कोशिका की रासायनिक क्रिया है, जिसमें ऑक्सीजन से ग्लूकोज़ टूटकर ऊर्जा मुक्त होती है। श्वासोच्छ्वास श्वसन के लिए ऑक्सीजन जुटाता है और उसकी बनाई कार्बन डाइऑक्साइड हटाता है।
अंतःश्वसन में फुफ्फुस में हवा क्यों आती है?
क्योंकि फुफ्फुस के भीतर का दाब वायुमंडलीय दाब से कम हो जाता है। छाती बड़ी होने से आयतन बढ़ता है और बॉयल के नियम से दाब घटता है। हवा हमेशा अधिक दाब से कम दाब की ओर जाती है, इसलिए श्वसन-मार्ग से भीतर आती है।
क्या उच्छ्वसन सक्रिय है या निष्क्रिय?
आराम में यह निष्क्रिय है: डायाफ्राम और बाह्य अंतरापर्शुक पेशियाँ शिथिल होती हैं और लचीले फुफ्फुस सिकुड़ते हैं। व्यायाम में या ज़ोर से फूँकने पर यह सक्रिय है, क्योंकि आंतरिक अंतरापर्शुक और पेट की पेशियाँ सिकुड़कर हवा जल्दी बाहर निकालती हैं।
ज्वारीय आयतन किसे कहते हैं?
एक सामान्य साँस में फुफ्फुस में जितनी हवा आती या जाती है, उसे ज्वारीय आयतन कहते हैं। स्वस्थ वयस्क में आराम के समय यह लगभग 500 mL होता है। श्वसन दर से गुणा करने पर प्रति मिनट संवातन मिलता है।
प्रति मिनट संवातन कैसे निकालते हैं?
श्वसन दर को ज्वारीय आयतन से गुणा करें। प्रति मिनट 15 साँस और हर बार 500 mL हो तो प्रति मिनट संवातन 15 × 500 = 7,500 mL, यानी 7.5 लीटर/मिनट है। mL को 1,000 से भाग देने पर लीटर मिलते हैं।
बेल जार मॉडल श्वासोच्छ्वास को कैसे दिखाता है?
बेल जार वक्ष गुहा है, Y-नली श्वासनली और श्वसनी, गुब्बारे फुफ्फुस और रबर की झिल्ली डायाफ्राम। झिल्ली नीचे खींचने से जार का आयतन बढ़ता है, दाब घटता है और गुब्बारे फूलते हैं। छोड़ने पर सब उलटा होता है।
अंतःश्वसन और उच्छ्वसन की हवा का संघटन क्या है?
लगभग, अंतःश्वसन की हवा में 21% ऑक्सीजन और 0.04% कार्बन डाइऑक्साइड होती है। उच्छ्वसन की हवा में लगभग 16% ऑक्सीजन और 4% कार्बन डाइऑक्साइड होती है, और वह गरम व नम भी होती है। नाइट्रोजन, लगभग 78%, लगभग अपरिवर्तित रहती है।
व्यायाम के समय हम तेज़ साँस क्यों लेते हैं?
काम करती पेशियाँ तेज़ी से श्वसन करती हैं, ऑक्सीजन अधिक लगती है और कार्बन डाइऑक्साइड अधिक बनती है। रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ने को मस्तिष्क का श्वसन केंद्र भाँप लेता है और साँस को तेज़ व गहरा कर देता है, ताकि फुफ्फुस जल्दी ऑक्सीजन दे सकें और कार्बन डाइऑक्साइड हटा सकें।
फुफ्फुस पिचकते क्यों नहीं?
फुफ्फुस फुफ्फुसावरण नामक दोहरी झिल्ली में लिपटे होते हैं, जिसकी परतों के बीच पतला तरल रहता है। यह तरल फुफ्फुस की सतह को वक्ष की दीवार के भीतर चिपकाए रखता है, इसलिए फुफ्फुस छाती के साथ फैलते-सिकुड़ते हैं, पिचकते नहीं।
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कक्षा 10 · 11
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कक्षा 11 · 12
पेशी संकुचन और स्लाइडिंग-फ़िलामेंट मॉडल
सार्कोमियर में एक्टिन और मायोसिन को सरकते देखें। ए बैंड 1.6 µm ही रहता है, जबकि आई बैंड और एच क्षेत्र घटते हैं। क्रॉस-ब्रिज चक्र, कैल्शियम और एटीपी चरण-दर-चरण समझें।
कक्षा 10 · 11
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देखें कि जाइलम में पानी कैसे ऊपर चढ़ता है और फ्लोएम में शर्करा कैसे नीचे जाती है। प्रकाश, आर्द्रता और हवा बदलकर वाष्पोत्सर्जन की दर (54.8 g/m²/h) निकालें।
कक्षा 10 · 12
खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल: ऊर्जा प्रवाह और 10 % नियम
खाद्य जाल बनाएँ, एक प्रजाति हटाकर असर देखें और ऊर्जा पिरामिड पर 10% नियम चलाएँ (उत्पादकों की 10,000 kJ से शीर्ष पर बचती है केवल 1 kJ)।
कक्षा 11 · 12
जनसंख्या वृद्धि: चरघातांकी और लॉजिस्टिक वक्र
r और वहन क्षमता K खींचें और चरघातांकी व लॉजिस्टिक वक्रों को अलग होते देखें। r = 0.40 प्रति घंटा और K = 1,000 पर कल्चर हर 1.73 घंटे में दोगुना होता है और K के पास रुक जाता है।
कक्षा 11 · 12
प्राकृतिक चयन: पेप्पर्ड मॉथ और कालिख वाला पेड़
कालिख का स्तर बदलकर देखिए कि पक्षी कौन-सा मॉथ पकड़ते हैं। 80% कालिख और 40% चयन पर गहरे मॉथ 10% से 15 पीढ़ियों में 90% से ऊपर पहुँच जाते हैं।
कक्षा 10 · 12
प्रतिरक्षा अनुक्रिया: प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिपिंड अनुक्रिया
टीका लगे और बिना टीके वाले व्यक्ति के प्रतिपिंड स्तर एक ग्राफ़ पर मिलाइए। इस मॉडल में स्मृति से सुरक्षा पाने का समय 8.1 से घटकर 2.5 दिन रह जाता है और शिखर 5.1 गुना ऊँचा होता है।
कक्षा 12
परागण और निषेचन
परागकोश से वर्तिकाग्र, परागनलिका से होकर बीजांड तक पराग की यात्रा देखें। द्विनिषेचन में 14 गुणसूत्र का युग्मनज और 21 गुणसूत्र का भ्रूणपोष कैसे बनता है, फिर बीज और फल।
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रेडियोधर्मी क्षय: अर्द्ध-आयु, क्षय का नियम और भेदन क्षमता
भौतिकी
बोर परमाणु: कक्षाएँ, ऊर्जा स्तर और हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम
रसायन विज्ञान
परमाणु की संरचना
रसायन विज्ञान
अम्ल, क्षारक और pH मान
रसायन विज्ञान
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
रसायन विज्ञान
गैस नियम: बॉयल, चार्ल्स, गे-लुसाक, आवोगाद्रो और PV = nRT
रसायन विज्ञान
आयनिक बंध कैसे बनता है
रसायन विज्ञान
वैद्युत अपघटन और फैराडे के नियम
रसायन विज्ञान
सहसंयोजक बंध
रसायन विज्ञान
आवर्त सारणी की आवर्तिता
रसायन विज्ञान
अभिक्रिया की दर और संघट्ट सिद्धांत
रसायन विज्ञान
द्रव्य की अवस्थाएँ: ठोस, द्रव, गैस और तापन वक्र
रसायन विज्ञान
परमाणु कक्षक: s, p, d के आकार, क्वांटम संख्याएँ और नोड
रसायन विज्ञान
आणविक आकृतियाँ और VSEPR सिद्धांत: आबंध युग्म, एकाकी युग्म और कोण
रसायन विज्ञान
मोल अवधारणा: मोलर द्रव्यमान, आवोगाद्रो संख्या और मोलर आयतन
रसायन विज्ञान
विसरण और निःस्राव: ग्राहम का नियम
रसायन विज्ञान
रासायनिक समीकरण संतुलन: विधि, उदाहरण और अभ्यास
रसायन विज्ञान
रासायनिक साम्य: साम्य स्थिरांक Kc और ले शातेलिए का सिद्धांत
रसायन विज्ञान
अनुमापन: ब्यूरेट और सूचक से अज्ञात सांद्रता निकालना
रसायन विज्ञान
गैल्वेनिक सेल: डेनियल सेल, EMF और नर्स्ट समीकरण
रसायन विज्ञान
ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाएँ: ऑक्सीकरण संख्या, इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण और अर्ध-अभिक्रिया
रसायन विज्ञान
हाइड्रोकार्बन: ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन और संरचनात्मक समावयवी 3D में
रसायन विज्ञान
प्रकार्यात्मक समूह: ऐल्कोहॉल, ऐल्डिहाइड, कीटोन, अम्ल, एस्टर और ऐमीन
रसायन विज्ञान
बहुलकीकरण: योगात्मक और संघनन बहुलक, पॉलिथीन और नायलॉन
रसायन विज्ञान
मिश्रण अलग करने की विधियाँ: निस्यंदन, आसवन, क्रोमैटोग्राफी, क्रिस्टलन
रसायन विज्ञान
क्रिस्टल जालक: SC, BCC और FCC एकक कोष्ठिका, संकुलन क्षमता और घनत्व
रसायन विज्ञान
रेडियोएक्टिवता: अल्फ़ा, बीटा, गामा क्षय और अर्ध-आयु
गणित
पाइथागोरस प्रमेय
गणित
त्रिकोणमितीय अनुपात और इकाई वृत्त
गणित
द्विघात समीकरण और द्विघात फलन का ग्राफ़
गणित
वृत्त के प्रमेय
गणित
ऊँचाई और दूरी: उन्नयन कोण और अवनमन कोण
गणित
प्रायिकता: प्रयोगसिद्ध बनाम सैद्धांतिक प्रायिकता
गणित
समांतर और गुणोत्तर श्रेढ़ी
गणित
माध्य, माध्यिका और बहुलक
गणित
समुच्चय और वेन आरेख
गणित
रैखिक समीकरण युग्म और सरल रेखा का आलेख
गणित
sin, cos, tan के आलेख
गणित
पूर्ण वर्ग बनाने की विधि और द्विघात समीकरण
गणित
वृत्त का क्षेत्रफल: सूत्र, उपपत्ति और हल किए प्रश्न
गणित
ठोस का आयतन और पृष्ठीय क्षेत्रफल: घन, घनाभ, बेलन, शंकु, गोला
गणित
समरूप त्रिभुज: स्केल गुणक, AA, SSS, SAS नियम और छाया से ऊँचाई
गणित
निर्देशांक ज्यामिति: दूरी, मध्य-बिंदु, ढाल, विभाजन सूत्र और बिंदुपथ
गणित
शांकव परिच्छेद: वृत्त, दीर्घवृत्त, परवलय और अतिपरवलय
गणित
फलनों का रूपांतरण: खिसकाना, खींचना और पलटना
गणित
अवकलज: स्पर्श रेखा की ढाल, छेदक से स्पर्श रेखा तक
गणित
रीमान योग और समाकलन: वक्र के नीचे का क्षेत्रफल
गणित
सीमा और ε–δ परिभाषा: चित्र में समझिए
गणित
त्रिविमीय सदिश: योग, डॉट गुणन और क्रॉस गुणन
गणित
आव्यूह रूपांतरण: घूर्णन, परावर्तन, अपरूपण और सारणिक
गणित
सम्मिश्र संख्याएँ: आर्गंड तल पर योग, गुणन, घात और मूल
गणित






















