कोशिका के किसी भी भाग पर क्लिक करें या ऊपर की सूची से चुनें। चित्र आरेख है, माप अनुमानित हैं।
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- चुना गया भाग
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- कोशिका की वास्तविक चौड़ाई (जंतु कोशिका)
- 20µm
- कोशिका की वास्तविक चौड़ाई (पादप कोशिका)
- 50µm
- चित्र की चौड़ाई 400× (जंतु कोशिका)
- 8.0mm
- चित्र की चौड़ाई 400× (पादप कोशिका)
- 20.0mm
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- ऊपर के चित्र में दो कोशिकाएँ साथ-साथ हैं: बाईं ओर जंतु कोशिका, दाईं ओर पादप कोशिका। छोटे नीले बिंदु कोशिकाद्रव्य में बहती पुटिकाएँ हैं। पादप कोशिका में ये बड़ी रसधानी के चारों ओर घूमती हैं, जंतु कोशिका में इधर-उधर तैरती हैं।
- किसी भी भाग पर क्लिक कीजिए, जैसे हरे हरितलवक या बैंगनी केंद्रक पर। चुना हुआ भाग चमकेगा, बाकी धुँधले हो जाएँगे और चित्र के नीचे उसका नाम व कार्य लिखा आएगा। खाली जगह पर क्लिक करने से सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा।
- माउस न हो तो “अंग चुनें” सूची से वही काम कर सकते हैं। दाईं ओर मापन पैनल बताता है कि वह भाग किस कोशिका में मिलता है और उसका सामान्य माप क्या है।
- “कोशिका” में केवल पादप या केवल जंतु कोशिका चुनकर उसे बड़ा देखिए। फिर जंतु कोशिका दिखते समय कोई पादप-विशिष्ट भाग (कोशिका भित्ति, हरितलवक, रसधानी) चुनिए। नीचे लिखा आएगा कि यह भाग इस कोशिका में नहीं होता।
- आवर्धन का स्लाइडर चलाइए। कोशिका की वास्तविक चौड़ाई तय है, पर सूक्ष्मदर्शी में उसके चित्र की चौड़ाई वास्तविक चौड़ाई को आवर्धन से गुणा करने पर मिलती है। परीक्षा में यही गणना पूछी जाती है।
प्याज़ का छिलका उतारिए, ईंटों की दीवार मिलेगी
रसोई से एक प्याज़ लाइए। बाहर का सूखा छिलका हटाइए, भीतर की परत से पतली गीली झिल्ली खींचिए और पानी की एक बूँद में रखकर सूक्ष्मदर्शी के नीचे देखिए। जो दिखेगा वह चौंकाने वाला है: झिल्ली छोटे-छोटे कमरों की सजी हुई पंक्तियाँ है, बिलकुल ईंटों की दीवार जैसी। हर कमरे की दीवार साफ़ है और भीतर एक गोल बिंदु है। ये कमरे ही कोशिकाएँ हैं।
जंतु कोशिका लगभग 20 µm और पादप कोशिका लगभग 50 µm चौड़ी होती है। इतनी छोटी कि नंगी आँख से एक भी नहीं दिखती, फिर भी आपके शरीर में खरबों कोशिकाएँ काम कर रही हैं। हर कोशिका एक छोटा कारख़ाना है: ऊर्जा बनाती है, प्रोटीन बनाती है, कचरा बाहर फेंकती है और अपनी प्रतिलिपि बनाती है। इस पृष्ठ पर हम उस कारख़ाने की हर मशीन पहचानेंगे।
पाठ्यपुस्तकें कोशिकांगों के नाम और कार्य रटने को कहती हैं, और ज़्यादातर विद्यार्थी सूची रट लेते हैं तथा परीक्षा के हफ़्ते भर बाद भूल जाते हैं। हम उलटा करेंगे। पहले चित्र देखिए, फिर हर भाग को किसी जानी-पहचानी चीज़ से मिलाइए, जैसे नगर कार्यालय, बिजलीघर या डाकघर। चित्र और उपमा याद रहेंगे तो नाम अपने आप याद आएँगे।
कोशिका सिद्धांत: बिलकुल शुरू से
सन् 1665 में रॉबर्ट हुक ने अपने बनाए सूक्ष्मदर्शी से कॉर्क का पतला टुकड़ा देखा तो उसमें छोटे डिब्बों की कतारें मिलीं। मठ के छोटे कमरों (सेल) से समानता देखकर उन्होंने इन्हें कोशिका नाम दिया। असल में वे मृत कोशिकाओं की दीवारें देख रहे थे। कुछ वर्ष बाद एंटनी वान ल्यूवेनहॉक ने पहली बार जीवित कोशिकाएँ, जैसे जीवाणु और शुक्राणु, देखीं।
सन् 1838-39 में मैथियास श्लाइडेन (पादपों पर) और थियोडोर श्वान (जंतुओं पर) ने कहा कि सभी जीव कोशिकाओं से बने हैं। 1855 में रुडोल्फ़ विरचो ने जोड़ा कि नई कोशिकाएँ केवल पहले से मौजूद कोशिकाओं से बनती हैं, अचानक कहीं से पैदा नहीं होतीं। इन विचारों से मिलकर कोशिका सिद्धांत बना।
- सभी जीव एक या अधिक कोशिकाओं से बने होते हैं।
- कोशिका जीवों की संरचना और कार्य की मूल इकाई है।
- नई कोशिकाएँ हमेशा पहले से मौजूद कोशिकाओं से बनती हैं।
नए शब्द एक नज़र में
आगे कहीं अटकना न पड़े, इसलिए पहले शब्दावली साफ़ कर लें।
- कोशिकांग (ऑर्गेनेल): कोशिका के भीतर का छोटा कार्यशील भाग, जिसकी अपनी संरचना और अपना काम होता है।
- कोशिकाद्रव्य: कोशिका झिल्ली और केंद्रक के बीच का जेली जैसा तरल, जिसमें कोशिकांग तैरते हैं।
- यूकैरियोट: ऐसा जीव जिसकी कोशिका में झिल्ली से घिरा सुसंगठित केंद्रक होता है। पादप, जंतु, कवक, प्रोटोज़ोआ।
- प्रोकैरियोट: ऐसा जीव जिसकी कोशिका में सुसंगठित केंद्रक नहीं होता, जैसे जीवाणु।
- झिल्लीयुक्त कोशिकांग: अपनी झिल्ली से घिरा भाग, जैसे केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक।
- ऊतक: एक ही काम करने वाली समान कोशिकाओं का समूह।
- आवर्धन: सूक्ष्मदर्शी किसी वस्तु को उसके वास्तविक आकार से कितना गुना बड़ा दिखाता है।
कोशिकांग-यात्रा: एक-एक करके
कोशिका को एक छोटा नगर समझिए: प्रशासन कार्यालय, बिजलीघर, कारख़ाने, डाकघर, पानी की टंकी, सफ़ाई दल और सबको घेरती सीमा-दीवार। यह उपमा बिलकुल सटीक नहीं है, पर सीखने में बहुत काम आती है। नीचे पढ़ते समय सिमुलेशन में उसी भाग पर क्लिक करते जाइए।
सीमा: कोशिका भित्ति और कोशिका झिल्ली
कोशिका झिल्ली (प्लाज़्मा झिल्ली) हर कोशिका की बाहरी परत है, पादप की भी और जंतु की भी। यह फ़ॉस्फ़ोलिपिड की दो परतों से बनी बेहद पतली झिल्ली है, जिसमें प्रोटीन जड़े होते हैं। इसका काम चयनात्मक है: पानी, ऑक्सीजन और पोषक पदार्थ भीतर आने देती है, अपशिष्ट बाहर जाने देती है और अनचाही चीज़ों को रोकती है। घर के उस चौकीदार की तरह, जो हर किसी को अंदर नहीं आने देता।
यह झिल्ली हैरान करने की हद तक पतली है, लगभग 8 nm, जबकि जंतु कोशिका 20,000 nm चौड़ी है। यानी एक कोशिका की चौड़ाई तक पहुँचने के लिए 2,500 झिल्लियाँ एक के ऊपर एक रखनी होंगी।
कोशिका भित्ति केवल पादप कोशिका में होती है (कवक और जीवाणुओं में भी, पर अलग पदार्थ की)। पादपों में यह मुख्यतः सेलुलोज़ के तंतुओं से बनी होती है और झिल्ली के बाहर रहती है। यह कठोर है, इसलिए कोशिका को आकार और मज़बूती देती है और पानी भरने पर कोशिका को फटने से बचाती है। भित्ति पूर्णतः पारगम्य है: पानी और घुले पदार्थ आसानी से निकल जाते हैं, इसलिए चुनने का काम झिल्ली ही करती है। भित्ति के आर-पार कोशिकाद्रव्य के बारीक धागे (प्लाज़्मोडेस्माटा) पास की कोशिकाओं को जोड़ते हैं।
नियंत्रण कक्ष: केंद्रक और केंद्रिका
केंद्रक कोशिका का प्रशासन कार्यालय है। इसके भीतर DNA होता है, जिसमें लिखा है कि कोशिका क्या बनाएगी और कैसे काम करेगी, साथ ही आनुवंशिकता की सूचना भी। इसके चारों ओर दोहरी झिल्ली होती है जिसमें छोटे छिद्र हैं ताकि संदेश बाहर जा सकें। सामान्य केंद्रक लगभग 6 µm का होता है, यानी कोशिका का अच्छा-ख़ासा भाग घेरता है। पादप कोशिका में बड़ी रसधानी केंद्रक को किनारे धकेल देती है, जबकि जंतु कोशिका में वह अक्सर बीच के पास रहता है।
केंद्रिका केंद्रक के भीतर का सघन गोल बिंदु है, जिसकी अपनी झिल्ली नहीं होती। यहाँ राइबोसोम के घटक बनते हैं। जिन कोशिकाओं को बहुत प्रोटीन चाहिए उनमें केंद्रिका बड़ी होती है।
व्यस्त बीच का भाग: कोशिकाद्रव्य और उसका प्रवाह
कोशिकाद्रव्य अर्ध-तरल जेली है, जिसमें अधिकांश पानी है और लवण व प्रोटीन घुले हैं। कोशिकांग इसी में तैरते हैं, और शर्करा टूटने के पहले चरण (ग्लाइकोलाइसिस) जैसी कई अभिक्रियाएँ सीधे यहीं होती हैं।
सिमुलेशन के नीले बिंदुओं को देखिए। जीवित कोशिका में कोशिकाद्रव्य स्थिर नहीं रहता, बहता रहता है। इसे कोशिकाद्रव्य प्रवाह (साइटोप्लाज़्मिक स्ट्रीमिंग) कहते हैं। पादप कोशिका में यह बड़ी रसधानी के चारों ओर घूमता है, जो हाइड्रिला की पत्ती की कोशिकाओं में सूक्ष्मदर्शी से साफ़ दिखता है। प्रवाह पोषक पदार्थ, संदेश और पैक किया सामान कोशिका के एक सिरे से दूसरे तक पहुँचाता है। बड़ी कोशिका में केवल विसरण के भरोसे यह काम बहुत धीमा होता।
बिजलीघर: माइटोकॉन्ड्रिया
माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका के ऊर्जा-घर हैं। ये अंडाकार या धागे जैसे होते हैं, सामान्यतः लगभग 2 µm लंबे, यानी एक जंतु कोशिका की चौड़ाई में लगभग 10 एक-दूसरे से सटाकर आ जाएँगे। इनमें दो झिल्लियाँ होती हैं: बाहरी चिकनी और भीतरी मुड़ी हुई। इन मोड़ों को क्रिस्टी कहते हैं, जो सतह बढ़ाकर अधिक अभिक्रियाओं की जगह बनाते हैं।
यहाँ ऑक्सीजन की मदद से ग्लूकोज़ का विघटन पूरा होता है और बहुत सारा ATP बनता है। ATP कोशिका की ऊर्जा-मुद्रा है, जिससे पेशी का संकुचन, तंत्रिका के संकेत और प्रोटीन निर्माण सब चलता है। इसीलिए पेशी कोशिकाओं और यकृत की कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया बहुत होते हैं। रोचक तथ्य यह है कि इनका अपना DNA और राइबोसोम होता है और ये स्वयं संख्या बढ़ा सकते हैं।
सौर रसोई: हरितलवक
हरितलवक हरा लवक है, जो केवल पादप कोशिकाओं (और शैवाल) में मिलता है। इसके भीतर हरा वर्णक क्लोरोफ़िल प्रकाश पकड़ता है और उस ऊर्जा से कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से ग्लूकोज़ तथा ऑक्सीजन बनती है, यानी प्रकाश-संश्लेषण। यह लगभग 5 µm लंबा होता है, इसलिए 50 µm की पादप कोशिका की चौड़ाई में 10 पास-पास बैठ सकते हैं।
माइटोकॉन्ड्रिया की तरह इसमें भी दो झिल्लियाँ, अपना DNA और राइबोसोम होते हैं। भीतर थैली जैसे थाइलैकॉइड सिक्कों की ढेरी (ग्रेना) की तरह सजे होते हैं और उनके चारों ओर स्ट्रोमा नाम का तरल होता है। अन्य लवक दूसरे रंगों के होते हैं: फलों-फूलों में लाल-पीले वर्णीलवक, और आलू जैसी जगहों पर मंड जमा करने वाले रंगहीन अवर्णीलवक।
पानी की टंकी: बड़ी केंद्रीय रसधानी
प्रौढ़ पादप कोशिका के बीच में एक ही विशाल रसधानी होती है, जो झिल्ली (टोनोप्लास्ट) से घिरी और कोशिका रस से भरी होती है। 50 µm की कोशिका में इसका व्यास 30 µm मानें तो अकेली यही थैली चौड़ाई का लगभग 60% ले लेती है। जंतु कोशिकाओं में रसधानी हो तो छोटी और कई होती हैं।
इसके काम कई हैं: पानी, खनिज, शर्करा और वर्णक जमा करना, अपशिष्ट को अलग रखना और सबसे अहम, कोशिका को तना हुआ रखना। जब रसधानी पानी से भरकर झिल्ली को भित्ति से दबाती है तो कोशिका कड़ी रहती है। इसे स्फीति कहते हैं। पानी कम पड़ने पर यह दाब घटता है और पौधा मुरझा जाता है।
कारख़ाने का फ़र्श: राइबोसोम और दो तरह की ER
राइबोसोम बहुत छोटे कण हैं, लगभग 25 nm के, जिन पर झिल्ली नहीं होती। ये संदेश पढ़कर अमीनो अम्लों को एक के बाद एक जोड़ते हुए प्रोटीन बनाते हैं। कुछ कोशिकाद्रव्य में स्वतंत्र तैरते हैं, कुछ ER से चिपके रहते हैं।
अंतर्द्रव्यी जालिका (ER) झिल्ली की नलियों और चपटी थैलियों का जाल है, जो केंद्रक की झिल्ली से जुड़ा रहता है। खुरदरी ER पर राइबोसोम चिपके होने से वह दानेदार दिखती है, यहाँ प्रोटीन बनकर मुड़ते हैं। चिकनी ER पर राइबोसोम नहीं होते, यहाँ लिपिड और स्टेरॉइड बनते हैं और यकृत की कोशिकाओं में विषैले पदार्थ निष्क्रिय किए जाते हैं। दोनों एक ही जाल के भाग हैं।
डाकघर और सफ़ाई दल: गॉल्जी उपकरण और लयनकाय
गॉल्जी उपकरण चपटी थैलियों का ढेर है, जैसे एक पर एक रखी तश्तरियाँ। ER से आए प्रोटीन यहाँ बदले जाते हैं, छाँटे जाते हैं और छोटी थैलियों (पुटिकाओं) में पैक होकर अपने पते पर जाते हैं: कोशिका झिल्ली, लयनकाय या कोशिका के बाहर। यह डाकघर की तरह छाँटने, मुहर लगाने और पता लिखने का काम करता है। इसीलिए ग्रंथि कोशिकाओं में गॉल्जी उपकरण बड़ा होता है।
लयनकाय एक झिल्ली से घिरी छोटी थैली है, जिसमें पाचक एंज़ाइम सुरक्षित भरे होते हैं। यह भोजन-कणों, घिसे-पिटे कोशिकांगों और घुस आए रोगाणुओं को तोड़ देता है, इसलिए इसे कोशिका का सफ़ाई दल कहते हैं। पादप कोशिका में यह काम काफ़ी हद तक रसधानी करती है, इसीलिए सामान्य पुस्तक के पादप कोशिका चित्र में लयनकाय नहीं बनाए जाते।
विभाजन का सहायक: तारककाय
तारककाय में सामान्यतः दो सेंट्रीओल होते हैं, एक-दूसरे से समकोण पर रखी छोटी नलिकाएँ। कोशिका विभाजन के समय ये दो ध्रुवों की ओर चले जाते हैं और तर्कु तंतु बनाने में मदद करते हैं, जो गुणसूत्रों को बराबर बाँट देते हैं। जंतु कोशिका में यह केंद्रक के पास रहता है।
उच्च पादपों की कोशिकाओं में सेंट्रीओल नहीं होते, फिर भी वहाँ विभाजन भली-भाँति होता है, क्योंकि तर्कु बनाने की उनकी व्यवस्था अलग है। इसलिए परीक्षा में तारककाय को जंतु कोशिका की विशेषता माना जाता है।
पादप कोशिका और जंतु कोशिका: कहाँ अलग
दोनों कोशिकाओं में केंद्रक, कोशिकाद्रव्य, कोशिका झिल्ली, माइटोकॉन्ड्रिया, ER, राइबोसोम और गॉल्जी उपकरण होते हैं। अंतर कुछ तय जगहों पर है और वे दोनों जीवों के जीने के ढंग से आते हैं। पादप एक जगह खड़ा रहकर अपना भोजन बनाता है, इसलिए उसे प्रकाश पकड़ने वाली मशीन और कठोर ढाँचा चाहिए। जंतु भोजन खोजने घूमता है, इसलिए उसकी कोशिकाएँ नरम और लचीली होती हैं और पाचक एंज़ाइमों की थैली चाहिए।
| विशेषता | पादप कोशिका | जंतु कोशिका |
|---|---|---|
| कोशिका भित्ति | होती है (सेलुलोज़ की) | नहीं होती, केवल झिल्ली |
| हरितलवक | होते हैं (हरे भागों में) | नहीं होते |
| रसधानी | एक बड़ी केंद्रीय | नहीं होती या छोटी और कई |
| सेंट्रीओल | उच्च पादपों में नहीं | होते हैं |
| लयनकाय | सामान्यतः नहीं दिखाए जाते | होते हैं |
| केंद्रक की स्थिति | अक्सर किनारे की ओर | अक्सर बीच के पास |
| आकार | निश्चित, लगभग आयताकार | गोल या अनियमित |
| भोजन | स्वयं बनाती है (स्वपोषी) | बना-बनाया खाती है (परपोषी) |
| संचित भोजन | मंड (स्टार्च) | ग्लाइकोजन |
प्रोकैरियोट और यूकैरियोट
अब तक देखी दोनों कोशिकाएँ यूकैरियोटिक हैं (यूनानी “यू” यानी सच्चा, “कैरियोन” यानी केंद्रक)। इनका DNA झिल्ली से घिरे केंद्रक में रहता है। जीवाणु जैसे प्रोकैरियोट में ऐसा केंद्रक नहीं होता। उनका DNA न्यूक्लियॉइड नाम के क्षेत्र में बिना झिल्ली की दीवार के बिखरा रहता है।
| विशेषता | प्रोकैरियोट | यूकैरियोट |
|---|---|---|
| केंद्रक | सुसंगठित नहीं, केवल न्यूक्लियॉइड | झिल्ली से घिरा सुसंगठित |
| झिल्लीयुक्त कोशिकांग | नहीं होते | माइटोकॉन्ड्रिया, ER, गॉल्जी आदि होते हैं |
| DNA | सामान्यतः एक वृत्ताकार | कई रैखिक गुणसूत्र |
| राइबोसोम | छोटे (70S) | बड़े (80S) |
| सामान्य माप | लगभग 1 से 10 µm | लगभग 10 से 100 µm |
| उदाहरण | जीवाणु, नील-हरित शैवाल | पादप, जंतु, कवक, प्रोटोज़ोआ |
सिमुलेशन में खुद करके देखिए
पढ़कर समझने से बेहतर है करके समझना। ये प्रयोग एक-एक करके कीजिए।
- प्रयोग 1, पता मिलाइए: “सभी भाग” की स्थिति में किसी अनजाने भाग पर क्लिक कीजिए, नाम का अनुमान लगाइए, फिर चित्र के नीचे की पंक्ति से मिलाइए। दस बार करने पर सारे नाम याद हो जाएँगे।
- प्रयोग 2, केवल पादप के भाग: “पादप कोशिका” चुनकर कोशिका भित्ति, हरितलवक और रसधानी पर क्लिक कीजिए। फिर “जंतु कोशिका” चुनकर सूची से वही भाग चुनिए। चित्र में कुछ नहीं चमकता और पंक्ति बताती है कि भाग इस कोशिका में नहीं है।
- प्रयोग 3, प्रवाह देखिए: “कोशिका” चुनकर कोशिकाद्रव्य चुनिए। नीली पुटिकाएँ बड़ी होकर आसानी से दिखेंगी। तुलना कीजिए कि पादप कोशिका में वे रसधानी के चारों ओर घूमती हैं और जंतु कोशिका में कैसे भटकती हैं।
- प्रयोग 4, नाम छिपाइए: “भागों के नाम दिखाएँ” बंद करके चित्र देखिए और ख़ुद से पूछिए, फिर क्लिक करके उत्तर जाँचिए। परीक्षा में बिना नाम वाले चित्र आते हैं।
- प्रयोग 5, आवर्धन: स्लाइडर को 40 और 1000 के बीच चलाकर देखिए कि कोशिका के चित्र की चौड़ाई कैसे बदलती है। सोचिए कि वास्तविक चौड़ाई क्यों नहीं बदलती।
- प्रयोग 6, साथ-साथ तुलना: “साथ-साथ तुलना” चुनकर माइटोकॉन्ड्रिया जैसा साझा भाग चुनिए। वह दोनों कोशिकाओं में चमकेगा। अब हरितलवक चुनिए, केवल दाईं कोशिका प्रतिक्रिया देगी।
माप का गणित: चित्र से वास्तविक आकार तक
कोशिकाओं का माप माइक्रोमीटर (µm) में बताया जाता है। 1 mm = 1000 µm और 1 µm = 1000 नैनोमीटर (nm)। यह रूपांतरण याद रहे तो बाकी गणित सरल है।
वास्तविक माप = चित्र का माप ÷ आवर्धनपहले चित्र और वास्तविक माप को एक ही इकाई में लाइए
आवर्धन = चित्र का माप ÷ वास्तविक मापयही सूत्र उलटकर
प्रश्न 1: प्याज़ की कोशिका की वास्तविक लंबाई
400 गुना आवर्धन पर खींचे चित्र में प्याज़ की एक कोशिका की लंबाई 100 mm मापी गई। उसकी वास्तविक लंबाई क्या है?
वास्तविक लंबाई = 100 mm ÷ 400 = 0.25 mmचरण 1, मान रखिए
0.25 mm × 1,000 = 250 µmचरण 2, µm में बदलिए
प्रश्न 2: सिमुलेशन की कोशिका चित्र में कितनी बड़ी
शुरुआती आवर्धन 400 गुना है। 20 µm चौड़ी जंतु कोशिका चित्र में 8.0 mm की दिखती है और 50 µm की पादप कोशिका 20.0 mm की। मापन पैनल देखिए, ठीक यही संख्याएँ आती हैं।
चित्र का माप = 20 µm × 400 = 8.0 mm (जंतु)वास्तविक माप × आवर्धन
चित्र का माप = 50 µm × 400 = 20.0 mm (पादप)वही नियम, दूसरी कोशिका
प्रश्न 3: केंद्रक की लंबाई में कितने राइबोसोम
केंद्रक का व्यास लगभग 6 µm और एक राइबोसोम लगभग 0.025 µm (25 nm) का है। एक पंक्ति में रखने पर केंद्रक के आर-पार कितने राइबोसोम आएँगे?
6 ÷ 0.025 = 240 राइबोसोमबड़ा माप ÷ छोटा माप, दोनों µm में
प्रश्न 4: स्केल पट्टी से आवर्धन
सूक्ष्मचित्र में 10 µm लिखी एक स्केल पट्टी पन्ने पर 25 mm लंबी है। आवर्धन कितना है?
25 mm = 25 × 1,000 µmदोनों को एक इकाई में लाइए
आवर्धन = (25 × 1,000) ÷ 10 = 2,500 गुनाचित्र ÷ वास्तविक
प्रश्न 5: एक मिलीमीटर में कितनी कोशिकाएँ
1,000 µm लंबी रेखा पर 20 µm चौड़ी जंतु कोशिकाएँ पास-पास रखने पर 50 आती हैं और 50 µm चौड़ी पादप कोशिकाएँ 20।
1,000 ÷ 20 = 50 जंतु कोशिकाएँरेखा की लंबाई ÷ कोशिका की चौड़ाई
1,000 ÷ 50 = 20 पादप कोशिकाएँवही विधि
| भाग | सामान्य माप (µm) | 20 µm की कोशिका की चौड़ाई में कतार में आने वाली संख्या |
|---|---|---|
| केंद्रक | 6.0 | 3.3 |
| केंद्रिका | 1.0 | 20 |
| माइटोकॉन्ड्रिया | 2.0 | 10 |
| गॉल्जी उपकरण | 2.0 | 10 |
| लयनकाय | 0.5 | 40 |
| राइबोसोम | 0.025 | 800 |
| कोशिका झिल्ली | 0.008 | 2,500 |
वे ग़लतियाँ जो सब करते हैं
इस विषय में अंक ज्ञान की कमी से कम और छोटी चूकों से ज़्यादा कटते हैं। कुछ जानी-पहचानी फिसलनें।
- “हर कोशिका में केंद्रक होता है”: ग़लत। परिपक्व लाल रक्त कोशिका और पादपों की चालनी नलिका कोशिका में केंद्रक नहीं होता, जबकि कंकाल पेशी तंतु में कई होते हैं।
- कोशिका भित्ति और कोशिका झिल्ली को एक समझना: भित्ति कठोर, पूर्ण पारगम्य और केवल पादपों में; झिल्ली पतली, चयनात्मक और हर कोशिका में।
- “सभी पादप कोशिकाओं में हरितलवक होते हैं”: ग़लत। जड़ की कोशिकाओं तक प्रकाश नहीं पहुँचता, इसलिए उनमें नहीं होते।
- “माइटोकॉन्ड्रिया ऊर्जा बनाते हैं”: ऊर्जा बनती नहीं। ग्लूकोज़ की रासायनिक ऊर्जा ATP में बदलती है। “ऊर्जा मुक्त करते हैं” या “ATP बनाते हैं” लिखना सुरक्षित है।
- लयनकाय और रसधानी को गड्डमड्ड करना: लयनकाय में पाचक एंज़ाइम होते हैं, रसधानी मुख्यतः संचय और दाब बनाए रखने की थैली है।
- चित्र में झिल्ली छोड़ देना: पादप कोशिका बनाते समय भित्ति के ठीक भीतर कोशिका झिल्ली की अलग रेखा बनाना कई लोग भूल जाते हैं।
- RER और SER उलझाना: सतह पर बिंदु (राइबोसोम) हों तो वह खुरदरी ER है।
वास्तविक जीवन में कहाँ काम आता है
कोशिका की संरचना कोई अलग-थलग पाठ नहीं है। आसपास की कई घटनाओं की व्याख्या इसमें मिलती है।
- पौधे क्यों मुरझाते हैं: पानी की कमी से रसधानी का दाब घटता है और कोशिकाएँ ढीली पड़ जाती हैं। पानी देने पर फिर तन जाती हैं।
- पेशियों की थकान: पेशी कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया बहुत होते हैं, इसलिए ऑक्सीजन कम पड़ने पर सबसे पहले इन्हीं पर असर पड़ता है।
- एंटीबायोटिक जीवाणुओं को क्यों मारती है, आपको नहीं: कई एंटीबायोटिक जीवाणु की कोशिका भित्ति या छोटे राइबोसोम पर वार करती हैं, जो मानव कोशिका में नहीं होते।
- कुछ आनुवंशिक रोग: लयनकाय का कोई एंज़ाइम न हो तो कचरा कोशिका में जमकर नुकसान करता है।
- आहार रेशा: सब्ज़ियों का रेशा पादप कोशिका भित्ति का सेलुलोज़ है, जिसे हम पचा नहीं पाते।
- नमक डालने पर खीरे से पानी क्यों निकलता है: कोशिका के बाहर गाढ़ा विलयन होने पर परासरण से रसधानी और कोशिकाद्रव्य का पानी बाहर खिंच जाता है।
परीक्षा कोना: CBSE और विद्यालय स्तर के प्रश्न
कोशिका की संरचना NCERT कक्षा 9 की विज्ञान पुस्तक के अध्याय “कोशिका: जीवन की मौलिक इकाई” का केंद्र है और आगे हर स्तर की जीव-विज्ञान में लौटती है। प्रश्न सामान्यतः चार रूपों में आते हैं।
- परिभाषा: कोशिका भित्ति क्या है? माइटोकॉन्ड्रिया क्या हैं? गॉल्जी उपकरण क्या है? एक पंक्ति और कार्य लिखिए।
- कारण: माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का ऊर्जा-घर क्यों कहते हैं? लयनकाय को आत्मघाती थैली क्यों कहते हैं? दो-तीन वाक्यों में कारण सहित उत्तर दीजिए।
- अनुप्रयोग: किसी कोशिका का वर्णन या चित्र दिया होगा और बताना होगा कि वह किस प्रकार की कोशिका है, क्यों, और किसी नामित कोशिकांग के न होने पर क्या होता।
- अंतर: पादप व जंतु कोशिका, कोशिका भित्ति व कोशिका झिल्ली, खुरदरी व चिकनी ER, प्रोकैरियोट व यूकैरियोट। चार बिंदुओं की तालिका सबसे अच्छी रहती है।
त्वरित दोहराव सूची
परीक्षा से पहले की रात इसे एक बार देख लीजिए।
- कोशिका संरचना और कार्य की मूल इकाई है; कोशिका सिद्धांत का श्रेय श्लाइडेन, श्वान और विरचो को जाता है; कोशिका नाम हुक ने दिया।
- कोशिका झिल्ली: हर कोशिका में, चयनात्मक, फ़ॉस्फ़ोलिपिड और प्रोटीन की बनी।
- कोशिका भित्ति: केवल पादपों में (सेलुलोज़), कठोर, पूर्ण पारगम्य।
- केंद्रक: DNA और नियंत्रण; केंद्रिका: राइबोसोम के घटक बनाती है।
- माइटोकॉन्ड्रिया: ATP बनाते हैं, दो झिल्लियाँ, क्रिस्टी, अपना DNA।
- हरितलवक: प्रकाश-संश्लेषण, क्लोरोफ़िल, ग्रेना, केवल पादपों में।
- रसधानी: पादपों में एक विशाल थैली, संचय करती है और कोशिका को स्फीत रखती है।
- राइबोसोम: प्रोटीन बनाते हैं; खुरदरी ER: राइबोसोम सहित; चिकनी ER: लिपिड और विषहरण।
- गॉल्जी उपकरण: छाँटता, बदलता, पैक करता है; लयनकाय: पाचन और सफ़ाई।
- तारककाय: जंतु कोशिका के विभाजन में तर्कु बनाता है।
- वास्तविक माप = चित्र का माप ÷ आवर्धन; 1 mm = 1,000 µm।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कोशिका क्या है और इसे जीवन की इकाई क्यों कहते हैं?
कोशिका किसी जीव की संरचना और कार्य की सबसे छोटी इकाई है। एक अकेली कोशिका भोजन से ऊर्जा ले सकती है, प्रोटीन बना सकती है, अपशिष्ट निकाल सकती है और अपनी प्रतिलिपि बना सकती है, इसलिए इसे जीवन की इकाई कहते हैं। अमीबा एक कोशिका का पूरा जीव है।
पादप कोशिका और जंतु कोशिका में मुख्य अंतर क्या है?
पादप कोशिका में सेलुलोज़ की कोशिका भित्ति, हरितलवक और एक बड़ी केंद्रीय रसधानी होती है। जंतु कोशिका में ये नहीं होते, पर सेंट्रीओल और लयनकाय होते हैं। पादप कोशिका का आकार निश्चित और जंतु कोशिका का लचीला होता है, और पादप भोजन बनाता है जबकि जंतु बना-बनाया खाता है।
माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का ऊर्जा-घर क्यों कहते हैं?
माइटोकॉन्ड्रिया में ऑक्सीजन की मदद से ग्लूकोज़ का विघटन पूरा होता है और बहुत मात्रा में ATP बनता है। ATP कोशिका की हर गतिविधि का ईंधन है। जिन कोशिकाओं को अधिक ऊर्जा चाहिए, जैसे पेशी कोशिकाएँ, उनमें माइटोकॉन्ड्रिया भी अधिक होते हैं।
कोशिका भित्ति और कोशिका झिल्ली में क्या अंतर है?
कोशिका भित्ति केवल पादप कोशिका में होती है; सेलुलोज़ की बनी, कठोर और पूर्णतः पारगम्य। कोशिका झिल्ली हर कोशिका में होती है; फ़ॉस्फ़ोलिपिड और प्रोटीन की बनी, पतली और चयनात्मक पारगम्य। पादपों में भित्ति बाहर और झिल्ली उसके ठीक भीतर होती है।
जंतु कोशिका में हरितलवक क्यों नहीं होते?
जंतु प्रकाश-संश्लेषण नहीं करते, वे बना-बनाया भोजन खाते हैं, इसलिए प्रकाश पकड़ने वाले कोशिकांग की ज़रूरत नहीं पड़ती। भोजन से ऊर्जा लेने का काम माइटोकॉन्ड्रिया करते हैं।
लयनकाय को आत्मघाती थैली क्यों कहते हैं?
लयनकाय के पाचक एंज़ाइम लगभग हर कार्बनिक पदार्थ को तोड़ सकते हैं। कोशिका गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो या मर रही हो तो थैली फट जाती है और एंज़ाइम कोशिका को ही पचा डालते हैं। इसीलिए यह नाम पड़ा।
कोशिकाद्रव्य प्रवाह (साइटोप्लाज़्मिक स्ट्रीमिंग) क्या है?
जीवित कोशिका में कोशिकाद्रव्य के लगातार धीरे-धीरे बहते रहने को कोशिकाद्रव्य प्रवाह कहते हैं। इससे पोषक पदार्थ, संदेश और पैक किया सामान कोशिका के एक भाग से दूसरे तक जल्दी पहुँचता है। बड़ी पादप कोशिकाओं में यह रसधानी के चारों ओर घूमता है।
सूक्ष्मदर्शी के चित्र से कोशिका का वास्तविक माप कैसे निकालें?
वास्तविक माप = चित्र का माप ÷ आवर्धन, दोनों एक ही इकाई में। जैसे 400 गुना आवर्धन पर चित्र का माप 100 mm हो तो वास्तविक माप 0.25 mm यानी 250 µm होगा।
क्या हर कोशिका में केंद्रक होता है?
नहीं। प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में सुसंगठित केंद्रक नहीं होता, और मनुष्य की परिपक्व लाल रक्त कोशिका तथा पादपों की चालनी नलिका कोशिका में भी नहीं होता। दूसरी ओर कंकाल पेशी तंतु में कई केंद्रक होते हैं।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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जीव विज्ञान के और एनिमेशन
कक्षा 9 · 11
समसूत्री कोशिका विभाजन
समसूत्री विभाजन किसे कहते हैं? पूर्वावस्था, मध्यावस्था, पश्चावस्था, अंत्यावस्था और कोशिकाद्रव्य विभाजन को चलते एनिमेशन में देखें, गुणसूत्र गिनने के नियम और हल किए गए प्रश्नों के साथ।
कक्षा 9 · 11
विसरण और परासरण
विसरण और परासरण क्या है, इनमें अंतर, जीवद्रव्यकुंचन, स्फीति और अंतःशोषण: कणों के लाइव सिमुलेशन से आसान भाषा में समझें, उदाहरण और हल किए गए प्रश्नों के साथ।
कक्षा 7 · 10 · 11
प्रकाश संश्लेषण
प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं, इसका समीकरण, प्रकाश और अप्रकाशी अभिक्रिया, केल्विन चक्र और प्रभावित करने वाले कारक: पत्ती और हाइड्रिला के सिमुलेशन में खुद देखें।
कक्षा 10 · 11
मानव हृदय की संरचना और कार्य
हृदय के चार कक्ष, कपाट, लब-डब ध्वनि और चलता ईसीजी एक साथ देखें। दोहरा परिसंचरण, हृद चक्र और हृद निकास हल किए गए प्रश्नों के साथ समझें (कक्षा 10, 11, NEET)।
कक्षा 10 · 12
मेंडल के आनुवंशिकता नियम
मेंडल के नियम, एकसंकर व द्विसंकर संकरण, परीक्षार्थ संकरण, अपूर्ण प्रभाविता, रक्त समूह सहप्रभाविता और लिंग निर्धारण — खुद पनेट वर्ग बनाकर हर अनुपात लाइव देखें।
कक्षा 12
डीएनए प्रतिकृति
डीएनए प्रतिकृति क्या है, अर्धसंरक्षी सिद्धांत, प्रतिकृति एंज़ाइमों का काम और मेसेल्सन-स्टाल प्रयोग को सिमुलेशन में स्वयं देखें और हिसाब लगाएँ।
कक्षा 10 · 11
कोशिकीय श्वसन
कोशिकीय श्वसन क्या है, वायवीय और अवायवीय श्वसन में अंतर, ग्लाइकोलाइसिस, क्रेब्स चक्र, इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र और ATP की गणना: सूत्रकणिका के सिमुलेशन में स्वयं देखें और गिनें।
कक्षा 10 · 11
एंजाइम क्रिया
एंजाइम क्या है, सक्रिय स्थल, ताला-चाबी व प्रेरित संग्रहण मॉडल, तापमान-pH का प्रभाव, मिकेलिस-मेंटन समीकरण और संदमक — लाइव सिमुलेशन में खुद बदलकर देखें।
कक्षा 10 · 11
तंत्रिका आवेग और एक्शन पोटेंशियल
देहली मान (-55 mV) पार करते ही एक्शन पोटेंशियल बनता है और अक्षतंतु में दौड़ता है — सतत या साल्टेटरी — फिर सिनेप्स पर न्यूरोट्रांसमीटर मुक्त होता है, सूत्रों सहित।
कक्षा 10 · 11
नेफ्रॉन और मूत्र निर्माण की प्रक्रिया
वृक्क रोज़ाना लगभग 180 लीटर तरल छानकर भी मूत्र सिर्फ़ लगभग 1.50 लीटर क्यों बनाता है? छानना, पुनः अवशोषण और ग्लूकोज़ की देहली मात्रा — सिमुलेशन में खुद आज़माएँ, सूत्रों सहित।
कक्षा 9 · 11
अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस)
अर्धसूत्री विभाजन किसे कहते हैं, क्रॉसिंग ओवर क्या है, समसूत्री विभाजन से यह कैसे अलग है — 2n = 4 कोशिका में पूर्वावस्था I से अंत्यावस्था II तक स्वयं चलाकर देखें।
कक्षा 10 · 11
पाचन तंत्र
पाचन तंत्र क्या है, कौन-सा एंजाइम कहाँ काम करता है, विलाई कैसे अवशोषित करती हैं — मुँह से बड़ी आँत तक भोजन की यात्रा स्वयं चलाकर देखें।
कक्षा 10 · 11
श्वसन क्रियाविधि: अंतःश्वसन और उच्छ्वसन
डायाफ्राम, पसलियाँ और अंतरापर्शुक पेशियाँ फुफ्फुस में हवा कैसे भरती और निकालती हैं, एनिमेशन में देखें। दाब मापक, स्पाइरोमीटर आलेख, बेल जार मॉडल और कूपिका में गैसों का विनिमय, हल प्रश्नों सहित।
कक्षा 12
प्रोटीन संश्लेषण
आरएनए पोलीमरेज़ जीन से mRNA कैसे बनाता है और राइबोसोम कोडोन पढ़कर प्रोटीन कैसे जोड़ता है, एनिमेशन में खुद देखें। जीन बदलें, उत्परिवर्तन करें, कोडोन सारणी मिलाएँ।
कक्षा 10 · 11
रक्त परिसंचरण: दोहरा परिसंचरण और हृदय निर्गम
देखिए रक्त हृदय से फेफड़ों, फिर पूरे शरीर और वापस हृदय तक कैसे जाता है। फुफ्फुसीय व दैहिक परिसंचरण, धमनी-शिरा-केशिका का अंतर और हृदय निर्गम के हल किए गए प्रश्न।
कक्षा 10
प्रतिवर्ती क्रिया और प्रतिवर्ती चाप
गर्म चीज़ छूने पर संकेत ग्राही, संवेदी तंत्रिका, मेरुरज्जु, प्रेरक तंत्रिका से होकर पेशी तक कैसे पहुँचता है, खुद चलाकर देखें। प्रतिवर्त का समय (24.33 ms) निकालें और जानें कि दर्द बाद में क्यों होता है।
कक्षा 10 · 11
मानव नेत्र: संरचना, प्रतिबिंब और समंजन
स्वच्छमंडल, परितारिका, लेंस, पक्ष्माभी पेशियाँ, दृष्टिपटल, पीत बिंदु और अंध बिंदु कैसे काम करते हैं, चलते चित्र में देखें। समंजन, निकट-दृष्टि और दीर्घ-दृष्टि दोष, लेंस क्षमता के हल सहित।
कक्षा 11 · 12
पेशी संकुचन और स्लाइडिंग-फ़िलामेंट मॉडल
सार्कोमियर में एक्टिन और मायोसिन को सरकते देखें। ए बैंड 1.6 µm ही रहता है, जबकि आई बैंड और एच क्षेत्र घटते हैं। क्रॉस-ब्रिज चक्र, कैल्शियम और एटीपी चरण-दर-चरण समझें।
कक्षा 10 · 11
पौधों में परिवहन: जाइलम, फ्लोएम और वाष्पोत्सर्जन
देखें कि जाइलम में पानी कैसे ऊपर चढ़ता है और फ्लोएम में शर्करा कैसे नीचे जाती है। प्रकाश, आर्द्रता और हवा बदलकर वाष्पोत्सर्जन की दर (54.8 g/m²/h) निकालें।
कक्षा 10 · 12
खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल: ऊर्जा प्रवाह और 10 % नियम
खाद्य जाल बनाएँ, एक प्रजाति हटाकर असर देखें और ऊर्जा पिरामिड पर 10% नियम चलाएँ (उत्पादकों की 10,000 kJ से शीर्ष पर बचती है केवल 1 kJ)।
कक्षा 11 · 12
जनसंख्या वृद्धि: चरघातांकी और लॉजिस्टिक वक्र
r और वहन क्षमता K खींचें और चरघातांकी व लॉजिस्टिक वक्रों को अलग होते देखें। r = 0.40 प्रति घंटा और K = 1,000 पर कल्चर हर 1.73 घंटे में दोगुना होता है और K के पास रुक जाता है।
कक्षा 11 · 12
प्राकृतिक चयन: पेप्पर्ड मॉथ और कालिख वाला पेड़
कालिख का स्तर बदलकर देखिए कि पक्षी कौन-सा मॉथ पकड़ते हैं। 80% कालिख और 40% चयन पर गहरे मॉथ 10% से 15 पीढ़ियों में 90% से ऊपर पहुँच जाते हैं।
कक्षा 10 · 12
प्रतिरक्षा अनुक्रिया: प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिपिंड अनुक्रिया
टीका लगे और बिना टीके वाले व्यक्ति के प्रतिपिंड स्तर एक ग्राफ़ पर मिलाइए। इस मॉडल में स्मृति से सुरक्षा पाने का समय 8.1 से घटकर 2.5 दिन रह जाता है और शिखर 5.1 गुना ऊँचा होता है।
कक्षा 12
परागण और निषेचन
परागकोश से वर्तिकाग्र, परागनलिका से होकर बीजांड तक पराग की यात्रा देखें। द्विनिषेचन में 14 गुणसूत्र का युग्मनज और 21 गुणसूत्र का भ्रूणपोष कैसे बनता है, फिर बीज और फल।
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