नियंत्रण
क्या दिखाएँ
मापन
- तार पर बल, F
- 0.200N
- अधिकतम संभव बल, BIL
- 0.200N
सिमुलेशन का उपयोग कैसे करें
- “सीधा तार” में डिफ़ॉल्ट मान से शुरू कीजिए: B = 0.5 T, I = 4 A, L = 0.1 m, θ = 90°। लाल तीर बल है, F = 0.200 N। टूटी रेखा तार की पुरानी जगह है, यानी क्षेत्र के धक्का देने से पहले की।
- कोण का स्लाइडर 0° की ओर खींचिए। तीर छोटा होता जाता है, और 0° पर तार क्षेत्र-रेखाओं के साथ लेट जाता है, बल 0.000 N हो जाता है। 30° भी आज़माइए: बल 0.100 N, ठीक अधिकतम का आधा।
- “धारा उलट दो” पर टिक कीजिए। आवेश के बिंदु मुड़ जाते हैं और बल का तीर पन्ने की दूसरी ओर कूद जाता है। अब “क्षेत्र उलट दो” पर भी टिक कीजिए, तीर वापस पहले वाली दिशा में आ जाता है। दो उलटफेर एक-दूसरे को काट देते हैं।
- छोटे हाथ वाले चित्र को दृश्य से मिलाइए। तर्जनी क्षेत्र, मध्यमा धारा, अंगूठा बल। यही फ्लेमिंग के बाएँ हाथ का नियम है।
- “डीसी मोटर” चुनिए। दो ध्रुवों के बीच एक कुंडली है, किनारे से देखी हुई। दोनों भुजाओं पर बराबर और विपरीत बल लगते हैं, इसलिए कुंडली घूमती है। हर आधे चक्कर पर बिंदु और क्रॉस (पन्ने से बाहर और पन्ने के अंदर की धारा) आपस में जगह बदलते दिखेंगे, क्योंकि विभक्त वलय का संपर्क बदल रहा है।
- दिक्परिवर्तक का टिक हटा दीजिए। कुंडली थोड़ी झूलती है, आगे निकल जाती है, फिर सीधी खड़ी होकर रुक जाती है। धारा न पलटे तो आधे चक्कर के बाद धक्का खिंचाव बन जाता है। फिर से टिक कीजिए, घूर्णन चलता रहता है।
मोटर प्रभाव असल में क्या है
कोई आवेश चुंबकीय क्षेत्र में से होकर गुज़रे तो उसे बगल की ओर धक्का लगता है। धारा चलते हुए आवेशों की धारा ही है, इसलिए क्षेत्र में रखे धारावाही तार पर भी सभी आवेशों के धक्कों का जोड़ बल बनकर लगता है। आवेश धातु छोड़कर बाहर नहीं निकल सकते, इसलिए धक्का पूरे तार को लगता है। इसी को मोटर प्रभाव कहते हैं।
इसके लिए तीन चीज़ें एक साथ चाहिए: धारा, चुंबकीय क्षेत्र, और ऐसा तार जो क्षेत्र की सीध में न हो। इनमें से एक भी हटा दीजिए तो कुछ नहीं होगा। तार के पास रखी कंपास की सुई का हिलना इसी कहानी का उलटा रूप है: वहाँ तार का अपना क्षेत्र सुई को धकेलता है।
बल न धारा की दिशा में होता है, न क्षेत्र की दिशा में। वह दोनों के लंबवत होता है। इसी वजह से इसकी तस्वीर दिमाग में बनाना कठिन लगता है। नीचे वाला हाथ का नियम इसी उलझन का आसान इलाज है।
सूत्र: F = BIL sin θ
एकसमान क्षेत्र B में L लंबाई के सीधे तार से धारा I गुज़रे तो बल तीनों का गुणनफल होता है, साथ में कोण का एक गुणक।
θ तार और क्षेत्र-रेखाओं के बीच का कोण है। तार क्षेत्र के आर-पार (θ = 90°) हो तो sin का मान 1 है और बल सबसे ज़्यादा, BIL। तार क्षेत्र की सीध में (θ = 0° या 180°) हो तो sin = 0 और बल बिलकुल नहीं। बीच की स्थितियों में क्षेत्र का सिर्फ़ वही हिस्सा काम करता है जो तार के आर-पार पड़ता है।
F = B I L sin θतार पर बल, न्यूटन में
F(अधिकतम) = B I Lजब तार क्षेत्र से समकोण पर हो
1 T = 1 N / (A · m)टेस्ला की परिभाषा
फ्लेमिंग का बाएँ हाथ का नियम
बाएँ हाथ का अंगूठा, तर्जनी और मध्यमा एक-दूसरे से समकोण पर फैलाइए, जैसे कमरे के कोने में तीन अक्ष होते हैं। तर्जनी को चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में रखिए (उत्तर से दक्षिण)। मध्यमा को पारंपरिक धारा की दिशा में रखिए। तब अंगूठा बल की दिशा बताएगा।
याद रखने की तरकीब: अंगूठा बल, तर्जनी क्षेत्र, मध्यमा धारा, अंग्रेज़ी में F-B-I। मोटर के लिए बायाँ हाथ, क्योंकि मोटर में धारा और क्षेत्र मिलकर गति पैदा करते हैं।
सिमुलेशन में बल हमेशा पन्ने के लंबवत है, इसलिए तीर तिरछा बना है, मानो स्क्रीन से बाहर आ रहा हो या अंदर जा रहा हो। ऊपर-दाएँ का मतलब पन्ने के अंदर, नीचे-बाएँ का मतलब पन्ने से बाहर। धारा उलटिए तो तीर भी पलट जाता है, क्योंकि एक उँगली घूमे तो अंगूठे को भी घूमना पड़ता है।
सूत्र से हल किए उदाहरण
चार छोटे सवाल। हर एक के बाद स्लाइडर पर मिलाकर देखिए।
उदाहरण 1: डिफ़ॉल्ट तार
0.1 m लंबे तार से 4 A धारा गुज़र रही है, और वह 0.5 T के क्षेत्र से समकोण (θ = 90°) पर है। बल F = 0.5 × 4 × 0.1 × sin 90° = 0.200 N।
उदाहरण 2: तार को तिरछा कीजिए
वही तार, पर अब क्षेत्र से 30° का कोण। sin 30° = 0.5, इसलिए F = 0.5 × 4 × 0.1 × 0.5 = 0.100 N। बल आधा। तार क्षेत्र की सीध में लेटा हो तो F = 0.000 N।
उदाहरण 3: बड़ा इंतज़ाम
0.25 m लंबे तार में 6 A धारा, 0.8 T के क्षेत्र के आर-पार, 90° पर। F = 0.8 × 6 × 0.25 = 1.20 N। यह एक छोटे सेब के वज़न के आसपास है, और वह भी पतले तार से। लाउडस्पीकर की पतले तार की कुंडली थोड़ी-सी धारा में ही अपना कोन हिला देती है, इसी वजह से।
उदाहरण 4: क्षेत्र निकालना
0.2 m के तार में 3 A धारा, अज्ञात क्षेत्र से 90° पर, और बल 0.15 N। सूत्र उलटकर B = F ÷ (I L) = 0.15 ÷ (3 × 0.2) = 0.15 ÷ 0.60 = 0.25 T।
धक्के से घूर्णन तक: कुंडली
सीधा तार एक बार धक्का खाकर चुंबक के इलाके से निकल जाता है। चलते रहने के लिए कुछ ऐसा चाहिए जो घूमे। तार को आयताकार फेरे में मोड़िए, उसे धुरी पर ध्रुवों के बीच बिठाइए और उसमें धारा चलाइए।
लंबी दोनों भुजाओं में धारा उलटी दिशा में चलती है (एक में ऊपर, दूसरी में नीचे)। बाएँ हाथ के नियम से एक भुजा पर बल ऊपर और दूसरी पर नीचे होता है। बराबर और विपरीत दो बल, पर अलग-अलग क्रिया-रेखाओं पर, यानी एक बलयुग्म। वह कुंडली को खिसकाता नहीं, घुमाता है।
दोनों सिरों की छोटी भुजाएँ समतल अवस्था में क्षेत्र के समांतर होती हैं, इसलिए उन पर काम का कोई बल नहीं लगता, और जो लगता भी है वह एक-दूसरे को काट देता है।
बल-आघूर्ण का सूत्र: τ = NBIA sin θ
N फेरों की कुंडली का क्षेत्रफल A (लंबाई L गुणा चौड़ाई W) है। दोनों लंबी भुजाओं में से हर एक पर बल N B I L लगता है। घुमाने की क्षमता वही बल गुणा कुंडली की चौड़ाई है, जो नीचे के छोटे सूत्र में आ जाती है।
यहाँ θ कुंडली के अभिलंब (तल से बाहर निकलती लंब रेखा) और क्षेत्र के बीच का कोण है। कुंडली क्षेत्र की सीध में लेटी हो तो अभिलंब 90° पर है और बल-आघूर्ण अधिकतम। कुंडली क्षेत्र के सामने हो तो अभिलंब क्षेत्र की सीध में, θ = 0°, और बल कुंडली के अपने ही तल में पड़ते हैं। वे फेरे को बस तानते हैं, बल-आघूर्ण शून्य।
τ = N B I A sin θकुंडली पर बल-आघूर्ण, न्यूटन-मीटर में
A = L × Wकुंडली का क्षेत्रफल
τ(अधिकतम) = N B I Aकुंडली का तल क्षेत्र के समांतर हो तो
उदाहरण 5: सिमुलेशन वाली मोटर
N = 20, B = 0.5 T, I = 4 A, L = 0.1 m और कुंडली की चौड़ाई W = 0.08 m लें तो क्षेत्रफल A = 0.1 × 0.08 = 0.0080 m²।
हर लंबी भुजा पर बल 20 × 0.5 × 4 × 0.1 = 4.00 N। अधिकतम बल-आघूर्ण 20 × 0.5 × 4 × 0.0080 = 0.32 N·m। दूसरे तरीके से जाँच लीजिए: 4.00 N × 0.08 m = 0.32 N·m।
उदाहरण 6: आधे घूमने के रास्ते में
अभिलंब क्षेत्र से 30° का कोण बनाए तो उसी कुंडली पर τ = 0.32 × sin 30° = 0.16 N·m। जिस क्षण कुंडली का तल क्षेत्र के लंबवत हो, बल-आघूर्ण शून्य होता है।
उदाहरण 7: फेरे बढ़ाने पर
बल-आघूर्ण N के समानुपाती है। फेरे 20 से 40 करें तो अधिकतम बल-आघूर्ण 0.32 से 0.64 N·m हो जाता है। असली मोटरों में एक मोटे फेरे की जगह पतले तार के बहुत सारे फेरे इसीलिए लगाए जाते हैं।
दिक्परिवर्तक: मोटर अटक क्यों नहीं जाती
एक दिक्कत है। कुंडली खड़ी अवस्था पार करते ही जो भुजा ऊपर जा रही थी वह धुरी के दूसरी ओर पहुँच जाती है, और बाएँ हाथ का नियम अब उसे नीचे धकेलता है। कुछ न बदले तो कुंडली आगे निकल जाती, धीमी होती, लौटती और आख़िर में रुक जाती। सिमुलेशन में दिक्परिवर्तक बंद करके यही देखिए।
इसका हल विभक्त-वलय दिक्परिवर्तक है। एक वलय को दो हिस्सों में काटा जाता है और हर हिस्सा कुंडली के एक सिरे से जुड़ा होता है। दो स्थिर कार्बन ब्रश उन हिस्सों को छूकर धारा पहुँचाते हैं। कुंडली खड़ी अवस्था पार करते ही हर हिस्सा एक ब्रश से दूसरे ब्रश पर चला जाता है, इसलिए कुंडली की धारा ठीक सही क्षण पर पलट जाती है। अब जो भुजा बाईं ओर है, उसकी धारा हमेशा ऐसी दिशा में है कि उसे ऊपर की ओर ही धक्का मिले।
सिमुलेशन के दाएँ ग्राफ़ में असर दिखता है। दिक्परिवर्तक के बिना बल-आघूर्ण sin θ पर चलता है और दूसरे आधे चक्कर में ऋणात्मक हो जाता है। दिक्परिवर्तक के साथ वह |sin θ| पर चलता है, हमेशा धनात्मक। फिर भी हर चक्कर में दो बार बल-आघूर्ण शून्य को छूता है। कुंडली की जड़ता उसे उन दो मृत बिंदुओं के पार ले जाती है।
- ब्रश स्थिर हैं और आपूर्ति की धारा लाते हैं। विभक्त वलय कुंडली के साथ घूमता है।
- धारा तब पलटती है जब कुंडली का तल क्षेत्र के लंबवत होता है, यानी जहाँ बल-आघूर्ण वैसे ही शून्य है।
- पूरे चक्कर में औसत बल-आघूर्ण अधिकतम का 0.637 गुना है, यानी 2/π। सिमुलेशन वाली मोटर के लिए यह 0.204 N·m है।
असली मोटर को ताक़तवर और चिकनी बनाना
घुमाने की ताक़त बढ़ाने के चार रास्ते हैं: ज़्यादा फेरे, मज़बूत क्षेत्र (बड़ा चुंबक या विद्युत चुंबक), ज़्यादा धारा, और बड़े क्षेत्रफल की कुंडली। बल-आघूर्ण के सूत्र में चारों मौजूद हैं, और सिमुलेशन में हर एक का स्लाइडर है।
घूर्णन झटकों में न चलकर चिकना रहे, इसके लिए असली मोटरों में अलग-अलग कोणों पर लगी कई कुंडलियाँ होती हैं और दिक्परिवर्तक में कई खंड। जब एक कुंडली मृत बिंदु पर होती है, तब दूसरी पूरे बल-आघूर्ण पर होती है। कुंडलियाँ नरम लोहे की क्रोड पर लपेटी जाती हैं, जो क्षेत्र को केंद्रित कर देती है।
डीसी मोटर की घूमने की दिशा पलटनी हो तो धारा पलटिए या क्षेत्र पलटिए। दोनों पलट दें तो मोटर फिर पहले वाली दिशा में घूमती है। सिमुलेशन में दोनों टॉगल साथ चलाकर देखिए।
आम ग़लतियाँ
अंक अक्सर इन्हीं जगहों पर कटते हैं।
- F = BIL sin θ में क्षेत्र के अभिलंब वाला कोण लगा देना। तार के लिए θ तार और क्षेत्र के बीच का कोण है।
- बल को क्षेत्र या तार की दिशा में बताना। बल हमेशा दोनों से समकोण पर होता है।
- दायाँ हाथ लगा देना। मोटर प्रभाव में बायाँ हाथ।
- यह भूल जाना कि पारंपरिक धारा + से − की ओर जाती है और मध्यमा उसी के साथ चलती है।
- दिक्परिवर्तक को आपूर्ति का स्विच कह देना। वह कुंडली की धारा पलटता है, आपूर्ति नहीं।
- कुंडली के लिए τ = BIL लिख देना। कुंडली में N फेरे और क्षेत्रफल होते हैं, इसलिए τ = NBIA sin θ।
परीक्षा का कोना
छोटे प्रश्नों में अक्सर फ्लेमिंग के बाएँ हाथ का नियम लिखने को, चित्र में बल की दिशा दिखाने को, और F = BIL sin θ लिखकर यह बताने को कहा जाता है कि वह कब शून्य होता है। बड़े प्रश्नों में चित्र सहित डीसी मोटर की कार्यविधि समझानी होती है: कुंडली, चुंबक, विभक्त वलय और ब्रश के नाम, और वलय को क्यों बाँटा गया इसका कारण।
संख्यात्मक सवालों में ज़्यादातर F = BIL sin θ और τ = NBIA sin θ आते हैं। सूत्र लिखिए, मात्रकों सहित मान रखिए और उत्तर न्यूटन या न्यूटन-मीटर में दीजिए। दिशा पूछी जाए तो तीन उँगलियों का चित्र बनाइए।
दोहराने की सूची
पन्ना बंद करने से पहले ज़ोर से बोलकर दोहरा लीजिए।
- चुंबकीय क्षेत्र में रखी धारा पर बल लगता है, जो दोनों के लंबवत होता है।
- F = BIL sin θ, θ तार और क्षेत्र के बीच का कोण। क्षेत्र की सीध में शून्य, आर-पार अधिकतम।
- बायाँ हाथ: अंगूठा बल, तर्जनी क्षेत्र, मध्यमा धारा।
- धारा या क्षेत्र उलटने पर बल उलटता है। दोनों उलटें तो बल वही रहता है।
- कुंडली पर बलयुग्म लगता है, इसलिए वह घूमती है: τ = NBIA sin θ।
- विभक्त-वलय दिक्परिवर्तक हर आधे चक्कर पर धारा पलटता है, इसलिए बल-आघूर्ण का चिह्न नहीं बदलता।
- N, B, I या A बढ़ाने से बल-आघूर्ण उसी अनुपात में बढ़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मोटर प्रभाव क्या है?
धारावाही तार पर चुंबकीय क्षेत्र जो बल लगाता है, उसे मोटर प्रभाव कहते हैं। यह बल धारा और क्षेत्र दोनों के लंबवत होता है, और यही विद्युत मोटर का मूल सिद्धांत है।
धारावाही तार पर बल का सूत्र क्या है?
F = BIL sin θ, जहाँ B टेस्ला में चुंबकीय क्षेत्र, I ऐम्पियर में धारा, L मीटर में क्षेत्र के भीतर तार की लंबाई और θ तार व क्षेत्र के बीच का कोण है। यहाँ के डिफ़ॉल्ट मान पर F = 0.200 N।
धारावाही तार पर बल कब शून्य होता है?
जब तार क्षेत्र के समांतर या प्रति-समांतर हो (θ = 0° या 180°), या जब धारा शून्य हो। दोनों स्थितियों में B I L sin θ शून्य होता है।
फ्लेमिंग के बाएँ हाथ का नियम कैसे लगाएँ?
बाएँ हाथ का अंगूठा, तर्जनी और मध्यमा आपस में समकोण पर फैलाइए। तर्जनी क्षेत्र की दिशा में, मध्यमा पारंपरिक धारा की दिशा में रखें, तो अंगूठा बल की दिशा बताता है।
डीसी मोटर में विभक्त-वलय दिक्परिवर्तक क्यों चाहिए?
इसके बिना हर आधे चक्कर पर कुंडली का बल-आघूर्ण चिह्न बदल लेता और कुंडली बस आगे-पीछे झूलती रहती। विभक्त वलय हर आधे चक्कर पर धारा पलट देता है, इसलिए बल-आघूर्ण हमेशा एक ही दिशा में लगता है।
चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली पर बल-आघूर्ण कितना होता है?
τ = NBIA sin θ, जहाँ N फेरों की संख्या, A कुंडली का क्षेत्रफल और θ कुंडली के अभिलंब व क्षेत्र के बीच का कोण है। सिमुलेशन की डिफ़ॉल्ट कुंडली का अधिकतम मान 0.32 N·m है।
डीसी मोटर के घूमने की दिशा कैसे पलटी जा सकती है?
धारा या चुंबकीय क्षेत्र, दोनों में से किसी एक को पलट दीजिए। दोनों पलटने पर घूर्णन की दिशा फिर पहले जैसी हो जाती है।
इस विषय पर और पढ़ाई
एनिमेशन से अवधारणा साफ़ हुई, अब परीक्षा की तैयारी: सिलेबस, सुझाव, किताबें और प्रवेश परीक्षा गाइड नीचे हैं (अंग्रेज़ी में)।
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Class 9-10 Physics textbook
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Dhaka University science unit admission 2026-27
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सदिशों का योग: त्रिभुज और समांतर चतुर्भुज नियम
दो सदिशों का परिणामी, त्रिभुज और समांतर चतुर्भुज नियम, घटक, नदी में नाव और बारिश में छाते का आपेक्षिक वेग खुद करके देखें। हल किए प्रश्न और NCERT अभ्यास सहित।
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उत्केंद्रता स्लाइडर खींचकर कक्षा को लंबा होते देखो। बराबर समय में बराबर क्षेत्रफल के सेक्टर, आवर्तकाल का नियम T² ∝ a³ और पलायन वेग, हल के साथ।
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न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम, g और उपग्रह
दो पिंडों का खिंचाव, व्युत्क्रम वर्ग ग्राफ़, पृथ्वी के ऊपर-नीचे g और उपग्रह की कक्षा खुद चलाकर देखें। कक्षीय चाल, आवर्तकाल, पलायन वेग और हल किए गए सवाल।
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कक्षा 11 · 12
डॉप्लर प्रभाव: चलता स्रोत, चलता श्रोता और सोनिक बूम
ध्वनि के स्रोत को तेज़-धीमा चलाइए और देखिए तरंगाग्र आगे कैसे सिकुड़ते और पीछे कैसे फैलते हैं। डॉप्लर सूत्र, एम्बुलेंस और ट्रेन के हल किए सवाल और सोनिक बूम सीखिए।
कक्षा 10 · 12
प्रिज़्म, प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण और इंद्रधनुष
सफ़ेद प्रकाश को प्रिज़्म से गुज़ारिए, प्रिज़्म कोण और आपतन कोण बदलिए और स्पेक्ट्रम बनते देखिए। विचलन, न्यूनतम विचलन, विक्षेपण क्षमता और वर्षा की बूँद में इंद्रधनुष बनना हल किए सवालों के साथ सीखिए।
कक्षा 12
किरख़ोफ़ के नियम: संधि नियम और लूप नियम
दो बैटरियों और तीन प्रतिरोधों वाला दो-लूप परिपथ खुद बनाओ। संधि पर धारा को बँटते देखो, विभव के योग को शून्य बनते देखो और किरख़ोफ़ के नियमों के सवाल कदम-दर-कदम हल करना सीखो।
कक्षा 12
व्हीटस्टोन सेतु और मीटर सेतु
व्हीटस्टोन सेतु का संतुलन बिगाड़कर गैल्वेनोमीटर की सुई को हिलते देखो। P/Q = R/S होने पर सुई शून्य पर आती है। मीटर सेतु में जॉकी खिसकाकर अज्ञात प्रतिरोध मापो, हल किए उदाहरणों के साथ।
कक्षा 12
एकल झिरी से विवर्तन
झिरी की चौड़ाई और तरंगदैर्घ्य बदलकर देखें कि प्रकाश कैसे फैलता है। तीव्रता का सूत्र I = I₀(sin β/β)², निम्निष्ठ की शर्त a sin θ = mλ और केंद्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई 2λD/a, हल सहित।
कक्षा 10 · 12
आँख के दोष और उनका निवारण
सामान्य, निकट-दृष्टि, दूर-दृष्टि और बढ़ती उम्र वाली आँख बदलकर देखें। प्रतिबिंब रेटिना के आगे या पीछे क्यों बनता है, और कौन-सा लेंस कितनी डायोप्टर से इसे ठीक करता है, सिमुलेशन में समझें।
कक्षा 12
प्रकाश का ध्रुवण: मैलस का नियम और ब्रूस्टर का नियम
ध्रुवक के पीछे विश्लेषक घुमाकर ग्राफ़ में I = I₀cos²θ देखें, फिर काँच पर प्रकाश डालकर ब्रूस्टर कोण खोजें। पोलरॉइड धूप का चश्मा, तीन फ़िल्टर की पहेली और हल किए सवालों के साथ।
कक्षा 12
संधारित्र का आवेशन और विसर्जन: RC समय स्थिरांक
प्रतिरोध के सहारे संधारित्र को आवेशित और विसर्जित करो। E, R और C बदलकर V = E(1 − e^(−t/RC)) और धारा का वक्र बनते देखो, 63% वाला समय स्थिरांक और संचित ऊर्जा निकालो।
कक्षा 10 · 12
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ: छड़ चुंबक, धारावाही तार और परिनालिका
छड़ चुंबक, सीधे धारावाही तार और परिनालिका की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ देखो। कंपास खींचो, धारा पलटो और B = μ₀I/2πr, B = μ₀nI व दाएँ हाथ का नियम सीखो।
कक्षा 12
एसी जनित्र
चुंबक के ध्रुवों के बीच कुंडली घुमाकर एसी जनित्र की साइन तरंग बनते देखिए। N, A, B और rpm बदलकर E₀ = NBAω और आरएमएस मान निकालिए, और जानिए मेन्स 50 Hz क्यों है।
कक्षा 10 · 12
ट्रांसफ़ॉर्मर
ट्रांसफ़ॉर्मर के प्राथमिक और द्वितीयक फेरे बदलकर देखिए वोल्टता कैसे बढ़ती-घटती है। Vs = Vp·Ns/Np, शक्ति संरक्षण, वास्तविक दक्षता और उच्च वोल्टता पर बिजली भेजने का कारण समझिए।
कक्षा 9 · 12
ऊष्मा का स्थानांतरण: चालन, संवहन और विकिरण
ताँबे, ऐलुमिनियम, काँच या लकड़ी की छड़ गरम करके Q/t = kAΔT/L देखें, बीकर में संवहन धाराओं को घूमते देखें, और T⁴ के अनुसार विकिरित शक्ति का बढ़ना जाँचें। सारणियों और हल किए सवालों के साथ।
कक्षा 12
प्रकाश-विद्युत प्रभाव: आइंस्टाइन का समीकरण और निरोधी विभव
निर्वात नली में सोडियम, जस्ते या ताँबे की पट्टिका पर किसी भी तरंगदैर्घ्य का प्रकाश डालें। देखें कि देहली आवृत्ति के नीचे इलेक्ट्रॉन क्यों नहीं निकलते, K = hf − φ निरोधी विभव कैसे तय करता है, और चमक सिर्फ़ धारा क्यों बदलती है।
कक्षा 11 · 12
गैस के अणु और अणुगति सिद्धांत: दाब, तापमान और चाल
डिब्बे में गैस के अणुओं की भागदौड़ देखिए। तापमान बढ़ाइए, गैस बदलिए, आयतन दबाइए और देखिए कि दीवारों पर टक्करों से मिला दाब PV = NkT से मेल खाता है। चाल की तुलना मैक्सवेल-बोल्ट्ज़मान वक्र से कीजिए और वर्ग-माध्य-मूल चाल निकालिए।
कक्षा 12
अर्धचालक डायोड: p–n संधि, I–V वक्र और दिष्टकारी
p–n संधि पर बायस लगाकर देखिए कि अवक्षय परत कैसे सिकुड़ती या फैलती है, आवेश वाहक कैसे पार होते हैं और शॉकली I–V वक्र कैसा बनता है। सिलिकन और जर्मेनियम की तुलना, भंजन और अर्धतरंग दिष्टकारी।
कक्षा 10 · 12
रेडियोधर्मी क्षय: अर्द्ध-आयु, क्षय का नियम और भेदन क्षमता
240 नाभिकों को अनियमित ढंग से क्षय होते देखो, गिनती को N = N₀e^(−λt) पर चलते पाओ, ग्राफ़ से अर्द्ध-आयु निकालो और परखो कि α, β, γ कागज़, एल्युमिनियम और सीसे में कितना घुस पाते हैं।
कक्षा 12
बोर परमाणु: कक्षाएँ, ऊर्जा स्तर और हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम
हाइड्रोजन के इलेक्ट्रॉन को n = 1 से 6 कक्षाओं में कूदते देखो, 1/λ = R(1/n₁² − 1/n₂²) से फोटॉन का रंग निकालो, और ऊर्जा आरेख व स्पेक्ट्रम पट्टी पर लाइमन, बामर और पाशन श्रेणी समझो।
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पूर्ण वर्ग बनाने की विधि और द्विघात समीकरण
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वृत्त का क्षेत्रफल: सूत्र, उपपत्ति और हल किए प्रश्न
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ठोस का आयतन और पृष्ठीय क्षेत्रफल: घन, घनाभ, बेलन, शंकु, गोला
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समरूप त्रिभुज: स्केल गुणक, AA, SSS, SAS नियम और छाया से ऊँचाई
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निर्देशांक ज्यामिति: दूरी, मध्य-बिंदु, ढाल, विभाजन सूत्र और बिंदुपथ
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शांकव परिच्छेद: वृत्त, दीर्घवृत्त, परवलय और अतिपरवलय
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फलनों का रूपांतरण: खिसकाना, खींचना और पलटना
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अवकलज: स्पर्श रेखा की ढाल, छेदक से स्पर्श रेखा तक
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रीमान योग और समाकलन: वक्र के नीचे का क्षेत्रफल
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सीमा और ε–δ परिभाषा: चित्र में समझिए
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त्रिविमीय सदिश: योग, डॉट गुणन और क्रॉस गुणन
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आव्यूह रूपांतरण: घूर्णन, परावर्तन, अपरूपण और सारणिक
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सम्मिश्र संख्याएँ: आर्गंड तल पर योग, गुणन, घात और मूल
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